गुरुद्वारा कमेटी में ‘दान घोटाला, डकार गए 51 लाख,  GM सस्पेंड

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा किया है। साथ ही कहा कि जीके ने एक नहीं लगातार कई घोटाले किए हैं, जिसमें से तीन घोटालों के सबूत सामने आए हैँ। इन घोटालों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरूण जेटली, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस सहित दिल्ली गुरुद्वारा आयोग से लिखित रूप से की है। इनमें सबसे अहम घोटाला है दान घोटाला, जिसके तहत 51 लाख रुपये का सीधे गबन किया गया है। मनजीत सिंह जीके के खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई है और पुलिस ने डीडी नंबर 11ए, तारीख 21 अक्टूबर 2018 के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पुलिस को अपना बयान दिया है और सभी साक्ष्य सौंपे हैं। मामला चूंकि, गुरुद्वारे के गोलक की लूट से जुड़ा है, इसलिए अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी शिकायत की गई है।
 
–कमेटी के सदस्य गुरमीत शंटी ने लगाए सनसनीखेज आरोप 
–प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को लिखी चिट्ठी, कमेटी खातों की जांच की मांग
–अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को भी लिखी चिटठी, करें हस्तक्षेप   
–गुरमीत शंटी ने पुस्तक घोटाले का जारी किया आडियो टेप 
शंटी ने आरोप लगाया कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी कमेटी के बाकी सदस्य एवं पदाधिकारी खामोश बैठे हैं। शंटी ने कहा कि मनजीत सिंह जीके के कार्यकाल के दौरान प्रधान-डीएसजीएमसी के रूप में, डीएसजीएमसी और जीएचपीएस के सभी खातों को सत्य जानने के लिए उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
     कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि सिख धर्म के प्रचार के लिए गुरुद्वारा कमेटी ने 82 हजार धार्मिक पुस्तकें छपवाने का दावा किया था, जबकि, हकीकत में पुस्तकें छपी ही नहीं और लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। पुस्तक घोटाले को लेकर शंटी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक आडियो टेप भी जारी किया, जिसमें पुस्तकें नहीं छापने और फर्जी बिल बनाने की बात कही गई है। आडियो टेप में पुस्तक छापने वाले जोगिंदर सिंह प्रेस ने माना है कि कमेटी ने उनसे फर्जी बिल बनवाए और उसका लाखों रुपये खा गए।
ब्लैकलिस्टेड  कंपनी को दिया ठेका, पेमेंट भी हुआ  
इसके अलावा कमेटी अध्यक्ष जीके ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी ‘रेनबी क्लॉथिंग प्राइवेट लिमिटेडÓ को कपड़े सप्लाई करने का ठेका दिया और उसे भुगतान भी कर दिया। यह कंपनी उनके बेटे एवं दामाद की है, जो उनके अपने निजी आवास के पते पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2015 में बंद हो चुकी कंपनी को 2017-18 में भुगतान किया गया। जबकि, कमेटी एक्ट के अनुसार परिवार का सदस्य कोई व्यवसाय गुरुद्वारे में नहीं कर सकता है।
51 लाख रुपये का दान का गबन 
पूर्व महासचिव गुरमीत शंटी ने कहा कि कनाडा के एक श्रद्धालु ने 1 लाख कैनेडियन डॉलर का दान डीएसजीएमसी को दिया, जिनको भारतीय रुपए में बदल कर 51,05,773.20 रुपए 30 जून 2016 को बैंक में जमा किया गया था। यह कुल राशि 51,05,773.20 है। बैंक स्टेटमेंट में भी यह रकम साफ दर्ज है। लेकिन, मनजीत जीके ने एक नकली वाउचर नंबर 3468 बना कर उसी तारीख को 51,05,773 रुपये उसी तारीख को यानी 30 जून 2016 और डीएसजीएमसी के कैश चेस्ट से निकाल ली गई।
जीके ने गृहमंत्रालय से मांगी है जेडप्लस सुरक्षा 
गुरमीत सिंह शंटी ने दावा किया कि मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत द्वारा हमले के डर से, (जैसे अमेरिकी संगत द्वारा हाल ही में उन पर किया गया था) दिल्ली पुलिस और जेड प्लस सुरक्षा मांगी है। इसके लिए गृह मंत्रालय एवं दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि जीके ईमानदार हैं, तो उन्हें दिल्ली की संगत के डर से सुरक्षा की मांग नहीं करनी चाहिए थी।
मंजीत सिंह दें इस्तीफा, गैरहाजिरी में हो खातों की जांच- सरना   
शिरोमणि अकाली दल (दिलली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने इतने बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही पुलिसे से उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि जीके की गैरहाजिरी में कमेटी के सभ्ीा खातों की जांच होनी चाहिए। सरना ने कहा कि कमेटी के इतिहास में यह पहला वाक्या होगा, जब एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं।
जांच में जो दोषी होगा, कार्रवाई होगी: दिल्ली कमेटी 
 दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने गुरमीत सिंह शंटी के आरोपों पर बहुत ज्यादा आज नहीं बोला है। कमेटी प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने इतना ही कहा कि हमने पहले ही नार्थ एवेन्यू थाने मे जांच के लिए तहरीर दे रखी हैं। लिहाजा, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्यवाही होंगी।

