दक्षिणी मुंबई में ढहा फुट ओवर ब्रिज, पांच की मौत, 29 घायल

NEW DELHI: दक्षिणी मुंबई में एक रेलवे स्टेशन के पास बृहस्पतिवार शाम पैदल पार पुल का बड़ा हिस्सा ढह जाने से पांच लोगों की मौत हो गई और 29 घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रसिद्ध सीएसएमटी स्टेशन के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया इमारत के पास वाले इलाके को जोड़ने वाले इस पुल को आम तौर पर ‘कसाब पुल’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान आतंकवादी इसी पुल से गुजरे थे।

 

आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अधिकारी ने बताया कि सभी घायलों को निकटवर्ती अस्पतालों में ले जाया गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जब पुल ढहा तब पास के सिग्नल पर लाल बत्ती के चलते ट्रैफिक रुका हुआ था और इसी कारण से ज्यादा मौतें नहीं हुई। वहीं अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि आज सुबह पुल पर मरम्मत कार्य चल रहा था इसके बावजूद इसका इस्तेमाल किया गया।

 

अधिकारी ने बताया कि घटना शाम साढ़े सात बजे हुई जब पुल का अधिकांश हिस्सा गिर गया। उन्होंने बताया, च्च्दमकल कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। हमने मोटर यात्रियों से डी एन मार्ग से लेकर जे जे फ्लाईओवर तक के रास्ते पर जाने से बचने के लिए कहा है।

 

मुंबई पुलिस ने ट्वीट किया, सीएसटी के प्लेटफॉर्म संख्या एक के ऊत्तरी छोर को टाइम्स ऑफ इंडिया इमारत के पास बीटी लेन से जोडऩे वाला पैदल पार पुल ढह गया है। यातायात प्रभावित हो गया है। यात्री अन्य मार्गों का इस्तेमाल करें। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।

समाज में विकार पैदा हो रहे हैं : अश्वनी लोहानी

NEW DELHI: रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने यहाँ इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में बींग गुड नामक पुस्तक का विमोचन किया। किताब के लेखक डा. नंदितेश निलाय हैं। इस मौके पर लोहानी ने कहा कि समाज में कई प्रकार के विकार पैदा हो रहे है। इसलिए बींग गृुड जैसे किताब को लिखने की अवश्यकता महसूस की गई है।

 

अपने अनुभवों को साझा करते हुए लोहानी ने कहा कि एयर इंडिया, मध्य प्रदेश पर्यटन, आईटीडीसी विभागों में भ्रष्टाचार कम करने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान अथवा संगठन को आगे बढ़ाने में कर्मचारियों की निष्ठा व कर्मठता प्रमुख होती है। यदि पारदर्शी वातावरण मिले तो संस्थान को नई ऊंचाई लाया जा सकता है।

 

लोहानी ने कहा कि, अच्छा होना तो सामान्य बात होनी चाइए लेकिन शायद आज समाज वैसा है नहीं इसलिए बींग गुड़ नामक किताब पब्लिश किया गया। इस मौके पर किताब में लेखक डॉक्टर नंदितेश निलाय ने ह्यूमन वैल्यूज़, डेज़िग्नेशन द नेक्स्ट आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा किया है। साथ ही ये वैल्यूज़ वर्तमान समाज में क्यों आवश्यक है, बताने की कोशिश किया है।

 

किताब के विमोचन के दौरान लोहानी ने सरकारी विमानआन कम्पनी एर इंडिया, आईटीडीसी, मध्य प्रदेश टुरिज़म कॉर्परेशन लिमिटेड आदि में व्याप्त करप्शन और उससे उनकी लड़ाई के बारे अपने अनुभव साझा किया।

रेलवे में ‘जीरो-एक्सीडेंट’ के लिए आधुनिक पहल

NEW DELHI: भारतीय रेलवे ने मिशन-जीरो एक्सीडेंट के लिए बड़ी कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत लंबे रेलवे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नल प्रणाली स्थापित करने जा रहा है। इसके लिए पहले चरण में देश के तीन रेलवे रूटों का चयन किया गया है। करीब 450 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक पर एकीकृप सिग्नल प्रणाली लगाया जाएगा। इसपर 1200 करोड़ रुपये लागत आएगी।

 

भारतीय रेलवे ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसमें दिल्ली-चैन्नई रूट के झांसी-बीना के बीच 150 किलोमीटर ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके अलावा रेनिगुंटा सेक्शन (155 किलोमीटर), विजियानाग्राम सेक्शन (140 किलोमीटर) सहित मध्य रेलवे में आधुनिक सिग्नल सिस्टम लगाया जाएगा। इस आधुनिक यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) के अलावा एलटीई बेस्ड मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्यूनिकेशन (एमअीआरसी) सिस्टम भी लगाया जाएगा।

