UP: वॉट्सऐप पर ट्रिपल तलाक, हलाला के नाम पर रेप

NEW DELHI.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रिपल तलाक कानून को खारिज करने के बाद भी देश के विभिन्न शहरों में अभी भी ट्रिपल तलाक की घटनाएं हो रही हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक विवाहिता को पति द्वारा वॉट्सऐप पर ट्रिपल तलाक देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिले के सांगीपुर इलाके में रहने वाली महिला को पहले पति ने तलाक दिया और फिर दो बार उसका रेप किया। इसपर जब महिला ने पुलिस को मामले की शिकायत दी तो आरोपी शख्स ने दोबारा निकाह की बात कहते हुए उसे एक रिश्तेदार मौलवी के पास हलाला कराने को भेज दिया। यहां पर भी महिला के विरोध करने के बावजूद मौलवी ने उसका रेप किया।

 

परिजनों के मुताबिक, महिला का निकाह करीब 9 साल पहले हुआ था और निकाह के बाद महिला ने दो बच्चों को भी जन्म दिया। हाल ही में कुछ दिनों पहले पति द्वारा तलाक के बाद रेप किए जाने पर उसने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। इसके बाद ही पति ने दबाव में दोबारा निकाह की बात कही थी, लेकिन इसके लिए हलाला कराने की शर्त रखी थी। आरोप के मुताबिक महिला की शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस विभाग ने शरिया कानून की बात कहते हुए कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद महिला न्याय के लिए अपने दो बच्चों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों के दरवाजे पर भटकती रही।

महिला दर-दर भटकने को मजबूर

कहा जा रहा है कि हलाला के नाम पर जिस मौलवी पर रेप करने का आरोप है उसका नाम मजीज है और वह नगर कोतवाली क्षेत्र के जोगापुर इलाके का निवासी है। वहीं घटना के बाद सांगीपुर पुलिस ने महिला और आरोपी मौलवी के खिलाफ केस तो दर्ज किया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इसी उदासीनता के कारण जहां महिला दर-दर भटकने को मजबूर है, वहीं अधिकारियों ने अब तक इस मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई बयान नहीं दिया है।

 

गौरतलब है कि, तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना फैसला सुना चुका है। अब कोर्ट में नया मुद्दा निकाह हलाला की चर्चा जोरों पर है। सुप्रीम कोर्ट में इसपर भी चुनौती दी गई है जिसकी सुनवाई संविधान पीठ करेगा। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से निकाह हलाला जैसी प्रथा भी खत्म करने की मांग उठने लगी है।

50 साल की महिलाएं भी बन सकेंगी मां

NEW DELHI. महिलाओं के लिए एक बडी खुशखबरी है, जो अधिक उम्र में मां नहीं बन पाती हैं। अब विज्ञान एवं तकनीक ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। लिहाजा, अगर आप 50 की उम्र में हैं तो घबराएं नहीं, अब मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।
कॅरियर और जिंदगी की भागदौड़ में उलझी महिलाएं परिवार शुरू करने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं। कई बार उनकी उम्र उस दहलीज पर पहुंच जाती है, बायोलॉजिकली जहां मां बनने में मुश्किल होती है। मगर मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि महिलाओं के अधिक उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं है। 50 साल महिलाओं के लिए एक ऐसी उम्र है जब ज्यादातर महिलाओं का मेनॉपॉज शुरू हो जाता है और अंडाशयों द्वारा हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में मां बनना नामुमकिन समझा जाता है। मगर साइंस और टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। अब 50 की उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।

एक ओर मेडिकल साइंस में तरक्की ने कॅरियर पर ध्यान देने वाली, स्वतंत्र महिलाओं को यह विकल्प दिया है कि वे गर्भावस्था को देरी से प्लान कर सकती हैं। वहीं, दूसरी ओर उन महिलाओं के लिए भी संभावनाएं उत्पन्न की हैं जो बढ़ती उम्र में दूसरा या तीसरा बच्चा चाहती हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने देर से शादी की हो, या जो दूसरी शादी से बच्चा चाहती हैं। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो दूसरा बच्चा प्लान करने के बारे में सोच रही हैं, लेकिन लंबे ब्रेक के बाद यानी लेट प्रेगनेंसी प्लानिंग।

