भाजपा का राष्ट्रीय महाकुंभ आज से, अमित शाह करेंगे अधिवेशन का शुभारंभ

NEW DELHI : भारतीय जनता पार्टी मिशन-2019 के लिए दिल्ली में कल से राष्ट्रीय परिषद शुरू कर रही है। दो दिवसीय इस बैठक का शुभारंभ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह करेंगे, जबकि आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका समापन करेंगे। लोकसभा चुनाव से पहले हो रही इस बैठक में भाजपा देशभर के सभी चुने हुए पार्टी के नुमाइंदों, पंचायत से लेकर संसद तक को आमंत्रित किया है।

 

यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 12000 लोगों की समुलियत होगी। बैठक में क्या-क्या होगा, इसको लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वीरवार की देर शाम राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक अधिवेशन में तीन प्रस्ताव लाने पर विचार हो रहा है, लेकिन अंतिम फैसला पदाधिकारियों की बैठक में होगा। इनमें से राजनीतिक प्रस्ताव गृहमंत्री राजनाथ सिंह रख सकते हैं। इसके अलावा आर्थिक प्रस्ताव होगा और अगर तीसरा प्रस्ताव आता है तो वह इंटरनरल सिक्युरिटी पर हो सकता है।

 

सूत्रों के मुताबिक अधिवेशन के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठक में सरकार के पांच साल के कामकाज का हिसाब-किताब पेश करेंगे। इसके जरिए वे अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी प्रचार कर सकते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह एक तरह का कार्यकर्ताओं का महासंगम होगा और इसका मकसद यही है कि जब कार्यकर्ता चुनाव के लिए मैदान में जाएं तो उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि वे किन मुद्दों पर जनता से बातचीत करें और किन वायदों और मुद्दों पर वोट मांगें। इसके अलावा प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ते और महिला रिजर्वेशन बिल जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर भी दांव खेल सकते हैं।

 

हालांकि ये दोनों ही मुद्दे महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनके जरिए प्रधानमंत्री इसे एक बड़े वादे के रूप में पेश कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अधिवेशन में भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर ही रहने वाला है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि इस अधिवेशन से इस तरह का संकेत जाए कि न सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल उंचा हो बल्कि लोगों में भी उत्साह का संचार हो। अधिवेशन में हिस्सा लेने आ रहे पंचायत जिला अध्यक्ष सहित जमीनी कार्यकर्ताओं में भी यह उत्सुकता रहेगी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किस तरह के लाइन ऑफ एक्शन का ऐलान करते हैं।

 

बता दें कि यह बैठक समान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी मिलने के बीच हो रही है। इसने हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी को मिली हार के बाद भगवा पार्टी के मनोबल को बढ़ाया है। यह पहला मौका है जब भाजपा अपनी राष्ट्रीय परिषद की बैठक को विस्तृत स्वरूप देने जा रही है। इसमें हर लोकसभा क्षेत्र के लगभग दस प्रमुख नेता हिस्सा लेंगे। बैठक में सभी सांसदों, विधायकों, परिषद के सदस्यों, जिला अध्यक्षों व महामंत्रियों के साथ हर क्षेत्र के विस्तारकों को भी बुलाया गया है ।

एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोड सह रेल बोगीबील पुल तैयार, PM मोदी 25 को करेंगे शुभांरभ

NEW DELHI: एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोड सह रेल बोगीबील पुल उत्तरी असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर बन कर तैयार हो गया है। अब चीन से मिलने वाली चुनौतियों का मुकाबला भारत मजबूती से कर सकेगा। नवनिर्मित ब्रिज से असम से अरुणाचल पहुंचने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसके लिए सेना और स्थानीय लोगों को तेजपुर होकर जाने की जरूरत नहीं होगी।

 

ब्रह्मपुत्र नदी पर एक छोर से दूसरे छोर तक ब्रिज से पहुंचने में केवल पांच मिनट का समय लगेगा। लेकिन इससे पांच सौ किलोमीटर दूरी तय करने की जरूरत नहीं होगी। इतना नहीं, सेना और स्थानीय लोगों को नदी पार करने के लिए फेरी (नौका) का सहारा नहीं लेगा होगा। इस ऐतिहासिक ब्रिज को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को लोकार्पण करेंगे। यह पुल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को समर्पित होगा।

 

प्रधानमंत्री मंगलवार को ही इस  तीन लेन की सड़क और दो रेलवे ट्रैक वाले पुल के साथ ही तिनसुकिया-नाहरलगुन (15907-15908 ) इंटरसिटी ट्रेन का भी उद्घाटन करेंगे । ये 14 कोच की ट्रेन करीब  साढ़े पांच घन्टे लेगी। इससे असम के धेमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा। ब्रह्मपुत्र के उत्तर के जिलों के लोगों को डिब्रूगढ़ में शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा के साथ हवाई अड्डे से आने जाने की सुविधा हो जाएगी। इसके साथ ही उत्तरी असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड  के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

 

 

मुख्य अभियन्ता मोहिंदर सिंह ने बताया कि डिब्रूगढ़ शहर से 17 किलोमीटर दूरी पर बने बोगिबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपये है। इस पुल का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है। इसके बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी और उत्तरी किनारों पर मौजूद रेलवे लाइने आपस में जुड़ जाएंगी। पुल के साथ ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद धमालगांव और तंगनी रेलवे स्टेशन भी तैयार हो चुके हैं।

तिनसुकिया के मंडल वाणिज्य प्रबंधक शुभम कुमार के अनुसार इस पुल के बनने से दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल से दूरी साढ़े तीन घंटे कम हो जाएगी। अब ट्रेन डिब्रूगढ़ से धेमाजी, लखीमपुर, हरमती रंगिया होते हुए नाहरलगुन (अरुणाचल) पहुँचाएगी। इस मार्ग पर ज्यादा ट्रेने चल पाएंगी। अभी दिल्ली से नाहरलगुन एक साप्ताहिक ट्रैन चलती है।

 

ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी भाग से  ईटानगर के लिए सड़क की दूरी 150 किमी घटेगी। इस पुल के साथ कई संपर्क सड़कों तथा लिंक लाइनों का निर्माण भी किया गया है। शुभम कुमार के  अनुसार इस लाइन के खुलने से माल ढुलाई पर भी खासा असर पड़ेगा। इस समय तिनसुकिया मंडल की माल ढुलाई से आमदनी करीब ढाई करोड़ रुपए प्रतिदिन की है और बोगीबील पुल खुलने के बाद यह और बढ़ेगी।

