गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत, नौकरी में चयन होते ही होगी नियुक्ति

NEW DELHI: हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने आज यानी गुरुवार को ये एलान किया कि सरकारी नौकरी में चयन के बाद गर्भवती महिलाओं की तुरंत नियुक्ति भी की जायेगी। हालांकि नियुक्ती के बाद महिलाओं को डिरिवरी के कुछ महीने पहले और बाद में छुट्टी दे दी जाएगी।

 

गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली इस छूट में पुलिस विभाग को छोड़कर बाकि सभी सरकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। सरकार ने यह फैसला इस बात को ध्यान में रखते हुए लिया है कि महिलाएं देर से नियुक्ति पाने की वजह से वरिष्ठता में अपने साथ के लोगों से पिछड़ जाती थीं। बता दें कि अब तक ऐसी महिलाओं को डिलिवरी के एक साल बाद नियुक्ति दी जाती थी जिस वजह से वह अपने साथी कर्मचारियों से पीछे रह जाती थीं।

 

मुख्य सचिव बीके अग्रवाल के मुताबिक यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल में पारित कर दिया गया है, जल्द ही स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी महकमों को यह आदेश जारी कर दिया जाएगा। मालूम हो कि सरकारी नौकरी के लिए परिक्षा उत्तीर्ण करने के 10 से 15 दिन के भीतर ही सभी व्यक्तियों को ड्यूटी ज्वाइन करने का समय दिया जाता है। वहीं गर्भवती महिलाओं को परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी मेडिकल बोर्ड में नौकरी के लिए अनफिट बताया जाता था।

 

मेडिकल बोर्ड द्वारा अनफिट बताए जाने के बाद गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति नहीं दी जाती थी जिससे उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती थी। यही नहीं, डिलिवरी के 6 महीने बाद इन महिलाओं को मेडिकल बोर्ड से फिटनेस का प्रमाण दिया जाता था जिस वजह से वह वरिष्ठता में पिछड़ जाती थीं। अब सरकार ने ऐसी महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए इस नियम को खत्म कर दिया है। अब गर्भवती महिलाएं भी परिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी ज्वाइन कर सकती हैं।

BJP की ‘पाठशाला : पहाड़ के विधायकों ने सीखी ‘संसदीय प्रक्रिया’

NEW DELHI.  लाभ के पद में विधायकी गंवाने वाले दिल्ली की सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी से सबक लेते हुए भारतीय जनता पार्टी ने आज अपने विधायकों के लिए एक पाठशाला लगाई। साथ ही उन्हें लाभ के पद सहित हर उन चीजों से रूबरू करवाया, जो एक नये विधायक के लिए जरूरी होती है। इसमें हिमाचल प्रदेश के उन 23 विधायकों को शामिल किया गया, जो पहली बार जीत कर विधानसभा में पहुंचे हैं। इसमें 2 महिला विधायक भी शामिल रहीं। इसका नेतृत्व हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर डा. राजीव बिंदल कर रहे हैं।

 

2 दिन की पाठशाला में पहले दिन को 3 सत्रों में बांटा गया। पहले सत्र में विधानसभा की कार्यवाही और इस दौरान किस तरह से सवाल उठाये जाते हैं, उसके तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। बता दें कि विधानसभाओं में अक्सर सवाल उठाने के दौरान ही माहौल बिगड़ जाता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोंकझोक होती है। कई बार तो मारपीट की नौबत भी आ जाती है। इन सब को देखते हुए विधायकों को अपना आचरण कैसा रखना चाहिए, उसके बारे में बताया गया। दूसरे सत्र में जनता के बीच व्यवहार कैसा होना चा हिए, उसको लेकर था। इसमें जतना अपने विधायक से क्या अपेक्षा रखती है और क्या क्या समस्याएं होती हैं, उसको लेकर विधायकों को बिंदुवार समझाया गया।

–भाजपा की ‘पाठशाला  में विधायकों ने सीखी ‘राजनीति

—केंद्रीय मंत्री एवं दिग्गजों ने पढ़ाए विधायकी करने के गुर 

–क्या है लाभ का पद, दी विधायकों को जानकारी 

–जनता से व्यवहार और विधानसभा की कार्यवाही भी समझायी 

–हिमाचल के 23 नये विधायकों ने करीब से देखी संसद 

 

 