 

बड़ी उम्र में मां बनने पर रिस्क
दिल्ली के फॉर्टिस लाफेम की ऑब्स्टेट्रिक्स और गाइनोकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ कुसुम साहनी का कहना है कि अगर आप 30 साल की उम्र के आसपास बच्चे को जन्म देने की प्लानिंग करती हैं तो प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक होती है। हालांकि बड़ी संख्या में महिलाएं अब बड़ी उम्र में भी प्रेग्नेंट हो रही हैं। 40 या 50 साल की उम्र में मां बनना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। हालांकि डॉ साहनी कहती हैं कि अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबीटीज, हाइपरटेंशन, होने वाले बच्चे में डाउन्स सिंड्रोम, समय से पहले डिलिवरी और स्टिल बर्थ जैसे कई रिस्क शामिल होते हैं। अधिक उम्र में 3 तरीकों से कर सकती हैं गर्भधारण। हालांकि इनके अपने-अपने सीमाएं और सफलता की दर है।

 

गर्भधारण के 3 तरीके

-प्राकृतिक रूप से गर्भधारण
-आईवीएफ तकनीक में खुद के अंडों का इस्तेमाल
-आईवीएफ तकनीक में डोनर की मदद से

उम्र पर निर्भर करती है फर्टिलिटी
इसमें कोई शक नहीं कि फर्टिलिटी की क्षमता उम्र पर निर्भर करती है। महिला की उम्र जितनी अधिक होगी उसके प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की संभावना उतनी ही घट जाएगी। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है उसके शरीर में मौजूद स्वस्थ अंडों की संख्या घटती जाती है और यही वजह है कि उसके प्रेग्नेंट होने की संभावना भी कम होती जाती है।

एक महिला जन्म के समय सभी अंडाणु के साथ पैदा होती है। 30 साल की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में स्वस्थ अंडाणुओं की संभावनाएं कम होती हैं। इससे उनके गर्भवती होने की संभवाना भी कम हो जाती है। इसलिए, विसंगतियों वाले बच्चे होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़ों की बात करें तो 20 की उम्र के दौर में जेनेटिक डिसऑर्डर के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संभावना 2500 में एक होती है, जबकि 40 की उम्र में यह संभावना 350 में एक हो जाती है।

 

डोनर की मदद से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल

50 साल की उम्र में ज्यादातर महिलाओं की रजानिवृत्ति शुरू हो जाती है। ऐसे में उनका मां बनना लगभग असंभव हो जाता है। वह अपने ही अंडों से गर्भधारण करने की कोशिश करने के बजाय किसी डोनर की सहायता से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि महिला को पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए ताकि प्रेग्नेंसी से जुड़े रिस्क को कम किया जा सके और स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके।

क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक
गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग कंसल्टेंट डॉ. रितु सेठी ने बताया कि, अपने अंडाणु से गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अंडाशय से प्राप्त परिपक्व अंडे के उर्वरता की जटिल प्रक्रिया है। इनफार्टिलिटी कई कारकों जैसे फेलोपियन ट्यूब में क्षति या अवरोध होना, एंडोमीट्रिओसिस, शुक्राणु गतिशीलता में कमी आना और ओवुलेशन में गड़बड़ी की वजह से हो सकती है। ओवरी से अण्डे के बाहर आने की क्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। बढ़ती उम्र में अपने अंडे का उपयोग कर गर्भ धारण करने का सफलता दर काफी कम है। हालांकि, अगर किसी ने कम उम्र में एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया कर ली है, तो उन्हें फर्टाइल करने के लिए क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक होती हैं।

 

