धोखा, डींग और धमकी है मोदी सरकार का सिद्धांत : सोनिया गांधी

NEW DELHI: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने बुधवार को एक ओर जहां मोदी सरकार पर ‘‘धोखा, डींग और धमकी’’ को अपने शासन का सिद्धांत बनाने का आरोप लगाया, वहीं प्रतिद्वंद्वियों का ‘‘सामने से मुकाबला करने को लेकर’’ अपने बेटे राहुल गांधी की तारीफ भी की। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने अपने बेटे और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राहुल संगठन में नई ऊर्जा लेकर आए हैं और उन्होंने ऐसी टीम बनाई है जिसमें अनुभव और युवा जोश का सही तालमेल है।

 

केन्द्र पर हमला तेज करते हुए सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि देश में डर और संघर्ष का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम नए आत्मविश्वास और निश्चय के साथ आगामी लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हमारी जीत ने नई आशा दी है।’’ इस बैठक में अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद सहित अन्य लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रतिद्वंद्वियों को पहले अजेय बताया जाता था। कांग्रेस अध्यक्ष ने सामने से डटकर उनका मुकाबला किया, हमारे लाखों कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया जिन्होंने उनके साथ मिलकर अपना सबकुछ दिया। हम वहां जीते जिन्हें उनका गढ़ माना जाता था।’’

 

मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की नींव पर मोदी सरकार योजनाबद्ध तरीके से हमले कर रही है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा संविधान के मूल्यों, सिद्धांतों और प्रावधानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। संप्रग अध्यक्ष ने कहा, ‘‘संस्थाओं को बर्बाद किया जा रहा है, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाया जा रहा है, असहमत लोगों को दबाया जा रहा है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है।’’ सोनिया गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘धोखा, डींग और धमकी मोदी सरकार के सिद्धांत बने हुए हैं। सच्चाई और पारदर्शिता को एकदम दरकिनार कर दिया गया है।’’

 

संप्रग अध्यक्ष ने कहा कि पिछले पांच साल देश के लिए बेहद आर्थिक और सामाजिक दबाव वाले रहे हैं। मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर जल रहा है। अलगाववाद चरम पर है। दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। किसान अभूतपूर्व दुख में हैं। अभूतपूर्व पैमाने पर रोजगार नष्ट होने से युवा सूनी आंखों से बाट जोह रहे हैं।’’ वर्ष 2017 में पार्टी की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी द्वारा दिखाई गई नेतृत्व क्षमता की भी सोनिया गांधी ने तारीफ की।

 

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (राहुल गांधी) अथक परिश्रम किया है। वह उन राजनीतिक दलों से भी संपर्क कर रहे हैं जिनका भारत के प्रति दृष्टिकोण हमारे जैसा है, जो पूर्ण सामाजिक न्याय के साथ तेज आर्थिक विकास चाहते हैं, जो किसानों और खेत मजदूरों, महिलाओं और युवाओं, संगठित और असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों के कल्याण हेतु हमारे एजेंडे को मानते हैं।’’ राहुल गांधी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि संसद में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई जहां देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

 

उन्होंने लिखा, ‘‘ऐसे में जब इस संसद का कार्यकाल समाप्त होने को है, मैं संसद में अपने कांग्रेस भाइयों और बहनों से मिले समर्थन और प्रेम के लिए उनका आभारी हूं। उनके कठिन परिश्रम और समर्पण के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं।’’ बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि देश की जनता बुद्धिमान है और वह जानती है कि ‘जुमलेबाजी’ एक संवेदनशील और जवाबदेह शासन का विकल्प नहीं हो सकती है। जनता जानती है कि ‘‘भूल-भुलैया, मंच प्रबंधन और प्रबंधन के टोटके’’ जिम्मेदार और जवाबदेह शासन का विकल्प नहीं हो सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि जनता ने उनसे बोले गए झूठ का नतीजा देखा है और उसे अनुभव किया है। सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के पास असीम संसाधन हैं। वे कोई लिहाज नहीं करेंगे और हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे। हम उनका मुकाबला करेंगे। हम अपनी पूरी ताकत लगाकर उनके खिलाफ लड़ेंगे।’’ उन्होंने दावा किया कि संसद बेहद कमजोर हो गई है और वहां चर्चाओं और बहस का गला घोंटा जा रहा है।

 