 

इसके अलावा सुदूर छोटे दो स्टेशनों के बीच (सेक्शन) टे्रनों-मालगाडिय़ों की पता लगाने के लिए डाग्नोस्टिक एंड प्रीटेक्टिव सिस्टम, एडवांस मेनटेंस सिस्टम लगाए जांएगे। यह सभी आधुनिक तकनीक की मदद से रेलवे ट्रैक, स्टेशन, सिग्नल सिस्टम, इंटरलॉकिंग सिस्टम आदि ऑनलाइन निगरानी हो सकेगी। खास बात यह है कि समयबद्ध मरम्मत व एडवांस मरम्मत की जरुरत का पता चल सकेगा। साथ ही एकीकृत सिग्नल सिस्टम मानवीय त्रुटि की गुंजाइश समाप्त कर देगा।

 

जानकारी के मुताबिक मिशन जीरो एक्सीटेंड लागू कर रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। रेलवे पहली बार कई आधुनिक तकनीकों का एकीकृत रूप में इस्तेमाल करने जा रहा है। ट्रेन परिचालन के पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत होने से मानवीय चूक से होने वाले ट्रेन हादसे थम जाएंगे।

 

बता दें कि ईटीसीएस लेवल-1 जिसे टे्रन प्रोटेक्शन एंड वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) के नाम से जानते हैं, 342 किलोमीटर ट्रैक पर लगाया जा चुका है। यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल-2 है। यह अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें वायरेस के जरिए सूचनाएं ट्रेन ड्राइवर को मिलेंगी। इसकी विशेषता यह है कि इंजन के केबिन में लगे स्क्रीन पर सिस्टम आगे चल रही ट्रेन की रफ्तार का अंदाजा स्वत: लगा लगेगा

 

इसके आधार पर स्क्रीन पर ड्राइवर को सिग्नल हरा, पीला अथवा लाल दिखाई देगा। जानकारी के मुताबिक ईटीसीएस आगे दौड़ती टे्रन की रफ्तार के आधार पर पीछे वाली ट्रेन की गति तय कर देती है। आगे की टे्रन रुकने पर सिस्टम लाला सिग्नल दिखाने के साथ अलार्म बजाता है। यदि ड्राइवर बे्रक नहीं लगाता है तब टे्रन में ईटीसीएस स्वत: बे्रक लगा देता है।

आईये, आपको बुला रहा है भारत का स्विट्जरलैण्ड

NEW DELHI. अगर आप नये साल का जश्न मनाने के लिए विदेश नहीं जा पाए हैं तो परेशान न हों, आपके लिए कश्मीर घाटी यात्रा के लिए तैयार है। साल के एक बड़े हिस्से में बर्फ से ढकी रहने वाली कश्मीर घाटी देश का स्विट्जरलैण्ड के रूप में मशहूर हो चुका है। तो, अब कश्मीर यात्रा के लिए हो जाइए तैयार! उत्तर रेलवे के साथ चलिए भारत के एक अनोखे भू-भाग में। एक विशिष्ट संस्कृति, आस्था के ताने-बाने, एक समृद्ध विरासत, कुटीर और लघु उद्योग, कढ़ाई, अखरोट की लकड़ी से बने फर्नीचर, हाथ के बुने कार्पेट, हैंड-रग, कीमती केसर के साथ-साथ मिलिए वहां के अदभुत एवं मिलनसार लोंगों से । यह भारत की भूमि है। विविधता में एकता दर्शाने वाली एक अनोखी संस्कृति…।
सर्दियों में पर्यटकों के लिए इस खूबसूरत घाटी में पहुँचना एक सपने के समान था, क्योंकि सर्दियों में भारी हिमपात के कारण जवाहर सुरंग से गुजरने वाला सड़क सम्पर्क पूरी तरह से बन्द हो जाता है। अब भारतीय रेलवे ने विशेष खूबियों वाली डीईएमयू रेलगाड़ियों के जरिए यहां के लिए एक सुगम और निर्बाध रेल सम्पर्क उपलब्ध करा दिया है ।

 

 

भारतीय रेलवे नेटवर्क के जरिए एक युग की सुबह

भारत की इस खूबसूरत घाटी को देश के शेष भागों से जोड़ने के लिए स्वप्निल परियोजना के रूप में इसकी शुरूआत हुई। भारतीय रेलवे इसे चरणबद्ध रूप में पूरा करने का अपना वादा निभा रही है । उत्तर रेलवे के उधमपुर -श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना दल दृढ़ निश्चय और चरणबद्ध रूप से इस पर निरंतर कार्य कर रहा है और देश के उस हिस्से तक अपनी पहुँच बना रहा है जो अलग-थलग पड़ जाता था । इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया गया है। हिमालय पर्वत के कठिन हिस्सों से होकर गुजरने वाली यह रेल लाइन विश्व की सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण रेल लाइन है।

