DSGMC : गुरुद्वारा कमेटी में पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा 

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्यों ने आज इस्तीफा दे दिया। इसमें शिरोमणि अकाली दल से संबंधित 4 पदाधिकारी एवं 9 कार्यकारिणी सदस्येां ने इस्तीफा दिया है। इस मौके पर कमेटी के उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह एवं कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य तरविंदर सिंह मारवाह अनुपस्थित रहे। कहा, जा रहा है कि इन लोगों ने अपने इस्तीफे भेजवा दिए। दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट की धारा 17 (2) बी, के तहत इस बार इस्तीफा जनरल हाउस को दिया गया है। जानकारी के अनुसार हाथ खड़े करके इस्तीफे को मंजूरी दी गई है। इस्तीफे के बाद अब मौजूदा कमेटी के सभी पदाधिकारी अब पूर्व पदाधिकारी हो गए हैं। काम चलाऊ के तौर पर कमेटी का जरूरी कार्य देखने के लिए जनरल हाउस ने पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत कालका एवं पूर्व महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा को अधिकृत किया है। इनको केवल रोजमर्रा के कार्यों पर फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया है। इसलिए कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हंै।
–जनरल हाउस में सभी सदस्यों का इस्तीफा मंजूर
–एक्सक्यूटिव बॉडी के दो सदस्य मीटिंग से रहे नदारद 
–नीतिगत फैसलों पर लगी फिलहाल रोक, रोजमर्रा के काम होंगे 
–हरमीत कालका एवं मनजिंदर सिरसा कार्यवाहक बनाए गए  
इसके अलावा नियमानुसार कमेटी के दफ्तर का इस्तेमाल करना भी लाभ के पद के दायरे में आ सकता है। अब कमेटी के द्वारा सोमवार को तीस हजारी कोर्ट में पुर्नविचार याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। ताकि, समय पूर्व कार्यकारिण्ीा के चुनाव करवाने की मंजूरी अदालत से ली जा सके। बता दें कि शुक्रवार को अदालत ने कार्यकारिणी सदस्यों के इस्तीफा न देने को कारण मानते हुए नये कार्यकारिणी के समय पूर्व चुनाव पर रोक लगा दी थी। साथ ही अगली तारीख 21 फरवरी को तय की गई है।  सूत्रों के अनुसार हाउस की बैठक में पहले हाथ उठाकर इस्तीफा देने का ऐलान हुआ। मीटिंग खत्म होने के बाद में लिखित में इस्तीफे सभी सदस्यों से लिया गया है। जबकि, धारा 17 -2 बी के अनुसार इस्तीफा हाथ से हस्तलिखित जनरल हाउस को देना जरूरी था। 
 
 
इस्तीफा देते ही जीके ने दिखाए तेवर, कहा-हुई बड़ी साजिश : जीके 
 
कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के पीछे बड़ी साजिश होने का दावा किया है। साथ ही कहा कि वक्त आने पर साजिश का खुलासा किया जाएगा। पत्रकारों द्वारा बार-बार कुरेदने पर हालांकि जीके ज्यादा नहीं बोले, पर इतना जरूर माना कि समय आने पर वो सबकुछ सामने रख देंगे। एक तरफ जीके खुद मान रहे हैं कि वो जल्द ही इस मामले से निकल कर बाहर आएंगे, लेकिन दूसरी ओर अभीी भी वो अपने आप को अकाली दल का वफादार सिपाही बता रहे हैं। 
 
सभी तथ्यों के आधार पर हुआ अदालत का फैसला : शंटी 
 
दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार का खुलासा करने और चुनाव को अवैध करार दिलवाने वाले कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि अदालत ने जो आर्डर दिया था वह सभी तथ्यों के आधार पर दिया था। लिहाजा, अब दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अदालत में क्या जवाब फाइल करती है, उसे पढऩे के बाद ही अगला कदम उठाउँगा। 
 
अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा : बाठ 
 
शिरोमणि अकाली दल के नेता एवं कमेटी सदस्य कुलवंत सिंह बाठ ने कहा कि अदालत ने जो कल कहा था उसके अनुसार आज जनरल हाउस में सभी सदस्यों ने अपना इस्तीफा लिखित में दे दिया है। अब सोमवार को तीसहजारी कोर्ट में पुनर्वविचार याचिका डाला जाएगा। चूंकि, स्कूलों में नये एडमिशन होने हैं,  गुरूपूरब सहित कई महत्वपूर्ण मसलें हैं, जिसको लेकर चुनाव जल्द कराना जरूरी है। इसलिए अदालत से गुहार लगाएंगे कि वर्तमान हालात और समस्याओं को देखते हुए चुनाव एक सप्ताह के भीतर करवाया जाए। 

