गुरुद्वारा बंगला साहिब का सूचना केन्द्र हुआ हाईटेक

NEW DELHI. गुरुद्वारा बंगला साहिब के नये बने सूचना केन्द्र का आज उद्घाटन किया गया। विदेशी पर्यटकों को सिख धर्म के बारे में आधुनिक तकनीक से जानकारी देने के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सूचना केन्द्र का नवीनीकरण किया गया है। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह द्वारा अरदास के बाद कारसेवा वाले बाबा बचन सिंह के प्रतिनिधी द्वारा सूचना केन्द्र की चाबीयाँ कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. को सौंपी।
इस सूचना केंद्र में विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केन्द्र में तमाम प्रबंध किये गये हैं। इसमें 10 गुरू साहिबानों के इतिहास के बारे में जानकारी करवाती दस्तावेजी फिल्म के साथ ही कम्पयूटर, वाई-फाई सेवा, आदि अतिआधुनिक सुविधायें विदेशी पर्यटकों को सूचना केन्द्र पर ही उपलब्ध करवायी गई है। साथ ही देश-विदेश से आने वाले गैरसिख राजनीतिक पर्यटकां के लिए एक अलग से ब्लॉक बनाया गया है। सूचना केन्द्र में मौजूद गाईड पर्यटकों के साथ हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी, फ्रैंच, जर्मनी एवं चीनी आदि भाषाओं में बात करने में समर्थ हैं।
इसके अलावा अंग्रेजी के सिख साहित्य की अलग खिड़की भी लगाई गई है। ताकि पर्यटक अपनी मनपसंद की किताब चुन कर साथ ले जा सके।

कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि दिल्ली में धार्मिक स्थानों पर जाने के अभिलाषी पर्यटकों की रेटिंग में कमेटी की बढिय़ा कारगुजारी के फलस्वरूप बंगला साहिब को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि गुरुद्वारा बंगला साहिब के बाद दिल्ली में दूसरे स्थान पर अक्षरधाम मंदिर एवं तीसरे नम्बर पर हुमांयू का मकबरा बाहर से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद है। इसलिए सूचना केन्द्र को प्रभावशाली एवं समय का साथी बनाने के लिए नवीनीकरण करना पड़ा है। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे।

सिख कैदियों की रिहाई के लिए तिहाड़ के बाहर अरदास

NEW DELHI. पंजाब के काले दौर के दौरान जूझने वाले सिख योद्धो की जेलों से रिहाई करवाने के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल के बाहर दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा ‘बंदी छोड़ दाता’ गुरु हरगोबिंद साहिब के चरणों में अरदास की गई। “ बन्दी छोड़ दिवस “ के मौके पर दिल्ली कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. के नेतृत्व में हुई अरदास के बाद तिहाड़ जेल के गेट न. 3 के बाहर मीडिया से बात करते हुए जी.के. ने सिख कैदियों के लिए कमेटी द्वारा लड़ी जा रहीं कानूनी लड़ाई की भी जानकारी दी।शिरोमणी अकाली दल दिल्ली स्टेट के अध्यक्ष जी.के. द्वारा जेल में बंद उन सिख कैदियों की रिहाई के लिए अरदास आयोजित की गई थी जो कि अपनी सजाएं खत्म होने के बाद भी जेलों में बंद हैं।

जी.के. ने कहा वैसे तो अकाली दल लम्बे समय से जेलों में बंद उन कैदी सिखों की कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, जो कि सजा समाप्त होने पर भी रिहा नहीं हुए है। पर आज गुरु हरगोबिन्द साहिब के चरणों में अरदास की गई है कि जिस तरह गुरु साहिब आपने ग्वालियर की जेल में बंद 52 पहाड़ी हिन्दू राजाओं को मुक्त करवाया था। उसी तरह अब इन कैदियों की जल्द रिहाई के लिए गुरु साहिब अपनी कृपा से कोई ऐसा रास्ता निकाले, जिसके बाद रिहाई संभव हो सके। हम गुरु महाराज के चरणों में इसलिए अरदास कर रहे हैं क्योंकि हमारा मानना है की गुरु महाराज की कोर्ट सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर है।

एक निर्णय की वजह से बाहर नहीं आ पा रहे हैं सिख

जी.के. ने बताया की काले दौर के दौरान हथियार उठाने वाले या ना उठाने वाले सभी सिख आज दो दशक जेल में बंद रहने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय की वजह से जेल से बाहर नहीं आ पा रहे है। यह देश की कार्यपालिका और न्यायपालिका के लिए चिंतन और मंथन का विषय है, की आखिर अपनी सजा पूरी करने के बावजूद इन सिख कैदियों के मानवधिकारों की बात किसे कब और कैसे याद आएगी ? जी.के. ने बताया की दिल्ली कमेटी जहां इन कैदियों की लड़ाई विभिन्न अदालतों और राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग में लड़ रही है वही अकाली दल सरकार के साथ बातचीत के जरिये सियासी लड़ाई भी लड़ रहा है। भाई जगतार सिंह हवारा से लेकर भाई सतनाम सिंह पाऊंटा साहिब तक की पैरवी दिल्ली कमेटी ने अदालतों में की है। सिर्फ मानवाधिकारों की लड़ाई ही नहीं लड़ी बल्कि मामले को अंजाम तक पहुंचाते हुए तिहाड़ जेल में 5600 सीसीटीवी कैमरे लगवाने का आदेश भी दिल्ली हाईकोर्ट से पारित करवाया है ताकि जेल के अंदर कैदियों का शरीरिक उत्पीड़न ना हो।