 

कश्मीर घाटी में रेल नेटवर्क

चरणबद्ध रूप से कार्य करते हुए रेलवे ने पहले अनंतनाग से मझोम तक 68 किलोमीटर उसके बाद मझोम से बारामूला 32 किलोमीटर तत्पश्चात काज़ीगुण्ड से अनंतनाग 18 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन का कार्य पूरा करके कश्मीर घाटी में रेल सम्पर्क उपलब्ध कराया। इस लाइन पर सबसे लंबी रेल सुरंग, पीर पंजाल रेल सुरंग जम्मू एवं कश्मीर रेलवे के इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा तथा बनिहाल सेक्शन को रेल रेटवर्क से जोड़ने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है ।

पीर पंजाल सुरंग:

 

11 किलोमीटर लंबी टी-80 सुरंग सबसे लंबी यातायात सुरंग है। यह पीर पंजाल पर्वत क्षेत्रों से गुजरते हुए कश्मीर घाटी को जोड़ती है । यह जम्मू के लोगों को हर मौसम में उपलब्ध रहने वाला वैकल्पिक यातायात माध्यम उपलब्ध कराती है। 7 वर्ष 5 महीने में तैयार की गई इस सुरंग को 150 इंजीनियरों और 1300 फील्ड कर्मियों ने दिन-रात के अथक श्रम से पूरा किया है। इस लाइन के निर्माण में तीन लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट और 7500 मीट्रिक टन इस्पात का उपयोग किया गया है।

रेलवे स्टेशन:

इस सैक्शन पर पड़ने वाले रेलवे स्टेशनों में बनिहाल, शाहाबाद हॉल्ट, काज़ीगुण्ड, सदूरा, अनंतनाग, बिजबहेड़ा, पंजगाम, अवन्तीपुरा, काकापोर, पम्पोर, श्रीनगर, बड़गाम, मझोम, पट्टन, हामरे, सोपोर और बारामूला शामिल हैं।

 

 

कश्मीर घाटी रेलवे के लिए विशेष प्रकार के डीईएमयू डिब्बे:

 

इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई द्वारा खास खूबियों वाला एक रेल इंजन इस लाइन के लिए डिजाइन किया है। यह 1400 अश्वशक्ति का डीज़ल इंजन है। इंजन को सर्दियों में तत्काल स्टार्ट करने और गर्म रखने की सुविधा है । इसके चालक कक्ष का बाहरी सिरा फाइबर के प्लास्टिक नोज़ कोन वाला है जो इंजन के आगे के हिस्‍से को खूबसूरत बनाता है। चालक कक्ष को गर्म रखने तथा कश्मीर के शीतकालीन मौसम में कोहरे को हटाने के लिए डी-फॉगिंग यूनिट और स्पष्ट दृश्यता के लिए सिंगल लुक आउट ग्लास है। सर्दियों में पटरियों पर गिरी बर्फ को हटाने के लिए इंजन के आगे स्नो कटिंग टाइप कैटल गार्ड लगे हैं।

11 जोड़ी डीईएमयू रेलगाड़ियां उपलब्ध

 


उत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी दीपक कुमार के मुताबिक इस सेक्शन पर चलाई जा रही 11 जोड़ी डीईएमयू रेलगाड़ियां हर मौसम में रेल सुविधा उपलब्ध कराती हैं । जनयातायात के रूप में शुरू की गयी यह रेल सेवाएं बहुत जल्दी ही वहाँ के लोगों में लोकप्रिय हो गई हैं । रेल यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या के मद्देनजर डीईएमयू रेलगाड़ियों की यात्री वहन क्षमता भी बढ़ाई गयी है।

 

यात्री कृपया ध्यान दें… होली पर रेलवे ने चलवाईं 9 स्पेशल ट्रेनें

NEW DELHI. होली पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने खास व्यवस्था की है। रेलवे ने 9 स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की घोषणा की है। पूर्व-मध्य रेलवे की तरफ से की गई इस व्यवस्था से लाखों की संख्या में यात्रियों को त्योहार के दौरान अच्छी सुविधा हासिल हो सकेगी।

 

1- आसनसोल-पटना होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 03561, आसनसोल-पटना होली स्पेशल ट्रेन 24 व 25 फरवरी और 3 व 4 मार्च को आसनसोल से पटना के बीच चलेगी। आसनसोल से चारों दिन यह गाड़ी सुबह 7:15 बजे खुलकर दोपहर 2:05 बजे पटना पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 03562 इन चार दिनों में पटना से दोपहर 3:15 पर खुलेगी।

