NRI पीडि़त दुल्हनों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा 

NEW DELHI: एनआरआई पतियों द्वारा छोड़ी गई पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एवं उत्तराखंड की लड़कियों ने आज अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में शांतिमयी प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। पीडि़त लड़कियों ने दुल्हों पर शिकंजा कसने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) डाल रखी है। बुधवार को इसकी पहली तारीख थी। लेकिन, सभी पक्षों के शामिल न होने की वजह से चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की बेंच ने इस मामले पर गौर करते हुए इसकी अगली तारीख 28 मार्च मुकर्रर कर दी। जनहित याचिका पीडि़त दुल्हनों की ओर से बनाए गए संगठन अब नहीं वेलफेयर सोसायटी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने मिलकर डाली है। 
पीडि़त दुल्हनों की अगुवाई अब नहीं सोशल वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष सतविंदर सत्ती कर रही हैं, जो खुद भी पीडि़त हैं। उनके साथ सबसे ज्यादा लड़कियां पंजाब के विभिन्न शहरों से दिल्ली पहुंची। 
 
–डाली जनहित याचिका, 28 मार्च को होगी सुनवाई 
–लम्बी तारीख से भड़की लड़कियां, किया शांतिमय प्रदर्शन 
–पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड एवं दिल्ली की लड़कियां शामिल 
–प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार, एनआरआई दूल्हों पर कसें शिकंजा 
  इसमें पंजाब से सीमा जगराओं, सर्वजीत गुरदासपुर, नीरू कुमारी नंगल डैम, हरप्रीत कौर पटियाला, सुखविंदर कौर बठिंडा, सुखजीत कौर अमृतसर, ज्योति रानी जालंधर, वीरपाल होशियारपुर, बलजीत कौर मानसा, सुखमीन कौर लुधियाना, कुलविंदर कौर नाभा, नीतू कुमारी हरियाणा, सीमा रानी कुरुक्षेत्र, रंजीत कौर देहरादून, गुरनीत कौर दिल्ली, मंजू कुमारी दिल्ली, सतविंदर सत्ती लुधियाना आदि मौजूद रहीं। 
     पंजाब की पीडि़त लड़कियों ने अपने-अपने पतियों और उनके परिवारों के खिलाफ जंग लड़ रही हैं।  लंबी तारीख से नाराज पीडि़ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कोर्ट के बाहर शांतिमय तरीके से प्रदर्शन किया। संगठन की प्रमुख  सतविंदर सत्ती के मुताबिक हमने दिल्ली कमेटी की मदद से 9 नवंबर 2018 को याचिका डाली थी, जिसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अगली तारिख मार्च की दी है। हम पिछले कई वर्षों से अपनी लड़ाई लड़े रहे हैं। हमें कोर्ट से काफी उम्मीदें हैं। लेकिन अगर यहां भी लंबी तारिखें मिले तो हम कहां जाएंगे।
कोर्ट के ऑर्डर के बाद भी ससुराल घुसने नहीं दिया गया
सीमा जगराओं, सर्वजीत कौर का कहना है कि पंजाब के जगराओं कोर्ट के ऑर्डर मिलने के बाद भी आज पीडि़ताओं को अपने ससुराल घुसने नहीं दिया गया। एक साल से ज्यादा हो गया फिर भी कोर्ट की तरफ से लॉक तोडऩे की इजाजत नहीं मिली है। ससुराल वालों ने साजिश के तहत प्रॉपर्टी रिश्तेदारों के नाम कर ली है। इसलिए हम केंद्र सरकार और कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि उनकी जैसी लड़कियों को वित्तीय सहायता दी जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई आदि के खर्चे निकल सकें। पीडि़त लड़कियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई कि एनआरआई दूल्हों के खिलाफ कड़े कानून बनाकर पतियों को स्वदेश वापस बुलाया जाए। इस मौके पर पीडि़त लड़कियों से मिलने दिल्ली कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा भी पहुंचे और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। 