 

इस पुल की परियोजना को 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने मंजूरी दी थी लेकिन इसका निर्माण अप्रैल 2002 में शुरू हो पाया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री बाजपेयी ने इसका शिलान्यास किया था। पिछले 21 वर्षों में इस पुल के निर्माण को पूरा करने के लिये कई बार समय-सीमा बदली गई। अपर्याप्त फंड, तकनीकी अड़चनों के कारण कार्य पूरा नहीं हो सका। कई बार विफल होने के बाद आखिरकार इस साल 1 दिसंबर को पहली मालगाड़ी के इस पुल से गुजरने के साथ इसका निर्माण कार्य पूर्ण घोषित हुआ।

 

देश का पहला पूर्णतः वेल्डेड पुल 
इस पुल के निर्माण में कई नई तकनीक और उपस्करों का इस्तेमाल किया गया है। पुल के निर्माण में 80 हजार टन स्टील प्लेट्स का इस्तेमाल हुआ। देश का पहला पूर्णतः वेल्डेड पुल जिसमें यूरोपियन मानकों का पालन हुआ है। हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कॉपोरेशन ने मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग, ड्राई पेनिट्रेशन टेस्टिंग तथा अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग जैसी आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल किया है। बीम बनाने के लिए इटली से विशेष मशीन मंगाई गई। बीम को पिलर पर चढ़ाने के लिए 1000 टन के हाइड्रॉलिक और स्ट्रैंड जैक का इस्तेमाल किया गया। इंजीनियरों के अनुसार पुल की आयु 120 साल होने की आशा है।

 

सेना और स्थानीय लोगों की मुश्किलें समाप्त होगी
सेना और स्थानीय लोगों की मुश्किलें समाप्त हो जाएंगी और उनका आवागम आसान हो जाएगा। अभी लोगों को असम से अरुणाचल जाने के लिए तेजपुर रोड से जाना पड़ता है। इसमें बहुत समय लगता था। बोगीबील ब्रिज से यह 500 किलोमीटर की दूरी कम होगी। स्वीडन और डेनमार्क के बीच बने होरिशवा ब्रिज टनल की तर्ज पर बोगीबील ब्रिज को बनाया गया है।

 

सबसे जरूरी यह है कि चीन से मिलने वाली चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए सामरिक दृष्टि से सेना के लिए यह ब्रिज बहुत सहायक होगा। इस रेलमार्ग से रंगिया होते हुए दिल्ली जाने के लिए नया रूट बन जाएगा। यहां से दिल्ली जाने के लिए गुवाहाटी जाने की जरूरत नहीं होगी। 155 किलोमीटर की दूरी कम होगी और रेलयात्रियों को तीन घंटे समय की बचत होगी। सबसे अहम है कि स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम होगी और रोजागर के नये अवसर मिलेंगे।

 

दिल्ली  की कम होगी दूरी, बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी 
तिनसुकिया के मंडल वाणिज्य प्रबंधक शुभम कुमार के अनुसार इस पुल के बनने से दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल से दूरी 3 घंटे कम हो जाएगी। अब ट्रैन डिब्रूगढ़ से गुवाहाटी होते हुए नाहरलगुन (अरुणाचल) पहुँचाएगी। ज्यादा ट्रेने चल पाएंगी। अभी दिल्ली से नाहरलगुन वीकली ट्रैन चलती है। 25 को प्रधानमंत्री तिनसुकिया-नाहरलगुन (15907-15908 ) इंटरसिटी ट्रेन का भी उद्घाटन करेंगे । ये 14 कोच की ट्रैन साढ़े पांच घन्टे लेगी। इससे असम के धीमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा। आगे एक राजधानी बोगीबील से धीमाजी होते हुए दिल्ली के लिए चलाई जा सकती है।

पंजाब, हरयाणा से बढ़ेगी अनाज की धुलाई
अभी असम से कोयला, उर्वरक और स्टोन चिप्स की रेल से सप्लाई उत्तर व शेष भारत को होती है। जबकि पंजाब, हरयाणा से अनाज यहाँ आता है। इस पुल के बनने से इनमें बढ़ोतरी के साथ रेलवे की आमदनी बढ़ने की संभावना है।

मिशन-2019 : ‘अजेय भारत, अटल भाजपा’

NEW DELHI : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार के फैसलों को लेकर देश में तमाम तरह की निर्मित हो रही विपरीत परिस्थितियों का पार्टी कार्यकर्ताओं पर पडऩे वाले असर को रोकने के लिए कूटनीतिक चाल चली। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए विभिन्न दलों  के बीच चल रही गठजोड़ की कवायद के लिए तीन शब्द इस्तेमाल किए। नेतृत्व का पता नहीं, नीति अस्पष्ट और नीयत भ्रष्ट। इसी के साथ उन्होंने अजेय भारत, अटल भाजपा का नया नारा देते हुए कार्यकर्ताओं का इस संदेश के साथ माइंड मेकअप किया कि 2019 के चुनाव में भाजपा को कोई चुनौती नहीं है।  
    भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समापन पर मोदी द्वारा एक ही मंत्र दिया गया। 48 साल के एक ही परिवार के शासन की तुलना 48 माह राजग सरकार से करें, चुनाव में जीत का रास्ता अपने आप बन जाएगा। मोदी ने कहा  कि हम सत्ता को कुर्सी के रूप में नहीं देखते, बल्कि सत्ता को जनता के बीच में काम करने का उपकरण समझते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में भाजपा दो दशकों से अधित समय से सत्ता में हैं, क्योंकि पार्टी सत्ता को सेवा करने का साधन मानती है। विपक्ष के महागठबंधन की कवायद पर सीधा कटाक्ष करते हुए  मोदी ने कहा कि जो लोग एक-दूसरे को देख नहीं सकते, एक साथ चल नहीं सकते, आज वो गले लगने को मजबूर हैं, क्योंकि पार्टी की लोकप्रियता बढ़ी है और काम की स्वीकार्यता बढ़ी है।
 