मंजीत सिंह जीके की बढ़ी मुश्किलें, होगी FIR

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में 82 हजार धार्मिक पुस्तकों के हुए घोटाले में कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू एवं निलंबित महाप्रबंधक हरजीत सिंह सुबेदार की मुश्किलें बढ़ गई है। तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में अदालत में डाली गई पुर्नविचार याचिका को आज पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया। लिहाजा, अब तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है, इसकी प्रबल आशंका बन गई है।

बता दें कि पिछले दिनों भ्रष्टाचार के एक मामले को लेकर सीएमएम विजेता सिंह ने हरजीत सिंह सुबेदार, दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद हरजीत सिंह सुबेदार ने अपने बचाव में पटियाला हाउस कोर्ट के सेशन जज सतीश कुमार अरोड़ा की अदालत में पुर्नविचार याचिका दाखिल की गई थी। इसमें सुबेदार की तरफ से दलील दी गई थी कि निचली अदालत ने उनका पक्ष सुने बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है।

–गुरुद्वारा कमेटी में भ्रष्टाचार के मामले में खारिज हुई याचिका
–कमेटी के पूर्व प्रबंधक एवं संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू भी शामिल
–दिल्ली की सिख सियासत को लग सकता है बड़ा झटका

इसपर अदालत ने अग्रिम स्थगन आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को निर्धारित की थी। 7 जनवरी को सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज सुनाए गए फैसले में अदालत ने हरजीत सिंह सुबेदार की याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही अपना विस्तृत आदेश संबंधित कोर्ट को भेजने की बात कही है। निचली अदालत ने इस मामले की सुनवाई वीरवार 10 जनवरी को करेगी। इसलिए यह आशंका जताई जा रही है कि दिल्ली पुलिस अब इस मामले में मंजीत सिंह जीके सहित तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके अदालत के सामने पेश कर सकती है। बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा 82 हजार धार्मिक पुस्तकों की खरीद में फर्जी बिलों के आधार पर दिखाने का आरोप है। इस मामले को दिल्ली कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने उजागर किया था। शंटी ने ही पुलिसिया कार्रवाई न होने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। शंटी की तरफ से अधिवक्ता राजिंदर छावड़ा ने घोटाले की सभी कडिय़ों को जोड़ते हुए अदालत के समक्ष तथ्य पेश किए थे।

भ्रष्ष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत : गुरमीत शंटी


दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य एवं पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि आज भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी बड़ी जीत हुई है। कमेटी के अध्यक्ष एवं उनके मातहतों ने धार्मिक स्थल पर गोलक की लूट की है। यही कारण है कि अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ के सख्त कार्रवाई करते हुए 19 पेज का विस्तृत आर्डर लिखा है। इसमें सभी कारणों को बताया गया है कि एफआईआर करना क्यों जरूरी है, जिसमें प्रथम दृष्टया पाया गया है कि इस मामले में बड़े मामले में बड़ा करप्शन एवं फ्राड हुआ है। शंटी ने कहा कि अब किसी भी सूरत में दिल्ली कमेटी के भ्रष्टाचारी बच नहीं सकते हैं। इसके लिए वह हर लड़ाई लडऩे को तैयार हैं।

 

सरना ने सुखबीर बादल से मांगा इस्तीफा

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि पटियाला हाउस कोर्ट के सत्र न्यायाधीश द्वारा मंजीत सिंह जी.के. के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश बरकरार रखने के बाद अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल को तुरंत पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। सरना ने कहा कि गुरु की गोलक की लूट करने वालों को कमेटी में नियुक्ति करने का असल व्यक्ति वही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली कमेटी के जनरल हाउस को भंग करके कमेटी के आम चुनाव होने चाहिए।

400 बेड, 40 साल और अब सिख संगतों से धोखा 

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन शुरू होने वाले 400 बेड के बाला साहिब अस्पताल को लेकर हो रही सियासत में आज सरना बंधु भी कूद गए। साथ ही बाला साहिब अस्पताल की कारसेवा व प्रबंधन बाबा बचन सिंह को देने पर सवाल खड़े कर दिए है। शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना एवं महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने कहा कि 2013 और 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने बाला साहिब अस्पताल खुद चलाने का दिल्ली की संगत से वायदा किया था। लेकिन, 6 साल के बाद खुद चलाने की बात से पीछे हट गए। कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी को बाबा बचन सिंह के गले डालकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश की है। बिना किसी योजनाबंदी के अस्पताल को सोंैपने की कारसेवा बाबा बचन सिंह को देना दिल्ली की संगत के साथ बड़ा मजाक है। बाबा हरबंश सिंह ने कड़ी मेहनत करके संगतों के सहयोग से अस्पताल की ईमारत खड़ी की थी, जो की अब जर्जर हालात में है। संगत को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि अस्पताल कितने बेड का होगा, और इसको आर्थिक रूप से बाबा बचन सिंह कैसे चलाएंगे। 
 