 

सिख कैदियों की रिहाई में रोड़ा–परमिन्दर

 

कमेटी के प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि सिख कैदियों की रिहाई में केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की सीधी भूमिका नहीं है। क्योंकि राजीव गांधी की हत्या में लिप्त कैदियों को तमिलनाडु सरकार द्वारा रिहा करने का फैसला लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिन कैदियों पर सीबीआई जांच चल रही है यां फिर टाडा लगा हुआ है उनकी सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई नहीं करने का आदेश दे दिया था। जो की सिख कैदियों की रिहाई में रोड़ा बना हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट ही इनकी रिहाई के आदेश दे सकती है। इस अवसर पर अरदास कमेटी सदस्य चमनं सिंह द्वारा की गई। अरदास में कमेटी सदस्य परमजीत सिंह चंडोक, आत्मा सिंह लुबाना, रमिंदर सिंह स्वीटा और रणजीत कौर आदि शामिल हुए।


गुरुद्वारा कमेटी में ‘दान घोटाला, डकार गए 51 लाख,  GM सस्पेंड

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा किया है। साथ ही कहा कि जीके ने एक नहीं लगातार कई घोटाले किए हैं, जिसमें से तीन घोटालों के सबूत सामने आए हैँ। इन घोटालों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरूण जेटली, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस सहित दिल्ली गुरुद्वारा आयोग से लिखित रूप से की है। इनमें सबसे अहम घोटाला है दान घोटाला, जिसके तहत 51 लाख रुपये का सीधे गबन किया गया है। मनजीत सिंह जीके के खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई है और पुलिस ने डीडी नंबर 11ए, तारीख 21 अक्टूबर 2018 के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पुलिस को अपना बयान दिया है और सभी साक्ष्य सौंपे हैं। मामला चूंकि, गुरुद्वारे के गोलक की लूट से जुड़ा है, इसलिए अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी शिकायत की गई है।
 
–कमेटी के सदस्य गुरमीत शंटी ने लगाए सनसनीखेज आरोप 
–प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को लिखी चिट्ठी, कमेटी खातों की जांच की मांग
–अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को भी लिखी चिटठी, करें हस्तक्षेप   
–गुरमीत शंटी ने पुस्तक घोटाले का जारी किया आडियो टेप 
शंटी ने आरोप लगाया कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी कमेटी के बाकी सदस्य एवं पदाधिकारी खामोश बैठे हैं। शंटी ने कहा कि मनजीत सिंह जीके के कार्यकाल के दौरान प्रधान-डीएसजीएमसी के रूप में, डीएसजीएमसी और जीएचपीएस के सभी खातों को सत्य जानने के लिए उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
     कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि सिख धर्म के प्रचार के लिए गुरुद्वारा कमेटी ने 82 हजार धार्मिक पुस्तकें छपवाने का दावा किया था, जबकि, हकीकत में पुस्तकें छपी ही नहीं और लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। पुस्तक घोटाले को लेकर शंटी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक आडियो टेप भी जारी किया, जिसमें पुस्तकें नहीं छापने और फर्जी बिल बनाने की बात कही गई है। आडियो टेप में पुस्तक छापने वाले जोगिंदर सिंह प्रेस ने माना है कि कमेटी ने उनसे फर्जी बिल बनवाए और उसका लाखों रुपये खा गए।
ब्लैकलिस्टेड  कंपनी को दिया ठेका, पेमेंट भी हुआ  
इसके अलावा कमेटी अध्यक्ष जीके ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी ‘रेनबी क्लॉथिंग प्राइवेट लिमिटेडÓ को कपड़े सप्लाई करने का ठेका दिया और उसे भुगतान भी कर दिया। यह कंपनी उनके बेटे एवं दामाद की है, जो उनके अपने निजी आवास के पते पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2015 में बंद हो चुकी कंपनी को 2017-18 में भुगतान किया गया। जबकि, कमेटी एक्ट के अनुसार परिवार का सदस्य कोई व्यवसाय गुरुद्वारे में नहीं कर सकता है।
51 लाख रुपये का दान का गबन 
पूर्व महासचिव गुरमीत शंटी ने कहा कि कनाडा के एक श्रद्धालु ने 1 लाख कैनेडियन डॉलर का दान डीएसजीएमसी को दिया, जिनको भारतीय रुपए में बदल कर 51,05,773.20 रुपए 30 जून 2016 को बैंक में जमा किया गया था। यह कुल राशि 51,05,773.20 है। बैंक स्टेटमेंट में भी यह रकम साफ दर्ज है। लेकिन, मनजीत जीके ने एक नकली वाउचर नंबर 3468 बना कर उसी तारीख को 51,05,773 रुपये उसी तारीख को यानी 30 जून 2016 और डीएसजीएमसी के कैश चेस्ट से निकाल ली गई।
जीके ने गृहमंत्रालय से मांगी है जेडप्लस सुरक्षा 
गुरमीत सिंह शंटी ने दावा किया कि मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत द्वारा हमले के डर से, (जैसे अमेरिकी संगत द्वारा हाल ही में उन पर किया गया था) दिल्ली पुलिस और जेड प्लस सुरक्षा मांगी है। इसके लिए गृह मंत्रालय एवं दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि जीके ईमानदार हैं, तो उन्हें दिल्ली की संगत के डर से सुरक्षा की मांग नहीं करनी चाहिए थी।
मंजीत सिंह दें इस्तीफा, गैरहाजिरी में हो खातों की जांच- सरना   
शिरोमणि अकाली दल (दिलली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने इतने बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही पुलिसे से उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि जीके की गैरहाजिरी में कमेटी के सभ्ीा खातों की जांच होनी चाहिए। सरना ने कहा कि कमेटी के इतिहास में यह पहला वाक्या होगा, जब एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं।
जांच में जो दोषी होगा, कार्रवाई होगी: दिल्ली कमेटी 
 दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने गुरमीत सिंह शंटी के आरोपों पर बहुत ज्यादा आज नहीं बोला है। कमेटी प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने इतना ही कहा कि हमने पहले ही नार्थ एवेन्यू थाने मे जांच के लिए तहरीर दे रखी हैं। लिहाजा, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्यवाही होंगी।