गुरुद्वारा कमेटी का जनरल मैनेजर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित

दिल्ली कमेटी सदस्य सरदार गुरमीत सिंह शंटी द्वारा कमेटी के जनरल मैनेजर सरदार हरजीत सिंह सुबेदार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर कमेटी अध्यक्ष मंजीतसिंह जीके ने तत्काल प्रभाव से सुबेदार को संस्पेंड कर दिया है। साथ ही जांच के लिए सरदार हरमीत सिंह कालका व सरदार महिन्द्रपाल सिंह चड्ड़ा की अगुवाई में 2 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस फैसले का ऐलान करते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. ने सूबेदार को पद से निलंबित भी कर दिया।

बादल की ‘अदालत’ में अकालियों की लगी ‘क्लास’  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी में कथित भ्रष्टाचार, घोटाले सहित कई अन्य मामलों में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई आज अकाली दल बादल के सुप्रीमों सुखबीर सिंह बादल की अदालत में पहुंची। बादल ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके एवं महासचिव मनजिंंदर सिंह सिरसा के बीच छिड़े जंग को सुलझाने के लिए आज अपने आवास पर सभी नेताओं को तलब किया। बादल ने कमेटी के करीब 20 सदस्यों से बंद कमरे में अलग-अलग बातचीत की और वर्तमान हालात की बावत जानकारी मांगी। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान ज्यादातर सदस्यों ने करप्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। साथ ही कहा कि कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए। इसको लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है और संगत के बीच गलत मैसेज भी जा रहा है।
— सिरसा-जीके की लड़ाई को सुलझाने में जुटे सुखबीर बादल  
–दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार पर सदस्यों ने उठाई आवाज 
–अलग-अलग सदस्यों से बंद कमरे में मिले शिअद सुप्रीमो 
सूत्रों के मुताबिक सदस्यों ने कहा कि अब करप्शन का मुद्दा इतना ज्यादा फैल गया है िक संगत भी पूछने लगी है। लिहाजा, संगतों को हम लोग क्या जवाब दें। सदस्यों ने सुखबीर बादल को कहा कि पहले मंजीत सिंह जीके इस्तीफे की बात कही और शक्तियां देकर चले गए, और अब महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा ने अपनी शक्तियां देकर घर बैठ गए। यह सिख संगतों के बीच बहुत गलत मैसेज जा रहा है। लिहाजा इस मसले को तुरंत सुलझाया जाना चाहिए। एक सदस्य ने कहा कि मंजीत सिंह जीके पर बड़ा ही गंभीर आरोप लगा है, इसके जवाब में जीके को खुद अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही पार्टी को चाहिए कि वह इसकी निष्पक्ष जांच करवाए।
आज फिर बाकी 20 सदस्यों से करेंगे मुलाकात
   शुक्रवार को फिर दिल्ली के बाकी सदस्यों को बुलाया गया है। वीरवार को पश्चिमी दिल्ली एवं नई दिल्ली क्षेत्र के सदस्य पहुंचे थे। इनमें पूर्व कमेटी अध्यक्ष एवं पटना साहिब के नवनियुक्त अध्यक्ष अवतार सिंह हित, रंजीत कौर, हरमनजीत सिंह, जगदीश सिंह काहलो, हरजीत सिंह पप्पा, गुरमीत सिंह भाटिया, निशान सिंह मान, स्वर्ण सिंह बराड़, मनमोहन सिंह, दलजीत सिंह सरना, सर्वजीत सिंह विर्क एवं महेंद्र सिंह भुल्लर आदि पहुंचे। इसके अलावा कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके खुद भी मौजूद रहे, लेकिन सुखबीर बादल सदस्यों से अकेले ही मिले। इस दौरान सदस्यों ने कई अहम सुझाव भी दिए। सूत्रों के मुताबिक सुखबीर ङ्क्षसह बादल से मिलने के बाद कुछ सदस्यों ने अकाली सांसद प्रो. चंदूमाजरा के आवास पर जाकर उनसे भी मुलाकात की। उधर, इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कुछ भी बोलने से साथ इनकार कर दिया है।
भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए : रंजीत कौर 
दिल्ली कमेटी की सदस्य एवं अकाली दल बादल की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रंजीत कौर ने भी पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के समक्ष अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि कमेटी एवं पार्टी में जो भी आतंरिक विरोध का मामला है उसे बैठकर सुलझा लिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सिख संगत के सामने आ जाए। लेकिन, अफसोस कि एक दूसरे पर आरोप लगाने के चलते संगत के बीच गलत मैसेज जा रहा है। उन्होंने सुखबीर बादल को बताया कि कमेटी में विपक्ष नहीं है, लेकिन हम खुद ही विपक्ष क्रियेट कर दिए हैं। लिहाजा, समय-समय पर सदस्यों की काउंसलिग होनी चाहिए। रंजीत कौर ने इस दौरान बताया कि हमसभी को मिलकर संगइन को मजबूत करना चाहिए। यूथ विंग को महिला विंग की तर्ज पर फैलाना चाहिए। हमने 1000 महिलाओं को जोड़ा है। स्त्री कवि दरबार शुरू कराया। अब घरेलू महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। रंजीत कौर ने सुखबीर बादल को लिखित सुझाव दिया कि वह कार्यकर्ताओं से बीच-बीच में मिलें, ताकि उनका मनोबल भी मजबूत हो।
धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे : बाठ 
दिल्ली कमेटी के पूर्वी दिल्ली से सदस्य कुलवंत सिंह बाठ के मुताबिक आरोप बहुत लोग लगाते हैं, अगर आरोप गंभीर है तो कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके को खुद सामने आकर संगत को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी भी अध्यक्ष जांच बिठा सकते हैं। 5 साल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। बाठ ने दिल्ली कमेटी के एक्ट में सरकार जो संशोधन करने जा रही है उसका स्वागत किया है। धार्मिक लोग राजनीतिक क्षेत्र से अलग होना चाहिए। धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे।

