पुस्तक घोटाला मामला: मंजीत सिंह सहित तीन के खिलाफ केस दर्ज

NEW DELHI: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में 82 हजार धार्मिक पुस्तकों की छपाई में हुए बड़े घोटाले के मामले में दिल्ली कमेटी के पूर्व प्रधान मंजीत सिंह जीके सहित तीन लोगों पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। अदालत के आदेश के बाद नॉर्थ एवन्यू थाने में धारा 420/34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसमें जीके के अलावा निलंबित चल रहे महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार, कमेटी के पूर्व संयुक्त अमरजीत सिंह पप्पू भी शामिल हैं। अदालती निर्देश के बाद हुई कार्रवाई के बाद दिल्ली में सिख सियासत गरमा गई है।

 

इससे पहले बुधवार को पटियाला हाउस कोर्ट के सेशन जज ने आदेश दिया था कि मंजीत सिंह जीके के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और हम मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विजेता सिंह रावत के आदेश को बहाल करते हैं। इस कार्रवाई के बाद जीके विरोधी खेमा एवं विपक्षी पार्टियां एलर्ट हो गई हैं। बता दें कि यह कार्रवाई दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य गुरमीत सिंह शंटी की शिकायत पर हुई है। शंटी ने ही पुस्तक घोटाले को उजागर किया था और स्थानीय पुलिस में शिकायत दी थी। लेकिन, स्थानीय पुलिस ने इसे नजरअंदाज कर दिया। आखिरकार शंटी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

 

इसके बाद 13 दिसंबर 2018 को पटियाला हाउस कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने के दिल्ली पुलिस को आदेश दिए थे, लेकिन 24 घंटे का समय पूरा होने के भीतर ही निलंबित जीएम हरजीत सिंह सूबेदार ने आदेश को चुनौती दे दी थी। इसके बाद अदालत ने मामले में फैसला आने तक एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। अब पुलिस ने सभी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर दिल्ली कमेटी ने भी गुरमीत शंटी पर पलटवार किया है। कमेटी के धर्म प्रचार प्रमुख एवं जीके के करीबी परमजीत सिंह राणा ने कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी के खिलाफ संबंधित थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें मानहानी का दावा किया गया है।

 

मंजीत सिंह के खिलाफ सख्त धाराओं में दर्ज हो केस : शंटी
दिल्ली कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने दिल्ली पुलिस द्वारा हल्की धाराओं में के स दर्ज करने पर विरोध जताया है। साथ ही आरोप लगाया कि मंजीत सिंह जी.के. के राजनीतिक प्रभाव के कारण पुलिस ने जानबूझ कर कम संगीन धाराएं लगायी है, जबकि मंजीत सिंह जी.के. और अन्य लोगों के खिलाफ आई.पी. सी. की धाराएं 420, 467, 468, 471, 409, 120 बी. 34 तथा इनकम टैक्स की धारा 276 (सी.) (1 ), 277 और 277 (ए.) और ब्लैक मनी कानून के अंतर्गत धारा 51 के अंतर्गत केस दर्ज होना चाहिए।

 

शंटी ने कहा कि कमेटी के निलंबित जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार की तरफ से सेशन कोर्ट में एफआईआर पर रोक लगाने के लिए जो याचिका दायर हुई थी उसको निरस्त करते हुए कोर्ट ने निचली अदालत के आर्डर को कायम रखा। शंटी ने हल्की धाराओं में केस दर्ज होने के खिलाफ पटिआला हाउस कोर्ट में फिर पेश हुए। शंटी ने अपनी दलील में अदालत को बताया कि दोनों प्रकाशक सरकारी गवाह बन चुके हैं और उन्होंने यह भी स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने प्रबंधकों के दबाव में आकर नकली बिल बनाये और कमेटी के कर्मचारी धरमिंदर सिंह, प्रभजीत सिंह और परमिंदर सिंह ने भी पैसे सम्बन्धी हुए लेन – देन को स्वीकारा है, तो किस प्रकार पैसे की हेराफेरी से इंकार किया जा सकता है। पुलिस की छानबीन में भी यह बात साहमने आयी है तो फिर उचित धाराओं में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। शंटी के मुताबिक अदालत ने इस मामले में उचित धाराएं लगाने की हिदायत देते हुए 14 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