मेरी कॉम ने रचा इतिहास, वर्ल्ड चैंपियन पर कब्‍जा

NEW DELHI. सुपरमॉम एमसी मेरी कॉम ने शनिवार को वर्ल्ड चैंपियनशिप में खिताबी सिक्सर लगाते हुए इतिहास रच दिया। दिल्ली के केडी जाधव हॉल में हुई 48kg कैटिगरी के फाइनल फाइट में उन्होंने यूक्रेन की हन्ना ओकोता को 5-0 (30-27, 29-28, 29-28, 30-27, 30-27) से हराया और रेकॉर्ड छठी बार महिला विश्व कप का खिताब जीतने का गौरव हासिल किया। मेरी कॉम इस जीत के बाद भावुक हो गईं। तिरंगा लहराते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। भावुक मैरी ने कहा, ‘मैं इस जीत के लिए अपने सभी प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करती हूं, जो मुझे यहां समर्थन करने के लिए आए। मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह महान पल है।’ यह दूसरा मौका है, जब वह खिताबी फाइट के लिए घरेलू फैंस के सामने थीं। इससे पहले 2006 घरेलू दर्शकों के सामने रिंग में उतरी थीं।

इस जीत के साथ ही 35 वर्षीय स्टार भारतीय बॉक्सर आयरलैंड की कैटी टेलर को पछाड़कर सबसे अधिक 6 वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में जीतने वाली पहली महिला बॉक्सर बन गईं। इससे पहले मेरी और टेलर 5-5 बार वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर बराबरी पर थीं।

पहला राउंड
पहले राउंड में दोनों खिलाड़ी सावधानी से एक दूसरे खेल को परख रहीं थीं और इसलिए ज्यादा आक्रमण नहीं कर रहीं थीं। दोनों ने अपने राइट पंच का अच्छा इस्तेमाल किया। मैरी ने कुछ पंच मारे, जिनमें से कुछ अच्छे सही निशाने पर लगे। इस बीच, हालांकि हन्ना ने भी अपने राइट जैब का अच्छा उपयोग किया लेकिन मेरी कॉम अपनी फुर्ती से उनके अधिकतर पंचों को नाकाम करने में सफल रहीं।

दूसरा राउंड
दूसरे राउंड में दोनों ने आक्रामकता दिखाई और राइट जैब के साथ फिस्ट के संयोजन से हावी होने की कोशिश की। रणनीति दोनों खिलाड़ियों को एक जैसी थी। शुरुआत में हन्ना ने अच्छे पंच मारे जो सटीक रहे। हालांकि दूसरे राउंड के अंत में मेरी कॉम ने दूरी बनाते हुए अपने लिए मौके बनाए और फिर समय पर पंच मार अंक बटोरे।

तीसरा राउंड
तीसरे राउंड की शुरुआती एक मिनट में मैरी ने राइट और लेफ्ट जैब के संयोजन से तीन-चार अच्छे पंच स्कोरिंग एरिया में मार जजों को प्रभावित किया लेकिन यहां से हन्ना बेहद आक्रामक हो गईं और मैरी को उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल हो गया। अनुभवी मैरी ने धैर्य बनाए रखा और जब हन्ना लापरवाह दिखीं तब पंच मार अंक बटोरे। इस राउंड के बाद मेरी खुश नजर आ रही थीं, जैसे कि उन्हें अपनी जीत का विश्वास हो गया था।

पुरुष बॉक्सर के वर्ल्ड रेकॉर्ड की बराबरी

यही नहीं, उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप्स के इतिहास में 6 खिताब जीतने के वर्ल्ड रेकॉर्ड (महिला और पुरुष) की बराबरी भी कर ली। 6 बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव उनसे पहले पुरुष बॉक्सिंग में क्यूबा के फेलिक्स सेवोन के नाम था। सेवोन ने 1997 में बुडापेस्ट में आयोजित हुई चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर यह रेकॉर्ड अपने नाम किया था।

उम्र में 13 साल का अंतर
आज खेले गए फाइनल फाइट में दोनों बॉक्सरों की बात करें, तो दोनों की उम्र में 13 साल का अंतर है। यूक्रेन की बॉक्सर हन्ना अभी 22 साल की हैं, लेकिन अपने उम्दा खेल की बदौलत उन्होंने ‘हंटर’ नाम से अपनी पहचान बना ली है। उन्होंने यूरोपियन यूथ चैंपियनशिप्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है।

 

ज्योतिषपीठ को लेकर दो शंकराचार्यों को बड़ा झटका

(विनोद मिश्रा)