गुरुद्वारा कमेटी का खजाना खाली, गहराया संकट

NEW DELHI.  : 100 करोड़ सालाना रूपये के बजट वाली दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर आर्थिक संकट गहरा गया है। कमेटी प्रबंधकों की गलत नीतियों के चलते दूसरों का पेट भरने वाली कमेटी का खजाना खाली हो चुका है, नतीजन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कमेटी अब ऋण ले रही है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कर्ज लेने की नौबत आई है। यह ऋण भी किसी नये संस्थान को स्थापित करने या ढांचागत निवेश के लिए नहीं बल्कि अपने 12 स्कूलों (गुरू हरिकिशन पब्लिक स्क्ूल) में कार्यरत कर्मचारियों को छठें वेतन आयोग का बकाया देने के लिए लिया जा रहा है। स्कूलों में छठें वेतन आयोग को लागू करने की जिम्मेदारी कमेटी की थी, लेकिन, कमेटी प्रबंधकों की हठधर्मिता के कारण मामले को लटका दिया गया। लिहाजा अब दो ही चारा बचा है, या तो अदालत की अवमानना के आरोप में जेल जाएं या स्कूलों को सरकार के हवाले कर दें। दोनों ही अवस्थाओं में कमेटी प्रबंधकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं व भविष्य की हत्या होने की संभावना है। इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए बकाया 65 करोड़ रूपये का भुगतान करने के लिए पहले बैंकों से कर्जा लेने की जुगत भिड़ाई गई, लेकिन स्कूलों के घाटे में होने के कारण बैंकों ने लोन वसूली के लिए व्यापाक आधार न होने के कारण लोन देने से इनकार कर दिया। इसलिए अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से कर्ज लेने की बात तय हो गई है। पहली किश्त के तौर पर करीब 25 करोड़ का लोन लिया जाएगा।

—कमेटी प्रबंधकों की गलत नीतियों से बिगड़े हालात
–बैंकों ने गुरुद्वारा कमेटी को लोन देने से किया इनकार
–एसजीपीसी से ऋण लेने के लिए खटखटाया दरवाजा
–आर्थिक संकट गहराने के बाद 450 कर्मचारियों को निकालने का फैसला
–स्कूलों की तालाबंदी रोकने के लिए जमाबंदी का सहारा

वर्ष 2013 में कमेटी की सत्ता संभालने वाले अकाली नेता मंजीत सिंह जीके के लिए अदालत में पूर्व कमेटी द्वारा दाखिल एक हलफनामा मुश्किल में डाल दिया। हालांकि, मई 2014 से जीके ने कमेटी कर्मचारियों को छठें वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देना शुरू कर दिया। लेकिन पिछले 11 साल के बकाये को देने के लिए नीति बनाने में कमेटी के प्रबंधकों ने अपने गलत नीतियों से स्कूलों को इस कगार पर खड़ा कर दिया है कि कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ गई है। यही कारण है कि स्कूलों पर ताला लगाने का कारण बनी हुई है। हालांकि, मौजूदगा कमेटी ने आर्थिक संकट गहराने के बाद अब अतिरिक्त 450 कर्मचारियों को बाहर निकालने का फैसला लिया गया है। इन कर्मचारियों को लगभग 1.8 करोड़ रूपये का वेतन हर महीने मुफ्त में दिया जा रहा था। कमेटी इस वेतन को बचाकर स्क्ूलों को फिर से खड़ा करना चाहती है। लेकिन 450 करोड़ चूल्हा बुझाने के बावजूद स्कूलों के लाभ में आने की स्थिति नहीं है। हां, स्कूलों के खर्चे लगभग पूरे होने की आशंका जरूर व्यक्त की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक छठें वेतन आयोग का बकाया अभी कमेटी ने दिया नहीं है और दूसरी ओर सातवें वेतन आयोग को लागू करने की मांग को लेकर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कई याचिकाएं अदालत में दाखिल हो गई हैं। सिख हलकों में कहा जा रहा है, जत्थेदार संतोष सिंह ने 1965 में इन स्क्ूलों केा खोला था और उनके पुत्र के प्रधानगी काल में इन स्कूलों के बंद होने के हालात बन गए हैं।