गुरुद्वारा कमेटी का जनरल मैनेजर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित

दिल्ली कमेटी सदस्य सरदार गुरमीत सिंह शंटी द्वारा कमेटी के जनरल मैनेजर सरदार हरजीत सिंह सुबेदार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर कमेटी अध्यक्ष मंजीतसिंह जीके ने तत्काल प्रभाव से सुबेदार को संस्पेंड कर दिया है। साथ ही जांच के लिए सरदार हरमीत सिंह कालका व सरदार महिन्द्रपाल सिंह चड्ड़ा की अगुवाई में 2 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस फैसले का ऐलान करते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. ने सूबेदार को पद से निलंबित भी कर दिया।

बादल की ‘अदालत’ में अकालियों की लगी ‘क्लास’  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी में कथित भ्रष्टाचार, घोटाले सहित कई अन्य मामलों में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई आज अकाली दल बादल के सुप्रीमों सुखबीर सिंह बादल की अदालत में पहुंची। बादल ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके एवं महासचिव मनजिंंदर सिंह सिरसा के बीच छिड़े जंग को सुलझाने के लिए आज अपने आवास पर सभी नेताओं को तलब किया। बादल ने कमेटी के करीब 20 सदस्यों से बंद कमरे में अलग-अलग बातचीत की और वर्तमान हालात की बावत जानकारी मांगी। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान ज्यादातर सदस्यों ने करप्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। साथ ही कहा कि कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए। इसको लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है और संगत के बीच गलत मैसेज भी जा रहा है।
— सिरसा-जीके की लड़ाई को सुलझाने में जुटे सुखबीर बादल  
–दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार पर सदस्यों ने उठाई आवाज 
–अलग-अलग सदस्यों से बंद कमरे में मिले शिअद सुप्रीमो 
सूत्रों के मुताबिक सदस्यों ने कहा कि अब करप्शन का मुद्दा इतना ज्यादा फैल गया है िक संगत भी पूछने लगी है। लिहाजा, संगतों को हम लोग क्या जवाब दें। सदस्यों ने सुखबीर बादल को कहा कि पहले मंजीत सिंह जीके इस्तीफे की बात कही और शक्तियां देकर चले गए, और अब महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा ने अपनी शक्तियां देकर घर बैठ गए। यह सिख संगतों के बीच बहुत गलत मैसेज जा रहा है। लिहाजा इस मसले को तुरंत सुलझाया जाना चाहिए। एक सदस्य ने कहा कि मंजीत सिंह जीके पर बड़ा ही गंभीर आरोप लगा है, इसके जवाब में जीके को खुद अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही पार्टी को चाहिए कि वह इसकी निष्पक्ष जांच करवाए।
आज फिर बाकी 20 सदस्यों से करेंगे मुलाकात
   शुक्रवार को फिर दिल्ली के बाकी सदस्यों को बुलाया गया है। वीरवार को पश्चिमी दिल्ली एवं नई दिल्ली क्षेत्र के सदस्य पहुंचे थे। इनमें पूर्व कमेटी अध्यक्ष एवं पटना साहिब के नवनियुक्त अध्यक्ष अवतार सिंह हित, रंजीत कौर, हरमनजीत सिंह, जगदीश सिंह काहलो, हरजीत सिंह पप्पा, गुरमीत सिंह भाटिया, निशान सिंह मान, स्वर्ण सिंह बराड़, मनमोहन सिंह, दलजीत सिंह सरना, सर्वजीत सिंह विर्क एवं महेंद्र सिंह भुल्लर आदि पहुंचे। इसके अलावा कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके खुद भी मौजूद रहे, लेकिन सुखबीर बादल सदस्यों से अकेले ही मिले। इस दौरान सदस्यों ने कई अहम सुझाव भी दिए। सूत्रों के मुताबिक सुखबीर ङ्क्षसह बादल से मिलने के बाद कुछ सदस्यों ने अकाली सांसद प्रो. चंदूमाजरा के आवास पर जाकर उनसे भी मुलाकात की। उधर, इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कुछ भी बोलने से साथ इनकार कर दिया है।
भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए : रंजीत कौर 
दिल्ली कमेटी की सदस्य एवं अकाली दल बादल की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रंजीत कौर ने भी पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के समक्ष अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि कमेटी एवं पार्टी में जो भी आतंरिक विरोध का मामला है उसे बैठकर सुलझा लिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सिख संगत के सामने आ जाए। लेकिन, अफसोस कि एक दूसरे पर आरोप लगाने के चलते संगत के बीच गलत मैसेज जा रहा है। उन्होंने सुखबीर बादल को बताया कि कमेटी में विपक्ष नहीं है, लेकिन हम खुद ही विपक्ष क्रियेट कर दिए हैं। लिहाजा, समय-समय पर सदस्यों की काउंसलिग होनी चाहिए। रंजीत कौर ने इस दौरान बताया कि हमसभी को मिलकर संगइन को मजबूत करना चाहिए। यूथ विंग को महिला विंग की तर्ज पर फैलाना चाहिए। हमने 1000 महिलाओं को जोड़ा है। स्त्री कवि दरबार शुरू कराया। अब घरेलू महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। रंजीत कौर ने सुखबीर बादल को लिखित सुझाव दिया कि वह कार्यकर्ताओं से बीच-बीच में मिलें, ताकि उनका मनोबल भी मजबूत हो।
धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे : बाठ 
दिल्ली कमेटी के पूर्वी दिल्ली से सदस्य कुलवंत सिंह बाठ के मुताबिक आरोप बहुत लोग लगाते हैं, अगर आरोप गंभीर है तो कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके को खुद सामने आकर संगत को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी भी अध्यक्ष जांच बिठा सकते हैं। 5 साल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। बाठ ने दिल्ली कमेटी के एक्ट में सरकार जो संशोधन करने जा रही है उसका स्वागत किया है। धार्मिक लोग राजनीतिक क्षेत्र से अलग होना चाहिए। धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे।

सिक्खी सेवा भूल, कीचड़ उछालने की शुरु हुई राजनीति

NEW DELHI.  सिक्खी सेवा के लिए स्थापित दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इन दिनों अजीबोगरीब घोटालों को सुलझाने में उलझ गई है। इसके चलते असली काम छोड़ विपक्षी दलों के आरोपों पर सफाई देने में जुट गई है। साथ ही विपक्षी दलों के असली मुद्दों के बदले उनके निजी मुद्दों को उठाकर कीचड़ उछालने की नई सियासत शुरू कर दी है। दिल्ली कमेटी ने विरोधियों पर पलटवार करने के लिए हर हफ्ते पोल-खोल कांफ्रैंस करने की नई परंपरा शुरू कर दी। आज उसकी शुरुआत थी। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह, तख्त पटना साहिब कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित तथा कमेटी के प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने विरोधियों पर तीखे हमले किये। 
 
