DSGMC: सिरसा बनेंगे अध्यक्ष, महासचिव पर कालका की दावेदारी 

 NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 9 मार्च को प्रस्तावित  कार्यकारिणी चुनाव को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो गई है। इसमें नये अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे कमेटी के मौजूदा महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम चल रहा है। अध्यक्ष पद की रेस में मौजूदा वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरमीत ङ्क्षसह कालका, पटना साहिब कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित, मौजूदा कनिष्ठ उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह और मुख्य सलाहकार कुलवंत सिंह बाठ भी दावा जता रहे हैं। लेकिन, दिल्ली ईकाई के प्रभारी बलविंदर सिंह भूदड़ एवं शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की तरफ से सदस्यों को लगभग सिरसा के नाम पर सहमति दे दी गई है। इसलिए सिरसा के साथ महासचिव के तौर पर हरमनजीत या हरमीत कालका बन सकते हैं।
–गुरुद्वारा कमेटी का चुनाव 9 मार्च को, जनरल हाउस बुलाया 
–महिला सदस्य रंजीत कौर, हरिंदर पाल, चंडोक को मिल सकता है पद 
—सिरसा के बनने के बाद पहली बार कोई बनेगा जाट सिख अध्यक्ष 
हालांकि, पदाधिकारी कौन बनेगा इसका फैसला शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा भेजे जाने वाले लिफाफे से तय होगा। दिल्ली ईकाई के प्रभारी बलविंदर सिंह भूदड़ सुखबीर बादल का यह लिफाफा लेकर 9 मार्च को होने वाले कमेटी कार्यकारिणी के जनरल हाउस में पहुंचेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस बाद एकमात्र महिला सदस्य रंजीत कौर भी पदाधिकारियों में चुनी जा सकती हैं, इसकी प्रबल संभावना बनी है। 
   सूत्रों के मुताबिक सिरसा जाट सिख हैं, इसलिए कमेटी के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है कि कोई जाट सिख अध्यक्ष बनेगा। अभी तक कमेटी के इतिहास में अधिकतर बार अध्यक्ष का पद पाकिस्तान से आए भापा बिरादरी के लोगों के पास रहा है। उस वजह से पदाधिकारियों में भापा बिरादरी का हमेशा दबदबा रहा है। मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा के प्रधान बनने की अवस्था में किसी अन्य जाट सिख नेता का पदाधिकारियों की सूची में आना मुश्किल है। पिछले 6 साल से सिरसा ही कमेटी पदाधिकारियों में जाट सिख कोटे का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 
  सूत्रों की माने तो मौजूदा 51 सदस्यों में 30 से ज्यादा सदस्य भापा बिरादरी से हैं, इसलिए 5 पदाधिकारियों में से 2 या 3 भापा बिरादरी से आना तय माना जा रहा है। साथ ही रामगढिया बिरादरी में मौजूदा 6-7 सदस्यों में से किसी एक की लाटरी पदाधिकारी बनने की लग सकती है। क्योंकि, इसके बाद कार्यकाणिी का चुनाव 2021 तक नहीं होगा। मार्च 2021 में आम चुनाव होगा। इसलिए अकाली अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के लिए बड़ी चुनौती सभी बिरादरियों को प्रतिनिधितव देने की होगी। हालांकि, अभी तस्वीर साफ नहीं है कि 9 मार्च की चुनी जाने वाली कार्यकारिणी का कार्यकाल 29 मार्च 2019 तक होगा या मार्च 2021 तक। लेकिन सूत्रों का दावा है कि यही चुनाव अगले 2 साल तक के लिए होने जा रहा है। मौजूदा कमेटी की पूरी कार्यकारिणी के इस्तीफा देने के बाद कमेटी वर्तमान में वैधानिक संकट से गुजर रही है। पूरी कार्यकारिणी का इस्तीफा देने का नाटकीय घटनाक्रम भी पहली बार कमेटी के इतिहास में हुआ है। लिहाजा, नई कमेटी के गठन के बाद स्थिति ठीक होने की संभावना है। लेकिन, सभी लोग अपनी-अपनी गणित सेट करने में जुट गए हैं। 
 
कमेटी चुनाव में  ये है बिरादरी का गणित 
 दिल्ली की सिख सियासत में जाट बिरादरियों का भी बड़ा अहम रोल माना जाता है। वर्तमान में जाट सिख समुदाय से मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा, कुलवंत सिंह बाठ, जगदीप सिंह काहलो मैदान में हैं। जबकि, भापा बिरादरी से हरमीत सिंह कालका, हरमनजीत सिंह, परमजीत सिंह राणा, हरिंदर पाल सिंह, परमजीत सिंह चंडोक आदि हैं। इसके अलावा रामगढिया बिरादरी से अवतार सिंह हित, रंजीत कौर, रमिंदर सिंह स्वीटा एवं हरजीत सिंह पप्पा की दावेदारी प्रमुख है।  

DSGMC : गुरुद्वारा कमेटी में पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा 

