कोर्ट ने 29 हफ्ते की गर्भवती महिला को दी गर्भपात की इजाजत

NEW DELHI: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 42 वर्षीय एक महिला को 29 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की सोमवार को इजाजत दे दी। भ्रूण के डाउन सिंड्रोम से ग्रसित होने का पता चलने के बाद महिला के मानसिक, शारीरिक और वित्तीय तनाव बढ़ जाने के दावे पर विचार करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। बता दें कि 20 हफ्ते के बाद का गर्भ गिराना कानूनी रूप से गलत है। हालांकि, विशेष मामलों में कोर्ट इसकी छूट दे सकता है।

 

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी एस सोमाद्दर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि राज्य आर्थिक और चिकित्सीय मदद की पेशकश कर उसकी समस्याओं को दूर करने के लिए आगे नहीं आया। इसने कहा कि अजन्मे बच्चे के साथ ही मां को भी गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि भ्रूण डाउन सिंड्रोम से ग्रसित है और उसके दिल, पेट एवं भोजन नली की विकृति से प्रभावित होने की आशंका है।

 

महिला के वकीलों ने अदालत को बताया कि सरकार गठित पैनल की रिपोर्ट में बताया गया कि अगर बच्चा जन्म लेता है तो उसे विशेष देखभाल एवं दीर्घकालिक इलाज की जरूरत होगी और फिर भी वह ठीक हो जाएगा, यह पूरी तरह नहीं कहा जा सकता। पीठ ने महसूस किया कि ऐसी स्थिति में बच्चे के जन्म से मां को अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा से गुजरना होगा।

 

अदालत ने महिला को पंजीकृत निजी अस्पताल में गर्भपात कराने की इजाजत दे दी। वह फिलहाल 29 हफ्ते की गर्भवती है। एकल पीठ द्वारा गर्भपात की इजाजत नहीं दिए जाने के बाद महिला के वकीलों कलोल बसु और अपलक बसु ने खंडपीठ का रुख किया था।

गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत, नौकरी में चयन होते ही होगी नियुक्ति

NEW DELHI: हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने आज यानी गुरुवार को ये एलान किया कि सरकारी नौकरी में चयन के बाद गर्भवती महिलाओं की तुरंत नियुक्ति भी की जायेगी। हालांकि नियुक्ती के बाद महिलाओं को डिरिवरी के कुछ महीने पहले और बाद में छुट्टी दे दी जाएगी।

 

गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली इस छूट में पुलिस विभाग को छोड़कर बाकि सभी सरकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। सरकार ने यह फैसला इस बात को ध्यान में रखते हुए लिया है कि महिलाएं देर से नियुक्ति पाने की वजह से वरिष्ठता में अपने साथ के लोगों से पिछड़ जाती थीं। बता दें कि अब तक ऐसी महिलाओं को डिलिवरी के एक साल बाद नियुक्ति दी जाती थी जिस वजह से वह अपने साथी कर्मचारियों से पीछे रह जाती थीं।

 

मुख्य सचिव बीके अग्रवाल के मुताबिक यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल में पारित कर दिया गया है, जल्द ही स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी महकमों को यह आदेश जारी कर दिया जाएगा। मालूम हो कि सरकारी नौकरी के लिए परिक्षा उत्तीर्ण करने के 10 से 15 दिन के भीतर ही सभी व्यक्तियों को ड्यूटी ज्वाइन करने का समय दिया जाता है। वहीं गर्भवती महिलाओं को परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी मेडिकल बोर्ड में नौकरी के लिए अनफिट बताया जाता था।

 

मेडिकल बोर्ड द्वारा अनफिट बताए जाने के बाद गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति नहीं दी जाती थी जिससे उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती थी। यही नहीं, डिलिवरी के 6 महीने बाद इन महिलाओं को मेडिकल बोर्ड से फिटनेस का प्रमाण दिया जाता था जिस वजह से वह वरिष्ठता में पिछड़ जाती थीं। अब सरकार ने ऐसी महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए इस नियम को खत्म कर दिया है। अब गर्भवती महिलाएं भी परिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी ज्वाइन कर सकती हैं।

गटशि फाउंडेशन ने थामा जरूरतमंत महिलाओं का हाथ

NEW DELHI. जरूरतमंद महिलाओं एवं समाज के पिछडे वर्ग से जुडी महिलाओं के कल्याण के लिए काम कर रही स्वयं सेवी संस्था “गटशि फाउंडेशन” ने एक नई पहल शुरू की है।
गटशि फाउंडेशन एक सेल्ह-हेल्प ग्रुप की तरह फेसबुक पेज शुरू किया था, जिसमें पूरे देश से ३५००० महिलाये जुड चुकी हैं, और अपना योगदान करती हैं। मई २०१६ मे ०२ लोगों से शुरू हुआ ये ग्रुप अब ३५००० महिलाओ का ग्रुप बन गया है।

विभिन्न तरह के शहरों और पेशेवर पृष्ठभूमि से मजूद होने की वजह से ये महिलायें ग्रुप में सभी तरह के विचार-विमर्श करने में सक्षम है । मार्च २०१७ मे “गटशि फाउंडेशन” को एक पैन इंडिया एनजीओ के रूप मे पंजीकृत किया गया।

 

प्राइम मिशन के अलावा, “गटशि फाउंडेशन” सक्रिय रूप से समाज के कमजोर वर्ग को उनकी विभिन्न योजनाओ के माध्यम से नियमित रूप से खाद्य एवं कपड़ा वितरण जैसी सेवाएं प्रदान कर रही है। गटशि फाउंडेशन” ने हाल ही में जरूरतमंद लोगों के लिए कपडा वितरण अभियान चलाया, जिसमें ग्रुप सदस्यों की मदद से उन्होंने पुरे दिल्ली-एनसीआर से कपडे इक्कठे किये और इन कपड़ो को गरीब, कुष्ट रोगियों, स्लम मे रहने वाले परिवारों मे वितरित किया।

फाउंडेशन की संस्थापक निशा पांडे की माने तो उनका उद्देश्य एक ऐसा महिलाओ का समूह बनाना है जहां महिलायें एक दूसरे के अच्छे भविष्य की कामना करती है और एक दूसरे के सहयोग के लिए हमेशा उपलब्ध रहती है। निशा पांडे की टीम में युवा और प्रतिबद्ध महिलाओं के अलावा पारुल उप्पल, देवा जे आहूजा, चंद्रिमा सोम, देबलीना सेन, मोनिका और कई अन्य टीम मेंबर्स शामिल है।