–गुरुद्वारा कमेटी ने भी विपक्षी दलों पर किया पलटवार 
–वर्दी, पुस्तक एवं गोलक घोटाले पर दी सफाई, दी नसीहत 
   कालका ने सरना कार्यकाल के दौरान किताबों तथा वर्दी की खरीद में अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का सरना पर आरोप लगाया। साथ ही बताया कि दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना की बेटी की कम्पनी बिंद्रा सिलैक्शन व अन्यों से 10 लाख 67 हजार रूपये के कोर्ट पैंट, वर्दी तथा शालों की खरीद 2003 में कमेटी द्वारा की गई थी। इसमें सीधे तौर पर साबित होता है कि सरना भाईयों ने अपनी बर्तनों की कम्पनी पंजाब स्टेनलस स्टील से गुरुद्वारा कमेटी तथा स्कूलों में गिफ्ट आईटमों की खरीद करने के साथ ही अपनी बेटी तथा दामाद की दुकानों से कपड़ा खरीदकर सीधे तौर पर अपने परिवार को फायदा पहुंचाया है।  कालका ने कहा कि सरना ने कहा था कि आज भी पुराने बर्तन बेंच कर उस समय के बर्तनों की कीमत वसूल की जा सकती है। परन्तु सवाल उठता है कि जितने बर्तन स्टाफ या अन्य लोगों को उपहार में दिये गये वो कैसे वापिस आयेंगे। कालका ने साफ कहा कि दुष्प्रचार के कीचड़ में उतरने का हमारा कोई ईरादा नहीं था, परन्तु विरोधियों ने कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. के खिलाफ सियासत से प्रेरित होकर निचले स्तर के आरोप लगाये हैं। नतीजन, हमें संगतों को इनकी हकीकत के बारे बताने को मजबूर होना पड़ा।
   कालका ने 2013 में दिल्ली कमेटी चुनाव के दौरान गुरू की गोलक से चुनाव प्रचार सामग्री छपवाने के लिए सरना ने 55 हजार प्रति प्रचार सामग्री छपवाई थी। 
सच क्या है, सरना संगतों को बतायें
   कमेटी प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि दिल्ली कमेटी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कमेटी के स्टोर में बिना कागज तथा किताबें आये 27 लाख रूपये का कमेटी ने भुगतान कर दिया। साथ ही अपना कागज देने के बावजूद 78 रूपये की एक किताब खरीदना कहीं न कहीं कमेटी प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जिस पिं्रटर से यह किताब छपवाई गई थी आज उस पते पर ब्यूटी पार्लर चल रहा है। सच क्या है, सरना संगतों को बतायें। 

गुरुद्वारा कमेटी का घोटाला पहुंचा पुलिस स्टेशन 

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी द्वारा मौजूदा कमेटी अध्यक्ष पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों को आज सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। साथ ही शंटी के खिलाफ नार्थ एवेन्यू पुलिस थाने में आपराधिक मानहानि का केस दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज कराई है। यह जानकारी कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका तथा प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने पत्रकारों को दी। नेताओं ने शंटी के दावों की हवा निकालते हुए उलटे शंटी पर आरोपों की झड़ी लगा दी। साथ ही सभी आरोपों का सिलसिलेवार जवाब भी दिया। कालका ने कहा कि शंटी ने सियासी रजिंश के कारण झूठे आरोप लगाकर कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. की छवि खराब करने की कोशिश की है।
 
–कमेटी ने पूर्व महासचिव शंटी के खिलाफ थाने में दी शिकायत 
–मामला तूल पकड़ा, दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप की छिड़ी जंग 
–सियासी रजिंश के कारण मनजीत सिंह की छवि खराब करने की कोशिश : कमेटी 
जी.के. के द्वारा कौम तथा पंथ के लिए किये जा रहे कार्यो को विरोधी पचा नहीं पा रहे हैं। इसलिए शंटी ने जानबूझकर मनगढंत तथ्यों के सहारे दिल्ली की संगत को गुमराह करने के लिए घोटाले जैसे गंभीर शब्द इस्तेमाल करके कमेटी की साफ छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। 
  इस मौके पर प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि पूर्व महासचिव गुरमीत शंटी ने जगदीश टाईटलर की सी.डी. कमेटी द्वारा जारी करने के मामले में करोड़ों रूपये के घोटाले तथा इस डील मेंं कमेटी अध्यक्ष को बड़ी कार मिलने का दावा किया था। जोकि बिना सबूतों और गवाहों के किया गया था। हम शंटी को चुनौती देते हैं कि इस मामले में लगाये गये आरोपों के सबूत सार्वजनिक करें। क्योंकि शंटी अपने पूर्व अध्यक्ष सरना के साथ मिलकर कांग्रेसियों के काफी नजदीक थे। इसलिए माना जा सकता है कि शंटी का पुराना कांग्रेस प्रेम उनसे ऐसे बेबुनियाद दावे करवा रहा हो। 
शंटी के दावे की हवा निकली, संगत के सामने नहीं रखा सबूत 
कमेटी प्रवक्‍ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब की कारसेवा का कार्य कारसेवा वाले बाबा को देने के बदले शंटी ने 60 लाख रूपये बतौर रिश्वत लेने का दावा किया है तथा अग्रिम भुगतान के रूप में 30 लाख किसी मुख्यग्रंथी को देने की बात कही है। लेकिन इस दावे के पीछे किसी तरह का सबूत संगत के सामने नहीं रखा है। इसलिए हमने दिल्ली पुलिस को शंटी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दी है। ताकि, शंटी द्वारा किये गये दावों के स्रोत तथा सच्चाई का संगत के सामने खुलासा हो सके। 
 