–बाला साहिब अस्पताल चलाने में फेल हुई गुरुद्वारा कमेटी 
–6 सालों तक दिल्ली की संगत को धोखा देते रहे अकाली : सरना 
–2013 और 2017 में बनाया था चुनावी घोषणा पत्र में मुख्य मुद्दा 
–अस्पताल चलाने से पीछे हटे, छुड़ाया पीछा, पहुंचे बाबा की शरण में 
  पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरना बंधू ने दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान प्रबधकों से पूछा कि यही काम तो वह भी 2012-13 में बाला साहिब अस्पताल चलाने को लेकर कर रहे थे। तब बादल दल ने विरोध क्यों किया? उन्होंने कहा की बादल दल जब 6 साल तक अस्पताल नहीं चला पाया तो अब बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में जाकर अस्पताल चलवाने की गुहार लगा रहे हैं। 
अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा
     सरना ने कहा कि बादल दल ने इसी बाला साहिब अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा और संगत को झूठा भरोसा देकर गुरु की गोलक और कमेटी के संसाधनों पर कब्ज़ा कर लिया। अब 6 साल गुरु की गोलक लूटने और संसाधनों का घोर दुरपयोग करने के बाद जब बाला साहिब अस्तपाल नहीं चला सके और संगतों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई तो बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में अपने पापों पर पर्दा डालने पहुंच गए।    उन्होंने कहा की दिल्ली की सिक्ख संगत जानना चाहती हैं कि बादल दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा, कुलदीप सिंह भोगल, हरमीत सिंह कालका सहित कमेटी के वरिष्ठ नेता किस गलती की माफ़ी के लिए बाबा बचन सिंह  (कार सेवा वाले) की चौखट पर पहुंचे हैं। 
बादल दल पर हमला बोलते हुए सरना ने कहा कि दिल्ली कमेटी ने उनपर आरोप लगाया था कि बाला साहिब अस्पताल को मनीपाल/बी.एल. कपूर (अस्पताल) को बेच दिया गया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही साबित हुई? 
  
 
1978 में 400 बेड का अस्पताल बनना हुआ था शुरू  
दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के रिकार्डों के मुताबिक 1978 से लगभग साढ़े 12 एकड़ जमीन पर अस्पताल बनाने का सफर शुरू हुआ था। शुरुआत में यह अस्पताल 400 बेड के साथ मेडिकल कालेज के तौर पर प्रस्तावित था। लेकिन 40 साल के बाद भी अस्पताल चलाने को लेकर दिल्ली कमेटी के पास कोई योजना और सरकारी मंजूरी अभी तक नहीं है। सूत्रों की माने तो जर्जर हो चुकी ईमारत को बनाने से पहले कारसेवा वालों ने इसका नक्शा भी पास नहीं कराया था। जिसकी वजह से नगर निगम व मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया से अस्पताल को चलाने की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ दमकल विभाग व अन्य विभागों की भी मंजूरी अधर में लटकी हुई है। सिखों के बीच बाला साहिब अस्पताल को राम मंदिर की तरह चुनावी मुद्दा माना जाता है। हर केाई अस्पताल बनाने को दावा वोट लेने के लिए करता है। लेकिन अस्पताल कब बनेगा उसकी तारीख कोई नहीं बताता है। 

विधानसभा में पगड़ी विवाद में घिरे अकाली विधायक

NEW DELHI. दिल्ली विधानसभा में हुए पगड़ी प्रकरण पर अकाली-भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा अब घिर गए हैं। सिरसा के विरोधी एवं शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने सिरसा के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब पर पगड़ी की मर्यादा ना बचाने को लेकर शिकायत भेजने का ऐलान किया है। साथ ही पूरे घटनाक्रम को सिरसा की नौटंकी करार दिया है। सरना ने कहा कि सिरसा ने जानबूझ कर ओछी सियासत के लिए जमीन पर लेट कर पडग़ी का अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि सिरसा ने खुद लेटकर उस जमीन पर अपनी पगड़ी रखी, जहां से लोग जूतों के साथ गुजरते हैं, इसलिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को चाहिए की सिरसा को बिना देरी के श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करके सख्त कार्यवाही करें।

–विपक्षी दलों ने घेरा,श्री अकाल तख्त से की शिकायत
–विधानसभा में सिरसा ने जानबूझ कर पगड़ी का अपमान किया : सरना

 