40 फीसदी भुगतान पर तैयार थे कर्मचारी
सूत्रों के मुताबिक कमेटी के पदाधिकारियों के पास उस समय कर्मचारियों के साथ बकाये को लेकर डील करने का बढय़ा मौका था। कर्मचारी 40 फीसदी भुगतान के एवज में 100 फीसदी भुगतान पर हस्ताक्षर करने को तैयार हो गया था। लेकिन यहीं पर कमेटी प्रबंधकों ने दूर दर्शिता का इस्तेमाल करने की बजाय लोक लुभावन कार्यशैली के तहत सबकुछ चौपट कर दिया। मतलब उस समय 110 करोड़ के बकाये का फैसला 40 से 45 करोड़ में खत्म होने वाला था, परंतु प्रबंधकों ने फैसला नहीं लिया। नतीजन अदालत में हलफनामा दे दिया कि हम 100 फीसदी बकाये का ब्याज सहित भुगतान करेंगे। 110 करोड़ रुपये के कुल भुगतान की जगह कमेटी अभी तक 110 करोड़ रुपये का लगभग भुगतान कर चुकी है, और अभी भी 50 से 60 करोड़ रूपया ब्याज राशि के रूप में देना बाकी है।

कमेटी की आमदनी और खर्चे का हिसाब
बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी का सालाना बजट लगभग 100 करोड़ रुपये का है। इसमें से करीब 95 करोड़ से ज्यादा का खर्चा होता है। कमेटी की आय का मुख्य साधन गुरू की गोलक, कढ़ा प्रसाद, अखंड पाठ, बिल्डिंग फंड आदि से हैं। खास बात यह है कि कमेटी में तैनात 1700 कर्मचारियों के वेतन के रूप में हर महीने 4 करौड़ रूपये सैलरी आती है। इसके अलावा धर्म प्रचार, साहित्य, धार्मिक कार्यक्रम, आर्थिक सहायता आदि मदों में खर्चा होता है।

दुर्दशा के लिए सिर्फ सरना जिम्मेदार : कमेटी

दिल्ली कमेटी के प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने कहा कि 2013 तक सत्ता में रहे पूर्व कमेटी अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने अगर समय रहते स्कूल कर्मचारियों को उसका हक दे दिया होता तो आज 175 करोड़ रूपये की देनदारी स्कूलों के समक्ष खड़ी न होती। सरना ने स्टाफ के साथ 11 साल झेले टकराव के अंतिम दौर में हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि स्कूल कर्मचारियों को उसका हक दिया जाएगा। यही हलफनामा नई कमेटी के लिए जी का जंजाल बन गया है। कमेटी प्रवक्ता ने माना है कि एसजीपीसी से लोन लिया जा रहा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कमेटी अपनी विरासत को बचाने के लिए कदम उठा रही है। हमारे लिए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाना मुख्य लक्ष्य है।

सरना ने गुरुद्वारा न्यायिक आयोग को किया सतर्क

शिरोमणि अकाली दल के महासचिव हरविंदर सिंह सरना कहा कि दिल्ली कमेटी के खजाने को लूट कर खाली करने के बाद बादल दल ने शिरोमणी कमेटी के खजाने से 25 करोड़ रुपए कर्ज हासिल करने की साजिश को अंजाम दिया है। सरना ने कहा कि दिल्ली के सभी बैंकों द्वारा गुरद्वारों की जमीने गिरवी रख कर दिल्ली कमेटी को कर्ज देने की पेशकश को ठुकराए जाने के बाद इसने गुपचुप तरिके से शिरोमणी कमेटी के खजाने से 25 करोड़ रुपए 10 फीसदी सालाना ब्याज पर कर्ज हासिल करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि यह पैसा भी जी. के. द्वारा परोक्ष रूप से अपने निजी फायदे के लिए खर्च लिए जाने की योजना भी पहले से ही तैयार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस गहरी और घिनौनी साजिश की बाबत गुरुद्वारा जुडिशल कमीशन को सतर्क किया है।

गुरुद्वारा कमेटी: सियासत में व्यस्त, भूली ‘असली सेवा’

NEW DELHI.  देश-विदेश के सियासी मसलों में व्यस्त दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस समय अपने असली काम को भूल गई है। नतीजन, कमेटी मुख्यालय से लेकर स्कूलों एवं शिक्षण संस्थाओं की व्यवस्था चरमरा गई है। स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है, लेकिन कमेटी प्रबंधन अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इंफाल, हरियाणा, उत्तराखंड आदि राज्यों के मसले को लेकर सियासत करने में व्यस्त है। स्कूलों में नया सत्र भी शुरू हो गया है। लेकिन, प्रबंधकों को बच्चों की कोई चिंता नहीं दिखती है। खास बात यह है कि स्कूलों में प्रशासन की जिम्मेदारी देखने के लिए बनाई गई चेयरमैन और मैनेजर वाली कमेटियां भी दो महीने पहले से ही भंग कर दी गई हैं। कमेटियां भंग करने के साथ ही कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके द्वारा कहा गया था कि बहुत जल्द नये एवं काम करने वाले लोगों के नेतृत्व में सभी कमेटिंया बनेगी, लेकिन अभी तक कोई कमेटी गठित नहीं हुई है। इसको लेकर भी कमेटी सदस्यों एवं अकाली नेताओं में गुस्सा बना हुआ है। कमेटी प्रबंधकों की व्यवस्ता का आलम यह है कि कमेटी में जरूरी बिलों और चेकों पर साइन करने के लिए समय नहीं है।

–स्कूलों में व्यवस्था बदहाल, प्रबंधक कमेटियां पड़ी हैं भंग
—नया सत्र शुरू, जरूरी विषय पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं
–प्रबंधक व्यस्त, बिना साइन अटके पड़े हैं जरूरी बिल और रिकार्ड

 