सुहागरात : फर्स्ट नाइट को सिर्फ फिजिकल रिलेशन से जोड़कर न देंखे

NEW DELHI. सुहागरात, यानी शादी के बाद की पहली रात। शादीशुदा कपल्स के मन में अक्सर अपनी पहली रात को लेकर काफी इच्छाएं और सपने होते हैं। आमतौर पर लोग फर्स्ट नाइट को सिर्फ फिजिकल रिलेशन से जोड़कर देखते हैं और अगर आप भी यही सोचते हैं, तो फिर ज़रा सावधान हो जाएं। अगर ऐसा ख्याल है तो इसे दिमाग से निकाल दें क्योंकि शादी की अन्य रस्मों-रिवाजों के चलते आप शादीशुदा कपल्स काफी बिज़ी रहते हैं और उन्हें थकान भी होने लगती है। ऐसे में किसी भी तरह के फिजिकल रिलेशन की उम्मीद लगाना बेकार है।
नवविवाहित जोडे को एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को समझना चाहिए और यह देखना चाहिए कि वे किस चीज को ज्यादा तरजीह देते हैं। एक-दूसरे को समझने के लिए वक्त लें और किसी भी चीज़ के लिए जल्दबाज़ी न करें। इन बातों को नोट करें कि कब और किस अवस्था में आपका पार्टनर टर्न-ऑन होता है और तब ऑर्गेज्म के पॉइंट तक पहुंचें।

 

हरगिज न करें ऑर्गेंज्म का दिखावा
इसे तो आप हरगिज न करें। चूंकि यह आपके नए सफर की शुरुआत है, इसलिए किसी भी तरह का दिखावा, फिर चाहे वह इमोशन्स का ही दिखावा क्यों न हो, बिल्कुल भी न करें। रोमांटिक रहें और चाहे तो अपनी सेक्शुअल पसंद-नापसंद को लेकर बात कर सकते हैं।

 

सेक्स के बारे में बातें
शादी के बाद की पहली रात एक आइसब्रेकर होती यानी यह वह रात होती है जब कपल्स एक-दूसरे को अच्छी-तरह से जान और पहचान सकें। इसलिए अगर वे उस रात सेक्स को लेकर बातें भी न कर पाएं तो कोई बात नहीं। सेक्स के अलावा अन्य चीजों पर बात करें। एक-दूसरे की पसंद और आदतों के बारे में जानने की कोशिश करें। एक-दूसरे के साथ कुछ अंतरंग पल बिताएं।

 

पहले मेल पार्टनर करे शुरुआत
आम धारणा यह होती है कि किसी भी चीज की शुरुआत पुरुष पहले करें। फिर चाहे वह सेक्स को लेकर ही क्यों न हो। लेकिन यह भी तो हो सकता है कि पुरुष पार्टनर एक्सपेक्ट कर रहा हो कि उसकी पार्टनर शुरुआत करे। इसलिए ओपन रहें और खुलकर बात करें।

#MeToo मामलों की होगी जांच, सरकार बनाएगी 4 सदस्यीय कमिटी

NEW DELHI. केंद्र सरकार ने मीटु अभियान के तहत सामने आ रहे मामलों की जांच कराने का फैसला लिया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने शुक्रवार को कहा कि रिटायर्ड जज के नेतृत्व के एक कमिटी का गठन किया जाएगा, जो मीटु के तहत आने वाले मामलों की जांच करेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह ऐसी हर शिकायत के पीछे के दर्द पर भरोसा करती हैं और उन सभी मामलों पर भरोसा करती हैं।  उन्होंने कहा, ‘मीटु अभियान के तहत आने वाले सभी मामलों की जांच के लिए मैंने एक कमिटी बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें सीनियर न्यायिक अधिकारी और कानून के जानकार शामिल होंगे।’ यौन शोषण की शिकायतों से निपटने के सभी तरीकों और इससे जुड़े कानूनी और संस्थागत फ्रेमवर्क तैयार करने में यह कमिटी मदद करेगी। बहुत सी महिलाएं मीटु अभियान के तहत सोशल मीडिया पर अपने साथ हुए बर्ताव के बारे में लिख रही हैं।

यौन शोषण के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि किसी के भी खिलाफ लगे यौन शोषण के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह बात उन्होंने उस समय कही थी जब केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर लगे आरोपों पर उनसे सवाल पूछा गया था। गांधी ने मंगलवार को कहा था कि ताकतवार होने के बाद पुरुष अक्सर ऐसा करते हैं। यह मीडिया के साथ राजनीति और प्राइवेट कंपनियों पर भी लागू होता है। जब महिला ने इस पर मुखरता से बोलना शुरू कर दिया है तो इन आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

 