2- हबीबगंज-पटना सुपरफास्ट होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 01657 हबीबगंज-पटना सुपर फास्ट होली स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को शाम 4:30 पर हबीबगंज से पटना के लिए खुलेगी। वापसी में यह ट्रेन एक मार्च को पटना से दोपहर 1 बजे हबीबगंज के लिए चलेगी।

3- रांची-पटना होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 08621 रांची-पटना होली स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रात 11:15 बजे रांची से पटना के लिए रवाना होगी। यह ट्रेन एक मार्च को सुबह 10:15 बजे पटना से रांची के लिए रवाना होगी।

4- हावड़ा-रक्सौल होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 03041 हावड़ा-रक्सौल होली स्पेशल 25 फरवरी को रात 10:50 पर हावड़ा जंक्शन से रक्सौल के लिए खुलेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 03042 रक्सौल जंक्शन से शाम 7:45 बजे खुलेगी।

5- मालदा टाउन- आनंद विहार होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 03429 मालदा टाउन-आनंद विहार होली स्पेशल ट्रेन 24, 25 फरवरी को सुबह 9:05 बजे मालदा टाउन से खुलेगी। वापसी में 6 और 13 मार्च को ट्रेन नंबर 03430 आनंद विहार से शाम 5:10 पर खुलेगी।

6- हावड़ा-गोरखपुर होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 03031, हावड़ा-गोरखपुर होली स्पेशल 28 फरवरी को रात 11:55 पर हावड़ा से खुलेगी। वापसी में एक मार्च को ट्रेन नंबर 03032 शाम 7:05 पर गोरखपुर से खुलेगी।

7- टाटा-छपरा होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 08181 टाटा-छपरा होली स्पेशल 28 फरवरी को सुबह 5:05 बजे टाटानगर जंक्शन से रवाना होगी। वापसी में ट्रेन नंबर 08182, 28 फरवरी को रात 11:00 बजे छपरा से टाटानगर के लिए रवाना होगी।

8- कोलकाता-छपरा होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 03135 कोलकाता-छपरा होली स्पेशल 26 फरवरी को रात 8:05 बजे कोलकाता से रवाना होगी। वापसी में ट्रेन नंबर 03136 छपरा स्टेशन से 27 फरवरी को दोपहर 1:20 बजे रवाना होगी।

9- संतरागाछी-दरभंगा होली स्पेशल: ट्रेन नंबर 08021 संतरागाछी-दरभंगा होली स्पेशल 28 फरवरी को शाम 3:40 बजे संतरागाछी स्टेशन से खुलेगी। ट्रेन नंबर 08022, 1 मार्च को दोपहर 1:50 बजे दरभंगा से रवाना होगी।

रेल मंत्रालय : कार्यशैली को लेकर अधिकारियों एवं मंत्री स्टॉफ में टकराव

NEW DELHI.  रेलवे मंत्रालय में इन दिनों सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। सरकार एक ओर जहां रेलवे की अत्याधुनिक तस्वीर पेश करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रेल मंत्रालय में कार्यशैली को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। नतीजन, रेल मंत्रालय दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। रेलमंत्री पीयूष गोयल द्वारा रेलवे बोर्ड में बैठे अफसरों की संख्या घटाने और उन्हें क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजने के हालिया आदेश के बाद स्थिति और ज्यादा गंभीर बन गई है। इस आदेश के बाद कुछ कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों का तबादला भी हो चुका है, लेकिन अगले तबादले को लेकर अधिकारी अड़ गए हैं। सूत्रों की माने तो रेलवे बोर्ड के सभी मेंबर एकजुट हो गए हैं और वह कतई नहीं चाहते कि जो अधिकारी रेलवे को चला रहे हैं, उनका तबादला किया जाए। बोर्ड सूत्रों की माने तो अधिकारियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि रेलमंत्री अधिकारियों को बोर्ड से हटाकर खुद अपनी सहायकों की फौज बढ़ाते जा रहे हैं। इसको लेकर रेलवे बोर्ड के शीर्ष प्रबंधन में बेहद नाराजगी का माहौल है।

 

 

–अफसरों को दिल्ली से हटाने के पक्ष में नहीं है रेलवे बोर्ड
–अफसरों को हटाकर मंत्री बढ़ाना चाहते हैं अपनी सहायकों की फौज : सूत्र