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्यों ने आज इस्तीफा दे दिया। इसमें शिरोमणि अकाली दल से संबंधित 4 पदाधिकारी एवं 9 कार्यकारिणी सदस्येां ने इस्तीफा दिया है। इस मौके पर कमेटी के उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह एवं कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य तरविंदर सिंह मारवाह अनुपस्थित रहे। कहा, जा रहा है कि इन लोगों ने अपने इस्तीफे भेजवा दिए। दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट की धारा 17 (2) बी, के तहत इस बार इस्तीफा जनरल हाउस को दिया गया है। जानकारी के अनुसार हाथ खड़े करके इस्तीफे को मंजूरी दी गई है। इस्तीफे के बाद अब मौजूदा कमेटी के सभी पदाधिकारी अब पूर्व पदाधिकारी हो गए हैं। काम चलाऊ के तौर पर कमेटी का जरूरी कार्य देखने के लिए जनरल हाउस ने पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत कालका एवं पूर्व महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा को अधिकृत किया है। इनको केवल रोजमर्रा के कार्यों पर फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया है। इसलिए कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हंै।
–जनरल हाउस में सभी सदस्यों का इस्तीफा मंजूर
–एक्सक्यूटिव बॉडी के दो सदस्य मीटिंग से रहे नदारद 
–नीतिगत फैसलों पर लगी फिलहाल रोक, रोजमर्रा के काम होंगे 
–हरमीत कालका एवं मनजिंदर सिरसा कार्यवाहक बनाए गए  
इसके अलावा नियमानुसार कमेटी के दफ्तर का इस्तेमाल करना भी लाभ के पद के दायरे में आ सकता है। अब कमेटी के द्वारा सोमवार को तीस हजारी कोर्ट में पुर्नविचार याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। ताकि, समय पूर्व कार्यकारिण्ीा के चुनाव करवाने की मंजूरी अदालत से ली जा सके। बता दें कि शुक्रवार को अदालत ने कार्यकारिणी सदस्यों के इस्तीफा न देने को कारण मानते हुए नये कार्यकारिणी के समय पूर्व चुनाव पर रोक लगा दी थी। साथ ही अगली तारीख 21 फरवरी को तय की गई है।  सूत्रों के अनुसार हाउस की बैठक में पहले हाथ उठाकर इस्तीफा देने का ऐलान हुआ। मीटिंग खत्म होने के बाद में लिखित में इस्तीफे सभी सदस्यों से लिया गया है। जबकि, धारा 17 -2 बी के अनुसार इस्तीफा हाथ से हस्तलिखित जनरल हाउस को देना जरूरी था। 
 
 
इस्तीफा देते ही जीके ने दिखाए तेवर, कहा-हुई बड़ी साजिश : जीके 
 
कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के पीछे बड़ी साजिश होने का दावा किया है। साथ ही कहा कि वक्त आने पर साजिश का खुलासा किया जाएगा। पत्रकारों द्वारा बार-बार कुरेदने पर हालांकि जीके ज्यादा नहीं बोले, पर इतना जरूर माना कि समय आने पर वो सबकुछ सामने रख देंगे। एक तरफ जीके खुद मान रहे हैं कि वो जल्द ही इस मामले से निकल कर बाहर आएंगे, लेकिन दूसरी ओर अभीी भी वो अपने आप को अकाली दल का वफादार सिपाही बता रहे हैं। 
 
सभी तथ्यों के आधार पर हुआ अदालत का फैसला : शंटी 
 
दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार का खुलासा करने और चुनाव को अवैध करार दिलवाने वाले कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि अदालत ने जो आर्डर दिया था वह सभी तथ्यों के आधार पर दिया था। लिहाजा, अब दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अदालत में क्या जवाब फाइल करती है, उसे पढऩे के बाद ही अगला कदम उठाउँगा। 
 
अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा : बाठ 
 
शिरोमणि अकाली दल के नेता एवं कमेटी सदस्य कुलवंत सिंह बाठ ने कहा कि अदालत ने जो कल कहा था उसके अनुसार आज जनरल हाउस में सभी सदस्यों ने अपना इस्तीफा लिखित में दे दिया है। अब सोमवार को तीसहजारी कोर्ट में पुनर्वविचार याचिका डाला जाएगा। चूंकि, स्कूलों में नये एडमिशन होने हैं,  गुरूपूरब सहित कई महत्वपूर्ण मसलें हैं, जिसको लेकर चुनाव जल्द कराना जरूरी है। इसलिए अदालत से गुहार लगाएंगे कि वर्तमान हालात और समस्याओं को देखते हुए चुनाव एक सप्ताह के भीतर करवाया जाए। 

400 बेड, 40 साल और अब सिख संगतों से धोखा 

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन शुरू होने वाले 400 बेड के बाला साहिब अस्पताल को लेकर हो रही सियासत में आज सरना बंधु भी कूद गए। साथ ही बाला साहिब अस्पताल की कारसेवा व प्रबंधन बाबा बचन सिंह को देने पर सवाल खड़े कर दिए है। शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना एवं महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने कहा कि 2013 और 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने बाला साहिब अस्पताल खुद चलाने का दिल्ली की संगत से वायदा किया था। लेकिन, 6 साल के बाद खुद चलाने की बात से पीछे हट गए। कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी को बाबा बचन सिंह के गले डालकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश की है। बिना किसी योजनाबंदी के अस्पताल को सोंैपने की कारसेवा बाबा बचन सिंह को देना दिल्ली की संगत के साथ बड़ा मजाक है। बाबा हरबंश सिंह ने कड़ी मेहनत करके संगतों के सहयोग से अस्पताल की ईमारत खड़ी की थी, जो की अब जर्जर हालात में है। संगत को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि अस्पताल कितने बेड का होगा, और इसको आर्थिक रूप से बाबा बचन सिंह कैसे चलाएंगे। 
 