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि स्थाई समितियां खत्म सी हो गई हैं। दोनों सदनों में चर्चा और छंटनी से बचने के लिए धन विधेयक का रास्ता अपनाया जा रहा है। वही धन विधेयक जिसे उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश ने ‘संविधान के साथ फर्जीवाड़ा’ कहा था।

कोई भी मोदी की ईमानदारी पर सवाल नहीं खड़ा कर सकता : राजनाथ

NEW DELHI: राफेल विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने पर विपक्ष पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि कोई भी मोदी की ईमानदारी पर सवाल खड़ा नहीं कर सकता और प्रतिद्वंद्वी दलों को लोगों की आंखों में धूल झोंकने एवं उन्हें गुमराह करने से बाज आना चाहिए। सिंह ने कहा कि जो लोग बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए कि मोदी किसके लिए, अपनी पत्नी के लिए, बच्चे के लिए’ संपत्ति बनायेंगे? कौन है उनका? वह इसे किसे देंगे।

 

उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव हेतु भाजपा के संकल्प पत्र के लिए सुझाव जुटाने के लिए बुद्धिजीवियों के साथ बाचतीत के दौरान कहा, मैं आहत महसूस करता हूं। मैं लंबे समय से मोदी को जानता हूं…यदि आप चाहते हैं तो आप दूसरे आरोप लगा सकते हैं कि मोदी ने कम काम किया या फिर मोदी और काम कर सकते थे- लेकिन कोई भी प्रधानमंत्री की ईमानदारी और मंशा पर सवाल खड़ा नहीं कर सकता। आपको लोगों को गुमराह कर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों समेत भाजपा के किसी भी नेता पर भ्रष्टाचार का दाग नहीं है। पार्टी के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपने विरुद्ध आरोप लगने पर इस्तीफा देकर एक उदाहरण स्थापित किया था। सिंह ने कहा,‘‘किसी ने कहा कि प्रथम ²ष्टया मामला बनता है, इसलिए आडवाणीजी ने इस्तीफा देकर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वह तबतक संसद में कदम नहीं रखेंगे जबतक उनका नाम पाक-साफ नहीं हो जाता। वह हवाला घोटाला में नाम आने के बाद 1996 में आडवाणी द्वारा सांसद के तौर पर इस्तीफे का जिक्र कर रहे थे।

 

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने देशभर से 10 करोड़ लोगों से सुझाव जुटाने के लिए तीन फरवरी को एक महीने का ‘भारत के मन की बात, मोदी के साथ’ अभियान शुरू किया था। पार्टी के बिहार मामलों के प्रभारी भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, राज्य के मंत्री नंद किशोर यादव और प्रेम कुमार भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का संचालन पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने किया। सिंह ने कहा कि राजनीति लोगों के बीच झूठ फैलाने और उनकी आंखों में धूल झोंकने के आधार पर नहीं होनी चाहिए बल्कि यह सच और केवल सच से निॢदष्ट होनी चाहिए।

PM मोदी की DMK चीफ एम करुणानिधि से मुलाकात, अटकलें गर्म

NEW DELHI. पीएम नरेंद्र मोदी के एक मूव ने दक्षिण भारत की राजनीति में सोमवार को राजनीतिक जानकारों को हैरत में डाल दिया। मोदी सोमवार को अपने चेन्नैदौरे के दौरान डीएमके चीफ करुणानिधि से मिलने पहुंचे। बता दें कि तमिलनाडु में बीजेपी को डीएमके की धुर विरोधी एआईएडीएमके का करीबी माना जाता है। डीएमके भी केंद्र सरकार की नीतियों की कट्टर आलोचक रही है। ऐसे में मोदी और करुणानिधि की यह मुलाकात हर किसी को हैरान कर रही है। मोदी ने करुणानिधि से मुलाकात ही नहीं की, बल्कि उन्हें दिल्ली में अपने आवास पर आने का न्योता भी दिया।

इससे अटकलें गर्म हैं कि क्या तमिलनाडु में बीजेपी नए समीकरण तलाश रही है। हालांकि बीजेपी ने मोदी-करुणानिधि की मुलाकात पर ऐसी सभी अटकलों को खारिज किया है। बीजेपी ने इसे बस एक शिष्टाचार भेंट बताया है।