–प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया मिशन-2019 के लिए नया नारा 
—महागठबंधन पर निशाना-नेतृत्व का पता नहीं, नीति अस्पष्ट, नीयत भ्रष्ट
–2019 के चुनाव में भाजपा को कोई चुनौती नहीं है : प्रधानमंत्री  
मोदी ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में हमें कहीं चुनौती  नजर नहीं आती। कारण, गठबंधन में नेतृत्व का पता नहीं, नीति अस्पष्ट और नीयत भ्रष्ट है। वे न तो मुद्दों पर लड़ते हैं, न काम के विषय पर लड़ते हैं, वे झूठ पर लड़ते हैं। झूठ बोलना, झूठ गढऩा और झूठ दोहराना ही उनका काम रह गया है। उन्होंने कहा कि हमारी समस्या यह है कि हमें झूठ के साथ लडऩा नहीं आता। लेकिन, अब एक रणनीति के साथ हम उनके झूठ से भी लड़ेंगे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि आज छोटे-छोटे दल भी कांग्रेस के नेतृत्व को नहीं स्वीकार कर रहे हैं। कई दल तो कांग्रेस के नेतृत्व को बोझ समझते हैं। 
 उन्होंने कहा-भारत कभी भी किसी के वशीभूत नहीं हुआ और भाजपा अपने सिद्धांतों पर ही चलेगी। इसके पहले केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राजनीतिक प्रस्ताव रखा गया। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से एनआरसी पर प्रस्ताव लाया गया। शाह ने दावा किया कि इस देश में घुसपैठ बर्दास्त नहीं होगी। पार्टी इस पर बड़ा अभियान चलाएगी।  
 
एक देश एक चुनाव पर मोदी का नया रूख
भाजपा की इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी  देश में एक साथ चुनाव कराने का मुद्दा आया। यह मसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ही उठाया गया और इसको लेकर देश में जिस तरह की आशंकाएं हैं, मोदी ने उसे यह कहते हुए दूर किया कि इस पर किसी को दबाव नहीं देना चाहिए। इस पर चर्चा होनी चाहिए और यह चर्चा सिर्फ राजनीतिक नहीं होनी चाहिए, बल्कि  अलग-अलग तरह के प्लेटफॉर्म पर इसकी चर्चा होनी जरूरी है। मतलब,मोदी की तरफ से पार्टी को साफ संकेत दिया गया कि वह इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाए और उस पर जनमानस बनाने का काम करे।  
 
 
 
 जो सत्ता में फेल हुए, विपक्ष में भी फेल हुए 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें कहीं भी चुनौती नजर नहीं आती और स्वाभाविक तौर पर यह बात 2019 के संदर्भ में कही। कांग्रेस पर विपक्ष में रहते हुए भी फेल होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, लोकतंत्र में विपक्ष होना चाहिए, उनके सवाल लोकतंत्र की मजबूती हैं लेकिन हमारी पीड़ा यह है कि जो सत्ता में फेल हुए, वे विपक्ष में भी फेल हुए हैं। कभी भी किसी फेयर मुद्दे पर बात नहीं उठाई।  
 
  बूथ हमारा किला, कार्यकर्ता उसे अजेय बनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 2019 में फिर जीत का मजबूत भरोसा जताया। साथ ही कहा कि हम विजय का विश्वास लेकर चल पड़े हैं, और इस विश्वास का आधार है। सवा सौ करोड़ देशवासियों का प्यार। काम की बदौलत जनता का आशीर्वाद मिलेगा। एक-एक पोलिंग बूथ को जीतना है, कार्यकर्ताओं को इसमें जुटना है। बूथ हमारी चौकी है और संगठन व सरकार का किला। वह मजबूत होना चाहिए, इसके लिए कार्यकर्ताओं को जुटना होगा। पीएम मोदी ने कहा, हमारे पास प्रतिबद्धता है, नेतृत्व है, विचारधारा है, कार्यकर्ताओं की ताकत है। हमें उनके झूठ के तंत्र को तोडऩा है। हम विकास मानवीयता के साथ चाहते हैं। हम समता चाहते हैं, मानवता चाहते हैं। देश का वैभव चाहते हैं, लेकिन सादगी के दम पर। 
 
सबका साथ सबका विकास की नीति सफल 
एससी/एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर उसे पुराने स्वरूप में लाने से सवर्णों की नाराजगी बीजेपी के लिए चिंता बढ़ाने वाली बात हो सकती है।  लेकिन रविशंकर प्रसाद ने पीएम मोदी के भाषण के बारे में जो कुछ भी बताया उसमें सीधे-सीधे एससी-एसटी ऐक्ट से जुड़ा कोई जिक्र नहीं था। प्रसाद ने इतना जरूर बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार ने कभी किसी का न धर्म देखा, न जाति देखी, न आर्थिक हैसियत देखी न समुदाय देखा।  
 
2019 तो जीतेंगे ही, 50 साल तक नहीं हारेंगे : शाह 
दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आखिरी दिन भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपने संबोधन में 2019 में जीत का भरोसा जताया। साथ ही कहा कि 19 को हम जीतेंगे और उसके बाद 50 साल तक हमें कोई नहीं हटा पाएगा। 