–बाला साहिब अस्पताल चलाने में फेल हुई गुरुद्वारा कमेटी 
–6 सालों तक दिल्ली की संगत को धोखा देते रहे अकाली : सरना 
–2013 और 2017 में बनाया था चुनावी घोषणा पत्र में मुख्य मुद्दा 
–अस्पताल चलाने से पीछे हटे, छुड़ाया पीछा, पहुंचे बाबा की शरण में 
  पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरना बंधू ने दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान प्रबधकों से पूछा कि यही काम तो वह भी 2012-13 में बाला साहिब अस्पताल चलाने को लेकर कर रहे थे। तब बादल दल ने विरोध क्यों किया? उन्होंने कहा की बादल दल जब 6 साल तक अस्पताल नहीं चला पाया तो अब बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में जाकर अस्पताल चलवाने की गुहार लगा रहे हैं। 
अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा
     सरना ने कहा कि बादल दल ने इसी बाला साहिब अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा और संगत को झूठा भरोसा देकर गुरु की गोलक और कमेटी के संसाधनों पर कब्ज़ा कर लिया। अब 6 साल गुरु की गोलक लूटने और संसाधनों का घोर दुरपयोग करने के बाद जब बाला साहिब अस्तपाल नहीं चला सके और संगतों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई तो बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में अपने पापों पर पर्दा डालने पहुंच गए।    उन्होंने कहा की दिल्ली की सिक्ख संगत जानना चाहती हैं कि बादल दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा, कुलदीप सिंह भोगल, हरमीत सिंह कालका सहित कमेटी के वरिष्ठ नेता किस गलती की माफ़ी के लिए बाबा बचन सिंह  (कार सेवा वाले) की चौखट पर पहुंचे हैं। 
बादल दल पर हमला बोलते हुए सरना ने कहा कि दिल्ली कमेटी ने उनपर आरोप लगाया था कि बाला साहिब अस्पताल को मनीपाल/बी.एल. कपूर (अस्पताल) को बेच दिया गया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही साबित हुई? 
  
 
1978 में 400 बेड का अस्पताल बनना हुआ था शुरू  
दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के रिकार्डों के मुताबिक 1978 से लगभग साढ़े 12 एकड़ जमीन पर अस्पताल बनाने का सफर शुरू हुआ था। शुरुआत में यह अस्पताल 400 बेड के साथ मेडिकल कालेज के तौर पर प्रस्तावित था। लेकिन 40 साल के बाद भी अस्पताल चलाने को लेकर दिल्ली कमेटी के पास कोई योजना और सरकारी मंजूरी अभी तक नहीं है। सूत्रों की माने तो जर्जर हो चुकी ईमारत को बनाने से पहले कारसेवा वालों ने इसका नक्शा भी पास नहीं कराया था। जिसकी वजह से नगर निगम व मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया से अस्पताल को चलाने की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ दमकल विभाग व अन्य विभागों की भी मंजूरी अधर में लटकी हुई है। सिखों के बीच बाला साहिब अस्पताल को राम मंदिर की तरह चुनावी मुद्दा माना जाता है। हर केाई अस्पताल बनाने को दावा वोट लेने के लिए करता है। लेकिन अस्पताल कब बनेगा उसकी तारीख कोई नहीं बताता है। 

गुरुद्वारा कमेटी में ‘दान घोटाला, डकार गए 51 लाख,  GM सस्पेंड

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा किया है। साथ ही कहा कि जीके ने एक नहीं लगातार कई घोटाले किए हैं, जिसमें से तीन घोटालों के सबूत सामने आए हैँ। इन घोटालों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरूण जेटली, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस सहित दिल्ली गुरुद्वारा आयोग से लिखित रूप से की है। इनमें सबसे अहम घोटाला है दान घोटाला, जिसके तहत 51 लाख रुपये का सीधे गबन किया गया है। मनजीत सिंह जीके के खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई है और पुलिस ने डीडी नंबर 11ए, तारीख 21 अक्टूबर 2018 के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पुलिस को अपना बयान दिया है और सभी साक्ष्य सौंपे हैं। मामला चूंकि, गुरुद्वारे के गोलक की लूट से जुड़ा है, इसलिए अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी शिकायत की गई है।
 
–कमेटी के सदस्य गुरमीत शंटी ने लगाए सनसनीखेज आरोप 
–प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को लिखी चिट्ठी, कमेटी खातों की जांच की मांग
–अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को भी लिखी चिटठी, करें हस्तक्षेप   
–गुरमीत शंटी ने पुस्तक घोटाले का जारी किया आडियो टेप 
शंटी ने आरोप लगाया कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी कमेटी के बाकी सदस्य एवं पदाधिकारी खामोश बैठे हैं। शंटी ने कहा कि मनजीत सिंह जीके के कार्यकाल के दौरान प्रधान-डीएसजीएमसी के रूप में, डीएसजीएमसी और जीएचपीएस के सभी खातों को सत्य जानने के लिए उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
     कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि सिख धर्म के प्रचार के लिए गुरुद्वारा कमेटी ने 82 हजार धार्मिक पुस्तकें छपवाने का दावा किया था, जबकि, हकीकत में पुस्तकें छपी ही नहीं और लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। पुस्तक घोटाले को लेकर शंटी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक आडियो टेप भी जारी किया, जिसमें पुस्तकें नहीं छापने और फर्जी बिल बनाने की बात कही गई है। आडियो टेप में पुस्तक छापने वाले जोगिंदर सिंह प्रेस ने माना है कि कमेटी ने उनसे फर्जी बिल बनवाए और उसका लाखों रुपये खा गए।
ब्लैकलिस्टेड  कंपनी को दिया ठेका, पेमेंट भी हुआ  
इसके अलावा कमेटी अध्यक्ष जीके ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी ‘रेनबी क्लॉथिंग प्राइवेट लिमिटेडÓ को कपड़े सप्लाई करने का ठेका दिया और उसे भुगतान भी कर दिया। यह कंपनी उनके बेटे एवं दामाद की है, जो उनके अपने निजी आवास के पते पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2015 में बंद हो चुकी कंपनी को 2017-18 में भुगतान किया गया। जबकि, कमेटी एक्ट के अनुसार परिवार का सदस्य कोई व्यवसाय गुरुद्वारे में नहीं कर सकता है।
51 लाख रुपये का दान का गबन 
पूर्व महासचिव गुरमीत शंटी ने कहा कि कनाडा के एक श्रद्धालु ने 1 लाख कैनेडियन डॉलर का दान डीएसजीएमसी को दिया, जिनको भारतीय रुपए में बदल कर 51,05,773.20 रुपए 30 जून 2016 को बैंक में जमा किया गया था। यह कुल राशि 51,05,773.20 है। बैंक स्टेटमेंट में भी यह रकम साफ दर्ज है। लेकिन, मनजीत जीके ने एक नकली वाउचर नंबर 3468 बना कर उसी तारीख को 51,05,773 रुपये उसी तारीख को यानी 30 जून 2016 और डीएसजीएमसी के कैश चेस्ट से निकाल ली गई।
जीके ने गृहमंत्रालय से मांगी है जेडप्लस सुरक्षा 
गुरमीत सिंह शंटी ने दावा किया कि मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत द्वारा हमले के डर से, (जैसे अमेरिकी संगत द्वारा हाल ही में उन पर किया गया था) दिल्ली पुलिस और जेड प्लस सुरक्षा मांगी है। इसके लिए गृह मंत्रालय एवं दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि जीके ईमानदार हैं, तो उन्हें दिल्ली की संगत के डर से सुरक्षा की मांग नहीं करनी चाहिए थी।
मंजीत सिंह दें इस्तीफा, गैरहाजिरी में हो खातों की जांच- सरना   
शिरोमणि अकाली दल (दिलली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने इतने बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही पुलिसे से उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि जीके की गैरहाजिरी में कमेटी के सभ्ीा खातों की जांच होनी चाहिए। सरना ने कहा कि कमेटी के इतिहास में यह पहला वाक्या होगा, जब एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं।
जांच में जो दोषी होगा, कार्रवाई होगी: दिल्ली कमेटी 
 दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने गुरमीत सिंह शंटी के आरोपों पर बहुत ज्यादा आज नहीं बोला है। कमेटी प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने इतना ही कहा कि हमने पहले ही नार्थ एवेन्यू थाने मे जांच के लिए तहरीर दे रखी हैं। लिहाजा, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्यवाही होंगी।