सुब्रमण्यन स्वामी भी कूदे, पीएम मोदी स्पष्ट करें रुख

वहीं सत्ताधारी पार्टी बीजेपी में मीटु अभियान के लिए समर्थन बढ़ रहा है। मेनका गांधी के बाद अपने बयानों के लिए विवादों में रहने वाले बीजेपी नेता और राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने भी इस अभियान के प्रति समर्थन जाहिर किया है। स्वामी से जब एमजे अकबर को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘उन पर लगे आरोप किसी एक महिला ने नहीं बल्कि कई महिलाओं ने लगाए हैं। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं मीटु अभियान का समर्थन करता हूं। मुझे नहीं लगता कि यदि महिलाएं लंबे समय बाद सामने आ रही हैं तो इसमें कोई बुराई है। पीएम मोदी को भी इस मुद्दे पर अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए।’

वीणा बनीं देश की पहली ट्रांस ब्यूटी क्वीन

NEW DELHI.  छत्तीसगढ़ की वीणा सेंद्रे ने देश की पहली ट्रांस ब्यूटी क्वीन का खिताब जीत लिया है। मुंबई में आयोजित इस स्पर्धा में प्रदेश की वीणा सेंद्रे ने शानदार प्रदर्शन किया और ब्यूटी क्वीन का ताज हासिल कर लिया। गौरतलब है कि वीना मिस ट्रांसक्वीन इंडिया कॉम्पिटिशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। ऑनलाइन वोटिंग के जरिए देशभर से ट्रांसजेंडर समुदाय से ब्यूटी क्वीन का चुनाव हुआ था। इस कॉम्पिटिशन में वीना टॉप पर चल रही थीं। 13 से अधिक वोट पाकर वीना ने यह टाइटल अपने नाम किया। इस कॉन्टेस्ट में वीना के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रांसजेडर्स शामिल हुई थीं।

 

24 साल की वीना मूल रूप से रायपुर की ही रहने वाली हैं और यहीं उन्होंने अपनी मॉडलिंग व पर्सनालिटी डेवलेपमेंट की ट्रेनिंग पूरी की है। रैंप पर वॉक के दौरान वीना की अदाएं देखने लायक थीं। प्रतियोगिता के दौरान जब वह रैंप पर उतरीं तो देखने वाले देखते ही रह गए। वीना इससे पहले फैशन की दुनिया के बेहद प्रतिष्ठित माने जाने वाले ‘लैक्मे फैशन वीक’ के रैंप पर भी अपनी अदाओं का जलवा बिखेर चुकी हैं।

 

पीजेंट इंडिया द्वारा यह ब्यूटी कॉन्टेस्ट पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया है। ट्रांसजेंडर्स समुदाय को संवैधानिक मान्यता मिलने के बाद से इस स्पर्धा का दायरा बढ़ा है और अब देश के प्रत्येक राज्य से ट्रांसवुमन मॉडल्स इस स्पर्धा में चुन कर आ रही हैं। अलग-अलग राउंड से होते हुए फाइनल मुकाबला सात अक्टूबर की रात को मुंबई में हुआ। पब्लिक वोटिंग, रैंप वॉक, व्यक्तित्व और प्रजेन्स और माइंड और सोशल अवेयरनेश से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हुए वीना ने सभी का दिल जीत लिया।

वीना ने इस स्पर्धा को जीतकर अपनी प्रतिभा को पूरी दुनिया के सामने साबित किया है। उनका टैलेंट, आत्मविश्वास और खूबसूरती किसी भी दूसरे के मुकाबले कम नहीं है। वीना ने कहा कि वे अब आगे बतौर प्रोफेशनल मॉडल काम करते हुए अपनी पहचान को मजबूत बनाना चाहती हैं। इसके साथ ही बॉलीवुड की तरफ भी उनका रूझान है। यदि फिल्मों में बेहतर भूमिकाएं मिलीं, तो वे जरूर काम करना चाहेंगी।

वीना ने इस खिताब को जीतने के बाद एक चर्चा के दौरान कहा कि समाज में अक्सर ट्रांस जेंडर बच्चों को उनके पैरेंन्ट्स से वो प्यार नहीं मिल पाता जो आम बच्चों को मिलता है। या यूं कहा जाए तो ऐसे बच्चे उपेक्षा का शिकार होते हैं और उन्हें उनके ही हाल पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे बच्चों को भी एक सुखद भविष्य बनाने का अधिकार है। उन्हें सपोर्ट मिलना जरूरी है। वीना ने मैट्रिक तक पढ़ाई की है। उनका कहना है कि वे आगे और पढ़ना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों के चलते उच्च शिक्षा नहीं ले पाईं। अभी वे डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए आगे की पढ़ाई पूरी कर रही हैं।