बता दें कि गुरुद्वारा कमेटी के अधीन संचालित गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूलों में कई जरूरी विषयों में अध्यापकों की कमी बताई जा रही है। स्कूलों में संविदा के आधार पर रखे गए ज्यादातर अध्यापकों को इस वर्ष का कांट्रैक्ट नहीं दिया गया है। अब तक 176 टीचरों में से महज 40 को बहाल किया गया है। इसके पीछे स्कूलों की माली हालात ठीक होना बताया जा रहा है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। स्कूलों का प्रबंध गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल सोसायटी चलाती है, जिसका मुख्यालय इंडिया गेट स्कूल में है, वहीं दूसरी तरफ समानान्तर कमेटी का शिक्षा विभाग स्कूलों के अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए माता सुन्दरी कालेज से कार्यशील है। लेकिंन स्कूलों के प्रबंध में तालमेल की कमी के चलते समस्या खड़ी हो गई है। इसके लिए चेयरमैन ओर मैनेजरों की योग्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जबकि, 2013 के चुनाव के समय कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत से वायदा किया था स्कूलों का प्रबंध सियासी लोगों की बजाय शैक्षणिक योगयता वाले लोगों को सौंपा जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ है। स्कूलों से जुड़ृे लोगों का कहना है कि प्रबंधकों को च ाहिए कि देश विदेश की चिंता करने की बजाय अपने स्कूलों को देखने की ओर ध्यान देना चाहिए। उधर, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर कमेटी प्रबंधकों को घेरना शुरू कर दिया है।

स्कूल प्रिंसिपल की फाइल गुम, हडकंप
गुरूतेग बहादुर गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, की प्रिंसिपल की निजी फाइल गुम हो गई है, इसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है। यह वाक्या तब हुआ जब प्रिेंसिपल के खिलाफ शिक्षा निदेशालय में एक शिकायत पहुंची है। इसको लेकर कमेटी मुख्यालय में भी चर्चा है कि आखिर प्रिंसिपल की फाइल में क्या खामी थी जो कि गुम हो गई है।

 

 

गुरुद्वारा कमेटी : 4 दिन, 3 अधिकारी, 2 बार सस्पेंड 

NEW DELHI. महिला उत्पीडऩ को लेकर घिरी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में आज शुक्रवार को एक नया मोड़ आया। अपने विदेश दौरे से लौटते ही दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने महाप्रबंधक, 2 डिप्टी जीएम को सस्पेंड कर दिया। साथ ही जांच के लिए एक हाईलेवल कमेटी गठित कर दी और 30 दिन में रिपोर्ट मांग लिया। इन्हीं तीनों अधिकारियों जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार, उप जनरल मैनेजर सुखविन्दर सिंह एवं बलबीर सिंह को कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने 16 अप्रैल को सस्पेंड किया था। हालांकि, दूसरे ही दिन 17 अप्रैल को कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने सिरसा के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सिरसा और कालका के बीच तीन दिन तक शीतयुद् चलता रहा। तीनों अधिकारियों के खिलाफ महिला उत्पीडऩ को लेकर अलग-अलग थानों में केस भी दर्ज हैं।
–विदेश से लौटते ही कमेटी अध्यक्ष जीके ने दोबारा किया सस्पेँड  
–महिला उत्पीडऩ को लेकर चल रहा विवाद में आया नया मोड़ 
–धर्मेद्र सिंह को बनाया कार्यकारी कमेटी प्रबंधक 
सिरसा के द्वारा दंडित करने और कालका द्वारा उन्हें खुले तौर पर बचाने की कवायद सिख संगतों के बीच में जगजाहिर हो चुकी है। सियासत के जानकारों के अलावा आम सिख भी इस घटना को लेकर कमेटी प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं।   नये बदलाव में कमेटी अध्यक्ष मंजीत ङ्क्षसह जीके ने धमेंन्द्र सिंह को जांच पूरी होने तक कमेटी का कार्यवाहक महाप्रबंधक नियुक्त किया है। वे गुरुद्वारा बंगला साहिब के जनरल मैनेजर के साथ ही कमेटी मुख्यालय का अतिरिक्त कार्य भी देखेंगे।
   सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने 24 अप्रैल मंगलवार को कार्यकारिणी की बैठक बुला ली है। इस बैठक में अधिकारों पर पैदा हुई दुविधा का हल तलाशने की कोशिश हो सकती है। सूत्रों की माने तो हो सकता है महासचिव का अधिकार भी छिन जाए।
पूर्व न्यायाधीश आरएस सोढ़ी करेंगे जांच 
कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के सेवामुक्त न्यायाधीश आर.एस.सोढ़ी की जांच कमेटी बनाने का फैसला किया है। सोढ़ी को 30 अप्रैल तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सोढ़ी देश के चर्चित मामलों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने जेसिका लाल हत्याकांड जैसे मामलों को निपटाया है। इससे पहले सिरसा ने भी 4 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी, जो पहले दिन से ही काम कर रही है।
दोनों अधिकारियों को नहीं मिली जमानत 
कमेटी सूत्रों की माने तो जनरल मैनेजर हरजीत सिंह सूबेदार एवं उप महाप्रबंधक सुखविन्दर की जमानत याचिका शुक्रवार को अदालत ने खारिज कर दी है। इस मामले में 23 अप्रैल को अब सुनवाई होगी। साथ ही कुछेक धाराओं को और जोडऩे की बात हो रही है। हालांकि, आईओ ने रिपोर्ट फाइल की। हालांकि, कमेटी ने जमानत याचिका खारिज होने की बात से इनकार कर रहा है।
दागियों को बचाने के लिये जीके धड़ा व्याकुल : इंद्र मोहन 
शिरोमणी अकाली दल (दिल्ली) के सीनियर उप-प्रधान इन्दर मोहन सिंह ने कमेटी प्रबंधन पर महिला उत्पीडऩ के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों को जब महासचिव ने सस्पेंड कर दिया तो कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत कालका ने उनका बचाव कर सिख संगतों के बीच गलत मैसेज दिया।  ऐसा लगता है कि कथित संगीन जुर्म से लिप्त जनरल मैनेजर तथा उसके साथियों को बचाने के लिये प्रबंधन व्याकुल हैं।
  इंदर मोहन सिंह ने दिल्ली कमेटी के सभी औहदेदारों तथा सदस्यों से अपील की है कि वह साफ तौर पर बतायें कि वह दागी अफसरों का साथ देकर धार्मिक संस्था का प्रभाव बिगाडऩा चाहतें हैं। महिलाओं की रक्षा की बजाय कमेटी के लोग आरोपियों को बचाने में लगे हैं। अगर पीडि़त महिलायों को कोई इन्साफ नहीं मिलता है तो शिरोमणी अकाली दल दिल्ली कानूनी कार्यवाही करने के अतिरिक्त दिल्ली की संगतों के सहयोग से दागी औहदेदारों के घरों एंव कार्यालयों पर धरना प्रर्दषन करने से गुरेज नहीं करेगी।