इसके अलावा रेल मंत्रालय में रेल मंत्री के सहायक एवं उनकी आउऊटशोर्ष की हुई टीम के द्वारा रेल शीर्ष प्रबंधन को आदेश देना भी रेल अफसरों के लिए नागवार गुजर रहा है। सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी द्वारा अगस्त से जनवरी के बीच तीन बार रेल कर्मचारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उनके द्वारा रेल कर्मचारियों का मनोउत्थान किया गया है। वहीं रेलमंत्री द्वारा निजी सेवा प्रदातत्ताओं के साथ रेल के आधुनिकीकरण की तरफ किए जा रहे संवाद भी कहीं न कहीं रेलमंत्रालय के कर्मचारियों का मनोबल डाउन किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड और मंत्री स्टाफ के बीच टकराव के चलते अधिकारी काम कम अपनी नौकरी बचाने के लिए ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसके अलावा मंत्री स्टाफ के लगातार हर चीजों में दखलंदाजी के चलते बोर्ड मेंबरों में खासी नाराजागी है, यही कारण है कि बोर्ड इस समय दो हिस्सों में बंट गया है। रेल अधिकारियों में पशोपेश की स्थिति बन गई है कि वह मंत्री एवं उनके स्टाफ के आदेशों को पालन करें या फिर रेलवे के शीर्ष प्रबंधन की बात मानें।

250 अधिकारियों को दिल्ली से बाहर जाना पड़ेगा
रेलमंत्री पीयूष गोयल के इस फैसले से कुल 500 अधिकारियों में से 250 अधिकारियों को दिल्ली से बाहर जाना पड़ेगा। इसमें 100 से अधिक अधिकारियों को दिल्ली के बाहर जाने का आदेश जारी किया जा चुका है। रेल मंत्रालय के मुताबिक सितंबर 2017 तक रेलवे बोर्ड में कुल स्वीकृत पदों पर तैनात अधिकारियों को आधा करने का फैसला किया गया था। लेकिन अभी तक उसको पूरा नहीं किया जा सका है।

9 माह बाद Indian रेलवे का होगा ‘नया अवतार

NEW DELHI. बुलेट की रफ्तार और मजबूती के साथ लक्ष्य को भेदने की क्षमता यह सब अब रेलवे के कर्मचारियों में दिखाई देखा। बुलेट ट्रेन के आने से पहले ही रेलवे अपने कर्मचारियों को बुलेट जैसा बनाने की तैयारी में जुट गया है। यही कारण है कि वह बदलते जमाने और बदलती तकनीक के अनुसार अपने लाखों कर्मचारियों को हाईटेक करने जा रही है। कर्मचारियों का कौशल और ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय रेल के सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का नाम ‘परियोजना सक्षम होगा और इससे उत्पादकता और कार्य क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। ऐसे सभी प्रशिक्षणों का फोकस भारतीय रेल के सभी कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन में बदलाव लाना है। कैलेंडर के अनुसार प्रशिक्षण 9 महीनों के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। इस हिसाब से 9 महीने बाद रेलवे का नया अवतार हो जाएगा।

 

–नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी रेल कर्मचारी होंगे हाईटेक
–बुलेट ट्रेन आने से पहले ही कर्मचारी हो जाएंगे प्रशिक्षित
–प्रशिक्षण का फोकस कार्य प्रदर्शन में बदलाव लाना

इस योजना के अंतर्गत अगले एक वर्ष तक प्रत्येक जोन के सभी कर्मचारियों को उनके कार्य क्षेत्र से संबंधित कौशल और ज्ञान का एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में रेल बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने सभी क्षेत्रीय रेल के महाप्रबंधक तथा रेल उत्पादन इकाई के महाप्रबंधकों को पत्र लिखा है।
पत्र के मुताबिक महाप्रबंधकों को संबंधित क्षेत्र की आवश्यकता के आधार पर प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों (कार्य क्षेत्र के अनुसार कर्मचारियों का समूह बन सकता है) के लिए प्राथमिक प्रशिक्षण आवश्यकता चिन्हित की जानी चाहिए। प्रशिक्षण आवश्यकताओं को चिन्हित करने और प्रशिक्षण कैलेंडर बनाने का कार्य 31 दिसंबर, 2017 तक पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित होना चाहिए कि प्रत्येक कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके अलावा इस बात पर बल दिया गया है कि रेलवे का एकीकृत दर्शन सतत रूप से शिक्षण-प्रशिक्षण रहा है, फिर भी उत्पादकता और कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए सभी कर्मचारियों को कम समय का प्रशिक्षण दिये जाने की आवश्यकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम इस आवश्यकता को पूरा करेगा। रेलवे में 13 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं।