सरना कहा कि उन्हें इस बात से कोई वास्ता नहीं की दिल्ली विधान सभा में क्या हुआ और क्या नहीं हुआ ? लेकिन जारी वीडियो में यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सिरसा पगड़ी के साथ उस रास्ते में लेटे हुए हैं, जहां से लोग जूतों के साथ गुजरते हंै। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो फ्रांस सहित दूसरे अन्य देशों में पगड़ी के मुद्दे पर उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (बादल) हल्ला मचाते हंै, जबकि दूसरी तरफ उनके विधायक सिरसा खुद जानबूझ कर पगड़ी का अपमान करते हैं। दिल्ली की सिक्ख संगतों को इस बात का सख्त नोटिस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को एक लिखित शिकायत भी भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सिरसा गुरू की गोलक को नुकसान पहुंचाने के दोषी हैं , वहीं दूसरी और सिक्ख पंथ की विलक्षण पहचान का प्रतीक पगड़ी का अपमान करने का भी आरोपी हैं। उन्होंने कहा कि विचार चर्चा और सही दलील से किसी भी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, न की पगड़ी का अपमान करके। सरना ने आरोप लगाया कि उलटे सीधे ड्रामें करके दिल्ली कमेटी के मुद्दों को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जिसे सिख संगत कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बादल दल अपनी राजनीति चमकाने के लिए निचले दजऱ्े की हरकतों पर उतर आया है।

सज्जन कुमार के इशारे पर बोल रहे हैं सरना : सिरसा

भाजपा-अकाली विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि हरविंदर सिंह सरना 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार के इशारे पर बयान दे रहे हैं। वह सदैव सिख दंगों के आरोपियों के पक्ष में बोलते रहे हैं, और आज भी पगड़ी मामले में उनका बयान उसी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में एक दिन पहले ही दिल्ली कमेटी के सदस्यों ने सिरसा का समर्थन किया था और दिल्ली सरकार की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की थी। सिरसा का आरोप है कि उन्हें सदन से बाहर निकाले जाने के दौरान जबरन उनकी पगड़ी को निकाला गया।

 

धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश : जरनैल सिंह

दिल्ली की सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी के तिलकनगर से विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं की आदत है कि वह हर मसले को धार्मिक रंग देना चाहते हैं। उन्होंने कोई काम तो किया नहीं है, बजाय इसके जो काम करना चाहता है उसके बीच में धार्मिक भावनाओं से खेलना शुरू कर दिया। जरनैल सिंह ने कहा कि अकाली-भाजपा विधायक मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा ने घटिया प्रचार के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की है, लिहाजा, वह खुद पगड़ी मामले के दोषी हैं। इसके लिए उन्हें सिख संगतों से माफी मांगना चाहिए।

DSGMC: सिरसा ने दिया इस्तीफा, मंजीत जीके अड़े 

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में भ्रष्टाचार को लेकर जंग छिड़ गई है। करप्शन पर घिरे कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने आज सीधे तौर पर इस्तीफा तो नहीं दिया है, लेकिन दो महीने पहले ही कार्यकारिणी चुनाव करवाने का ऐलान जरूर कर दिया है। लिहाजा, 28 एवं 29 मार्च 2019 को होने वाला चुनाव अब इसी महीने की 27 से 30 दिसम्बर के बीच होगा। इसके लिए कमेटी ने वीरवार को आनन फानन में एक्सक्यूटिव बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में कमेटी के कुछ सदस्यों ने मंजीत सिंह जीके पर दबाव बनाया कि वह पहले इस्तीफा दें, फिर चुनाव करवाएं। लेकिन, जीके अड़ गए और इस्तीफा नहीं दिए। सूत्रों के मुताबिक जीके ने सभी सदस्यों को कहा कि इस्तीफा देने की फिलहाल जरूरत नहीं है। हम चुनाव समय से पहले ही करवा रहे हैं।  लिहाजा, अपने पदों पर चुनाव तक बनें रहें। इसको लेकर मीटिंग में गरमागरमी भी हुई, और कार्यकारिणी सदस्य हरिंदर पाल सिंह ने तो मीटिंग का बाईकाट कर बाहर निकल आए। लेकिन, मामला इतना तूल पकड़ लिया कि मीटिंग खत्म होने के थोड़ी देर बाद कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भेज दिया।
 
–गुरुद्वारा कमेटी में छिड़ा सियासी महाभारत, बदले घटनाक्रम  
–सिरसा समर्थक 4 सदस्यों ने भी सुखबीर बादल को भेजा इस्तीफा 
—गुरुद्वारा कमेटी में नये चुनाव का ऐलान, मार्च की बजाय इसी महीने होगा  
सिरसा के इस्तीफा देने के सहित कमेटी की कार्यकारिणी सदस्य जसवीर सिंह जस्सी, मीटिंग का बाईकाट करने वाले कार्यकारिणी सदस्य हरिंदर पाल सिंह एवं यमुनापर के सदस्य कुलवंत सिंह बाठ ने भी तुरंत इस्तीफा दे दिया। सभी कार्यकारिणी मेंबरों ने अपने इस्तीफे पार्टी अध्यक्ष को दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सिरसा ने अपना इस्तीफा देकर कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर दबाव बना दिया है। इसको लेकर देर शाम सियासत और ज्यादा गरमा गई है। 
 