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान मोदी ने करुणानिधि को दिल्ली में उनके आवास पर आने का न्योता दिया और वहां आराम करने का आग्रह भी किया। बता दें कि राज्य के पूर्व सीएम और डीएमके अध्यक्ष करुणानिधि पिछले काफी समय से बीमार चल रहे हैं। पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और राज्य के बीजेपी चीफ भी मुलाकात करने पहुंचे थे।

इससे पहले करुणानिधि के बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन और उनकी बहन तथा राज्यसभा सांसद कणिमोझी दरवाजे पर पीएम को रिसीव करने पहुंचे और फिर छोड़ने भी आए। दोनों नेताओं ने हाथ हिलाकर पीएम को विदा किया। बता दें कि पीएम मोदी सोमवार को चेन्नै के दौरे पर थे।

गौरतलब है कि तमिलनाडु जे. जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके अभी भी दो धड़ों में बंटी हुई है। पहला धड़ा सीएम पलनिसामी और ओ पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाला है, जबकि दूसरा धड़ा शशिकला के नेतृत्व वाला है। पलनिसामी और पन्नीर धड़े को एक करने में बीजेपी की भूमिका अहम मानी जाती है।

आयुर्वेद में 100% भरोसा जरूरी : मोदी

New delhi .नरेंद्र मोदी ने दूसरे आयुर्वेद दिवस के मौके पर मंगलवार को दिल्ली में देश के पहले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) का इनॉगरेशन किया। राजधानी के सरिता विहार इलाके में इसे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) की तर्ज पर बनाया गया है। इस मौके पर पीएम ने आयुर्वेद की पढ़ाई करने वालों से ही पूछा कि उन्हें क्या इसमें 100% भरोसा है। मोदी ने आगे कहा कि लोग हॉस्पिटल की शुरुआत आयुर्वेद का बोर्ड लगाकर करते हैं, फिर अंदर अंग्रेजी इलाज होने लगता है।