PM : केसरिया रंग में रंग गए आज सारे रंग

NEW DELHI.  तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली शानदार सफलता से कार्यकर्ता ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गदगद हैं। प्रधानमंत्री अपनी खुशी का इजहार भाजपा मुख्यालय आकर किया, जहां पार्टी कार्यकर्ता उनका इंतजार कर रहे थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने चुनाव नतीजों का श्रेय पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की टी और भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया है। साथ ही कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं के खून की एक भी बूंद बेकार नहीं जाएगी। त्रिपुरा में बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं ने शहादत दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा के कारण कई कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया है। भय और भ्रम, इन दो शस्त्रों को ले करके माओवादी विचारों और लेफ्टिस्ट पार्टियों ने जुल्म किए हैं।
केसरिया रंग में रंग गए आज सारे रंग : मोदी 
–सूरज का उदय होता है तो उसका रंग होता है केसरिया 
–नो वन से वॉन की यात्रा, शून्य से शिखर तक की यात्रा : पीएम मोदी 
–तीन राज्यों के चुनावी नतीजों पर प्रधानमंत्री गदगद 
–भय और भ्रम, इन दो शस्त्रों को ले कर लेफ्टिस्ट पार्टियों ने जुल्म किए 
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लोकतंत्र की ताकत है कि गरीब और अनपढ़ मतदाता ने भी इस चोट का जवाब वोट से दिया है। लेफ्ट पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जय और पराजय लोकतंत्र का हिस्सा है। अगर रगों में लोकतंत्र है तो पराजय को भी स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2014 से मैं देख रहा हूं कि लोकतंत्र की बात करने वाले पराजय को बड़े दिल के साथ स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों को यह समझना होगा कि नो वन से वॉन  की यात्रा, शून्य से शिखर तक की यात्रा है।
 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सूर्य जब ढलता है तब लाल रंग का होता है, और जब सूर्योदय होता है उस समय केसरिया रंग का होता है। कल देश होली पर अनेक रंगों से रंगा हुआ था, लेकिन आज सारे रंग केसरिया रंग में रंग गए हैं।  बता दें कि शनिवार को पार्टी मुख्यालय में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री उन पार्टी कार्यकर्ताओं को यादकर भावुक हो गए, जिन्होंने राजनीतिक हमलों में अपनी जान गंवा दी। कांग्रेस और लेफ्ट पर हमला बोलते हुए मोदी ने मारे गए कार्यकर्ताओं को शहीद कहा और उनकी याद में 2 मिनट का मौन रखा। इस दौरान सभी कार्यकर्ता और नेता खड़े होकर मौन रहे।
नार्थ ईस्ट का कोना मजबूत 
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वास्तु शास्त्र विशेषज्ञों का मानना है कि इमारत की रचना जब होती है तो उसमें जो नॉर्थ ईस्ट का कोना होता है उसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए निर्माण के समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है। अब नॉर्थ ईस्ट का कोना भी मजबूत हो गया है और मुझे इस बात की खुशी है। जब नार्थ-ईस्ट ठीक होगा तो सबकुछ अपने आप ठीक हो जाएगा।
त्रिपुरा में बाल सेना ने किया कमाल 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि त्रिपुरा की टीम सबसे छोटी आयु की टीम है। त्रिपुरा में कुछ उम्मीदवार महज 25 साल के थे, लेकिन राजनीतिक जीवन की इस बाल सेना ने बड़ा कमाल कर दिखाया। कुछ उम्मीदवार तो ऐसे थे कि डर लग रहा था कि 25 की आयु तक पहुंचे न हो। इसका डर था कि कहीं इनकी उम्मीदवारी खत्म न हो जाए। देखने में इतने छोटे कार्यकर्ता थे जो लग रहा था कि अभी कॉलेज में ही गए थे। पीएम ने अमित शाह को बीजेपी की विजय यात्रा का शिल्पी बताया। साथ ही कहा कि यह साबित हो गया है कि जनता से जुड़कर चुनाव जीता जा सकता है। संगठन की शक्ति जरूरी है, टीवी पर चमकने से नेतृत्व नहीं होता।
कांग्रेस पार्टी पर हमला, कहा- कद हुआ छोटा 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बीच कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस का पार्टी का कद इतना छोटा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतनी कमजोर कभी नहीं थी, जितनी अब है। ऐसे नेता हैं, जिनका पद तो बढ़ गया है, पर कद घट गया है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ पद में बड़े होते जाते हैं और कद में छोटे होते जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी का कद इतना छोटा कभी नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी को सतर्क रहना होगा कि कांग्रेस कल्चर इधर-उधर से न घुस जाए। गोवा दौरे का जिक्र करते हुए मोदी ने बताया कि उन्होंने सीएम नारायणसामी से कहा था कि जून के बाद कांग्रेस के पास आप ही दिखाने के लिए होंगे कि पार्टी भी सत्ता में है या रही है।

PM: स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति के लिए भारत आएं

DAVOS/NEW DELHI. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने दुनिया की चुनौतियों को गिनाया तो इनसे निपटने के लिए कई उपाय भी सुझाए। क्लाइमेंट चेंज, आतंकवाद और संरक्षणवाद को दुनिया के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियां बताते हुए पीएम ने नाम लिए बिना दुनिया की बड़ी ताकतों को आईना दिखाया। उन्होंने अच्छे और बुरे आतंकवाद को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों को घेरा तो संरक्षणवाद को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने यह कहकर चीन को भी लपेटा कि भारत किसी दूसरे देश की भूमि पर नजर नहीं रखता है। पीएम ने दुनिया की दरारों और दूरियों को पाटने के लिए शास्त्रों, उपनिषद, गौतम बुद्ध, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का उदाहरण दिया। उन्होंने दुनिया को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, ‘अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति के लिए भारत आएं। अनिश्चितता और तीव्र परिवर्तनों के इस दौर में एक भरोसेमंद, टिकाऊ, पारदर्शी और प्रगतिशील भारत एक अच्छी खबर है।”
2 दशक में बदली दुनिया’ 
पीएम ने 1997 में पूर्व पीएम एचडी. देवेगौड़ा की दावोस यात्रा को याद करते हुए कहा, ‘उस साल भारत की जीडीपी 400 बिलियन डॉलर से कुछ अधिक थी अब दो दशक बाद यह छह गुना हो चुका है। उस वर्ष इस फोरम का विषय था ‘बिल्डिंग द नेटवर्क सोसायटी’। आज 21 साल बाद 1997 वाला विषय सदियों पुराना लगता है। आज हम सिर्फ नेटवर्क सोसायटी नहीं, बिग डेटा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस वाली सोसासटी में हैं। तब यूरो मुद्रा नहीं थी, ना ही ब्रेग्जिट के आसार थे। तब बहुत कम लोगों ने ओसामा बिन लादेन का नाम सुना था और हैरी पॉर्टर को लोग नहीं जानते थे। तब यदि आप साइबर दुनिया में ऐमजॉन शब्द सर्च करते तो आपको नदियों और जंगलों के बारे में जानकारी मिलती। तब ट्वीट चिड़ियों का काम था मनुष्य का नहीं। वह पिछली शताब्दी थी। उस जमाने में भी दावोस अपने समय में आगे था और वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम का परिचायक था आज भी दावोस समय से आगे है।’
पीएम ने कहा, ‘इस वर्ष फोरम का विषय है- creating a share future in a fractured world यानी दरारों से भरे विश्व में साझा भविष्य का निर्माण। नए-नए बदलावों से नई-नई शक्तियों से आर्थिक क्षमता और राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इससे विश्व के स्वरूप में दूरगामी परिवर्तनों की छवि दिखाई दे रहरी है। विश्व के सामने शांति-स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई और गंभीर चुनौतियां हैं।’