महिलाएं पिछड़ीं तो देश तरक्की नहीं कर सकता

NEW DELHI.  उपराष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्‍यम बताते हुए कहा है कि खासकर भारत जैसे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की नीवं इससे ही पड़ती है।  हैदराबाद में यूनिवर्सिटी कॉलेज फॉर वुमेन के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं पिछड़ी रही तो कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। एक महिला को शिक्षित करने से केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा परिवार सशक्‍त बनता है। लैंगिक असमानता के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उन्‍होंने  लोगों को आगाह किया कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को पीछे रखने के गंभीर परिणाम हो सकते है।
 नायडू ने रूढ़ियों और पुराने चलन की दीवारों को गिराने का आह्वान करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को अपनी बात कहने और सुनने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओँ को सशक्त बनाना एक तरह से पूरे समाज को सशक्त बनाना है।

राजनीति में महिलाओँ की भागीदारी जरूरी 
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा सिर्फ रोजगार के लिए नहीं होती बल्कि इससे व्यक्ति के ज्ञान और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है जिससे वह सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की जरूरत हर क्षेत्र में है। उन्हें बराबरी का अधिकार देने के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक क्षेत्र को सशक्त बनाना होगा। उन्होंने लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए राजनीति में महिलाओँ की भागीदारी को जरूरी बताया और इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की स्थिति बेहतर बनाए बिना विश्व का कल्याण संभव नहीं है क्योंकि कोई भी पक्षी केवल एक पंख से नहीं उड़ सकता।
श्री नायडू ने महिलाओं को शिक्षित करने के सकारात्मक परिणामों पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अगर महिलाएं शिक्षित हुई तो इससे शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। महिलाओं की कमाई करने की क्षमता बढ़ने से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रतिभा और कौशल की छाप छोड़े छात्र 
उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी कर कॉलेज से निकल रहे छात्रों को सलाह दी कि वे जिस क्षेत्र में भी जाएं अपनी प्रतिभा और कौशल की छाप छोड़े। उन्होंने छात्रों से औसत दर्जे का नहीं बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन करने की अपील की। उपराष्ट्रपति ने देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार का केन्द्र बनने के मामले में खास प्रगति नहीं करने की बात करते हुए कहा’’ हम लोग ज्ञान प्राप्ति के मामले में तो अच्छे है लेकिन ज्ञान के क्षेत्र में कुछ नया दे पाने में उस स्तर पर सक्षम नहीं हो पाए है। हम कुछ नया तभी कर सकते है जब हम अपनी शिक्षा प्रणाली में ऐसा बदलाव लाएं जो युवा मस्तिष्क को रचनात्मकता और कौशल के साथ नई सोच के लिए प्रेरित कर सके।‘’
श्री नायडू ने इस अवसर पर शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे कॉलेजों को उत्कृष्टता और नवाचार का केन्द्र बनाने के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित करें। उन्‍होंने छात्रों को अपनी मातृ भाषा, माता-पिता, जन्म स्थान, मातृ भूमि और गुरु को कभी न भूलने जैसी पांच अहम बातों पर जीवन भर अमल करने की नसीहत दी।

RSS: महिलाओं के सहयोग के बिना देश नहीं कर सकता तरक्की

NEW DELHI. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मातृ समागम के दौरान कहा कि देश महिलाओं की मदद के बिना तरक्की नहीं कर सकता है। साथ ही कहा कि उन लोगों को अपनी विचारधारा बदलने की जरूरत है जो महिलाओं को दासी समझते हैं। उन्होंने कहा कि स्त्रियों को देवी माना जाना चाहिए। जयपुर के इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पुरुषों से किसी भी मायने में महिलाएं कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘भारतीय विचार परंपरा में पुरुष और महिला को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। महिला और पुरुष दोनों के अपनी-अपनी प्राकृतिक गुण संपदा के आधार पर साथ चलने से ही सृष्टि चलती है।’ आरएसएस चीफ ने यह भी कहा, ‘देश में 50 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। उनके सहयोग के बिना देश की उन्नति संभव नहीं।’