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घोटाले सही, मैं अपने आरोपों पर अडिग : शंटी   
 
 दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य  गुरमीत सिंह शंटी गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर लगाए सभी आरोपों पर अडिग हैं। साथ ही गुरुद्वारा कमेटी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मनगढंत करार दिया है। शंटी ने वीरवार को कमेटी की प्रेस कांफ्रेंस के जवाब में बयान जारी करते हुए कहा कि मंजीत सिंह जीके सच्चाई से भाग रहे हैं और अपना मुंह छिपा रहे हैं। लिहाजा, मेरे द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब खुद की बजाय कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के जरिये दिलवा रहे हैं। जबकि, गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के लिए खुद आगे बढकर जा रहे हैं।
संगत को गुमराह कर रही है गुरुद्वारा कमेटी 
शंटी ने कहा कि कालका जी सफ़ेद झूठ ओर संगत को गुमराह करने वाला है। शंटी ने दावा किया कि कमेटी अध्यक्ष ने अपनी बेटी की कंपनी को बचाने के लिए बहुत बडा फर्जीवाडा किया है। इसकी शिकायत इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स, दिल्ली  पुलिस और संभंधित विभाग को करूंगा। साथ ही पूछूंगा कि जो कंपनी 2015 में बंद हो चुकी है उसका बकाया टैक्स दिल्ली कमिटी और नकली कंपनी ने कहा जमा करवाया यह एक आपराधिक मामला है, जिसके कारण मंजीत सिंह जी.के. और बेटी-दामाद को जेल जाना पड़ सकता है। शंटी ने मंजीत सिंह जी.के. के ऊपर आरोप लगाया कि वह सफ़ेद झूठ बोल रहे हैं और उन्हें संगत कभी माफ़ नहीं करेगी। शंटी ने कहा कि मैं मंजीत सिंह जी.के. के खिलाफ 420  धारा के तहत स्नढ्ढक्र दर्ज कराने जा रहे हैं। इस घोटाले कि शिकायत गृह मंत्रालय, सीबीआई और दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से करूंगा।

धर्म संभालने वाले ही तोड़ रहे हैं ‘सिक्खी मर्यादा’

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके श्री गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर घर-घर तक धर्म प्रचार करने में जुटे हैं। साथ ही बच्चों को इस मुहिम से जोड़कर गुरूनानक के राजदूत या एम्बेसडर बनाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, उनकी ही कमेटी के कुछ कर्मचारी सिख रहत मर्यादा का खुलेआम उल्लंघन कर कमेटी के धर्म प्रचार को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इसमे से एक हैं गुरुद्वारा कमेटी के रागी भाई जरनैल सिंह, जिनपर आरोप है कि उन्होंने अपने केसों की बेअदबी की है। इसका खुलासा तब हुआ,जब उनके ही एक साथी ने कमेटी प्रबंधकों को शिकायत की। इसके बाद दिल्ली कमेटी के महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा के कार्यालय में तैनात सेवादार संतोष सिंह को ध्रूमपान करते हुए पाया गया। उनकी धू्रमपान करने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

–गुरुद्वारा कमेटी के दो कर्मचारियों ने किया सिख रहित मर्यादा का उल्लंघन
–गुरूद्वारा के रागी ने किया केशों की बेअदबी, सेवादार धु्रम्रपान करते हुए मिला
–दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के धर्म प्रचार पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर सिखों द्वारा बवाल काटने के बाद कमेटी प्रबंधकों ने आनन फानन में दोनों कर्मचारियों को निष्कासित कर अपनी जान बचा ली। हालांकि, रागी जरनैल सिंह के मामले में दो सदस्यों की जांच कमेटी बनाई गई, जिसमें कमेटी सदस्य ओंकार सिंह राजा व हरजीत सिंह जीके शामिल थे। इस कमेटी की सिफारिश पर रागी को 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही दोबारा अमृत छकने के बाद नौकरी पर बहाल कर दिया गया। बहाली के इस कागजात पर कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के हस्ताक्षर हैं। इन दोनों घटनाओं के बाद दिल्ली कमेटी द्वारा किए जा रहे घर्म प्रचार पर अब सवाल उठ गए हैँ। साथ ही सिख रहत मर्यादा के विरूद्व कार्य करते पकड़े गए दोनों कर्मचारियों ने सिख संगत को भी हैरान कर दिया है।
हैरानी की बात है कि हर मसले पर सोशल मीडिया में अपनी वीडियो डालने वाले धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन परमजीत सिंह राणा इस मामले में खामोशी धारण किए हुए हैं। खास कर रागी को बहाल करने के मामले में अंतिम रिपोर्ट पर धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन को ही फैसला करना चाहिए था। लेकिन, धर्म संकट में फंसी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के लिए अब आगे के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जरूरी मापदंड तय करने जरूरी हो गए हैं।