‘डेटा ही सबसे बड़ी संपदा’ 
मोदी ने कहा, ‘तकनीक आधारित बदलाव से हमारे रहने, काम करने व्यवहार बातचीत और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय समूहों और राजनीति और अर्थव्यवस्था तक को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। तकनीक के जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने तीनों आयामों का एक बड़ा उदाहरण सोशल मीडिया के प्रयोग में देखने को मिलता है। आज डेटा सबसे बड़ी संपदा है। डेटा के ग्लोबल फ्लो से सबसे बड़े अवसर बन रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौतियां भी।’
दर्द भरी चोट पहुंचा सकती हैं दरारें’ 
पीएम ने कहा,’विज्ञान, तकनीक और आर्थिक प्रगति के नए आयामों में एक ओर तो मानव की समृद्धि के नए रास्ते दिखाने की क्षमता है। वहीं दूसरी ओर इन परिवर्तनों से ऐसी दरारें भी पैदा हुई हैं जो दर्द भरी चोट पहुंचा सकती हैं। बहुत से बदलाव ऐसी दीवारें खड़ी कर रहे हैं जिन्होंने पूरी मानवता के लिए शांति और समृद्धि के रास्ते को दुर्गम ही नहीं दु:साध्य बना दिया है। ये दरारें, बंटवारा और बाधक विकास के अभाव की हैं, गरीबी की हैं, बेरोजगारी की हैं।’
‘भारत ने हजारों साल पहले कहा-पूरी दुनिया परिवार’ 
मोदी ने कहा, ‘भारत, भारतीयता और भारतीय विरासत का प्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए इस फोरम का विषय जितना समकालीन है उतना ही समयातीत भी है। समयातीत इसलिए क्योंकि भारत में अनादिकाल से हम मानव मात्र को जोड़ने में विश्वास करते आए हैं, उसे तोड़ने में नहीं उसे बांटने में नहीं। हजारों साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने कहा, ‘वसुधैवकुटुम्बकम्’। यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। यह धारणा निश्चित तौर पर आज दरारों और दूरियों को मिटाने के लिए ज्यादा सार्थक है।’

‘क्लाइमेंट चेंज सबसे बड़ी चुनौती ‘ 
पीएम ने क्लाइमेंट चेंज को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं दुनिया की सिर्फ तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र करूंगा जो मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़े खतरे पैदा कर रही हैं। पहला खतरा है क्लाइमेंट चेंज का। ग्लेशियर पीछे हटते जा रहे हैं। आर्कटिक की बर्फ पिघलती जा रही है। बहुत से द्वीप डूब रहे हैं या डूबने वाले हैं। बहुत गर्मी और बहुत ठंड, बेहद बारिश और बाढ़ या बहुत सूखा। अतिवादी मौसम का प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। हर कोई कहता है कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना चाहिए। लेकिन ऐसे कितने देश या लोग हैं जो विकासशील देशों और समाजों को उपयुक्त तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधन मुहैया कराने में मदद करना चाहते हैं।’
‘भारतीय शास्त्रों की सीख’ 
पीएम ने कहा, ‘हजारों साल पहले भारत में लिखे गए प्रमुख उपनिषद ‘इशोपनिषद की शुरुआत में तत्वद्रष्ट्रागुरु ने अपने शिष्यों से परिवर्तनशील जगत के बारे में कहा- तेनत्यक्तेनभुन्जीथा यानी संसार में रहते हुए उसका त्यागपूर्वक भोग करो। ढाई हजार साल पहले भगवान बुद्ध ने अपरिग्रह यानी आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल को अपने सिद्धांतों में प्रमुख स्थान दिया। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का टस्ट्रीशिप का सिद्धांत भी आवश्यकता यानी नीड के अनुसार उपयोग और उपभोग करने के पक्ष में था। लालच पर आधारित शोषण का उन्होंने सीधा विरोध किया। भारतीय परंपरा में प्रकृति के साथ गहरे तालमेल के बारे में। हजारों साल पहले शास्त्रों में मनुष्यमात्र को बताया गया कि हम सब मानव पृथ्वी की संतान हैं।’
‘आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक-अच्छे-बुरे आतंकवाद का फर्क’ 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को दूसरा सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि आतंकवाद जितना खतरनाक है उससे भी ज्यादा खतरनाक है अच्छे और बुरे आतंकवाद का फर्क पैदा करना। उन्होंने कहा कि यह भी काफी दुखद है कि पढ़े-लिखे और संपन्न युवा भी चरमपंथ की ओर जा रहे हैं।