इस मौके पर मोदी ने कहा, “साथियों, आयुर्वेद को बढ़ाने के लिए देश के हर जिले में अच्छी सुविधाओं से लैस एक आयुर्वेदिक अस्पताल जरूर होगा। आयुष मंत्रालय ने इसकी शुरुआत कर दी है। अब तक ऐसे 65 अस्पताल बन चुके हैं।”
“मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं कि वेलनेस का ऐसा माहौल बने कि आपको यहां तक आने की नौबत ना आए। आज इस इंस्टीट्यूट से आयुर्वेद को नई ऊर्जा मिल रही है। यह संस्थान रिसर्च और हेल्थ प्रैक्टिस का केंद्र बनेगा।”
आयुर्वेद पढ़ते हैं तो उसमें भरोसा भी रखें
मोदी ने कहा, “मुझे बताएं कि आज जो स्टूडेंट्स आयुर्वेद पढ़कर निकलते हैं। कितनों की 100% श्रद्धा आयुर्वेद में है। जब कोई मरीज आता है तो कहता है यार जल्दी ठीक हो जाऊं इसके लिए एलोपैथिक ही दे दो। बाहर बोर्ड तो आयुर्वेद का लगा होता है, लेकिन अंदर इलाज होने लगता है अंग्रेजी।”
एक कहानी है कि एक बार किसी ने नौकर से पूछा मालिक कहां गए तो उसने कहा वो तो आगे वाले रेस्टोरेंट में खाने गए हैं। मुझे बताएं कि उसके रेस्टोरेंट में कौन खाने आएगा। यही हाल आयुर्वेद का है। जब डॉक्टर्स ही अपने इलाज के लिए एलोपैथिक डॉक्टर से सामने लाइन में खड़े रहेंगे तो कौन उनसे इलाज कराएगा।”
हर कोर्स के लिए मिले अलग सर्टिफिकेट
 मोदी ने कहा, “आयुर्वेद के अलावा फिजियोथैरिपी में भी बड़ा स्कोप है। आजकल तो खिलाड़ियों के साथ कई बड़े लोग अपने पर्सनल फिजियो रखते हैं। 4 साल तक बीएएमएस की पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स को आयुर्वेद, योग, पंचकर्म समेत कई कोर्स पढ़ाए जाते हैं। मैं सोचता हूं कि उन्हें हर कोर्स के लिए अलग सर्टिफिकेट दिया जाए, ताकि वो डिग्री के साथ-साथ अपनी प्रैक्टिस शुरू कर सकें।”
अायुर्वेद में डाटा और रिसर्च बहुत जरूरी
पीएम ने कहा, “आयुर्वेद में डाटा और रिसर्च मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। एक कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे घरों से आयुर्वेद दूर है, क्योंकि इसकी पद्धति आज के जमाने के हिसाब से नहीं है। लोग इसी से परेशान हो जाते हैं कि पहले दवाई को उबालो, फिर छानो, सुखाओ। आज इन दवाओं की पैकेजिंग की जरूरत है, ताकि एलोपैथिक की तरह ही उन्हें दवाएं तैयार मिल सकें।”
हर्बल दवाओं का ग्लोबल मार्केट हो रहा तैयार
दुनिया में हर्बल दवाओं का ग्लोबल मार्केट तैयार हो रहा है। भारत को भी इसमें भागीदार होना है। औषधीय खेती के लिए काम करना होगा।”
आपने देखा होगा कि विटामिन बी12 के लिए सी-बीट की खेती होती है। अगर हम नई टेक्नोलॉजी पर काम करें तो उन मछुआरों की जिंदगी में भी रोशनी बिखेर सकते हैं। हम 2022 तक किसानों की इनकम दोगुना करना चाहते हैं कृषि और आयुष मंत्रालय इसके लिए मिलकर काम करें।”
गरीबों को मिले सस्ता इलाज
मोदी ने कहा, “दुनिया बड़ी आशा भरी नजरों से भारत के आयुर्वेद और योग की ओर देख रही है। हम हर तरह के हेल्थ सिस्टम का सम्मान करते हैं। सभी को अपनी तरक्की का हक है। सरकार का टारगेट है कि कैसे भी हो गरीबों को सस्ता इलाज मिले। हमने मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की थी, इसके तहत 2.5 करोड़ बच्चों और 70 लाख महिलाओं को टीका लगाया जा चुका है।”
इन बच्ची की जिंदगी अनमोल है। पहले टीकाकरण में बढ़ोतरी 1% थी, जो तीन साल में अब 6.5% हो चुकी है।
आयुर्वेद का टॉप इंस्टीट्यूट होगा
 पहले फेज में इस इंस्टीट्यूट को 10 एकड़ में बनाया गया है। इसे तैयार करने में 157 करोड़ रुपए की लागत आ रही है। इसे एक्रीडिएशन बोर्ड ऑफ हॉस्पिटल (NABH) से मंजूरी मिली हुई है। इस इंस्टीट्यूट में एक एकेडमिक ब्लॉक भी है।
पिछले साल ही शुरू हुआ आयुर्वेद दिवस
देश में पहला आयुर्वेद दिवस पिछले साल मनाना गया था। धन्वंतरि जयंती के मौके पर मोदी सरकार ने इसकी शुरू की। इसका मकसद भारत के पारंपरिक आयुर्वेदिक इलाज को बढ़ावा देना है। धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है।

RSS : PM मोदी के जीवन पर लिखी किताब ‘द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड’ का विमोचन

(नीता बुधौलिया)

नई दिल्ली :  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि कर्तृत्व संपन्न लोगों के चरित्र लिखे जाते हैं। जिनको बाहरी जगत में करिश्माई नेता कहा जाता है उनके जीवन चरित्र लिखे जाते हैं। इससे पहले भी नरेन्द्र मोदी के जीवन पर वृत्तांत आए हैं किन्तु इस बार उसको लिखने वाले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक जी का भी जीवन तथा कर्तृत्व सम्पन्नता नरेन्द्र मोदी जी की ही तरह है, इसलिए मैंने यहां आना स्वीकार किया. व्यक्तित्व जो दिखता है और जो होता है उसमें एकरूपता होनी चाहिए।

पीएम मोदी व्यक्तित्व, कर्तृत्व और नेतृत्व की वजह से आज हम सभी के लिए  ध्यान देने योग्य हैं। इस पुस्तक से उनके बारे में जानें ये उनके लिए नहीं हमारे लिए जरूरी है। व्यक्तित्व की चमक उनकी बाहर से दिखने वाली सम्पदा से नहीं आती उनके मन के अन्दर की सम्पदा से आती है।