गुरुद्वारा कमेटी का जनरल मैनेजर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित

दिल्ली कमेटी सदस्य सरदार गुरमीत सिंह शंटी द्वारा कमेटी के जनरल मैनेजर सरदार हरजीत सिंह सुबेदार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर कमेटी अध्यक्ष मंजीतसिंह जीके ने तत्काल प्रभाव से सुबेदार को संस्पेंड कर दिया है। साथ ही जांच के लिए सरदार हरमीत सिंह कालका व सरदार महिन्द्रपाल सिंह चड्ड़ा की अगुवाई में 2 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस फैसले का ऐलान करते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. ने सूबेदार को पद से निलंबित भी कर दिया।

बादल की ‘अदालत’ में अकालियों की लगी ‘क्लास’  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी में कथित भ्रष्टाचार, घोटाले सहित कई अन्य मामलों में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई आज अकाली दल बादल के सुप्रीमों सुखबीर सिंह बादल की अदालत में पहुंची। बादल ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके एवं महासचिव मनजिंंदर सिंह सिरसा के बीच छिड़े जंग को सुलझाने के लिए आज अपने आवास पर सभी नेताओं को तलब किया। बादल ने कमेटी के करीब 20 सदस्यों से बंद कमरे में अलग-अलग बातचीत की और वर्तमान हालात की बावत जानकारी मांगी। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान ज्यादातर सदस्यों ने करप्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। साथ ही कहा कि कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए। इसको लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है और संगत के बीच गलत मैसेज भी जा रहा है।
— सिरसा-जीके की लड़ाई को सुलझाने में जुटे सुखबीर बादल  
–दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार पर सदस्यों ने उठाई आवाज 
–अलग-अलग सदस्यों से बंद कमरे में मिले शिअद सुप्रीमो 
सूत्रों के मुताबिक सदस्यों ने कहा कि अब करप्शन का मुद्दा इतना ज्यादा फैल गया है िक संगत भी पूछने लगी है। लिहाजा, संगतों को हम लोग क्या जवाब दें। सदस्यों ने सुखबीर बादल को कहा कि पहले मंजीत सिंह जीके इस्तीफे की बात कही और शक्तियां देकर चले गए, और अब महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा ने अपनी शक्तियां देकर घर बैठ गए। यह सिख संगतों के बीच बहुत गलत मैसेज जा रहा है। लिहाजा इस मसले को तुरंत सुलझाया जाना चाहिए। एक सदस्य ने कहा कि मंजीत सिंह जीके पर बड़ा ही गंभीर आरोप लगा है, इसके जवाब में जीके को खुद अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही पार्टी को चाहिए कि वह इसकी निष्पक्ष जांच करवाए।
आज फिर बाकी 20 सदस्यों से करेंगे मुलाकात
   शुक्रवार को फिर दिल्ली के बाकी सदस्यों को बुलाया गया है। वीरवार को पश्चिमी दिल्ली एवं नई दिल्ली क्षेत्र के सदस्य पहुंचे थे। इनमें पूर्व कमेटी अध्यक्ष एवं पटना साहिब के नवनियुक्त अध्यक्ष अवतार सिंह हित, रंजीत कौर, हरमनजीत सिंह, जगदीश सिंह काहलो, हरजीत सिंह पप्पा, गुरमीत सिंह भाटिया, निशान सिंह मान, स्वर्ण सिंह बराड़, मनमोहन सिंह, दलजीत सिंह सरना, सर्वजीत सिंह विर्क एवं महेंद्र सिंह भुल्लर आदि पहुंचे। इसके अलावा कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके खुद भी मौजूद रहे, लेकिन सुखबीर बादल सदस्यों से अकेले ही मिले। इस दौरान सदस्यों ने कई अहम सुझाव भी दिए। सूत्रों के मुताबिक सुखबीर ङ्क्षसह बादल से मिलने के बाद कुछ सदस्यों ने अकाली सांसद प्रो. चंदूमाजरा के आवास पर जाकर उनसे भी मुलाकात की। उधर, इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कुछ भी बोलने से साथ इनकार कर दिया है।
भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए : रंजीत कौर 
दिल्ली कमेटी की सदस्य एवं अकाली दल बादल की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रंजीत कौर ने भी पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के समक्ष अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि कमेटी एवं पार्टी में जो भी आतंरिक विरोध का मामला है उसे बैठकर सुलझा लिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सिख संगत के सामने आ जाए। लेकिन, अफसोस कि एक दूसरे पर आरोप लगाने के चलते संगत के बीच गलत मैसेज जा रहा है। उन्होंने सुखबीर बादल को बताया कि कमेटी में विपक्ष नहीं है, लेकिन हम खुद ही विपक्ष क्रियेट कर दिए हैं। लिहाजा, समय-समय पर सदस्यों की काउंसलिग होनी चाहिए। रंजीत कौर ने इस दौरान बताया कि हमसभी को मिलकर संगइन को मजबूत करना चाहिए। यूथ विंग को महिला विंग की तर्ज पर फैलाना चाहिए। हमने 1000 महिलाओं को जोड़ा है। स्त्री कवि दरबार शुरू कराया। अब घरेलू महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। रंजीत कौर ने सुखबीर बादल को लिखित सुझाव दिया कि वह कार्यकर्ताओं से बीच-बीच में मिलें, ताकि उनका मनोबल भी मजबूत हो।
धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे : बाठ 
दिल्ली कमेटी के पूर्वी दिल्ली से सदस्य कुलवंत सिंह बाठ के मुताबिक आरोप बहुत लोग लगाते हैं, अगर आरोप गंभीर है तो कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके को खुद सामने आकर संगत को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी भी अध्यक्ष जांच बिठा सकते हैं। 5 साल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। बाठ ने दिल्ली कमेटी के एक्ट में सरकार जो संशोधन करने जा रही है उसका स्वागत किया है। धार्मिक लोग राजनीतिक क्षेत्र से अलग होना चाहिए। धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे।