सिख राजनीति में वर्चस्व की शुरु हुई  ‘अधर्मी लड़ाई’ 

NEW DELHI.  सिख धर्म की रक्षा और प्रचार प्रसार के लिए गठित की गई दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने मूल मससद से भटक गई है। वह सिखी की रक्षा की बजाय महिला उत्पीडऩ जैसे गंभीर मामले में उलझ कर रह गई है। पिछले एक सप्ताह से कमेटी प्रबंधन के बीच चल रहे शीत युद्ध के चलते कमेटी का कामकाज ठप पड़ गया है। साथ ही कर्मचारियों और अधिकारियों में दहशत का माहौल है। बुधवार को कमेटी में अजीबो गरीब स्थिति बनी रही। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज सुबह से शाम तक 6 चिट्ठी जारी किए। जवाब में कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने भी पलटवार कर दिया।
–कमेटी महासचिव सिरसा ने एक दिन में जारी किए 6 नोटिस 
–कार्यकारी अध्यक्ष कालका ने सुखबीर बादल से की सिरसा की शिकायत 
–गुरुद्वारा कमेटी में कामकाज ठप, दहशत में कर्मचारी 
कालका ने तो अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को पत्र लिखकर सिरसा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई। साथ ही कहा कि सिरसा पार्टी और कमेटी की छवि खराब कर रहे हैं। वह कार्यालय के अंतरिम पत्रों को भी सोशल मीडिया एवं मीडिया को जारी कर रहे हैे। इसके अलावा उन्होंने जिस परमजीवन जोत सिंह  को कार्यकारी महाप्रबंधक की जिम्मेदारी सौंपी है, वह कमेटी के अस्थाई कर्मचारी है, उन्हें जीएम कैसे बना दिया। कालका ने सुखबीर बादल को कहा है कि सिरसा की पहली चिट्ठी तकनीकी रूप से गलत है इसलिए मै इसका विरोध कर रहा हूं। लिहाजा, सिरसा के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए। कालका ने दूसरी चिट्ठी महासचिव सिरसा को लिखी, साथ ही  पूछा कि उस जनरल हाउस में आपने प्रधान को पावर देने का समर्थन किया था तो आज विरोध क्यों कर रहे हैं। इसके अलावा
अस्थायी अधिकारी परमजीवन जोत सिंह को कार्यकारी जनरल मैनेजर बनाने को सिरसा के एक्ट के बारे अल्प ज्ञान से जोड़ा है। इसके साथ ही अपने पुराने आदेशों के बरकरार रहने की सिरसा को जानकारी दी है।
अपने बचाव में उतरे दोनों अधिकारी, पहुंचे थाने 
 कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा निलंबित किए गए महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार और उपमहाप्रबंधक सुखविन्दर सिंह  भी अपने बचाव में बुधवार को मैदान में उतरे। दोनों अधिकारियों ने सुबह नार्थ एवेन्यू थाने में शिकायत पत्र देकर महासचिव सिरसा के द्वारा धमकाने और नौकरी पर ना आने देने की शिकायत दी है। साथ ही बताया है कि कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने उनका निलंबन कैंसिल कर दिया है।
तीनों अधिकारी कमेटी में दिखे तो केस दर्ज होगा 
महिला उत्पीडऩ के मामले में तीन अधिकारियों महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार और उपमहाप्रबंधक सुखविन्दर सिंह  एवं बलबीर सिंह  को सजा देने वाले कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा आज भी अपने फैसलों पर अडिग हैं। उन्होंने बुधवार को वर्तमान महाप्रबंधक को कहा है कि तीनों निलंबित अधिकारी अगर कमेटी में दिखते हैं तो तत्काल उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह स्वयं (सिरसा) कार्यकारी महाप्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज करवा देंगे। सिरसा ने कमेटी के सीएलओ को भी चिटठी जारी कर कानून तोडऩे वाले अधिकारियों के खिलाफ केज दर्ज कराने का आदेश दिया है। हालांकि, सिरसा ने मामले को बिगड़ता देख नार्थ एवेंन्यू पुलिस थाने में निलंबित महाप्रबंधक के खिलाफ बिना इजाजत के कमेटी कार्यालय में घूमने की शिकायत भी दर्ज करा दिया है।
जांच कमेटी ने तीनों अधिकारियों को किया तलब 
महिला उत्पीडऩ के आरोंपों से घिरे तीनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए बनाई गई 4 सदस्यीय कमेटी के प्रमुख सर्वजीत सिंह विर्क ने आज नोटिस जारी कर तीनों अधिकारियों को तलब कर लिया है। साथ ही कल सुबह पूछताछ के लिए पंजाबी बाग स्कूल में बुलाया है। जांच कमेटी ने कहा है कि उन्होंने अपनी जांच शुरू कर दी है, लिहाजा अधिकारियों को समय पर पहुंचना ही होगा।