गुरुद्वारा कमेटी के सभी कर्मचारियों का हो डोप टेस्ट : सरना

कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने बड़ा सवाल उठा दिए हैं। सोशल मीडिया पर डाले एक वीडियो में सरना ने उनके कार्यकाल के बाद भर्ती किए गए कमेटी के सारे कर्मचारियों का डोप टेस्ट कराने की मांग कर डाली है। यही नहीं, सरना ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यहां तक कह दिया कि महासचिव के साथ चलने वाला सेवादार धु्रमपान करता था इसकी खबर महासचिव को कैसे नहीं लगी। जबकि, ध्रूमपान करने के बाद कुछ देर तक बदबू आती है। सरना ने कहा कमेटी में धर्म प्रचार का ये आलम है कि लोगों के बीच प्रचार करने की बजाय इस समय कर्मचारियों में धर्म प्रचार की सबसे ज्यादा जरूररत है।

किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा : कमेटी

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने कहा कि दोनों ही मामलों की जानकारी कमेटी को जैसे ही हुई कमेटी ने त्वरित कार्रवाई की है। उनके मुताबिक कमेटी की कोशिश है कि ऐसी घटना दोबारा ना हो इसके लिए बाकायदा कर्मचारियों को सचेत किया जा रहा है। किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा।

करतारपुर कॉरिडोर का मुद्दा उठाएंगी सुषमा स्वराज

NEW DELHI. विदेश मंत्रालय ने गुरूवार को बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में आसन्न संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) बैठक से इतर अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी के समक्ष करतारपुर साहब कारिडोर के मुद्दे को उठायेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि देश में सभी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया है और हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी विदेश मंत्री को चिठ्ठी लिखी थी।

इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा था कि वह इस विषय को पाकिस्तानी सरकार के समक्ष उठाएंगी। इस विषय को नवजोत सिंह सिद्धू ने भी उठाया था। उन्होंने कहा, अभी तक हमारे पास से ऐसा कोई आधिकारिक संवाद नहीं है कि पाकिस्तान की सरकार इस विषय पर विचार करने को इच्छुक है और इसलिये विदेश मंत्री (यूएनजीए) बैठक से इतर अपने पाकिस्तानी समकक्ष के समक्ष इस मुद्दे को उठायेंगी।

 

 

कुमार ने कहा कि करतारपुर साहब तक जाने को लेकर कई खबरें सामने आ रही हैं और इस विषय को अतीत में पाकिस्तानी पक्ष के समक्ष कई बार उठाया गया। विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा के संबंध में 1974 में एक प्रोटोकाल हुआ था, इस प्रोटोकाल में करतारपुर साहिब शामिल नहीं है। 1999 में लाहौर की यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस मुद्दे को उठाया था और इस धार्मिक स्थल की वीजा मुक्त यात्रा पर विचार करने का अनुरोध किया था जो सिखों की धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा हुआ है।

मंत्रालय ने बताया कि इसके बाद पंजाब के तब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अनुरोध पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक सितंबर 2004 को प्रकाशोत्सव की 400वीं वर्षगांठ के अवसर पर अमृतसर में करतारपुर साहब के संबंध में सुविधा की घोषणा की थी। इसके बाद 4 सितंबर 2004 को विदेश सचिव स्तर की वार्ता के दौरान करतापुर साहब को प्रोटोकल के तहत सूची में शामिल करने के लिये पाकिस्तानी पक्ष से अनुरोध किया गया था।

 

पाकिस्तानी पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जतायी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जतायी। साल 2005 में पाकिस्तान ने तीन धार्मिक स्थलों की यात्रा वीजा के साथ करने की अनुमति दी थी लेकिन इसमें करतारपुर साहब शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि 2008 में भी तब के विदेश मंत्री ने करतारपुर साहब के मुद्दे को अपने पाकिस्तानी समकक्ष के समक्ष उठाया था लेकिन इसके बाद से पाकिस्तानी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है।

करतारपुर कॉरिडोर पर मचा सियासी महाभारत 

NEW DELHI. सिखों के पवित्र धर्मस्थल करतारपुर के लिए गलियारा खुलवाने के मामले में दिल्ली से लेकर पंजाब तक सियासत तेज हो गई है। अब गलियारा खुलवाने में के्रडिट को लेकर कांग्रेस और अकाली दल में संघर्ष छिड़ गया है। कांग्रेस के नेता एवं कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के एक दिन पहले विदेश मंत्री रक्षा मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात को लेकर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भड़क उठी हैं। उन्होंने आज मंगलवार को सिद्धू पर आरोपों की झड़ी लगा दी। साथ ही उन्होंने सिद्धू को पाकिस्तान का एजेंट और कठपुतली करार दिया। हरसिमरत कौर ने कहा कि सिद्धू के रूप में पाकिस्तान को नया एजेंट मिला है। पाकिस्तान उन्हें कठपुतली के रूप में इस्तेमाल कर रहा है और वह उनकी धुन पर नृत्य कर रहे हैं। 
 