गुरुद्वारा कमेटी का खजाना खाली, गहराया संकट

NEW DELHI.  : 100 करोड़ सालाना रूपये के बजट वाली दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर आर्थिक संकट गहरा गया है। कमेटी प्रबंधकों की गलत नीतियों के चलते दूसरों का पेट भरने वाली कमेटी का खजाना खाली हो चुका है, नतीजन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कमेटी अब ऋण ले रही है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कर्ज लेने की नौबत आई है। यह ऋण भी किसी नये संस्थान को स्थापित करने या ढांचागत निवेश के लिए नहीं बल्कि अपने 12 स्कूलों (गुरू हरिकिशन पब्लिक स्क्ूल) में कार्यरत कर्मचारियों को छठें वेतन आयोग का बकाया देने के लिए लिया जा रहा है। स्कूलों में छठें वेतन आयोग को लागू करने की जिम्मेदारी कमेटी की थी, लेकिन, कमेटी प्रबंधकों की हठधर्मिता के कारण मामले को लटका दिया गया। लिहाजा अब दो ही चारा बचा है, या तो अदालत की अवमानना के आरोप में जेल जाएं या स्कूलों को सरकार के हवाले कर दें। दोनों ही अवस्थाओं में कमेटी प्रबंधकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं व भविष्य की हत्या होने की संभावना है। इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए बकाया 65 करोड़ रूपये का भुगतान करने के लिए पहले बैंकों से कर्जा लेने की जुगत भिड़ाई गई, लेकिन स्कूलों के घाटे में होने के कारण बैंकों ने लोन वसूली के लिए व्यापाक आधार न होने के कारण लोन देने से इनकार कर दिया। इसलिए अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से कर्ज लेने की बात तय हो गई है। पहली किश्त के तौर पर करीब 25 करोड़ का लोन लिया जाएगा।

—कमेटी प्रबंधकों की गलत नीतियों से बिगड़े हालात
–बैंकों ने गुरुद्वारा कमेटी को लोन देने से किया इनकार
–एसजीपीसी से ऋण लेने के लिए खटखटाया दरवाजा
–आर्थिक संकट गहराने के बाद 450 कर्मचारियों को निकालने का फैसला
–स्कूलों की तालाबंदी रोकने के लिए जमाबंदी का सहारा

वर्ष 2013 में कमेटी की सत्ता संभालने वाले अकाली नेता मंजीत सिंह जीके के लिए अदालत में पूर्व कमेटी द्वारा दाखिल एक हलफनामा मुश्किल में डाल दिया। हालांकि, मई 2014 से जीके ने कमेटी कर्मचारियों को छठें वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देना शुरू कर दिया। लेकिन पिछले 11 साल के बकाये को देने के लिए नीति बनाने में कमेटी के प्रबंधकों ने अपने गलत नीतियों से स्कूलों को इस कगार पर खड़ा कर दिया है कि कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ गई है। यही कारण है कि स्कूलों पर ताला लगाने का कारण बनी हुई है। हालांकि, मौजूदगा कमेटी ने आर्थिक संकट गहराने के बाद अब अतिरिक्त 450 कर्मचारियों को बाहर निकालने का फैसला लिया गया है। इन कर्मचारियों को लगभग 1.8 करोड़ रूपये का वेतन हर महीने मुफ्त में दिया जा रहा था। कमेटी इस वेतन को बचाकर स्क्ूलों को फिर से खड़ा करना चाहती है। लेकिन 450 करोड़ चूल्हा बुझाने के बावजूद स्कूलों के लाभ में आने की स्थिति नहीं है। हां, स्कूलों के खर्चे लगभग पूरे होने की आशंका जरूर व्यक्त की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक छठें वेतन आयोग का बकाया अभी कमेटी ने दिया नहीं है और दूसरी ओर सातवें वेतन आयोग को लागू करने की मांग को लेकर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कई याचिकाएं अदालत में दाखिल हो गई हैं। सिख हलकों में कहा जा रहा है, जत्थेदार संतोष सिंह ने 1965 में इन स्क्ूलों केा खोला था और उनके पुत्र के प्रधानगी काल में इन स्कूलों के बंद होने के हालात बन गए हैं।