—योग्य बनना है तो कर्तृत्व पर ध्यान दें : मोहन भागवत 

नरेन्द्र भाई एक व्यक्ति के नाते, एक स्वयंसेवक के नाते, एक कार्यकर्ता के नाते गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले जैसे थे वैसे आज भी हैं। प्रसिद्धि के प्रकाश में रहते हुए भी अपने व्रत को निभाते हुए चलना नरेन्द्र भाई मोदी को आता है, ऐसा डॉ. पाठक का भी कर्तृत्व है।

डॉ. मोहन भागवत सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘द मेकिंग ऑफ अ लीजेंड’ को लोकार्पण के अवसर पर नई दिल्ली स्थित मावलंकर हॉल में सभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने इस अवसर पर बताया कि अगर हमको योग्य बनना है तो कर्तृत्व संपन्न लोगों के कर्तृत्व के पीछे क्या है, कर्तृत्व का मूल कहां है यह जानना आवश्यक है।

 

किसी भी कार्य को असंभव ना मानते हुए, जो होना चाहिए वो करने के लिए प्रयत्न करना, होना क्या चाहिए इसकी बात तो आजादी के बाद अपने देश में निरंतर चली है, 70 साल से नहीं हुई, अब हो रही है तो क्यों हो रही है। कर रहे हैं इसलिए हो रही है, कर क्यों रहे हैं, क्योंकि उसको असंभव नहीं मानते तो कर के देखेंगे, कैसे करना है सोचेंगे। ऐसा नहीं होता तो वैसा करके देखेंगे. यह कर्तृत्व के पीछे छिपा कर्तृत्व है जिस पर हमारा ध्यान जाना चाहिए।

देश के गांव-गांव में सुलभ शौचालय बनवा कर सिर पर मैला ढोने की अमानवीय प्रथा से वाल्मीकि समाज को मुक्ति दिलाने वाले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक तथा पुस्तक के लेखक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने इस अवसर पर कहा कि या तो हिन्दू धर्म रहेगा या इसमें व्याप्त छुआछूत. हिन्दू धर्म तो रहेगा लेकिन हम लोग छुआछूत को इस देश से समाप्त कर देंगे.

भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह ने बताया कि कैसे एक गरीब घर में जन्मा बालक कर्तव्य परायणता और ईश्वर प्रदत्त गुणों के कारण सर्वोच्च पद तक पहुंचा। यह पुस्तक ऐसे नरेन्द्र दामोदर दास मोदी के जीवन की सचित्र गाथा है। कार्यक्रम में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष डॉ. बलदेव भाई शर्मा ने की।

बाप रे, प्रधानमंत्री मोदी पर दूल्हे-दुल्हन में झगड़ा, टूट गई शादी

कानपुर। राजनीतिक विचारधारा मेल न खाने से एक तय हुई शादी टूट गई। एक बिजनसमैन की शादी एक गवर्नमेंट एम्लॉयी लड़की से तय हुई थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लड़के और लड़की में झगड़ा हो गया और आखिरकार शादी से एक दिन पहले ही दोनों का रिश्ता टूट गया।

शादी की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा के लिए लड़का और लड़की अपने-अपने परिवार के साथ एक मंदिर गए थे। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा।

इसी बीच दोनों के बीच देश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा होने लगी। लड़की ने देश की आर्थिक स्थिति को खराब बताया और इसके लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया। दूसरी तरफ लड़का मोदी के खिलाफ कुछ भी नहीं सुनना चाहता था। जल्द ही दोनों के बीच गरमा-गरम बहस शुरू हो गई।

लड़की ने कहा कि शादी के लिए वह विचार नहीं बदल सकती। उसने कहा कि वह जो भी सोचती है, वही कह रही है और ये जरूरी नहीं कि लड़के को जो ठीक लगे वही उसे भी लगे। इस पर लड़के ने साफ कर दिया कि वो मोदी के खिलाफ वह एक शब्द भी बर्दाश्त नहीं कर सकता।

 

इसके बाद दोनों के बीच बात इतनी बढ़ गई कि लड़की ने शादी न करने का ऐलान कर दिया। दोनों के बीच इस लड़ाई के बाद दोनों परिवारों ने कोशिश की कि मामला शांत हो जाए लेकिन दोनों ही शादी न करने की बात पर अड़े रहे। लड़की ने शादी तोड़ने के फैसले पर कहा कि वह ऐसे आदमी के साथ कैसे जिंदगी भर रह सकती है, जो उसके विचारों की कोई कद्र न करे।