 

प्रमुख कार्यों में नेतृत्व कर रही हैं महिलाएं’
भागवत ने कहा कि जिस प्रकार महिलाएं परिवार का कुशल नेतृत्व करती आई हैं, उसी प्रकार आज के समय में समाज के भी प्रमुख कार्यों में नेतृत्व दे रही हैं, यह हमारे लिए अच्छे संकेत हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए कठोर कानून की आवश्यकता है लेकिन कानून की अपनी सीमाएं हैं। सिर्फ कठोर कानून बनाने से नहीं बल्कि समाज जागरण से ही पूर्ण समाधान संभव है और विवेक विकसित करने और संस्कारों के संपादन से ही यह हमको करना होगा।

‘मातृ शक्ति के रूप में भारतीय संस्कृति में हैं प्रतिष्ठित’
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इसी कारण भारतीय संस्कृति में वह नारी शक्ति की बजाय मातृ शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित है। मातृ शक्ति संगम में राजस्थान के सभी जिलों के विभिन्न स्थानों में समाज जीवन में अग्रणी भूमिका निभा रहीं 284 महिलाएं उपस्थित रहीं।

पति, पत्नी का मालिक नहीं, सेक्शुअल चॉइस की आजादी  

NEW DELHI.  सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की आजादी को लेकर आज एक बडा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पति, पत्नी और ‘वो’ का रिश्ता अब अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अडल्टरी यानी विवाहेतर संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। कोर्ट ने IPC की धारा 497 में अडल्टरी को अपराध बताने वाले प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस आरएफ नरीमन की पांच जजों की बेंच ने एकमत से यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने हालांकि कहा कि अडल्टरी तलाक का आधार रहेगा और इसके चलते खुदकुशी के मामले में उकसाने का केस भी दर्ज हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने महिलाओं की इच्छा, अधिकार और सम्मान को सर्वोच्च बताया और कहा कि पति महिला का मालिक नहीं होता है। उन्हें सेक्शुअल चॉइस से रोका नहीं जा सकता है।
—सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,  अडल्टरी अब अपराध नहीं
—–पति, पत्नी और ‘वो’ का रिश्ता अब अपराध नहीं   
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने और जस्टिस खानविलकर की ओर से फैसला पढ़ते हुए कहा, ‘हम विवाह के खिलाफ अपराध से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 को असंवैधानिक घोषित करते हैं।’ अलग से अपना फैसला पढ़ते हुए न्यायमूर्ति नरीमन ने धारा 497 को पुरातनपंथी कानून बताते हुए जस्टिस मिश्रा और जस्टिस खानविलकर के फैसले के साथ सहमति जताई। उन्होंने कहा कि धारा 497 समानता का अधिकार और महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी अपराध तो नहीं होगा, लेकिन अगर पति और पत्नी में से कोई अपने पार्टनर के व्यभिचार के कारण खुदकुशी करता है, तो सबूत पेश करने के बाद इसमें खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला चल सकता है। इसके साथ ही तलाक के लिए विवाहेतर संबंधों को आधार माना जाएगा।
अडल्टरी कानून रोकता है महिला की सेक्सुअल चॉइस को 
देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला देते वक्त महिला अधिकारों की बात भी की। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि अब यह कहने का समय आ गया है कि पति महिला का मालिक नहीं होता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी कानून मनमाना है। उन्होंने कहा कि यह महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। अडल्टरी कानून महिला की सेक्सुअल चॉइस को रोकता है और इसलिए यह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि महिला को शादी के बाद सेक्सुअल चॉइस से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इसके साथ ही दूसरे देशों की मिसाल देते हुए कहा कि चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में व्यभिचार अपराध नहीं है।
इससे पहले 8 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि अडल्टरी अपराध है और इससे परिवार और विवाह तबाह होता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई के बाद कहा था कि मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा।
पति की इजाज़त से बनाए जा सकते हैं गैर मर्द से संबंध 
आईपीसी की धारा-497 के प्रावधान के तहत पुरुषों को अपराधी माना जाता है, जबकि महिला विक्टिम मानी गई है। धारा ये भी कहती है कि पति की इजाज़त से गैर मर्द से संबंध बनाए जा सकते हैं।
इसे एक तरह से पत्नी को पति की संपत्ति करार देने जैसा माना जाता था। पति की मर्जी के बगैर पत्नी गैर मर्द से संबंध बनाती है तो पति उस गैर मर्द पर केस दर्ज करा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना था कि महिलाओं को अलग तरीके से नहीं देखा जा सकता क्योंकि आईपीसी की किसी भी धारा में जेंडर विषमताएं नहीं हैं।याचिका में कहा गया था कि आईपीसी की धारा-497 के तहत जो कानूनी प्रावधान हैं वह पुरुषों के साथ भेदभाव वाला है।
सहमति से संबंध पर यह थी मांग   
याचिका में कहा गया था कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी और शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है तो ऐसे संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ उक्त महिला का पति अडल्टरी का केस दर्ज करा सकता है लेकिन संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान नहीं है जो भेदभाव वाला है और इस प्रावधान को गैर-संवैधानिक घोषित किया जाए।