40 फीसदी भुगतान पर तैयार थे कर्मचारी
सूत्रों के मुताबिक कमेटी के पदाधिकारियों के पास उस समय कर्मचारियों के साथ बकाये को लेकर डील करने का बढय़ा मौका था। कर्मचारी 40 फीसदी भुगतान के एवज में 100 फीसदी भुगतान पर हस्ताक्षर करने को तैयार हो गया था। लेकिन यहीं पर कमेटी प्रबंधकों ने दूर दर्शिता का इस्तेमाल करने की बजाय लोक लुभावन कार्यशैली के तहत सबकुछ चौपट कर दिया। मतलब उस समय 110 करोड़ के बकाये का फैसला 40 से 45 करोड़ में खत्म होने वाला था, परंतु प्रबंधकों ने फैसला नहीं लिया। नतीजन अदालत में हलफनामा दे दिया कि हम 100 फीसदी बकाये का ब्याज सहित भुगतान करेंगे। 110 करोड़ रुपये के कुल भुगतान की जगह कमेटी अभी तक 110 करोड़ रुपये का लगभग भुगतान कर चुकी है, और अभी भी 50 से 60 करोड़ रूपया ब्याज राशि के रूप में देना बाकी है।

कमेटी की आमदनी और खर्चे का हिसाब
बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी का सालाना बजट लगभग 100 करोड़ रुपये का है। इसमें से करीब 95 करोड़ से ज्यादा का खर्चा होता है। कमेटी की आय का मुख्य साधन गुरू की गोलक, कढ़ा प्रसाद, अखंड पाठ, बिल्डिंग फंड आदि से हैं। खास बात यह है कि कमेटी में तैनात 1700 कर्मचारियों के वेतन के रूप में हर महीने 4 करौड़ रूपये सैलरी आती है। इसके अलावा धर्म प्रचार, साहित्य, धार्मिक कार्यक्रम, आर्थिक सहायता आदि मदों में खर्चा होता है।

दुर्दशा के लिए सिर्फ सरना जिम्मेदार : कमेटी

दिल्ली कमेटी के प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने कहा कि 2013 तक सत्ता में रहे पूर्व कमेटी अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने अगर समय रहते स्कूल कर्मचारियों को उसका हक दे दिया होता तो आज 175 करोड़ रूपये की देनदारी स्कूलों के समक्ष खड़ी न होती। सरना ने स्टाफ के साथ 11 साल झेले टकराव के अंतिम दौर में हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि स्कूल कर्मचारियों को उसका हक दिया जाएगा। यही हलफनामा नई कमेटी के लिए जी का जंजाल बन गया है। कमेटी प्रवक्ता ने माना है कि एसजीपीसी से लोन लिया जा रहा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कमेटी अपनी विरासत को बचाने के लिए कदम उठा रही है। हमारे लिए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाना मुख्य लक्ष्य है।

सरना ने गुरुद्वारा न्यायिक आयोग को किया सतर्क

शिरोमणि अकाली दल के महासचिव हरविंदर सिंह सरना कहा कि दिल्ली कमेटी के खजाने को लूट कर खाली करने के बाद बादल दल ने शिरोमणी कमेटी के खजाने से 25 करोड़ रुपए कर्ज हासिल करने की साजिश को अंजाम दिया है। सरना ने कहा कि दिल्ली के सभी बैंकों द्वारा गुरद्वारों की जमीने गिरवी रख कर दिल्ली कमेटी को कर्ज देने की पेशकश को ठुकराए जाने के बाद इसने गुपचुप तरिके से शिरोमणी कमेटी के खजाने से 25 करोड़ रुपए 10 फीसदी सालाना ब्याज पर कर्ज हासिल करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि यह पैसा भी जी. के. द्वारा परोक्ष रूप से अपने निजी फायदे के लिए खर्च लिए जाने की योजना भी पहले से ही तैयार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस गहरी और घिनौनी साजिश की बाबत गुरुद्वारा जुडिशल कमीशन को सतर्क किया है।

गुरुद्वारा कमेटी: सियासत में व्यस्त, भूली ‘असली सेवा’

NEW DELHI.  देश-विदेश के सियासी मसलों में व्यस्त दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस समय अपने असली काम को भूल गई है। नतीजन, कमेटी मुख्यालय से लेकर स्कूलों एवं शिक्षण संस्थाओं की व्यवस्था चरमरा गई है। स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है, लेकिन कमेटी प्रबंधन अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इंफाल, हरियाणा, उत्तराखंड आदि राज्यों के मसले को लेकर सियासत करने में व्यस्त है। स्कूलों में नया सत्र भी शुरू हो गया है। लेकिन, प्रबंधकों को बच्चों की कोई चिंता नहीं दिखती है। खास बात यह है कि स्कूलों में प्रशासन की जिम्मेदारी देखने के लिए बनाई गई चेयरमैन और मैनेजर वाली कमेटियां भी दो महीने पहले से ही भंग कर दी गई हैं। कमेटियां भंग करने के साथ ही कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके द्वारा कहा गया था कि बहुत जल्द नये एवं काम करने वाले लोगों के नेतृत्व में सभी कमेटिंया बनेगी, लेकिन अभी तक कोई कमेटी गठित नहीं हुई है। इसको लेकर भी कमेटी सदस्यों एवं अकाली नेताओं में गुस्सा बना हुआ है। कमेटी प्रबंधकों की व्यवस्ता का आलम यह है कि कमेटी में जरूरी बिलों और चेकों पर साइन करने के लिए समय नहीं है।

–स्कूलों में व्यवस्था बदहाल, प्रबंधक कमेटियां पड़ी हैं भंग
—नया सत्र शुरू, जरूरी विषय पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं
–प्रबंधक व्यस्त, बिना साइन अटके पड़े हैं जरूरी बिल और रिकार्ड

 