‘गुरूघर में ‘दुशासन’ पर खिंची परिवार में ‘तलवारें’  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में महिला उत्पीडऩ को लेकर सोमवार को 3 बड़े अधिकारियों के निलंबन को लेकर हुई बड़ी कार्रवाई के बाद अब परिवार में ही तलवारें खिंच गई हैं। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने आज सुबह कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा को चुनौती देते हुए उनके आदेशों को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। इस कार्रवाई के बाद सिरसा ने दो नए आदेश जारी कर दिए। साथ ही तीनों अधिकारियों के निलंबन को मान्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही गुरुद्वारा एक्ट में महासचिव को मिले अधिकारियों का हवाला देते हुए चेतावनी भी दी कि अगर उनके आदेशों के उलट कोई फैसला लिया जाता है तो वह पुलिस में केस दर्ज भी करवा देंगे।  इसके साथ ही सिरसा ने गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार अध्यक्ष तथा महासचिव की ताकत की जानकारी एक अन्य ऑफिस आर्डर में जारी कर दी। इसके कुछ देर बाद मंगलवार शाम कार्यकारी अध्यक्ष कालका ने एक अन्य ऑफिस आर्डर में कमेटी अध्यक्ष को कमेटी की 30 मार्च 2017 को महासभा के जरिये दी गई असीमित शक्तियों की जानकारी जारी कर दी।
 
–गुरुद्वारा कमेटी में महिला उत्पीडऩ पर छिड़ी  जंग 
–अधिकारियों के बचाव और कार्रवाई में भिड़ गए कालका और सिरसा  
–कालका ने आदेश पर लगाई रोक, सिरसा ने दोबारा किया सस्पेंड
यह खेल मंगलवार को दिनभर चलता रहा। खास बात यह है कि सिरसा की सख्ती और कार्रवाई से दिल्ली कमेटी के भीतर और दिल्ली की सिख संगतों के बीच एक अच्छा मैसेज गया था। हर कोई इस फैसले की सराहना कर रहा था, चाहे वह कमेटी का विपक्षी दल ही क्यों न हो। लेकिन, कार्यकारी अध्यक्ष ने जिस तरीके से अधिकारियों के बचाव में उतरे हैं, उससे बड़ा सवाल उठ गया है। बता दें कि हरमीत कालका, कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके के बेहद करीबी माने जाते हैं। जीके इस समय विदेश दौरे पर गए हैं। उन्होंने अध्यक्षी का पदभार कालका को दिया है।
महिला उत्पीडऩ करने वालों को बचाने की कोशिश : सिरसा 
दिल्ली कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मुझे खेद है कि महिलाओं के उत्पीडऩ जैसे मामलों में आरोपी अधिकारियों को बचाने के लिए कमेटी के अधिकारी नये-नये कानूनी रास्ते निक ाल रहे हैं, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है। सिरसा ने कहा कि सोमवार को तीनों अधिकारियों पर जो एक्शन लिया, वह दुनियाभर के सिखों की भावनाओं को देखते हुए लिया। लेकिन, यहां तो बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और महासचिव की पावर गुरुद्वारा एक्ट के तहत मिली हुई है। वह किसी भी अधिकारी को ट्रांसफर नहीं की जा सकती। लिहाजा, हरमीत कालका के जरिये जिस कानून का हवाला दिया जा रहा है, वह सरासर गलत है। सिरसा ने पूर्व कमेटी अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना के एक अस्पताल वाले एक फैसले का हवाला भी दिया, जिसे जनरल हाउस ने पास किया था और बाद में पलट दिया गया। उन्होंने कहा कि महासचिव को जो अधिकार एक्ट से मिले हैं, उसके अनुसार ही उन्होंने कार्रवाई की है।
जांच कमेटी से कालका हटे, निशान सिंह को जोड़ा 
  कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पलटवार करते हुए सिरसा के आदेश को तकनीकी रूप से अपने ऑफिस आर्डर में गलत बता दिया। साथ ही कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते जांच कमेटी का चेयरमैन बनने से असमर्थता जताते हुए अध्यक्ष जी.के. के विदेश से वापिस आने तक महासचिव के आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में सिरसा ने पलटवार करते हुए ऑफिस आर्डर जारी करके जांच कमेटी में कालका की जगह कमेटी सदस्य निशान सिंह मान की नियुक्ति कर दी। साथ ही अपने पुराने आदेश के कायम रहने का दावा किया।
क्या है बवाल की जड़ 
 बता दें कि 16 अप्रैल को मनजिन्दर सिंह सिरसा ने कमेटी के महाप्रबंधक हरजीत सिंह सूबेदार और उपमहाप्रबंधक सुखविन्दर सिंह को महिला नौकरी मामले में अभद्र शब्दों के इस्तेमाल के मामले में निष्कासित किया था। जबकि बलबीर के खिलाफ कमेटी की ही एक महिला कर्मचारी ने मानसिक तौर पर तंग करने का आरोप लगाया था। महासचिव ने तीनों के खिलाफ पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज होने का हवाला देते हुए निष्कासित कर दिया था। साथ ही कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका को 4 सदस्यीय जांच कमेटी का चेयरमैन नियुक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया था।