हज सब्सिडी खत्म, महिलाओं की शिक्षा पर खर्च होगा पैसा

NEW DELHI.  भारत सरकार ने इस वर्ष से हज यात्रियों को यात्रा पर मिलने वाले सब्सिडी खत्म करने का ऐलान किया है। साथ ही सब्सिडी की यह राशि को मुस्लिम समाज खासकर मुस्लिम लड़कियों एवं महिलाओं की शिक्षा के लिये खर्च किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से 1.75 लाख हज यात्री सीधे प्रभावित होंगे। अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां भाजपा मुख्यालय में कहा कि हज यात्रियों को 2018 से यात्रा सब्सिडी नहीं मिलेगी। सरकार ने यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के 2012 के फैसले के मद्देनजर किया है, जिसमें हज सब्सिडी 2022 तक धीरे-धीरे खत्म करने का निर्देश दिया गया था।
–मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा पर खर्च होगा पैसा
–इस वर्ष 1.75 लाख यात्री जाएंगे हज पर मक्का मदीना 
—1300 गैर महिलाओं का चयन लॉटरी के माध्यम से कर लिया गया 
       नकवी ने कहा कि सब्सिडी की इस राशि को सरकार मुस्लिम समाज खासकर मुस्लिम लड़कियों एवं महिलाओं के शैक्षिक सशक्तीकरण पर व्यय करेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश से हज पर जाने वाले लोगों का कोटा पांच हजार बढ़ा दिया गया है और अब 1.75 लाख यात्री हज पर मक्का मदीना जाएंगे। इनमें से एक लाख 41 हजार लोग हज कमेटी के माध्यम से जाएंगे। पिछले साल कुल एक लाख 70 हजार लोग हज करने गये थे।
             उन्होंने बताया कि अगले माह से हज यात्रा के लिए ड्रा निकाला जाएगा। अब तक करीब 4 लाख आवेदन आये हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि 2012 में हज के लिये करीब 700 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाती थी और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद से सरकार धीरे धीरे सब्सिडी कम करती जा रही थी और गत वर्ष सब्सिडी की राशि 250 करोड़ रुपए थी।
           नकवी के मुताबिक सब्सिडी की राशि दरअसल एयर इंडिया में चली जाती थी। उन्होंने कहा कि हज जाने वालों को यात्रा के सस्ते विकल्प के रूप में समुद्र के रास्ते द्रुतगामी क्रूज़ सेवा भी शुरू की जाएगी, जिससे दो से तीन दिन में पहुंचा जा सकेगा। जबकि पहले पानी के जहाजों पर एक तरफ की यात्रा में एक-डेढ़ महीने तक लग जाते थे।
    नकवी के मुताबिक बिना महरम के हज जाने वाली 1300 गैर महिलाओं का चयन लॉटरी के माध्यम से कर लिया गया है। उनकी मदद के लिये महिला हज सहायकों को नियुक्त किया गया है। हज के दौरान उनके लिये ठहरने एवं आने जाने के लिये अलग से व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सब्सिडी खत्म करने के बावजूद सरकार द्वारा हज यात्रियों के लिए चिकित्सा एवं दवा और सुरक्षा की सुविधा जारी रहेगी।
             इस फैसले के राजनीतिक परिणामों के बारे में बात करते हुए नकवी ने कहा कि यह ‘गरिमा के साथ हजÓ को सुलभ करने के लिये लिया गया अच्छा फैसला है। मुसलमानों के मजहबी रिवाज में सब्सिडी के साथ हज करना मान्य नहीं है। सब्सिडी को पिछली सरकारों ने तुष्टीकरण की नीति के तहत शुरू किया था। जबकि मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज को गरिमा के साथ हज का अधिकार दिया है। मुस्लिम वोटों पर इससे पडऩे वाले असर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हमारा विकास का मसौदा, वोटों का सौदा नहीं है।
   गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सरकार से 2022 तक सब्सिडी खत्म करने के लिए कहा था। पिछले साल हज यात्रा के लिए 450 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी। दुनिया भर से लाखों मुसलमान हर साल हज यात्रा पर सऊदी अरब के मक्का जाते हैं।
  बता दें सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में हाल ही में 5000 की वृद्धि कर दी है। यानी अब इतने अतिरिक्त हजयात्री हज पर जा सकेंगे। वहीं बीते साल सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में 35,000 की वृद्धि की थी।

‘नीच’ पर गरमाई सियासत

NEW DELHI. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर बुरी तरह घिर गए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अय्यर को पीएम मोदी से माफी मांगने को कहा है। राहुल ने साफ किया कि वह इस तरह की भाषा को स्वीकार नहीं करते। इस बीच मणिशंकर अय्यर ने सशर्त माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि पीएम ने उनके शब्द का गलत अर्थ लगाया। इसके साथ ही अय्यर ने इस पूरे विवाद के लिए अपनी कमजोर हिंदी को जिम्मेदार बताया है। राहुल ने ट्वीट किया, ‘बीजेपी और प्रधानमंत्री अक्सर कांग्रेस पार्टी पर हमले के लिए खराब भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कांग्रेस की संस्कृति और विरासत अलग है।

– राहुल ने कहा, पीएम मोदी से माफी मांगें अय्यर

— मणिशंकर बोले-हिंदी कमजोर

मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया मैं उसका समर्थन नहीं करता। कांग्रेस पार्टी और मैं उम्मीद करते हैं कि वह माफी मांगेंगे।’ हालांकि राहुल गांधी के इस स्टैंड से बीजेपी संतुष्ट नहीं है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे कांग्रेस पार्टी की रणनीति बताते हुए कहा कि पहले वे पीएम के खिलाफ असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं और जब लोगों में इसको लेकर गुस्सा भड़कता है तो माफी मांग लते हैं। इस बीच मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि उनके कहने का वह अर्थ नहीं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बता रहे हैं। मणिशंकर ने कहा, ‘मैं हिंदीभाषी नहीं हूं। मैंने इंग्लिश शब्द ‘LOW’ का मन में तर्जुमा किया ‘नीच’। मेरे कहने का मतलब नीची जाति में पैदा होने से (Low born) से नहीं था। यदि नीच शब्द का यह अर्थ भी हो सकता है तो मैं माफी मांगता हूं। यदि कांग्रेस को गुजरात में इससे नुकसान हो तो मुझे अफसोस होगा।’ मणिशंकर ने यह भी बताया कि हिंदी की कम जानकारी की वजह से उन्होंने एक बार पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के लिए नालायाक शब्द का इस्तेमाल कर दिया था।

क्या है पूरा विवाद?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली स्थित इंटरनैशनल बाबा साहेब आंबेडकर सेंटर का उद्घाटन करते हुए कांग्रेस पार्टी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर इशारों में जमकर निशाना साधा और कहा था कांग्रेस ने एक परिवार को बढ़ाने के लिए बाबा साहेब के योगदान को दबाया। पीएम के इस बयान से नाराज कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने मोदी को ‘नीच’ और ‘असभ्य’ तक कह डाला। अय्यर ने कहा, ‘मुझको लगता है कि यह बहुत नीच किस्म का आदमी है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है और ऐसे मौके पर इस किस्म की गंदी राजनीति करने की क्या आवश्यकता है?’