मंजीत सिंह जीके की बढ़ी मुश्किलें, होगी FIR

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में 82 हजार धार्मिक पुस्तकों के हुए घोटाले में कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू एवं निलंबित महाप्रबंधक हरजीत सिंह सुबेदार की मुश्किलें बढ़ गई है। तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में अदालत में डाली गई पुर्नविचार याचिका को आज पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया। लिहाजा, अब तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है, इसकी प्रबल आशंका बन गई है।

बता दें कि पिछले दिनों भ्रष्टाचार के एक मामले को लेकर सीएमएम विजेता सिंह ने हरजीत सिंह सुबेदार, दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद हरजीत सिंह सुबेदार ने अपने बचाव में पटियाला हाउस कोर्ट के सेशन जज सतीश कुमार अरोड़ा की अदालत में पुर्नविचार याचिका दाखिल की गई थी। इसमें सुबेदार की तरफ से दलील दी गई थी कि निचली अदालत ने उनका पक्ष सुने बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है।

–गुरुद्वारा कमेटी में भ्रष्टाचार के मामले में खारिज हुई याचिका
–कमेटी के पूर्व प्रबंधक एवं संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू भी शामिल
–दिल्ली की सिख सियासत को लग सकता है बड़ा झटका

इसपर अदालत ने अग्रिम स्थगन आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को निर्धारित की थी। 7 जनवरी को सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज सुनाए गए फैसले में अदालत ने हरजीत सिंह सुबेदार की याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही अपना विस्तृत आदेश संबंधित कोर्ट को भेजने की बात कही है। निचली अदालत ने इस मामले की सुनवाई वीरवार 10 जनवरी को करेगी। इसलिए यह आशंका जताई जा रही है कि दिल्ली पुलिस अब इस मामले में मंजीत सिंह जीके सहित तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके अदालत के सामने पेश कर सकती है। बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा 82 हजार धार्मिक पुस्तकों की खरीद में फर्जी बिलों के आधार पर दिखाने का आरोप है। इस मामले को दिल्ली कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने उजागर किया था। शंटी ने ही पुलिसिया कार्रवाई न होने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। शंटी की तरफ से अधिवक्ता राजिंदर छावड़ा ने घोटाले की सभी कडिय़ों को जोड़ते हुए अदालत के समक्ष तथ्य पेश किए थे।

भ्रष्ष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत : गुरमीत शंटी


दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य एवं पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि आज भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी बड़ी जीत हुई है। कमेटी के अध्यक्ष एवं उनके मातहतों ने धार्मिक स्थल पर गोलक की लूट की है। यही कारण है कि अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ के सख्त कार्रवाई करते हुए 19 पेज का विस्तृत आर्डर लिखा है। इसमें सभी कारणों को बताया गया है कि एफआईआर करना क्यों जरूरी है, जिसमें प्रथम दृष्टया पाया गया है कि इस मामले में बड़े मामले में बड़ा करप्शन एवं फ्राड हुआ है। शंटी ने कहा कि अब किसी भी सूरत में दिल्ली कमेटी के भ्रष्टाचारी बच नहीं सकते हैं। इसके लिए वह हर लड़ाई लडऩे को तैयार हैं।

 

सरना ने सुखबीर बादल से मांगा इस्तीफा

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि पटियाला हाउस कोर्ट के सत्र न्यायाधीश द्वारा मंजीत सिंह जी.के. के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश बरकरार रखने के बाद अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल को तुरंत पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। सरना ने कहा कि गुरु की गोलक की लूट करने वालों को कमेटी में नियुक्ति करने का असल व्यक्ति वही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली कमेटी के जनरल हाउस को भंग करके कमेटी के आम चुनाव होने चाहिए।