दिल्ली कमेटी की स्कूलों की चेयरमैनी बनी सियासी खरबूजा 

 (जसकीरत कौर) 
 नई दिल्ली :  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नई कमेटी के गठन के 7 महीने बाद भी स्कूलों की कमेटियों में बदलाव अभी तक संभव नहीं हो पाया है। 31 मार्च 2017 को नये कार्यकारिणी के चुनाव के बाद अध्यक्ष बने मंजीत सिंह जीके और महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा के बीच ताकत के बंटवारे पर चल रहे शीतयुद्व के कारण नये कमेटियों पर पेंच फंसा हुआ है। इसके कारण स्कूलों की कमेटियों में अभी भी पुराने लोग ही काबिज हैं। टकराव की मुख्य वजह स्कूलों में अपने समर्थकों को अधिक से अधिक ताकत देने का है।
   आपसी सहमति से मामला ना सुलझने के कारण शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था। बादल ने अकाली दल के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा को इस मामले के हल के लिए जिम्मेदारी लगाई थी। लेकिन, दो महीने बीतने के बावजूद भी चंदूमाजरा को अपनी मुहिम में कामयाबी नहीं मिली है।
–कब कटेगा, कब बटेगा, किसी को नहीं पता 
— ‘ताकतÓ  के बंटवारे के चलते नई कमेटियों पर फंसा पेंच 
–7 महीने बाद भी गुरुद्वारा कमेटी के संस्थानों में चेयरमैनी पर फैसला नहीं 
–आपसी अंर्तकलह के चलते नहीं हो पा रहा है फैसला 
  सूत्रों की माने तो पिछले दिनों सुखबीर बादल से इस मसले पर देानों पक्षों की बातचीत हुई है। टकराव की मुख्य वजह धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र में कुछ लोगों की बढ़ रही दखंलदाजी है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर विधायक एवं पार्षद बने अकाली नेताओं को गुरुद्वारा कमेटी में बराबर सेवा निभाने का वर्तमान अध्यक्ष जीके की ओर से लगतार विरोध किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो जीके का तर्क है कि धार्मिक कमेटी में दूसरी पार्टी की सियासी विचारधारा को प्रोत्साहित करने वाले लोग फिट नहीं बैठते हैं, क्योंकि दिल्ली कमेटी का कार्य सिखों के हर मामले पर आवाज बुलंद करने का है। इस वजह से भाजपा समर्थक अकाली आगू सरकार विरोधी कई मसलों पर अपने सुर नरम कर लेते हैं। इसलिए, दिल्ली कमेटी के स्कूलों की चेयरमैनी सियासी खरबूजे की तरह हो गई है, जिसका किसी को पता नहीं चल रहा है, कि यह खरबूजा कब कटेगा और कब बटेगा।
भाजपा के टिकट पर 1 विधायक और 4 पार्षद चुनाव जीते
   गौरतलब है कि दिल्ली में भाजपा के टिकट पर 1 विधायक और 4 पार्षद चुनाव जीते हैं।
  सूत्रों के मुताबिक इस बार पहली बार सदस्य बने कई नेताओं को उम्मीद थी कि उन्हें कमेटियों में जगह मिलेगी, लेकिन अभी तक नहीं मिली। अब तो कई सदस्य कमेटी को ही कोसने लगे हैं। उनका तर्क है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जो हर जगह काबिज है, लेकिन बाकियों केा कहीं मौका नहीं मिल रहा है।
प्रत्येक स्कूल में 1 चेयरमैन और 1 प्रबंधक होना जरूरी
बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तहत 12 स्कूल (गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल) और 5 सहायता प्राप्त स्कूल हैं। इसमें से प्रत्येक स्कूल में 1 चेयरमैन और 1 प्रबंधक होना जरूरी है। इसके अलावा वाइस चेयरमैन और सहायक मैनेजर की संख्या का कोई पैमाना नहीं है। यह पद पूरी तरह से नेताओं केा फिट करने के लिए सृजित किया गया है। इसके अलावा कमेटी से जुड़े अन्य संस्थान, अस्पताल, डिस्पेंसरी, गुरुद्वारों की जिम्मेदारी के लिए भी कई पद सृजित किए गए हैं।