 
हाईकमान के आदेश पर दिया इस्तीफा : सिरसा 
 इस्तीफा देने के बाद मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पार्टी हाईकमान का आदेश दिया है कि दिल्ली कमेटी के पदाधिकारियों पर जो भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, वह ठीक नहीं है। लिहाजा, कमेटी एवं पार्टी की बदनामी न हो इसके लिए तत्काल नई कमेटी बननी चाहिए। जब तक नई कमेटी नहीं बनती है तब सारे आफिस बेयररर्स इस्तीफा देंगे। इसलिए, मैने तुरंत  इस्तीफा देना उचित समझा है। सिरसा ने कहा कि पार्टी हाईकमान का जो आदेश होगा,हम उसका पालन करेंगे। सिरसा ने कमेटी में ताकतों को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में साफ कहा कि हमारा आपसी कोई टकराव या खींचतान नहीं है। हमने पिछले 6 वर्ष के दौरान मिलजुल कर बड़ी सेवाऐं की हैं। हम धर्म की सेवा के लिए यहां आये हैं, ना कि अपने अहंकार को प्रदर्शित करने। हम सेवा के लिए आज भी एकजुट हैं, इसलिए टकराव शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।
 
 
 
कार्यकारणी बोर्ड ने दी चुनाव करवाने को स्वीकृति
 
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारणी बोर्ड की आज हुई बैठक के दौरान कमेटी के नये पदाधिकारियों का चुनाव दिसम्बर 2018 के अंतिम सप्ताह में करवाने के लिए जनरल हाऊस बुलाने का फैसला लिया गया है। कमेटी दफ्तर में 5 पदाधिकारियों एवं 10 कार्यकारणी सदस्यों की हुई बैठक के दौरान गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर दिल्ली से ननकाणा साहिब तक नगर कीर्तन लेकर जाने को भी मन्जूरी दी गई। 
   कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने कमेटी के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के दोषों का हवाला देते हुए 29 मार्च 2019 को होने वाले जनरल हाऊस को पहले बुलाने का प्रस्ताव पेश किया। ताकि नये पदाधिकारियों द्वारा नई जांच कमेटी बनाकर पुराने पदाधिकारियों पर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। जिसको कार्यकारणी ने मन्जूरी देते हुए 21 दिनों के नोटिस पीरियड के आधार पर 27 से 29 दिसम्बर के बीच जनरल हाऊस को बुलाने की मन्जूरी लेने के लिए गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय के पास पत्र भेजने की बात कही।
 
धार्मिक सियासत में कभी पदाधिकारियों ने पद नहीं छोड़े : जीके 
 
कार्यकारणी की बैठक के बाद मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि धार्मिक सियासत में एफ.आई.आर. दर्ज होने के बावजूद भी कभी पदाधिकारियों ने भी अपने पद नहीं छोड़े थे। पर हम संगत को जवाबदेह हैं, इसलिए लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए हमने नया जनरल हाऊस 3 महीने पहले बुलाने का फैसला लिया है। ताकि नई कमेटी मामले की निष्पक्ष जांच कर सके। जी.के. ने कार्यकारणी के सदस्यों द्वारा इस संबंधी लिये गये फैसले को बड़े दिल से लिया गया फैसला बताते हुए आज के फैसले के साथ धार्मिक सियासत में नया उदाहरण स्थापित होने का दावा किया। जी.के. ने कहा कि अफवाह तथा आरोप किसी भी धार्मिक संस्था पर लगने ठीक नहीं होते। इसलिए पार्टी हाईकमान को विश्वास में लेकर हमने यह फैसला लिया है। हम कुर्सी पर बैठकर विरोधियों के इस आरोप का सामना नहीं करना चाहते कि हम सच सामने आने में रूकावट पैदा कर रहे हैं।
 
 
गुरुद्वारा चुनाव आयोग को पत्र भेजेंगे 
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नये जनरल हाऊस को 3 महीने पहले बुलाने के सुझाव पर कार्यकारणी ने जो मोहर लगाई है उसको अगली मंजूरी के लिए हम गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को भेज रहे हैं। निदेशक की सुविधा तथा एक्ट के हिसाब से अगला जनरल हाऊस होगा। पत्रकारों द्वारा मौजूदा कमेटी के अब कार्यकारी होने के बारे पूछे गये सवाल के जवाब में सिरसा ने कहा कि मौजूदा कमेटी किसी भी हालात में कार्यकारी नहीं है। 

दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में हुआ अब टैंट घोटाला  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में आज एक नया घोटाला उजागर हुआ है। पहले 82 हजार पुस्तक का घोटाला फिर वर्दी घोटाला, और अब नये तरह का टेंट घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। लाखों रुपये के इस नये घोटाले का खुलासा दिल्ली कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने शुक्रवार को किया।
शंटी ने मीडिया के समक्ष एक आडियो टेप भी जारी किया, जिसमें कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, कमेटी के निलंबित चल रहे जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार एवं धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन परमजीत सिंह राणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शंटी ने ही कमेटी में अब तक के सभी घोटालों, एवं भ्रष्ष्टाचार का खुलासा किया है।   
–कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी  ने किया खुलाया, आडियो टेप जारी 
–कमेटी अध्यक्ष पर आरोप, निगरानी में हुआ 1.5 करोड़ का टैंट घोटाला : शंटी 
–घोटाले में अध्यक्ष, धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन और जनरल मैनेजर शामिल 
    कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने सबूत के तौर पर एक ऑडियो क्लिप जारी करते हुए रमन टैंट हाउस के मालिक तलवार सिंह की बातचीत का खुलासा किया है। इसमें यह कबूल किया कि उसने 1.5  करोड़ रुपए के नकली टैंट के बिल कमेटी के तत्कालीन जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार तथा कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. के कहने पर बनाये। उस ऑडियो में तलवार ने ये भी कबूल किया कि गुरद्वारा कमेटी के टैंट  का काम लेने के लिए 10 लाख रुपए की  रिश्वत मंजीत सिंह जी.के. को देने के लिए धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन परमजीत सिंह राणा ने कहा था। शंटी ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर मेरे आरोप झूठे हैं तो जी.के. मेरे साथ टी.वी.  पर लाइव बहस कर सकते हैं। शंटी ने कहा की घोटालों की  लिस्ट अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंजीत सिंह जी.के. पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त हंै। लिहाजा, उन्हें कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है। 
 
कर्मचारियों ने माना, दबाव डालकर बनवाए नकली बिल 
    गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि कमेटी अध्यक्ष ने गुरुघर में चोरी की है, लिहाजा, अब वह बच नहीं सकते। उनके खिलाफ भ्रष्ष्टाचार एवं घोटालों को अदालत ने भी बड़ी गंभीरता से लिया है। इसपर सुनवाई के लिए अगली तारीख 7 दिसंबर मुकरर्र की है। शंटी ने यह भी बताया कि पुलिस बावा प्रिंटर और जोगिन्दर सिंह प्रिंटर के बयान ले चुकी है, जिसमें नकली बिल सूबेदार हरजीत सिंह के कहने पर बनाने की बात कबूल की है । प्रिटिंग प्रेस प्रकाशकों के अलावा दिल्ली पुलिस ने दिल्ली कमेटी के कर्मचारी, जनरल मैनेजर धरमिंदर सिंह, परमिंदर सिंह प्रिंटिंग इंचार्ज, प्रभजीत सिंह केशियर के भी बयान दर्ज कर लिए हैं। कर्मचारियों ने यह कहा है कि हमारे ऊपर दबाव डाल कर नकली बिल बनवाये गए हैं।
 
स्कूलों में 3 महीने से वेतन नहीं, पाकिस्तान में बनाएंगे सराय  
 
 कमेटी के पूर्व महासचिव शंटी  ने कहा कि मंजीत सिंह जी.के. संगत को गुमराह कर रहे हैं। 3 महीनों से कमेटी से जुड़े गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के स्टाफ को तनख्वाह नहीं मिली और जी.के. पाकिस्तान के प्रधान मंत्री को चिटठी लिखकर करोड़ों रुपयों की सराय बनाने की बात कर रहे हैं। शंटी ने पूछा कि पाकिस्तान में सराय बनाने के लिए आपके पास करोड़ों रुपए हैं, लेकिन दिल्ली की गरीब संगत के लिए बाला साहिब हॉस्पिटल शुरू करवाने के लिए पैसे नहीं है। यह सरासर सिखों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। 
 
कमेटी ने सभी आरोपों को किया खारिज 
उधर, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरमीत  शंटी के आरोपों को खारिज किया है। साथ ही कहा कि सभी आरोप झूठे व काल्पनिक हैं। कमेटी के प्रवक्ता परमिंदर पाल ङ्क्षसह ने कहा कि फोन वार्ता कर रहें दोनों लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। जानबूझकर कमेटी की प्रतिष्ठा को खराब करने की साजिश रची गई हैं।

