ससुराल वालों ने पोते और दहेज के लिए किया परेशान, महिला ने की आत्महत्या

NEW DELHI: दहेज की मांग और दो बेटियों को जन्म देने के कारण अपने पति और ससुरालवालों के उत्पीडऩ से परेशान 25 वर्षीय एक महिला ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरेखा देसाले और शरद देसाले का मई 2016 में विवाह हुआ था। शरद साहपुर तालुक के खिनावाली गांव का रहने वाला है।

 

सुरेखा ने 2017 को एक बेटी को जन्म दिया था और इस वर्ष जनवरी में वह एक अन्य बेटी की मां बनी। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद से सुरेखा के ससुराल वाले उसे दहेज के लिए कथित रूप से परेशान कर रहे थे। बाद में उन्होंने दो बेटियों के जन्म के लिए उसे प्रताडि़त करना शुरू कर दिया क्योंकि वे बेटा चाहते थे। अधिकारी ने बताया कि महिला ने कथित उत्पीडऩ के बारे में अपने माता-पिता को बताया। उन्होंने बताया कि पिछले शनिवार सुरेखा के ससुराल वालों ने उसके माता-पिता को फोन पर बताया कि सुरेखा लापता है। सुरेखा का शव बाद में रात को गांव के कुएं में मिला।

 

अधिकारी ने बताया कि सुरेखा के भाई की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 304-बी (दहेज के लिए हत्या), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 498-ए (निर्दयता) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत उसके पति, ससुर और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मामले की जांच जारी है।

DSGMC: टाइटलर ने जिसे बनावाया था जज, उसी से शुरू करवाई जांच! 

NEW DELHI.  महिला उत्पीडऩ के मामले में फंसे तीन वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर घिरी दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी प्रबंधन और अकाली दल बादल का एक और चेहरा उजाहर हुआ है। अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी पर ही सवाल उठ गया है। दरअसल कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने इस मामले में सेवामुक्त जस्टिस आरएस सोढ़ी को इन अधिकारियों के खिलाफ जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। आज शुक्रवार को जस्टिस सोढ़ी ने इस मामले में आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी। इसके लिए बाकायदा कमेटी के संयुक्त सचिव के कक्ष में अदालत लगाई गई। सूत्रों के मुताबिक जस्टिस सोढ़ी ने अपने साथ हाईकोर्ट की पूर्व महिला जज इंदरमीत कौर कोछड़ के साथ कमेटी कार्यालय में जांच शुरू की। कोछड़ का नाम पहले टीम गठित करते समय नहीं  था, इन्हें बाद में टीम में शामिल किया गया। इन्हीं को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
–अकालियों का दोहरा चरित्र उजागर 
–महिला उत्पीडऩ में घिरे अधिकारियों की जांच पर उठे सवाल 
    खास बात यह है कि कुछ समय पूर्व ही कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने 1984 सिख दंगों के आरोपी एवं कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ पांच वीडियो स्टिंग जारी करते हुए दावा किया था कि टाइटलर ने इस स्टिंग वीडियो में बताया है कि उसने एक पाठक दंपत्ति को दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त करवाया था। सूत्रों की माने तो जस्टिस कोछड़ ही जस्टिस पाठक की पत्नी बताई जाती हैं। इसलिए टाइटलर के द्वारा लगवाई गई जज के द्वारा कमेटी कार्यालय में आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच करना विवाद में घिर गया है। एक तरफ तो दिल्ली कमेटी और अकाली दल के नेता बार-बार ये दावा करते थे कि जस्टिस कोछड़ को टाइटलर ने लगवाया है। अब उन्हीं के हवाले महिला उत्पीडऩ की जांच का जिम्मा सौंपा दिया है। लिहाजा, सवाल यह उठता है कि आखिर अकाली नेताओं को कमेटी अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए टाइटलर द्वारा लगवाए गए जज को जांच में क्यों बैठाया गया।
अकाली दल का दोहरा चेहरा उजागर
     खास बात यह है कि 1984 सिख दंगों को लेकर अकाली दल लगातार यह दावा करता रहा है कि पीडि़तों को न्याय दिलवाने के लिए वह गंभीर है। लेकिन, आज के फैसले से कहीं न कहीं अकाली दल का दोहरा चेहरा उजागर हो रहा है। खास बात यह है कि इन्हीं अधिकारियों की जांच के लिए कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा के एक चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस टीम के जांच प्रक्रिया शुरू होने के बीच अध्यक्ष ने नई जांच टीम बना दिया, जो आज विवादों में घिर गई है। कमेटी में आज दिनभर इसी बात की चर्चा रही कि महिला उत्पीडऩ में फंसे अधिकारियों के बचाने के लिए कमेटी प्रबंधन गलतियों पर गलतियां करता जा रहा है।
महिला जज की इच्छा प्रकट की थी : जीके 
कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने कहा कि हमने जस्टिस सोढ़ी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। सोढी ने एक पत्र भेजकर एक महिला जज को साथ जांच मे ंशामिल होने की इच्छा प्रकट की थी। क्योंकि मामला महिला शोषण से जुड़ा है इसलिए हमने महिला जज द्वारा जांच के मामले को मंजूर कर लिया था। महिला जज का चुनाव उन्होंने ही किया है।