बता दें कि रेल मंत्री ने कहा है कि रेल नेट वर्क बढ़ रहा है, नई रेल गाडिय़ां चलाई जा रही हैं, रेलवे द्वारा गुणवत्ता संबंधी सेवाएं प्रारंभ की गई हैं और सरकार का यह वचन है कि वह उत्तम और सुरक्षित रेल सेवा प्रदान करेगी। उनके मुताबिक यात्रियों की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं और यात्री बेहतर सुविधाएं और सेवाएं चाहते हैं। इसलिए रेल कर्मचारियों के लिए समय आ गया है कि वे बेहतर कार्य प्रदर्शन करें। कर्मचारी तभी पूरा कार्य प्रदर्शन कर सकेंगे जब उनके पास सही कौशल और ज्ञान हो तथा कर्मचारी यह समझते हों कि वह संगठन के नए शानदार मानको को पूरा कर सकेंगे। यह प्रशिक्षण इन उद्देश्यों की पूर्ति में मददगार साबित होगा।

पांच दिन का ऑन जॉब होगा प्रशिक्षण
जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षण के स्वभाव के आधार पर पांच दिन का ऑन जॉब प्रशिक्षण या क्लास रूम प्रशिक्षण रेलवे प्रशिक्षण केंद्र में चलाया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी कर्मचारियों के रिपोर्टिंग प्रबंधकों को प्रशिक्षण पूर्व और प्रशिक्षण के बाद की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना होगा, ताकि प्रशिक्षण का प्रभाव कार्य प्रदर्शन में दिखे और प्रशिक्षण में सुधार दिखे। रेल जोन को परियोजना सक्षम के प्रभाव को देखने के लिए नए तरीके अपनाने होंगे। यह प्रशिक्षण न केवल कर्मचारियों के कौशल को बढ़ावा देगा बल्कि इससे आने वाले दिनों में भारतीय रेल की कार्य क्षमता में भी सुधार होगा।

 