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मुकदमें में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती और स्वामी वासुदेवानन्द दोनों को ही ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नहीं माना है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को व्यवस्था दी कि ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य का पद रिक्त माना जाए। कोर्ट ने अखिल भारत काशी विद्वत परिषद को पंडितों, विद्वानों और तीन अन्य पीठों के शंकराचार्यों की मदद से तीन महीने के अंदर ज्योतिपीठ के शंकराचार्य का चयन करने निर्देश दिया। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और केजे ठाकर की पीठ ने अगला चयन होने तक शंकराचार्य कार्यालय के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने का भी निर्देश दिया है। साथ ही पीठ ने निचली अदालत के फैसले के उस भाग को बरकरार रखा है ,जिसमें स्वामी वासुदेवानंद को शंकराचार्य के चावर, छत्र और सिंहासन का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि पट्टाभिषेक के समय स्वामी वासुदेवानंद दंडी सन्यासी नहीं थे, इसलिए उन्हें शंकराचार्य के पद के लिए अयोग्य करार दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि पट्टाभिषेक के समय शंकराचार्य का पद रिक्त नहीं था, इसलिए स्वामी स्वरूपानंद का भी पट्टाभिषेक गलत और अवैध था। अदालत ने यह मानते हुए कि आदि शंकराचार्य द्वारा केवल चार पीठों की स्थापना की गई थी, वर्ष 1941 में अपनाई गई प्रक्रिया के मुताबिक ही शंकराचार्य का चयन करने का निर्देश दिया।

स्वामी वासुदेवानंद ने निचली अदालत के 5 मई के निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी.  निचली अदालत ने अपने फैसले में ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम पीठ के शंकराचार्य पद पर उनका दावा अवैध करार दिया था।  अदालत ने यह आदेश द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा 1989 में दायर एक याचिका पर दिया था।

वर्ष 1973 से बद्रीनाथ धाम का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आरोप लगाया था कि स्वामी वासुदेवानंद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपना दावा पेश करते रहे हैं और वह एक दंडी सन्यासी होने के पात्र नहीं हैं, क्योंकि वह नौकरी में रहे हैं और 1989 से वेतन लेते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड-अप इण्डिया के अन्तर्गत  अधिक ऋण बांटे बैंक

मुख्यमंत्री ने सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की 

विशेष राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को सम्बोधित किया

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने कहा है कि राज्य की 22 करोड़ जनता का विकास, सीधे तौर पर गांवों के विकास से जुड़ा है। राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु अवस्थापना सुविधाओं के विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर सृजित करने, और ग्रामीण जनता के लिये कल्याणकारी कार्यक्रम चलाये जाने के लिए बैंकों का सहयोग आवष्यक है, जिससे किसान, गांव व गरीब की आर्थिक व सामाजिक स्थिति में सुधार आये।
मुख्यमंत्री  आज यहां योजना भवन में सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एस0एल0बी0सी0) की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।
इस मौके पर उन्होंने ‘वार्षिक ऋण योजना 2017-18’ तथा ‘उत्तर प्रदेश गवर्नमेन्ट क्राॅप लोन रिडम्प्शन स्कीम फाॅर अपलिफ्टमेन्ट एण्ड सस्टनेबल डेवलपमेन्ट आॅफ स्माॅल एण्ड मार्जिनल फार्मर्स’ पुस्तिका का विमोचन भी किया।
योगी जी ने कहा कि प्रदेष की लगभग 78 फीसदी जनसंख्या गांवों में निवास करती है और अपनी आजीविका के लिए अधिकांषतः कृषि पर निर्भर है। प्रदेष में किसानों की कुल संख्या का लगभग 93 फीसदी लघु एवं सीमान्त कृषक हैं। स्पष्ट है कि प्रदेष की अर्थव्यवस्था काफी हद तक लघु एवं सीमान्त कृषकों पर निर्भर है। विगत वर्षों में दैविक आपदाओं-सूखा, बाढ़ तथा ओलावृष्टि का सर्वाधिक कुठाराघात इन कृषकों को ही झेलना पड़ा है, जिसके कारण ये कृषक बैंकों से लिये गये फसली ऋण की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में उनके सूदखोरों एवं साहूकारो के मकड़जाल में फसने की प्रबल सम्भावनायें हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका सीधा प्रभाव कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर पड़ना निष्चित है, जो प्रदेष के विकास की गति को सीधे तौर पर अवरूद्ध करेगा। प्रदेष के लघु एवं सीमान्त कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुधारने एवं उन्हे पुनः मुख्य धारा में वापस लाने के लिए, राज्य सरकार द्वारा उनके एक लाख रुपये तक के फसली ऋण को माफ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इसके अलावा, किसानों के एन0पी0ए0 ऋणों को एकमुष्त समाधान (ओटीएस) के तहत राज्य सरकार की वित्तीय सहायता से ‘राइट आॅफ’ किये जाने का निर्णय भी लिया। ताकि ऐसे कृषक पुनः बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकें जिन्हें ऋणग्रस्तता के चलते बैंकों ने फसली ऋण देना बंद कर दिया था।
योगी  ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बैंकों के सहयोग के चलते फसल ऋण माफी योजना को मूर्त रूप दिया जा सका है, किन्तु यह कार्य तभी पूर्ण होगा जब प्रदेष के प्रत्येक पात्र लघु व सीमान्त किसानों के खाते में राज्य सरकार द्वारा दी गयी राहत को पहुंचा दिया जाए।
उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों को ऋण अदायगी के लिए न तो कोई नोटिस जारी करें और न ही उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई करें। फसली ऋण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बैंकों के साथ-साथ जिला मषीनरी को भी जोड़ा गया है। इसके लिए जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी है। जिलाधिकारी सुनिष्चित करेंगे कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहंुचे और योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए।
मुख्यमत्री  ने कहा कि योजना में पारदर्षिता सुनिष्चित करने के लिए लाभान्वित होने वाले किसानों के बैंक खातों को आधार से लिंक कराया जाय। बैंकर्स जिला प्रषासन से आवष्यक समन्वय करते हुए आवष्यकतानुसार किसानों की के0वाई0सी0 औपचारिकतायें भी पूर्ण कराए। राज्य सरकार का वर्ष 2017-18 का बजट पारित होने के तत्काल बाद लघु एवं सीमान्त किसानों की फसल ऋण माफी की समतुल्य धनराषि, बैंकों को उपलब्ध करा दी जाएगी। इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों को ऋण माफी संबंधी प्रमाण-पत्र शिविर लगाकर उपलब्ध करायें जायें।
योगी जी ने कहा कि प्रदेष में जिस संख्या में बैंक की शाखाएं होनी चाहिए थी, वह नहीं हैं। वर्तमान में यहां 16,583 बैंक शाखाएं हैं, जिनमें 8,176 ग्रामीण शाखाएं हंै। प्रदेष में प्रति बैंक शाखा जनसंख्या का औसत लगभग 12,000 है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह औसत लगभग 9,000 है। इसी प्रकार प्रदेष के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति बैंक शाखा जनसंख्या का औसत लगभग 21,000 है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह औसत लगभग 17,400 है। इस प्रकार अखिल भारत की तुलना में उत्तर प्रदेष के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखायें अपर्याप्त हैं।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि भारत सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने एवं प्रदेष के अन्तिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को दृष्टिगत रखते हुए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक बैंक शाखायें स्थापित करना जरूरी है।