–केंद्रीय मंत्री हरसिमरत ने सिद्धू को बताया झूठा, कहा-पाक एजेंट 
–के्रडिट को लेकर कांग्रेस और अकाली दल में छिड़ी जंग  
   पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कहा है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री सिद्धू सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिस करतारपुर कॉरिडोर को अगले साल पाकिस्तान की ओर से खोलने की बात वह कह रहे हैं, हकीकत में ऐसी कोई बात ही नहीं है। इसको लेकर पाकिस्तान तैयार ही नहीं है। खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह बात कही है। शिरोमणि अकाली दल नेता और मोदी कैबिनेट में शामिल हरसिमरत कौर ने विदेश मंत्री की संबंधित चिटठी सार्वजनिक की। बताया कि चिटठी में कहा गया है कि सरकार पकिस्तान के साथ मामला उठाती रही है।
पाकिस्तान अब तक श्रद्धालुओं के दौरे में करतारपुर साहिब पर सहमत नहीं हुआ है, ना ही अब तक करतारपुर कॉरिडोर बनाने को लेकर कोई पत्र भेजा  है। हरसिमरत कौर बादल ने दावा किया कि  नवजोत सिंह सिद्धू को सोमवार को विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से फटकार मिली, जब सिद्धू ने उनसे मुलाकात कर करतारपुर साहिब गलियारा (कॉरिडोर) खोलने के लिए पाकिस्तान से वार्ता की पहल करने में मदद मांगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मसले को गड़बड़ाने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू को फटकार लगाई, और आरोप लगाया कि सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दी गई राजनीतिक मंज़ूरी का दुरूपयोग किया। 
नवजोत सिंह सिद्धू पर ताबड़तोड़ हमले
    हरसिमरत कौर ने मंगलवार को नवजोत सिंह सिद्धू पर ताबड़तोड़ हमले किए। साथ ही  कहा कि श्री करतारपुर साहिब मार्ग पर सिद्धू राजनीति और नौटंकी कर रहे हैं। वह पाकिस्तान निजी दौरे पर गए थे और वहां जाकर राजनीति करने लगे। जब वह वहां से लौटकर भारत आए तो उन्हें काले झंडे दिखाए गए। हर कोई नाराज था कि वह वहां गया और हमारे लोगों और सैनिकों की हत्या करने वाली पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले लगा लिया।
  पाकिस्तान की भाषा में बोल रहे हैं सिद्धू
हरसिमरत ने कहा कि इसके लिए क्षमा मांगने के बजाय सिद्धू लोगों की भावनाओं के साथ खेलना शुरू कर दिया। वह पाक आर्मी चीफ से गले मिलने पर निशाने पर आया तो कहा कि उन्होंने पाक जनरल को गले लगाया क्योंकि उन्होंने करतारपुर साहिब गलियारा खोलने की बात की। हरसिमरत ने कहा कि लेकिन सच्चाई यह है कि, पाकिस्तानी सरकार ने अब तक इस पर कुछ भी नहीं बताया है और कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि हर कोई भूल गया कि वह एक दुश्मन राष्ट्र के पास गए थे। कई सप्ताह बीत गए, लेकिन पंजाब की कांग्रेस कांग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री करतारपुर साहिब को लेकर कोई दस्तावेज नहीं दे सके। वह बस  पाकिस्तान की भाषा में बोल रहे हैं। पाकिस्तान के मंत्री वहां कुछ बोलते हैं या नहीं सिद्धू यहां उनके प्रचार में जुट जाते हैं। 
 
 
 
पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई पहल नहीं 
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा, मैंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिखा कि यह प्रचार किया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर गलियारे को खोलने पर ग्रीन सिग्नल दिया है और हमारी सरकार इसके पक्ष से कुछ भी नहीं कर रही है। इसके जवाब में विदेश मंत्री का जो पत्र मुझे मिला उसे पढ़कर मैं दंग रह गई। सुषमा स्वराज ने बताया कि ऐसी कोई बात नहीं है और पाकिस्तान सरकार की ओर से इस तरह की कोई पहल नहीं की गई है।
 
राहुल गांधी से पूछे सवाल 
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत ने कहा, मैं राहुल गांधी से पूछता हूं कि आपकी पार्टी का मंत्री एक दुश्मन राष्ट्र गया, हमारे लोगों को धोखा दिया और सिखों की भावनाओं के साथ खेला। क्या यह सब आपके आशीर्वाद से किया गया था? क्या आप उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे या आप उसके साथ दोस्ताने में हैं ? हरसिमरत कौर बादल ने नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जाने पर भी सवाल उठाए।