रेलवे में नहीं बढ़ेगा किराया, जारी रहेगा फ्लैक्सी फेयर

नई दिल्ली : रेलमंत्री पीयूष गोयल भारतीय रेलवे में व्यापक बदलाव करने जा रहे हैं। इसके तहत यात्रियों के लिए सुरक्षा, गति एवं सेवा के उच्च मानक सुनिश्चित करने के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में अहम योगदान देने का खाका खीचा है। पूरा जोर यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और ट्रेनों के समय सीमा को लेकर है। खास बात यह है कि हाल फिलहाल रेलवे किराया नहीं बढ़ेगा। न ही मालभाड़ा बढ़ाने पर कोई विचार है। इसके अलावा यात्रियों को चुभने वाला फ्लैक्सी फेयर खत्म नहीं होगा। रेलवे इसे खत्म करने की बजाय इसे अच्छा बनाने पर विचार कर रहा है।
–रेलवे में होंगे व्यापक बदलाव, नहीं बढ़ेगा किराया 
–फ्लैक्सी फेयर खत्म नहीं होगा, अच्छा बनाएंगे  
–यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, हटेंगे 5000 लेवल क्रासिंग 
–प्रधानमंत्री के लक्ष्य को लेकर न्यू इंडिया की तरफ बढ़ रही है रेल : पीयूष गोयल
    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्य रखा है जो नये भारत की दिशा में विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। इसी लक्ष्य को लेकर रेलमंत्री पीयूष गोयल भारतीय रेलवे में व्यापक बदलाव करने जा रहे हैं। पीयूष गोयल के आने के बाद एक माह के दौरान रेलवे ने लक्ष्य सुनिश्चित करने के लिए कई परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। इसके तहत यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।  पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि 5,000 मानव रहित लेवल क्रॉंसिंग को समयबद्ध ढंग से हटाएंगे या फिर गेट लगाएंगे।  इसके अलावा अगले साल से आईसीएफ कोच के बजाय एलएचबी कोचों को इस्तेमाल में लाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के लिए रेल के डिब्बों और स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है, जिससे विशेषकर महिलाएं एवं वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित होंगे। मैनुअल इंटरलॉकिंग के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल इंटरलॉकिंग की संख्या बढ़ाई जाएगी। रेलमंत्री के मुताबिक सबसे पहली प्राथमिकता सेफ़्टी है।
दशकों पुरानी समस्या है, पटरी सुधार, सिग्नल आदि को सुधार रहे हैं। जो रोलिंग स्टॉक, पटरी में प्राथमिकता देंगे जहां अत्यधिक जरूरी है। फील्ड दौरे नियमित, मरम्मत ब्लॉक को भी प्राथमिकता देगे। इसके अलावा समय सारणी पर काम करेंगे। साथ ही रात को काम करेंगें। वर्तमान सिग्नल प्रणाली को बेहतर किया जाएगा
टीपीडब्ल्यूएस (रेल सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली और एमटीआरसी (मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार) का उपयोग किया जाएगा। उपनगरीय और लम्बी दूरी की रेलगाडिय़ों में अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली लगाया जाएगा और खामियों इत्यादि का पता लगाने के लिए कैमरा, अल्ट्रासोनिक फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग होगा।
आरपीएफ एवं टीटीई वर्दी में रहेंगे 
रेलमंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक ड्यूटी के दौरान सभी आरपीएफ कर्मचारियों और टीटीई को उचित वर्दी में रहना होगा, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके। इसके अलावा आरपीएफ कर्मचारी टिकट चेकिंग नहीं करेंगे, क्योंकि यह टीटीई का काम है। हालांकि वे टिकट चेकिंग दल की सहायता करेंगे।
बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, होगा बदलाव
रेलमंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक निगरानी एवं यात्री सेवाओं के लिए मोबाइल एप के विस्तृत उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा सभी स्टेशनों एवं रेलगाडिय़ों में हाई स्पीड वाई-फाई कनेक्टिविटी होगी। 1 नवंबर, 2017 से लगभग 700 रेलगाडिय़ों की गति बढ़ाने का प्रस्ताव है।
पीयूष गोयल के मुताबिक 48 ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस के बजाय सुपरफास्ट एक्सप्रेस में तब्दील किया जा रहा है। ट्रेनों के आवागमन की जीपीएस आधारित रियल टाइम निगरानी से जुड़ी परियोजना में तेजी लाई जाएगी। इसरो के जरिये सभी रेल परिसंपत्तियों के उपग्रह आधारित मानचित्रण में तेजी लाई जाएगी।
ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में बदलाव 
रेलमंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में व्यापक बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत अगले 4-5 वर्षों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे ऊर्जा लागत में 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की राशि की बचत होगी। इसके साथ ही प्रदूषण घटेगा और आयातित डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। बकौल गोयल, रेलगाडिय़ों, स्टेशनों, कार्यालय भवनों और आवासीय परिसरों में समयबद्ध ढंग से 100 फीसदी एलईडी लाइटिंग और कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण जैसे कि पंखे, एसी इत्यादि लगाए जाएंगे।
स्टेशनों का तेजी से पुनर्विकास
दिसंबर 2018 तक लगभग 20 स्टेशनों का आधुनिकीकरण काफी तेजी से पूरा हो जाएगा जहां बेहतर बुनियादी ढांचागत एवं यात्री सुविधाएं होंगी। इनमें होटल, भोजनालय, शॉपिंग, विकलांग यात्रियों के अनुकूल सुविधाएं, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट हब, सुरक्षा इत्यादि की व्यवस्था होगी।
इसके अलावा अतिरिक्त स्टेशनों की पहचान की जाएगी और स्व-वित्तपोषण वाला बिजनेस मॉडल सृजित करने के प्रयास किए जाएंगे। मसलन, अनुबंध की अवधि का पुन:आकलन किया जाएगा, पहुंच नियंत्रण सनिश्चित किया जाएगा, उप-ठेका की आजादी होगी, इत्यादि।
बहुपयोगी केंद्रों के रूप में रेलवे स्टेशन
रेलमंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक देशभर के कई रेलवे स्टेशनों का इस्तेमाल योग सेंटर, कौशल प्रशिक्षण उद्देश्य, शैक्षणिक उद्देश्यों जैसी गतिविधियों के लिए बहुपयोगी केंद्रों के रूप में करने का प्रस्ताव है जहां दिनभर में कुछ ही ट्रेनें आती हैं। इसकी संख्या ज्यादा है।
 स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक सुविधाओं का उन्नयन
भारतीय रेलवे द्वारा संचालित विद्यालयों और अस्पतालों में बेहतर बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे न केवल रेल कर्मचारी, बल्कि अन्य लोग भी लाभन्वित होंगे।
मानव संसाधन के कल्याण पर विशेष जोर 
रेलमंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक मानव संसाधन के कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिकायत निवारण शिविर नियमित रूप से लगाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायतें सुनने के लिए प्रत्येक क्षेत्रीय एवं प्रभागीय मुख्यालय में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ स्थापित किए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। प्रणाली की दक्षता बेहतर करने के लिए आक्रामक ढंग से प्रक्रियागत सुधार लागू किए जा रहे हैं। इसके अलावा संगठनात्मक स्तरों की संख्या में कमी का विश्लेषण किया जा रहा है। परिचालन में गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘ए1Ó श्रेणी के 75 स्टेशनों पर प्रतिभाशाली और उत्साही अधिकारियों को स्टेशन डायरेक्टर के रूप में तैनात किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यालय से पुन: आवंटन के जरिये प्रभागीय कार्यकलाप मजबूत करने के लिए अतिरिक्त एडीआरएम की तैनाती की जाएगी।
कर्मचारियों के कल्याण पर ज्यादा जोर 
रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की स्थितियों को बेहतर बनाया जाएगा। उदाहरण के लिए, गैंग-मैन को आरामदेह वर्दी और बेहतर गुणवत्ता वाले जूते दिए जाएंगे। पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है और उन्हें किसी विशेष दिन औसतन लगभग 15-16 किलोमीटर चलना पड़ जाता है। उनके आवासीय क्वार्टरों (गैंग हट) को भी बेहतर किया जाएगा। लोको चालकों के रनिंग रूम को वातानुकूलित किया जा रहा है।
परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए रेलवे के राजस्व में वृद्धि
रेल मंत्रालय के मुताबिक रेल परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से वित्तीय स्थिति और परिचालन अनुपात बेहतर होगा। इसके अलावा, महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। भूमि के मुद्रीकरण को आकर्षक बनाकर यह काम पूरा किया जाएगा, जिसके लिए विभिन्न नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे। इन सुधारों से राष्ट्र की जीवन रेखा को पनपने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ये सुधार  आर्थिक-सामाजिक विकास में भी अपेक्षाकृत अधिक योगदान करेंगे। भारतीय रेलवे में व्यापक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सिर्फ लोगों की मजबूरी नहीं, बल्कि लोगों की पसंद है।