पीएम ने बताया गुजरात का अपमान
मणिशंकर के बयान के कुछ देर बाद ही सूरत में रैली के दौरान पीएम ने मणिशंकर अय्यर के बयान पर जोरदार पलटवार करते हुए इसे गुजरात का अपमान करार दिया। पीएम ने कहा, ‘कांग्रेस नेता ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जो लोकतंत्र में अस्वीकार्य है। बेहतरीन संस्थानों में पढ़े एक कांग्रेस नेता जो कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं, वह मोदी को ‘नीच’ कह रहे हैं। यह अपमानजनक है। यह मुगल मानसिकता के अलावा और कुछ नहीं है।’

मोदी ने कहा, ‘मैं भले ही नीची जाति का हूं लेकिन काम ऊंचे किए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ऊंच-नीच हमारे संस्कार में नहीं रहा, यह आपको ही मुबारक।’ इसके अलावा मणिशंकर अय्यर को आड़े हाथों लेते हुए पीएम ने यह भी कहा कि वह इसका जवाब नहीं देंगे। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी का कोई कार्यकर्ता किसी भी फोरम पर इसका जवाब नहीं देगा। हम ऐसी बातों का जवाब नहीं देते।’

अमित शाह ने भी किया पलटवार
मणिशंकर अय्यर के बयान पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, ‘देश के दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित और गरीब वर्ग के प्रति कांग्रेस में शुरू से ही घृणा रही है। आज जब यह वर्ग विकास कर रहा है, आगे बढ़ रहा है, तब कांग्रेस की यह घृणा बौखलाहट बनकर असभ्य भाषा के रूप में बाहर आ रही है।’ अमित शाह ने इसके अलावा कई और शब्दों को जिक्र करते हुए ट्वीट किया कि कांंग्रेस इस तरह की भाषा का इस्तेमाल मोदी के लिए करती रही है।

मानसिक रूप से फिट नहीं मणिशंकर: लालू
इस पूरे विवाद में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी कूद गए हैं। यूपीए सरकार में अय्यर के साथ कैबिनेट मंत्री रह चुके लालू ने कहा कि मणिशंकर मानसिक रूप से फिट नहीं हैं। इस बीच उन्होंने एक ट्वीट भी किया, जिसमें नाम लिए बिना ‘एक व्यक्ति’ को राजनीति में मर्यादा और भाषा को तार-तार करने का आरोप लगाया है।

जातिवाद के जहर को समाप्त करना जरूरी

NEW DELHI : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा  कि गांवों को आत्मनिर्भर तथा गरीबी एवं बीमारी से मुक्त बनाने के लिये जातिवाद के जहर को समाप्त करना जरूरी है क्योंकि जातिवाद का जहर गांवों को बिखेर देता है, विकास के सपने को चूर चूर कर देता है। गांव के विकास कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर और लक्ष्य के अनुरूप पूरा किये जाने की जरूरत है।           नानाजी देशमुख जन्म शताब्दी समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार गांवों के सामथ्र्य, रूचि और प्रकृति को जोड़कर ग्रामोदय की दिशा में काम कर रही है और कोई चीज थोपना नहीं चाहती है ।          प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गांव का विकास कैसे हो ? इसके लिए सरकार गंभीर है। हमारा प्रयास है कि गांव की अपनी जो शक्ति है, सबसे पहले उसी को जोड़ते हुए विकास का मॉडल बनाया जाए। जो सुविधाएं शहर में हैं वैसी अगर हम गांव में दे दें तो एक जीवन स्तर में बदलाव आएगा जो लोगों को गांव में रहने के लिए प्रेरित करेगा।
— गांवों को बिखेर रहा है जातिवाद का जहर : मोदी   
    उन्होंने कहा कि गांव आत्मनिर्भर बने, गांव गरीबी से मुक्त बने, गांव बीमारी से मुक्त बने । गांव में जातिवाद का जहर समाप्त हो क्योंकि जातिवाद का जहर गांवों को बिखेर देता है, विकास के सपने को चूर चूर कर देता है। गांव समृद्ध बने और सभी को जोडऩे वाला बने, ऐसे गांव के विकास के लिये भारत सरकार योजनाएं तैयार कर रही है और इस दिशा में प्रयास कर रही है। गांव को आत्मनिर्भर करना जरुरी है।          मोदी ने कहा, ” हम ग्रामीण विकास के कार्य को तेजी से लेना चाहते हैं । हम विकास करना चाहे, इतने से बात पूरी नहीं होगी , हम विकास की बात करें, इतने से बात पूरी नहीं होगी । हम कार्यो को समय सीमा के भीतर पूरा करें । योजनाएं जिस मकसद से शुरू की गई थी, उसमें कोई बदलाव नहीं आए ।     उन्होंने कहा कि योजनाओं पर काम करते हुए यह ध्यान रखना होगा कि वह इस बात पर आधारित नहीं हो कि उसमें कितना काम किया :आउटपुट: गया बल्कि इसका परिणाम :आउटकम: क्या रहा । हमने कितना बजट खर्च किया, इस पर जोर होने की बजाए, यह ध्यान रखा जाए कि लक्ष्य क्या था और हमने कितना कार्य पूरा किया ।        मोदी ने कहा कि 70 साल में जो विकास की गति रही, साल 2022 में जब देश की आजादी के 75 साल पूरे होंगे तब हम सात दशकों से सपने संजो कर बैठे व्यक्ति की आशा आकांक्षा को हम पूरा सकें, हम इस लक्ष्य के साथ काम करना है । इससे ङ्क्षहदुस्तान के आखिरी छोर के व्यक्ति तक भी उसका हक पहुंचाया जा सकता है।          उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के सुझाव के आधार पर ही ग्रामीण विकास के रोडमैप पर काम हो रहा हैं । सिर्फ विकास करने से बात पूरी नहीं होगी, सिर्फ अ’छा करने से बात पूरी नहीं होगी ….. ची•ाों को समय-सीमा में करने से ही काम अ’छा होगा । आज भारत सरकार इनके सपनों के आधार पर ग्रामीण भारत के विकास की ओर आगे बढ़ रही है ।       उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में केवल वोट का अधिकार नहीं है, बल्कि जनता की भागीदारी भी काफी जरूरी है । सरकार हर योजना की समीक्षा कर रही है ।
      मोदी ने कहा कि हमारे देश में संसाधनों के कारण आखिरी छोर के इंसान को हम कुछ नहीं दे पाते हैं, इस बात से आज भारत सरकार में आने के बाद मैं सहमत नहीं हूं। हमारे देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है, अगर कोई कमी है तब वह सुशासन की है। लोकतंत्र तभी सफल है जब जनभागीदारी से विकास हो और सरकार के साथ जनता का संवाद हो। ऐसा अनुभव रहा है कि जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है वहां पर मनरेगा का काम कम हो रहा है। जिन राज्यों में सुशासन है वहां मनरेगा का ज्यादा काम होता है।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिये सुशासन हमारी सरकार का मंत्र है और हम इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। अब मोबाइल ऐप’दिशाÓसे हर व्यक्ति ऊपर तक अपनी बात पहुंचा सकता है। इसके माध्यम से समय सीमा के तहत काम की प्रगति को देखा जा सकता है, योजनाओं में सुधार किया जा सकता है और सतत निगरानी की जा सकती है। इसके माध्यम से सांसदों को जोड़ा गया है जो जिला स्तर पर कार्य की प्रगति को देखते हैं ।
मोदी ने कहा कि अब गांव को आत्मनिर्भर बनाना होगा और जितनी सुविधाएं शहर को मिल रही हैं उतनी ही सुविधाएं गांव को भी मिलनी चाहिए।?       उन्होंने आगे कहा कि देश में’गरीबी भारत छोड़ोअभियान चलाया जा रहा है और 2022 तक इसको पाने की कोशिश होगी। मोदी ने कहा कि ङ्क्षटबर की खेती लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है।        प्रधानमंत्री ने कहा कि शहर को गांवों के लिए बाजार बनना चाहिए । उन्होंने कहा कि दीवाली के दिये गांव के कुम्हार से खरीदें ।        उन्होंने कहा कि 18000 गांव ऐसे थे जो कि 18वीं शताब्दी में जी रहे थे, वहां पर बिजली नहीं थी । हमने लाल किले से 1000 दिन में इन गांवों में बिजली देने का बीड़ा उठाया, अब तक 15,000 गांवों में बिजली पहुंचा चुके हैं । हमारी सरकार मुफ्त में बिजली कनेक्शन दे रही है।
 उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2022 में किसानों की आय को दोगुना करने का है । हमारा प्रयास किसान की लागत कम और मुनाफा बढ़ाना है । खुले में शौच के खिलाफ सरकार का अभियान काम कर रहा है । अब शौचालय को गांवों में’इज्जतघर कहा जा रहा है। देश के करीब 2.5 लाख गांव खुले में शौच से मुक्त हुए हैं।        मोदी ने कहा कि सरकार ने जो ‘दिशा ऐप लॉन्च की है, इससे सुशासन को बल मिलेगा । ग्रामीण भारत में चल रही योजनाओं के बारे में सारी जानकारी मिल सकेगी और दिशा के माध्यम से जनप्रतिनिधि लोगों के साथ जुड़ पाएगा। क्योंकि लोकतंत्र के विकास के लिये जनसंवाद और जन सहभागिता जरूरी तत्व है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में ग्रामीण विकास की गति तेज होगी । गांव का नागरिक भी शहर की ङ्क्षजदगी चाहता है ।शहर और गांव में बिजली 24 घंटे बिजली जानी चाहिए।      इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने’ग्राम संवाद ऐपको भी लांच किया, जिसके जरिए इस बात की निगरानी की जा सकेगी कि सरकार द्वारा गांवों के विकास के लिए जो योजनाएं चलाई जा रहीं हैं, वो ग्राम पंचायत स्तर पर किस तरह काम कर रही हैं । सरकारी योजनाओं को जिले के स्तर पर ठीक से लागू किया जा सके इसके लिए एक पोर्टल भी लांच किया गया । प्रधानमंत्री ने नानाजी देशमुख के नाम पर एक डाक टिकट भी जारी किया ।