बता दें कि गुरुद्वारा कमेटी के अधीन संचालित गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूलों में कई जरूरी विषयों में अध्यापकों की कमी बताई जा रही है। स्कूलों में संविदा के आधार पर रखे गए ज्यादातर अध्यापकों को इस वर्ष का कांट्रैक्ट नहीं दिया गया है। अब तक 176 टीचरों में से महज 40 को बहाल किया गया है। इसके पीछे स्कूलों की माली हालात ठीक होना बताया जा रहा है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। स्कूलों का प्रबंध गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल सोसायटी चलाती है, जिसका मुख्यालय इंडिया गेट स्कूल में है, वहीं दूसरी तरफ समानान्तर कमेटी का शिक्षा विभाग स्कूलों के अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए माता सुन्दरी कालेज से कार्यशील है। लेकिंन स्कूलों के प्रबंध में तालमेल की कमी के चलते समस्या खड़ी हो गई है। इसके लिए चेयरमैन ओर मैनेजरों की योग्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जबकि, 2013 के चुनाव के समय कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत से वायदा किया था स्कूलों का प्रबंध सियासी लोगों की बजाय शैक्षणिक योगयता वाले लोगों को सौंपा जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ है। स्कूलों से जुड़ृे लोगों का कहना है कि प्रबंधकों को च ाहिए कि देश विदेश की चिंता करने की बजाय अपने स्कूलों को देखने की ओर ध्यान देना चाहिए। उधर, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर कमेटी प्रबंधकों को घेरना शुरू कर दिया है।

स्कूल प्रिंसिपल की फाइल गुम, हडकंप
गुरूतेग बहादुर गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, की प्रिंसिपल की निजी फाइल गुम हो गई है, इसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है। यह वाक्या तब हुआ जब प्रिेंसिपल के खिलाफ शिक्षा निदेशालय में एक शिकायत पहुंची है। इसको लेकर कमेटी मुख्यालय में भी चर्चा है कि आखिर प्रिंसिपल की फाइल में क्या खामी थी जो कि गुम हो गई है।

 

 

गुरुद्वारा कमेटी : 4 दिन, 3 अधिकारी, 2 बार सस्पेंड 

NEW DELHI. महिला उत्पीडऩ को लेकर घिरी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में आज शुक्रवार को एक नया मोड़ आया। अपने विदेश दौरे से लौटते ही दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने महाप्रबंधक, 2 डिप्टी जीएम को सस्पेंड कर दिया। साथ ही जांच के लिए एक हाईलेवल कमेटी गठित कर दी और 30 दिन में रिपोर्ट मांग लिया। इन्हीं तीनों अधिकारियों जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार, उप जनरल मैनेजर सुखविन्दर सिंह एवं बलबीर सिंह को कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने 16 अप्रैल को सस्पेंड किया था। हालांकि, दूसरे ही दिन 17 अप्रैल को कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने सिरसा के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सिरसा और कालका के बीच तीन दिन तक शीतयुद् चलता रहा। तीनों अधिकारियों के खिलाफ महिला उत्पीडऩ को लेकर अलग-अलग थानों में केस भी दर्ज हैं।
–विदेश से लौटते ही कमेटी अध्यक्ष जीके ने दोबारा किया सस्पेँड  
–महिला उत्पीडऩ को लेकर चल रहा विवाद में आया नया मोड़ 
–धर्मेद्र सिंह को बनाया कार्यकारी कमेटी प्रबंधक 
सिरसा के द्वारा दंडित करने और कालका द्वारा उन्हें खुले तौर पर बचाने की कवायद सिख संगतों के बीच में जगजाहिर हो चुकी है। सियासत के जानकारों के अलावा आम सिख भी इस घटना को लेकर कमेटी प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं।   नये बदलाव में कमेटी अध्यक्ष मंजीत ङ्क्षसह जीके ने धमेंन्द्र सिंह को जांच पूरी होने तक कमेटी का कार्यवाहक महाप्रबंधक नियुक्त किया है। वे गुरुद्वारा बंगला साहिब के जनरल मैनेजर के साथ ही कमेटी मुख्यालय का अतिरिक्त कार्य भी देखेंगे।
   सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने 24 अप्रैल मंगलवार को कार्यकारिणी की बैठक बुला ली है। इस बैठक में अधिकारों पर पैदा हुई दुविधा का हल तलाशने की कोशिश हो सकती है। सूत्रों की माने तो हो सकता है महासचिव का अधिकार भी छिन जाए।
पूर्व न्यायाधीश आरएस सोढ़ी करेंगे जांच 
कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के सेवामुक्त न्यायाधीश आर.एस.सोढ़ी की जांच कमेटी बनाने का फैसला किया है। सोढ़ी को 30 अप्रैल तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सोढ़ी देश के चर्चित मामलों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने जेसिका लाल हत्याकांड जैसे मामलों को निपटाया है। इससे पहले सिरसा ने भी 4 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी, जो पहले दिन से ही काम कर रही है।
दोनों अधिकारियों को नहीं मिली जमानत 
कमेटी सूत्रों की माने तो जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार एवं उप महाप्रबंधक सुखविन्दर की जमानत याचिका शुक्रवार को अदालत ने खारिज कर दी है। इस मामले में 23 अप्रैल को अब सुनवाई होगी। साथ ही कुछेक धाराओं को और जोडऩे की बात हो रही है। हालांकि, आईओ ने रिपोर्ट फाइल की। हालांकि, कमेटी ने जमानत याचिका खारिज होने की बात से इनकार कर रहा है।
दागियों को बचाने के लिये जीके धड़ा व्याकुल : इंद्र मोहन 
शिरोमणी अकाली दल (दिल्ली) के सीनियर उप-प्रधान इन्दर मोहन सिंह ने कमेटी प्रबंधन पर महिला उत्पीडऩ के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों को जब महासचिव ने सस्पेंड कर दिया तो कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत कालका ने उनका बचाव कर सिख संगतों के बीच गलत मैसेज दिया।  ऐसा लगता है कि कथित संगीन जुर्म से लिप्त जनरल मैनेजर तथा उसके साथियों को बचाने के लिये प्रबंधन व्याकुल हैं।
  इंदर मोहन सिंह ने दिल्ली कमेटी के सभी औहदेदारों तथा सदस्यों से अपील की है कि वह साफ तौर पर बतायें कि वह दागी अफसरों का साथ देकर धार्मिक संस्था का प्रभाव बिगाडऩा चाहतें हैं। महिलाओं की रक्षा की बजाय कमेटी के लोग आरोपियों को बचाने में लगे हैं। अगर पीडि़त महिलायों को कोई इन्साफ नहीं मिलता है तो शिरोमणी अकाली दल दिल्ली कानूनी कार्यवाही करने के अतिरिक्त दिल्ली की संगतों के सहयोग से दागी औहदेदारों के घरों एंव कार्यालयों पर धरना प्रर्दषन करने से गुरेज नहीं करेगी।