मुंबई क्षेत्र में 100 नई उपनगरीय रेल सेवाएं आरंभ करेगी भारतीय रेल

NEW DELHI.   मुंबई उपनगरीय रेल सेवाओं को एक बड़े प्रोत्‍साहन के रूप में, भारतीय रेल पश्चिमी रेलवे और मध्‍य रेलवे जोन के अपने मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर 100 अतिरिक्‍त स्‍थानीय रेल सेवाएं आरंभ कर रही है। इन अतिरिक्त सेवाओं के साथ पश्चिमी रेलवे और मध्य  रेलवे के मुंबई में कुल उपनगरीय स्थानीय रेल सेवाएं वर्तमान 2983 सेवाओं से बढ़कर 3083 उपनगरीय सेवाओं तक पहुंच जाएगी।     ये सेवाएं कल अर्थात 29 सितंबर, 2017 को मुंबई में आयोजित एक भव्‍य कार्यक्रम में आरंभ की जाएंगी। इस अवसर पर केन्‍द्रीय रेल एवं कोयला मंत्री  पीयूष गोयल तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।

यह जानकारी रेलमंत्री पीयूष गोयल ने आज यहां दी। वह पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।  इस मौके पर रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिनहा, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्‍वनि लोहानी सहित रेल मंत्रालय के सभी वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इन 100 सेवाओं में से, 32 नई सेवाएं पश्चिमी रेल में और 68 सेवाएं मध्‍य रेलवे में आरंभ की जाएंगी।

पश्चिमी रेलवे में 17 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से ‘अप’ दिशा में आरंभ की जाएंगी, जबकि 15 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से ‘डाउन’ दिशा में आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर, पश्चिमी रेलवे में 32 नई सेवाएं आरंभ की जाएंगी। पश्चिमी रेलवे वर्तमान में 1323 उपनगरीय सेवाएं संचालित करती है। इन सेवाओं के जुड़ने के बाद पश्चिमी रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1355 तक पहुंच जाएंगी।

 

मध्‍य रेलव में   14 उपनगरीय सेवाएं 2 अक्‍तूबर, 2017 से ‘हार्बर लाइन’ पर आरंभ की जाएंगी। 2 अक्‍टूबर, 2017 से ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 14 उपनगरीय सेवाएं आरंभ की जाएंगी। ‘मेन लाइन’ पर 16 उपनगरीय सेवाएं 1 नवम्‍बर, 2017 से आरंभ की जाएंगी तथा ‘हार्बर’ एवं ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 24 उपनगरीय सेवाएं 31 जनवरी, 2018 से आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर मध्‍य रेलवे में 68 सेवाएं आंरभ की जाएंगी। मध्‍य रेलवे वर्तमान में 1660 उपनगरीय सेवाओं का संचालन करती है। इन सेवाओं के जुड़ने के बाद मध्‍य रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1728 तक पहुंच जाएंगी।

इन नई उपनगरीय सेवाओं के लागू होने से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में भीड़भाड़ में कमी आएगी तथा परिवहन में तेजी आएगी। इससे मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में रोजाना यात्रा करने वाले 77 लाख यात्रियों को लाभ पहुंचेगा।