सबसे खास तीसरा सत्र था, जिसमें लाभ के पद पर विस्तार से चर्चा हुई। भाजपा की नई दिल्ली से सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कौन-कौन से पद लाभ के दायरे में कानूनन आते हैं, उसके बारे में बताया। उन्होंने बताया कि विधायक चूंकि, जनता के चुने नुमाइंदे होते हैं, इसलिए  वह लाभ के पद में नहीं आते हैं, बशर्तें वह कोई सरकारी संस्था में ओहदा एवं सुविधा न लेता हो।     लोकसभा सचिवालय में लगी दो दिवसीय पाठशाला के पहले दिन केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, मीनाक्षी लेखी एवं हिमाचल के विधानसभा अध्यक्ष ने पाठ पठाए। सुबह साढ़े 10 बजे शुरू हुआ प्रबोधन कार्यक्रम शाम 4 बजे तक चला। इसके बाद सभी विधायकों को लोकसभा की लाइव कार्यवाही दिखाई। यहां के बाद लोकसभा की चर्चित लाईब्रेरी, न्यूज रूम को भी दिखाया और समझाया गया।

 

पहली बार संसद देखी, अच्छा लगा : कमलेश कुमारी 

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में पड़ती भोरंज की विधायक कमलेश कुमारी के मुताबिक आज पहली बार संसद को देखी, बहुत अच्छा लगा। ये हमारा सौभाग्य है कि जहां से देश चलता है, वहां आकर लाइव लोकसभा की कार्रवाई देखी। कमलेश कुमारी के मुताबिक प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान भी हमें वरिष्ठ नेताओं एवं केंद्रीय मंत्री ने राजनीति, कानून और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर अच्छी बातें बताई। यहां आकर बहुत कुछ सीखने को मिला है। कमलेश कुमारी के अलावा विधायक रीता देवी भी मौजूद रहीं।

 

प्रबोधन कार्यक्रम में बहुत कुछ सीखा : जियालाल

हिमाचल प्रदेश के भरमौर से पहली बार विधायक बने जिया लाल के  मुताबिक आज पहले दिन के प्रबोधन कार्यक्रम में बहुत कुछ सीखने को मिला। वरिष्ठ जनों ने लाभ के पद से लेकर जनता के बीच कैसे चलना है, विधानसभा की कार्यवाही कैसे चलती है और किस तरह से क्षेत्रीय मुद्दों को उठाना होता है, बारीकी सेे बताया गया। उनके मुताबिक पहली बार लोकसभा की लाइव कार्यवाही भी देखी, बहुत अच्छा लगा।

हिमाचल के नए CM जयराम, 27 को लेंगे शपथ, PM रहेंगे

NEW DELHI. जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। रविवार को उन्हें विधायक दल की मीटिंग में नेता चुना गया। नेता चुने जाने के बाद ठाकुर पार्टी के सीनियर लीडर्स के साथ गवर्नर आचार्य देवव्रत से मिले और सरकार बनाने का दावा पेश किया। शपथ ग्रहण समारोह 27 दिसंबर को शिमला में होगा। इससे पहले सीएम रेस में जेपी. नड्डा का नाम भी चल रहा था। लेकिन, कास्ट फैक्टर को देखते हुए ठाकुर को नेता चुना गया। हिमाचल में ठाकुर कम्युनिटी ज्यादा है और नड्‌डा ब्राह्मण हैं। बीजेपी के सामने सीएम की दिक्कत प्रेम कुमार धूमल के हारने की वजह से हुई थी। नरेंद्र सिंह तोमर ने ठाकुर के नाम का एलान किया। प्रेम कुमार धूमल ने ठाकुर के नाम का प्रस्ताव किया था। जयराम ठाकुर जब आभार प्रकट करने के लिए सामने आए तो पांच बार पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का नाम लिया। इसके बाद उन्होंने उनके पैर भी छुए। धूमल पार्टी के सीएम कैंडिडेट थे लेकिन वो सुजानपुर से चुनाव हार गए थे।

ठाकुर प्रेम कुमार धूमल सरकार में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं। इस बार सेराज से विधायक चुने गए। वो अब तक पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं।

 

तोमर ने किया ठाकुर के नाम का एलान
विधायक दल की बैठक में बीजेपी के सेंट्रल ऑब्जर्वर निर्मला सीतारमण और नरेंद्र सिंह तोमर भी शामिल हुए। तोमर ने कहा- बैठक में नए नेता के चयन की प्रक्रिया आज पूरी हो रही है। आज हम सब लोगों ने सबसे पहले बीजेपी के कोर ग्रुप की बैठक में हिस्सा लिया। चर्चा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी और संसदीय बोर्ड ने फैसला किया। विधानमंडल दल की बैठक हुई। इसमें पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल जी ने जयराम ठाकुर को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा। जेपी नड्डा और शांता कुमार ने प्रस्ताव का समर्थन किया।कोई दूसरा प्रस्ताव सामने नहीं है इसलिए जयराम ठाकुर जी को विधानमंडल दल का नेता घोषित किया जाता है।