शादी से बचने के लिए आदिवासी लड़कियां बन रहीं माओवादी

NEW DELHI. गृह मंत्रालय और आंध्र प्रदेश पुलिस का दावा है कि आदिवासी महिलाएं जल्दी शादी से बचने के लिए वामपंथी चरमपंथी आंदोलन में शामिल हो रही हैं। इतना ही नहीं आदिवासी अभिभावक बच्चियों को बोझ समझते हैं इसलिए उन्हें स्वयं इस तरह के गैरकानूनी संगठनों में ढकेल रहे हैं। बता दें कि आदिवासी महिलाओं की माओवादी भर्ती ने पुरुषों की भर्ती को पार कर लिया है। माओवादी संगठनों में लगभग 50 फीसदी महिलाएं हैं। रविवार को टीडीपी विधायक सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक के सोमा की हत्या में लगभग 20 से 25 महिला माओवादी शामिल थीं। विशाखापट्टनम ग्रामीण एसपी राहुलदेव शर्मा ने बताया कि इस घटना में कई महिलाएं शामिल थीं। इन महिलाओं की उम्र 18 से 20 साल की बीच थी। माना जा रहा है कि उनमें से अधिकांश महिलाएं छत्तीसगढ़ की थीं। उनमें से कुछ महिलाएं तेलंगाना की तेलगु भाषा बोल रही थीं। इनमें से दो महिलाओं की पहचान हुई है। एक विजाग और दूसरी ईस्ट गोदावरी इलाके की है।
पुलिस की मानें तो आदिवासी महिलाओं को माओवादी संगठनों में शामिल करने का अभियान छत्तीसगढ़ में चल रहा है। महिलाएं जल्दी शादी से बचने के लिए संगठन में शामिल हो रही हैं। पुलिस की मानें तो रविवार को हुए हमले में नंदपुर दलम की स्पेशन जोनल कमिटी की सदस्य अरुणा मुख्य रूप से शामिल थी। गृह मंत्रालय के मुताबिक डर के चलते आदिवासी अभिभावक बच्चियों को अपने से अलग करना बेहतर पाते हैं। माओवादियों की क्रूरता के चलते बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाएं माओवादी संगठन जॉइन कर रही हैं। ये लड़कियां पुलिस फोर्स के साथ होने वाली फायरिंग में ढाल प्रयोग करती हैं। हालांकि माओवादी के टॉप लीडरशिप जैसे सेंट्रल कमिटी और संगठन की सेंट्रल कमिटी के राजनीतिक विभाग में इन महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है।
शादी से बचने के लिए घर से भाग जाती हैं महिलाएं 
मार्च 2018 में पुलिस एनकांउटर में सात माओवादी मारे गए थे। इस एनकाउंटर के बाद यह भी बात सामने आई थी कि भारी संख्या में महिला माओवादियों को भी गोली लगी थी। इन महिला माओवादियों में अधिकांश हैदराबाद की थीं। हैदराबाद के एक वामपंथी कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि माओवादी कैडर में 50 फीसदी महिलाएं हैं। महिलाएं जबरन और मर्जी के खिलाफ शादी से बचने के लिए घर से भाग जाती हैं और माओवादी संगठन में शामिल हो जाती हैं। वे पितृसत्तात्मकता का भी विरोध करती हैं।