स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो शेरे पंजाब का इतिहास

NEW DELHI. शेरे पंजाब महाराज रणजीत सिंह का राज सर्वउत्थान, धर्मनिरपेक्ष एवं वीरता भरा राज था। महाराजा के दरबार में सभी धर्मो के विद्धान दरबारी थे। इसलिए महाराजा का इतिहास स्कूली पाठ्यक्रम पुस्तकों में शामिल करना हर पंजाबी के लिए गर्व की बात होगी। इन विचारों को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. एवं महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने आज शेरे पंजाब के जन्म दिवस के अवसर पर रणजीत फ्लाईओवर के समीप महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान प्रकट कियज्ञं
जी.के ने इतिहासकारों की ओछी सोच की निंदा करते हुए कहा कि महाराजा का राज, धर्मनिरपेक्ष होने के साथ ही सियासी एवं कूटनीतिक तौर पर खुशहाल राज था। महाराजा ने राज करेगा खालसा के सिद्धांत को अपनाते हुए पंजाब, कश्मीर, कांगड़ा, लद्दाख, काबुल एवं चीन के काफी बड़े हिस्से में दिलेरी के फलस्वरूप राज किया था। महाराजा ने जहां दरबार साहिब में सोना चढ़ाया वहीं शिव मंदिर बनारस एवं सुनहरी मस्जिद लाहौर में बराबर सोना लगवाया। यही कारण था कि अंग्र्रेज पूरे देश को गुलाम बनाने के बावजूद 40 वर्ष तक सतलुज नदी लांघने की हिम्मत नहीं कर सके। जी.के. ने कहा कि विश्वयुद्ध प्रथम एवं द्वितीय में सिख सेनाओं के हिस्सा लेने के पीछे भी महाराजा द्वारा सिख नौजवानों को युद्ध कौशल सिखलाना मुख्य कारण था। इसलिए ही अंग्रेजों ने बड़ी संख्या में सिख सेनाओं को विश्वयुद्ध में उतारा था। उक्त युद्धों के बाद अलग-अलग देशों में बस गये सिख, संसार भर में अपनी काबलीयत और मेहनत के चलते कामयाबी प्राप्त करने में कामयाब रहे।
महाराजा रणजीत सिंह की कूटनीतिक कौशल की चर्चा करते हुए जी.के. ने कहा कि चीन आज 1962 की जंग का हवाला देकर बार-बार धमकाता है। पर इसी चीन को महाराजा रणजीत सिंह ने कारगिल, गिलगिट एंव सिलीकेन वैली जीत कर हिन्दुस्तान का हिस्सा बनाया था। अमरीका जैसा ताकतवर देश भी महाराजा की रियासत का हिस्सा रहे काबुल-कंधार पर कब्जा करने में कामयाब नहीं हुआ। एक ओर महाराजा अंग्रेजां से सतलुज नदी ना पार करने का समझौता करता है और दूसरी ओर नैपोलियन के साथ दोस्ती करके अंग्रेजों को अपनी ताकत का अहसास करवाता है।
महाराजा रणजीत सिंह ने कोई भेदभाव नहीं किया
महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने सभी धर्मो के धार्मिक स्थानों को खजाने से धन बांटते समय कोई भेदभाव नहीं किया था। बाबा बंदा सिंह बहादर के खालसा राज के बाद महाराजा रणजीत सिंह के राज के दौरान धार्मिक तौर पर भेदभाव की कोई मिसाल नहीं मिलती। अंग्रेज जहां पूरे हिन्दुस्तान पर 200 वर्ष तक हकुमत करने में कामयाब रहे पर वहीं पंजाब अपने बहादुर वीरों के चलते सिर्फ 90 वर्ष ही गुलाम रहा। इसलिए धर्मनिरपेक्ष, बहादुर एवं दूरदर्शी भरपूर सोच के मालिक बादशाह के इतिहास को स्कूली किताबों का हिस्सा बनाना अति जरूरी है। इस अवसर पर पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह, कमेटी सदस्य अमरजीत सिंह पिंकी, कुलवंत सिंह बाठ, निशान सिंह मान, हरजीत सिंह पप्पा, आत्मा सिंह लुबाणा, सर्वजीत सिंह विर्क एवं गुरमीत सिंह भाटिया मौजूद थे।

गुरुद्वारा बंगला साहिब का सूचना केन्द्र हुआ हाईटेक

NEW DELHI. गुरुद्वारा बंगला साहिब के नये बने सूचना केन्द्र का आज उद्घाटन किया गया। विदेशी पर्यटकों को सिख धर्म के बारे में आधुनिक तकनीक से जानकारी देने के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सूचना केन्द्र का नवीनीकरण किया गया है। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह द्वारा अरदास के बाद कारसेवा वाले बाबा बचन सिंह के प्रतिनिधी द्वारा सूचना केन्द्र की चाबीयाँ कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. को सौंपी।
इस सूचना केंद्र में विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केन्द्र में तमाम प्रबंध किये गये हैं। इसमें 10 गुरू साहिबानों के इतिहास के बारे में जानकारी करवाती दस्तावेजी फिल्म के साथ ही कम्पयूटर, वाई-फाई सेवा, आदि अतिआधुनिक सुविधायें विदेशी पर्यटकों को सूचना केन्द्र पर ही उपलब्ध करवायी गई है। साथ ही देश-विदेश से आने वाले गैरसिख राजनीतिक पर्यटकां के लिए एक अलग से ब्लॉक बनाया गया है। सूचना केन्द्र में मौजूद गाईड पर्यटकों के साथ हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी, फ्रैंच, जर्मनी एवं चीनी आदि भाषाओं में बात करने में समर्थ हैं।
इसके अलावा अंग्रेजी के सिख साहित्य की अलग खिड़की भी लगाई गई है। ताकि पर्यटक अपनी मनपसंद की किताब चुन कर साथ ले जा सके।

कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि दिल्ली में धार्मिक स्थानों पर जाने के अभिलाषी पर्यटकों की रेटिंग में कमेटी की बढिय़ा कारगुजारी के फलस्वरूप बंगला साहिब को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि गुरुद्वारा बंगला साहिब के बाद दिल्ली में दूसरे स्थान पर अक्षरधाम मंदिर एवं तीसरे नम्बर पर हुमांयू का मकबरा बाहर से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद है। इसलिए सूचना केन्द्र को प्रभावशाली एवं समय का साथी बनाने के लिए नवीनीकरण करना पड़ा है। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे।

सिख कैदियों की रिहाई के लिए तिहाड़ के बाहर अरदास

NEW DELHI. पंजाब के काले दौर के दौरान जूझने वाले सिख योद्धो की जेलों से रिहाई करवाने के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल के बाहर दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा ‘बंदी छोड़ दाता’ गुरु हरगोबिंद साहिब के चरणों में अरदास की गई। “ बन्दी छोड़ दिवस “ के मौके पर दिल्ली कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. के नेतृत्व में हुई अरदास के बाद तिहाड़ जेल के गेट न. 3 के बाहर मीडिया से बात करते हुए जी.के. ने सिख कैदियों के लिए कमेटी द्वारा लड़ी जा रहीं कानूनी लड़ाई की भी जानकारी दी।शिरोमणी अकाली दल दिल्ली स्टेट के अध्यक्ष जी.के. द्वारा जेल में बंद उन सिख कैदियों की रिहाई के लिए अरदास आयोजित की गई थी जो कि अपनी सजाएं खत्म होने के बाद भी जेलों में बंद हैं।

जी.के. ने कहा वैसे तो अकाली दल लम्बे समय से जेलों में बंद उन कैदी सिखों की कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, जो कि सजा समाप्त होने पर भी रिहा नहीं हुए है। पर आज गुरु हरगोबिन्द साहिब के चरणों में अरदास की गई है कि जिस तरह गुरु साहिब आपने ग्वालियर की जेल में बंद 52 पहाड़ी हिन्दू राजाओं को मुक्त करवाया था। उसी तरह अब इन कैदियों की जल्द रिहाई के लिए गुरु साहिब अपनी कृपा से कोई ऐसा रास्ता निकाले, जिसके बाद रिहाई संभव हो सके। हम गुरु महाराज के चरणों में इसलिए अरदास कर रहे हैं क्योंकि हमारा मानना है की गुरु महाराज की कोर्ट सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर है।

एक निर्णय की वजह से बाहर नहीं आ पा रहे हैं सिख

जी.के. ने बताया की काले दौर के दौरान हथियार उठाने वाले या ना उठाने वाले सभी सिख आज दो दशक जेल में बंद रहने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय की वजह से जेल से बाहर नहीं आ पा रहे है। यह देश की कार्यपालिका और न्यायपालिका के लिए चिंतन और मंथन का विषय है, की आखिर अपनी सजा पूरी करने के बावजूद इन सिख कैदियों के मानवधिकारों की बात किसे कब और कैसे याद आएगी ? जी.के. ने बताया की दिल्ली कमेटी जहां इन कैदियों की लड़ाई विभिन्न अदालतों और राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग में लड़ रही है वही अकाली दल सरकार के साथ बातचीत के जरिये सियासी लड़ाई भी लड़ रहा है। भाई जगतार सिंह हवारा से लेकर भाई सतनाम सिंह पाऊंटा साहिब तक की पैरवी दिल्ली कमेटी ने अदालतों में की है। सिर्फ मानवाधिकारों की लड़ाई ही नहीं लड़ी बल्कि मामले को अंजाम तक पहुंचाते हुए तिहाड़ जेल में 5600 सीसीटीवी कैमरे लगवाने का आदेश भी दिल्ली हाईकोर्ट से पारित करवाया है ताकि जेल के अंदर कैदियों का शरीरिक उत्पीड़न ना हो।

 

सिख कैदियों की रिहाई में रोड़ा–परमिन्दर

 

कमेटी के प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि सिख कैदियों की रिहाई में केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की सीधी भूमिका नहीं है। क्योंकि राजीव गांधी की हत्या में लिप्त कैदियों को तमिलनाडु सरकार द्वारा रिहा करने का फैसला लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिन कैदियों पर सीबीआई जांच चल रही है यां फिर टाडा लगा हुआ है उनकी सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई नहीं करने का आदेश दे दिया था। जो की सिख कैदियों की रिहाई में रोड़ा बना हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट ही इनकी रिहाई के आदेश दे सकती है। इस अवसर पर अरदास कमेटी सदस्य चमनं सिंह द्वारा की गई। अरदास में कमेटी सदस्य परमजीत सिंह चंडोक, आत्मा सिंह लुबाना, रमिंदर सिंह स्वीटा और रणजीत कौर आदि शामिल हुए।