जयराम ठाकुर ने क्या कहा?
तोमर ने जयराम ठाकुर को आभार प्रकट करने के लिए बुलाया। जयराम ठाकुर ने कहा, “मैं नरेंद्र तोमर, निर्मला सीतारमण, जेपी नड्डा जी, प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार, हेमंत पांडे, पवन राणा और विधायकों का धन्यवाद करता हूं।”
हिमाचल एक ऐसा प्रदेश है, जहां बीजेपी की सरकार का हम इंतजार कर रहे थे और ये सपना साकार हुआ। हिमाचल कांग्रेस मुक्त हुआ। मैं नरेंद्र मोदी, अमित शाह को धन्यवाद देता हूं। जिस उम्मीद पर जनता ने हमें जनादेश दिया है और राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो हमसे उम्मीद रखी है, हम उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे।”

जयराम बनाम धूमल गुट की भिड़ंत से केंद्र दुखी

सेंट्रल ऑब्जर्वरों की मौजूदगी में जिस तरह से पहले जयराम गुट और फिर धूमल गुट ने नारेबाजी की और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी, उससे पार्टी हाईकमान काफी खफा है।
बीजेपी के बड़े नेताओं ने कहा है कि जिस तरह की चीजें सामने आईं हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जा सकता। दोषी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होगी।

धूमल ही होंगे हिमाचल प्रदेश में भाजपा का चेहरा 

NEW Delhi : हिमाचल प्रदेश में भाजपा के सत्ता में लाने के लिए पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर विश्वास जताया है। बुधवार को वहां के सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है, जिसमें धूमल की पसंद को खास तबज्जो दी गई है। धूमल को चुनाव मैदान में उतारने से साफ हो जाता है कि पार्टी सत्ता में आई तो कमान उन्हें ही सौपा जाएगा। मतलब धूमल एक तरह से मुख्यमंत्री पद का चेहरा सामने कर दिए गए हैं। चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार धोषित कर देने की भी संभावना है। भाजपा की रणनीतिक मोर्चाबंदी और गुडिय़ा कांड से डरे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला ग्रामीण सीट छोड़कर अर्की से लड़ेंगे।
  बुधवार को भाजपा उम्मीदवारों के जो चेहरे सामने आए हैं, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी क्षेत्रीय, सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण धूमल को चुनाव लड़ाने का फैसला है। पार्टी ने उन पर विश्वास जताकर साफ कर दिया है कि हिमाचल में पार्टी अपने आजमाए हुए चेहरा को दोहरा सकती है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखराम के बेटे अनिल शर्मा को टिकट देर पार्टी का लक्ष्य उन वोटों को साधना है, जो अभी तक कांग्रेस के साथ जाते रहे हैं। मंडी क्षेत्र में सुखराम का अच्छा प्रभाव रहा है। कांगड़ा में भाजपा नेता शांता कुमार का अच्छा असर है। धूमल का हमीरपुर क्षेत्र में खासा प्रभाव है। ऐसे में माना ये जा रहा है कि सारी स्थिति का आकलन करते हुए पार्टी ने उन लोगों को मैदान में उतारा है, जो कांग्रेस से मुकाबला करने की सामर्थ रखते हैं। इसमें बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व द्वारा धूमल की पसंद को ज्यादा तबज्जो दी गई है।
–भाजपा ने दिया संकेत, मोदी अपनी रैली में कर सकते हैं ऐलान 
–उनकी पसंद के प्रत्याशियों को पार्टी ने दिया तबज्जो
–धूमल का दबाव काम आया, मिली उनके करीबियों को ज्यादा सीट 
–केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के कतरे पर, नहीं दी प्राथमिकता 
–गुडिय़ा कांड से भयभीत वीरभद्र ने बदली अपनी सीट
पार्टी के आदेश पर धूमल इस बार अपनी पुरानी सीट हमीरपुर की जगह सुजानपुर से लड़ रहे हैं। उन्हें सुजानपुर से चुनाव लड़ाने का फैसला पार्टी ने बहुत सोच-समझकर किया है। सुजानपुर से धूमल के चुनाव मैदान में होने का फायदा पार्टी को कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर सीट पर मिलेगा।
   उधर, जिस तरह के राजनीतिक हालात हैं, उसमें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अपनी सीट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है। सूत्रों की माने तो जिस सीट से वह लगातार चुनाव लड़ते आए हैं, वहां हिमाचल के चर्चित गुडिय़ा कांड का मामला इतना गर्म है कि सिंह को सीट पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। लिहाजा, वह इस बार शिमला ग्रामीण की जगह पर सोलन जिले के अर्की सीट से चुनाव लडऩे जा रहे हैं।
 गौरतलब है कि बीते शनिवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ अलग से बंद कमरे में बैठक की थी। इस दौरान धूमल के साथ सभी सीटों और प्रत्याशियों की गुणा गणित का खाका खींचा गया था। इस मुलाकात से ही अंदेशा लगाया जा रहा था कि धूमल को ही भाजपा का चेहरा बनाया जा सकता है।
 केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पार्टी ने किया किनारे  
  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पार्टी ने किनारे कर दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि नड्डा की सिफारिश इस बार बिलकुल नहीं चली है। यहां तक की वह अपनी बिलासपुर सीट पर भी अपनी पसंद का उम्मीदवार नहीं दिला पाए हैं। बिलासपुर से सुभाष ठाकुर को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी ने यह चयन कांग्रेस उम्मीदवार बुम्बर ठाकुर की पकड़ को ध्यान में रखकर किया है। 2012 में नड्डा की सिफारिश पर उम्मीदवार रहे चंदेल को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए पार्टी नेतृत्व ने इस बार नड्डा को लेकर कोई जोखिम मोल लेना ठीक नहीं समझा।
नड्डा खेमे से लगातार यह प्रचारित किया जा रहा था कि इस बार पार्टी हिमाचल में उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में सामने ला सकती है, लेकिन पार्टी द्वारा बिलासपुर सीट में उम्मीदवार चयन में उन्हें तबज्जो नहीं देकर और धूमल को प्रोजेक्ट कर साफ संकेत दे दिया है कि हिमाचल में धूमल ही पार्टी के चेहरा होंगे।

हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान,9 नवंबर को चुनाव

 NEW DELHI : हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल आज बज गया। केंद्रीय चुनाव आयोग ने कई घंटे तक चली बैठक के बाद वीरवार की शाम तारीखों का ऐलान कर दिया। राज्य में एक ही चरण में 9 नवंबर को मतदान होगा। 18 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी। उसी दिन रिजल्ट भी घोषित होगा। इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। तारीखों का ऐलान अपने सहयोगी निर्वाचन आयुक्त ओमप्रकाश रावत और निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने किया है।
हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक राज्य में पिछले चुनाव की तुलना में मतदान केन्द्रों की संख्या 7252 से बढ़कर 7479 हो गयी है। सभी मतदान केन्द्रों को मतदान संबंधी जरूरी सुविधाओं से लैस किया गया है। खासकर महिला और दिव्यांग मतदाताओं के लिये जरूरी सुविधाओं के विशेष इंतजाम किये गये हैं।
–9 नवंबर को होगा मतदान, 18 दिसम्बर को मतगणना 
–68 विधानसभा सीटों के लिए बनाए 7479 मतदान केंद्र 
–महिला और दिव्यांग के लिये सुविधाओं के विशेष इंतजाम 
   मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक 16 अक्टूबर से नामांकन फाइल किया जा सकेगा। आखिरी तारीख 23 अक्टूबर होगी। 24 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और
26 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की तारीख निर्धारित की गई है। इस हिसाब से 9 नवंबर को राज्य में मतदान होगा और 18 दिसंबर को विधानसभा चुनाव की मतगणना की जाएगी। वर्तमान हिमाचल विधानसभा का कार्यकाल 7 जनवरी 2018 को खत्म हो रहा है।
    मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक राज्य में निष्पक्ष चुनाव के लिए बड़ी तैयारी की गई है। इसके लिए राज्य में बड़े पैमाने पर अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती होगी। राज्य के सभी पोलिंग बूथों को ग्राउंड फ्लोर पर रखने का फैसला किया है। सभी पोलिंग स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए सुविधा होगी। वोटिंग, नामांकन और चुनावी सभाओं की विडियोग्राफी की जाएगी। काउंटिंग हॉल की भी विडियोग्राफी की जाएगी।
    चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए खर्च की सीमा भी निर्धारित कर दी है। आयोग के मुताबिक हर उम्मीदवार चुनाव के दौरान 28 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे। लिहाजा, चुनाव परिणाम की घोषणा के 30 दिन के भीतर उम्मीदवारों को खर्च से संबंधित अपना शपथपत्र सौंपना होगा।
    सैनिकों और अप्रवासी भारतीयों के  परिजनों के लिये डाक और इलेक्ट्रॉनिक मतदान की तैयारियों के सवाल पर आयुक्त ने बताया कि र्सिवस वोटर्स की पंजीकरण प्रक्रिया चल रही है। इस श्रेणी के तहत इच्छुक मतदाता 18 अक्टूबर तक पंजीकरण करा सकेंगे।
सोशल मीडिया, पेड न्यूज पर रहेगी नजर 
चुनाव आयोग की इस बार सोशल मीडिया पर पैनी नजर रहेगी। पेड न्यूज के लिए आयोग ने जिला, राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोग लेवल तक त्रिस्तरीय कमिटी का गठन किया है।
 सभी पोलिंग स्टेशनों पर वीवीपैट का होगा प्रयोग 