उत्तर प्रदेष में अधिक से अधिक ‘बैंकिंग आउटलेट’ खोले बैंक

उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देष के अनुरूप आने वाले समय में उत्तर प्रदेष में अधिक से अधिक ‘बैंकिंग आउटलेट’ खोले जाएं, ताकि लोगों को आसानी से बैंकिंग सेवायें/सुविधायें मिल सकें। इस संकल्प की पूर्ति के लिये राज्य सरकार बैंकों को यथा सम्भव हर सुविधा उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बैंकों एवं बैंकर्स की सुरक्षा हेतु भी संवेदनषील है।
योगी जी ने कहा कि प्रदेष की अधिकांष आबादी आर्थिक रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों के कल्याण एवं उनकी आर्थिक समृृद्धि के लिए कृत संकल्पित है, इसलिए कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और सहकारिता को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना करने का काम शुरू किया गया है। यह लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकेगा जब कृषि उत्पादन में वृद्धि हो। इसके लिए किसानों को नयी तकनीक से जोड़ने, कृषि में निवेष के साथ-साथ वैज्ञानिक विधियों को बढ़ाने की दिषा में प्रभावी प्रयास किए जाए।

मण्डियों को आॅनलाइन जोड़ने पर भी बल दे रही है सरकार

मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रदेष सरकार खाद्य प्रसंस्करण तथा अन्य प्रकार के मूल्य संवर्धन कार्य-कलापों को बढ़ाने एवं मण्डियों को आॅनलाइन जोड़ने पर भी बल दे रही है। उत्तर प्रदेष देष का सबसे बड़़ा राज्य होने के बावजूद विकास के इन्डेक्स में पिछड़ा माना जाता है। वर्तमान सरकार ने प्रदेष में परिवर्तन, विकास और गरीबों के सषक्तीकरण का कार्य प्रारम्भ किया है।
उपलब्ध संसाधनों को तेजी से बढ़ाते हुए प्रदेष की विकास दर को 10 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, क्योंकि ऐसा होने पर ही राज्य के विकास के लिए आवष्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। इसके लिए कृषि जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र के साथ-साथ उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए म्ंेम व िकवपदह इनेपदमेे जैसे कदम उठाये जा रहे हैं। प्रदेष की विकास दर को बढ़ाने हेतु उद्योगों को प्रोत्साहन देने की तत्काल आवष्यकता है, ताकि प्रदेष में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ प्रदेष की आर्थिक स्थिति में भी तेजी से सुधार परिलक्षित हो।