सिख राजनीति में वर्चस्व की शुरु हुई  ‘अधर्मी लड़ाई’ 

NEW DELHI.  सिख धर्म की रक्षा और प्रचार प्रसार के लिए गठित की गई दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने मूल मससद से भटक गई है। वह सिखी की रक्षा की बजाय महिला उत्पीडऩ जैसे गंभीर मामले में उलझ कर रह गई है। पिछले एक सप्ताह से कमेटी प्रबंधन के बीच चल रहे शीत युद्ध के चलते कमेटी का कामकाज ठप पड़ गया है। साथ ही कर्मचारियों और अधिकारियों में दहशत का माहौल है। बुधवार को कमेटी में अजीबो गरीब स्थिति बनी रही। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज सुबह से शाम तक 6 चिट्ठी जारी किए। जवाब में कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने भी पलटवार कर दिया।
–कमेटी महासचिव सिरसा ने एक दिन में जारी किए 6 नोटिस 
–कार्यकारी अध्यक्ष कालका ने सुखबीर बादल से की सिरसा की शिकायत 
–गुरुद्वारा कमेटी में कामकाज ठप, दहशत में कर्मचारी 
कालका ने तो अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को पत्र लिखकर सिरसा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई। साथ ही कहा कि सिरसा पार्टी और कमेटी की छवि खराब कर रहे हैं। वह कार्यालय के अंतरिम पत्रों को भी सोशल मीडिया एवं मीडिया को जारी कर रहे हैे। इसके अलावा उन्होंने जिस परमजीवन जोत सिंह  को कार्यकारी महाप्रबंधक की जिम्मेदारी सौंपी है, वह कमेटी के अस्थाई कर्मचारी है, उन्हें जीएम कैसे बना दिया। कालका ने सुखबीर बादल को कहा है कि सिरसा की पहली चिट्ठी तकनीकी रूप से गलत है इसलिए मै इसका विरोध कर रहा हूं। लिहाजा, सिरसा के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए। कालका ने दूसरी चिट्ठी महासचिव सिरसा को लिखी, साथ ही  पूछा कि उस जनरल हाउस में आपने प्रधान को पावर देने का समर्थन किया था तो आज विरोध क्यों कर रहे हैं। इसके अलावा
अस्थायी अधिकारी परमजीवन जोत सिंह को कार्यकारी जनरल मैनेजर बनाने को सिरसा के एक्ट के बारे अल्प ज्ञान से जोड़ा है। इसके साथ ही अपने पुराने आदेशों के बरकरार रहने की सिरसा को जानकारी दी है।
अपने बचाव में उतरे दोनों अधिकारी, पहुंचे थाने 
 कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा निलंबित किए गए महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार और उपमहाप्रबंधक सुखविन्दर सिंह  भी अपने बचाव में बुधवार को मैदान में उतरे। दोनों अधिकारियों ने सुबह नार्थ एवेन्यू थाने में शिकायत पत्र देकर महासचिव सिरसा के द्वारा धमकाने और नौकरी पर ना आने देने की शिकायत दी है। साथ ही बताया है कि कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने उनका निलंबन कैंसिल कर दिया है।
तीनों अधिकारी कमेटी में दिखे तो केस दर्ज होगा 
महिला उत्पीडऩ के मामले में तीन अधिकारियों महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार और उपमहाप्रबंधक सुखविन्दर सिंह  एवं बलबीर सिंह  को सजा देने वाले कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा आज भी अपने फैसलों पर अडिग हैं। उन्होंने बुधवार को वर्तमान महाप्रबंधक को कहा है कि तीनों निलंबित अधिकारी अगर कमेटी में दिखते हैं तो तत्काल उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह स्वयं (सिरसा) कार्यकारी महाप्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज करवा देंगे। सिरसा ने कमेटी के सीएलओ को भी चिटठी जारी कर कानून तोडऩे वाले अधिकारियों के खिलाफ केज दर्ज कराने का आदेश दिया है। हालांकि, सिरसा ने मामले को बिगड़ता देख नार्थ एवेंन्यू पुलिस थाने में निलंबित महाप्रबंधक के खिलाफ बिना इजाजत के कमेटी कार्यालय में घूमने की शिकायत भी दर्ज करा दिया है।
जांच कमेटी ने तीनों अधिकारियों को किया तलब 
महिला उत्पीडऩ के आरोंपों से घिरे तीनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए बनाई गई 4 सदस्यीय कमेटी के प्रमुख सर्वजीत सिंह विर्क ने आज नोटिस जारी कर तीनों अधिकारियों को तलब कर लिया है। साथ ही कल सुबह पूछताछ के लिए पंजाबी बाग स्कूल में बुलाया है। जांच कमेटी ने कहा है कि उन्होंने अपनी जांच शुरू कर दी है, लिहाजा अधिकारियों को समय पर पहुंचना ही होगा।