मानसून सत्र: PM मोदी बोले- GST मतलब ‘ग्रोइंग स्ट्रॉंगर टुगेदर’

New Delhi.  संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है. सत्र शुरू होते ही अमरनाथ यात्रा के दौरान हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं पूर्व लोकसभा सांसद विनोद खन्ना, अनिल माधव दवे को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

 

इससे पहले संसद सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज मानसून सत्र का प्रारंभ हो रहा है। गर्मी के बाद, पहली वर्षा एक नई सुगंध मिट्टी में भर देती है, वैसे यह मानसून सत्र जीएसटी की सफल वर्षा के कारण, पूरा सत्र नई सुगंध और नई उमंग से भरा हुआ होगा।

जब देश के सभी राजनीतिक दल, सभी सरकारें सिर्फ और सिर्फ राष्‍ट्रहित के तराजू पर तोल करके निर्णय करती हैं, तो कितना महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रहित का काम होता है, वो जीएसटी में सफल और सिद्ध हो चुका है. ‘Growing Stronger Together’ यह जीएसटी की स्पिरिट का दूसरा नाम है। यह सत्र भी उस जीएसटी स्पिरिट के साथ आगे बढ़े।

यह सत्र अनेक रूप से महत्‍वपूर्ण है। 15 अगस्‍त को आजादी के सात दशक यात्रा पूर्ण कर रहे हैं। 09 अगस्‍त को सत्र के दरम्‍यान ही अगस्‍त क्रांति के 75 साल हो रहे हैं। ‘Quit India’ Movement के 75 साल का यह अवसर है। यही सत्र है जब देश को नए राष्‍ट्रपति और नए उपराष्‍ट्रपति चुनने का अवसर मिला है। एक प्रकार से राष्‍ट्र जीवन के अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण घटनाओं से भरा हुआ यह कालखंड है और इसलिए स्‍वाभाविक है कि देशवासियों का ध्‍यान हमेशा की तरह इस मानसून सत्र पर विशेष रहेगा।

जब हम मानसून सत्र का प्रारंभ कर रहे हैं तो उस प्रांरभ में, हम देश के उन किसानों को नमन करते हैं जो इस ऋतु में कठोर परिश्रम करके देशवासियों के खाद्य सुरक्षा का इंतजाम करते हैं और उन्‍हीं को नमन करते हुए यह सत्र का प्रारंभ होता है। इस मानसून सत्र में मुझे विश्‍वास है कि सभी राजनीतिक दल, सभी मान्‍य सांसद गण राष्‍ट्रहित के महत्‍वपूर्ण फैसले ले करके, उत्‍तम स्‍तर की चर्चा करके, हर विचार में value-addition करने का प्रयास, हर व्‍यवस्‍था में value-addition का प्रयास हम सब मिल करके करेंगे, ऐसा मेरा पूरा विश्‍वास है।