पूंजी निवेष और उद्योग स्थापना की विषाल सम्भावनायें

योगी  ने कहा कि उत्तर प्रदेष में पूंजी निवेष और उद्योग स्थापना की विषाल सम्भावनायें हैं। यह सरकार पूंजी निवेष और उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ उद्योगों, उद्यमियों की समस्याओं के समाधान एवं उनके कार्य विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने नयी औद्योगिक नीति लागू करेगी।
प्रदेष में बैंकों के योगदान की समीक्षा से स्पष्ट है कि बैंकों के ऋण-जमानुपात में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मार्च, 2017 तक लगभग 9 फीसदी की गिरावट आयी है। उत्तर प्रदेष के 18 जनपद ऐसे है जिनका ऋण-जमानुपात 40 प्रतिशत से भी कम है जो अधिकाषंतः पूर्वांचल से संबंधित हैं। जनपद सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, जौनपुर एवं गाजीपुर का ऋण जमानुपात 25 प्रतिशत से भी कम है। इससे प्रदेष के विकास में क्षेत्रीय असमानता स्पष्ट दिखायी देती है। उन्हांेने कहा कि पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए एक सुदृढ़ कार्ययोजना बना कर इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक ऋण वितरित किए जाएं।

मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना में अपेक्षित ऋण वितरण नहीं

मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना के अन्तर्गत भी अपेक्षित ऋण वितरण नहीं किया गया है। प्रदेष में बैंकों की शाखाओं के दृष्टिगत स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना के अन्तर्गत यदि एक अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थी एवं एक महिला लाभार्थी को ऋण दिया जाय तो, प्रतिवर्ष 33,000 नये उद्यमी प्रदेष के आर्थिक पटल पर तैयार होंगें, जो प्रदेष के सार्थक विकास में अहम् भूमिका का निर्वाह करेंगे। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत बैंकों ने उत्तर प्रदेष में 15 जून, 2017 तक 3 लाख लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत किये है। इस प्रकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में भी बैंकों ने उत्तर प्रदेष की बड़ी जनसंख्या के बावजूद कम ऋण वितरण किया है।
उन्होंने बैंकों से इन दोनों योजनाओं के अन्तर्गत लाभार्थियों की आवष्यकताओं के अनुरूप अधिक से अधिक ऋण वितरण करने की अपेक्षा की।
योगी जी ने कहा कि राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में उद्यमषीलता को भी प्रोत्साहन देने पर भी बल दे रही है। उद्योगों की आवष्यकता के अनुरूप सभी जनपद मुख्यालयों को 24 घण्टे, तहसील मुख्यालयों को 20 घण्टे तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घण्टे की विद्युत आपूर्ति प्रारम्भ कर दी गयी है। प्रत्येक इच्छुक परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौषल विकास प्रषिक्षण प्रदान करने की दिशा मंे काम किया जा रहा है। इसी प्रकार ग्रामीण स्वरोजगार प्रषिक्षण संस्थानों (आर-सेटी) के माध्यम से भी स्वरोजगार हेतु प्रषिक्षण दिया जा रहा है। कौषल विकास मिषन एवं आर-सेटी के माध्यम से प्रषिक्षण प्राप्त एवं स्वरोजगार के इच्छुक व्यक्तियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत ऋण प्रदान करने में बैंकों द्वारा वरीयता दी जानी चाहिए।
प्रदेष में संतोषजनक कार्य नहीं हुआ है
मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रदेश में शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी अभी तक प्रदेष में संतोषजनक कार्य नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत इस वर्ष 10 लाख परिवारों को आवास दिये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों के लिए ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास’’ मिषन के अन्तर्गत क्रियान्वित की जा रही है। इसके अन्तर्गत पात्र शहरी गरीबों द्वारा आवास के अधिग्रहण/निर्माण के लिए, लिए गए गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी दिये जाने की व्यवस्था है । उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि केन्द्र/राज्य सरकार के सबके लिये आवास मिषन को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर ऋण वितरण करें।