 इस बार राज्य में सभी पोलिंग स्टेशनों पर वीवीपैट का इस्तेमाल होगा। हिमाचल में पहली बार सभी पोलिंग स्टेशन पर वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपैट) मशीन का इस्तेमाल होगा। इससे पहले गोवा सहित कुछ चुनावों में इसका प्रयोग हो चुका है। बता दें कि वीवीपैट के जरिए प्रिटेंड पर्ची के जरिए वोटर को यह जानकारी दी जाती है कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, वह उसे ही मिला है। इस पर्ची को रिकॉर्ड के तौर पर रखा जाता है। पेपर ट्रायल के जरिए ईवीएम पर उठे शंका हटाने का एक जरिया माना जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि वीवीपैट पर्ची की रैंडम सैंपलिंग किया जाएगा, ताकि वोट सही पड़े हैं या नहीं इसका मिलान हो सके। वोट देने के बाद वोटर 7 सेकेंड तक के लिए वीवीपैट पर्ची देख सकता है।
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हिमाचल चुनाव से जुड़ी मुख्य बातें
– हिमाचल प्रदेश में 16 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे।
24 अक्टूबर: नामांकन पत्रों की जांच 
26 अक्टूबर: नामांकन वापस लेने की तारीख 
– 9 नवंबर को पूरे राज्य में एक ही चरण में वोटिंग होगी।
– 18 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी, इसी दिन चुनाव परिणाम घोषित होंगे।
– हिमाचल प्रदेश में वीवीपैट मशीन का इस्तेमाल होगा।
– हिमाचल में 7479 पोलिंग स्टेशन होंगे।
– हिमाचल में फोटो आईडी का इस्तेमाल होगा।
– एफिडेविट पूरा नहीं भरा होने पर प्रत्याशियों को नोटिस जारी होगा
-हिमाचल प्रदेश में वोटिंग की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
-प्रत्याशी प्रचार में अधिकतम 28 लाख रुपए खर्च कर पाएंगे।
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पिछली बार  4 नवंबर को हुआ था चुनाव 
हिमाचल प्रदेश में पिछली बार 4 नवंबर को चुनाव हुआ था और 20 दिसंबर को नतीजा आया था। हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। यहां पिछली बार कांग्रेस ने 36 सीटें जीती थीं। यहां बीजेपी की हार हुई थी और उसे 26 सीटें ही मिली थीं। बीजेपी ने प्रेम कुमार धूमल की अगुवाई में चुनाव लड़ा था। जबकि, कांग्रेस वीरभद्र सिंह की अगुवाई में। वीरभद्र छह बार मुख्यमंत्री रहे हैं। कांग्रेस ने अगला मुख्यमंत्री कंडीडेट भी वीरभद्र सिंह को घोषित किया है।
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49.05 लाख मतदाता चुनाव में करेंगे मतदान 
     मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 12वीं विधानसभा का कार्यकाल अगले साल सात जनवरी को पूरा हो रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस समय सीमा से पहले 13वीं विधानसभा के गठन के लिये चुनाव की तैयारियां मुकम्मल कर ली गयी हैं। इस बाबत 15 सितंबर तक संशोधित मतदाता सूचियों के मुताबिक राज्य के 49.05 लाख मतदाता विधानसभा चुनाव में मतदान कर सकेंगे। राज्य की 68 सीटों में से 17 अनुसूचित जाति और तीन अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि सभी मतदाताओं को फोटोयुक्त मतदाता पर्ची दी जायेगी। साथ ही मतदाता सूची में मतदाताओं और इवीएम पर उम्मीदवारों की फोटो होगी।