102 शहरों में होगी पलूशन से जंग

NEW DELHI. दिल्ली की जहरीली हवा इन दिनों चर्चा का विषय है लेकिन शायद ही किसी को इस बात पर संदेह हो कि पलूशन अब देशव्यापी समस्या है। पलूशन की समस्या के त्वरित समाधान की जरूरत को समझते हुए भारत ने 4 ग्लोबल एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया है। इनमें वर्ल्ड बैंक और जर्मन डिवेलपमेंट एजेंसी (GIZ) शामिल है जो भारत के 102 शहरों के पलूशन से निपटने की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करेंगी। अन्य दो एजेंसियों में एशियन डिवेलपमेंट बैंक (ADB) और ब्लूमबर्ग फिलेन्थ्रॉपीज के नाम शामिल हैं। ये एजेंसियां अलग-अलग भोगौलिक इलाकों में सरकार को प्रदूषण से लड़ने में मदद करेंगी। केंद्रीय पर्यावरण सेक्रटरी सीके मिश्रा ने बताया कि इन चारों एजेंसियों के साथ अग्रीमेंट को अंतिम रूप दे दिया गया है। ये एजेंसियां तकनीकी सहयोग देंगी और राज्यों को उनके शहरों में क्षमता विकसित करने में मदद करेंगी। मिश्रा के मुताबिक हर एजेंसी को शहरों के साथ काम करने के लिए एक भोगौलिक इलाका तय करके दिया जाएगा।
इन शहरों के लिए एक नए नैशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) की घोषणा जल्द ही हो सकती है। इसमें प्रदूषण घटाने के लिए नए सिरे से व्यापक टाइम लाइन भी फिक्स की जाएंगी। बढ़ते एयर पलूशन से व्यापक रूप से निपटने के लिए यह एक लंबे समय की नई रणनीति होगी। NCAP में विभिन्न तरीकों से पलूशन कंट्रोल, मैनुअल एयर क्वॉलिटी मॉनिटरिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाना, एयर क्वॉलिटी पर निगरानी रखने वाले मॉनिटरिंग स्टेशनों का विस्तार और जियॉग्रफिक इन्फर्मेशन सिस्टम (GIS) के प्लैटफॉर्म के जरिए डेटा अनैलेसिस के लिए एयर इन्फर्मेशन सेंटर जैसी चीजें शामिल होंगी।
एयर पलूशन को लेकर लोगों की तरफ से आने वाली शिकायतों के निस्तारण की भी व्यवस्था इसमें शामिल की जाएगी। इसके लिए इसमें एक जनशिकायत निवारण पोर्टल भी तैयार किया जाएगा जिसके माध्यम से एयर पलूशन से जुड़ी शिकायतों का निपटारा होगा। शहरों को इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने होंगे ताकि एयर पलूशन से जुड़ी कोई भी सूचना ईमेल या एसएमएस के जरिये रिपोर्ट की जा सके।

दिल्ली-एनसीआर में 2 घंटे ही फोड़ सकेंगे पटाखा

NEW DELHI. दिल्ली—एनसीआर में रहते हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। इस बार दीपावली पर आप दो घंटे ही पटाखा फोड पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ किया कि ग्रीन पटाखे की शर्त केवल दिल्ली-एनसीआर के लिए है और देश के बाकी हिस्सों में सामान्य पटाखे जलाए जा सकेंगे। कोर्ट ने साथ ही पटाखा फोड़ने के दो घंटे में समय बदलाव से साफ इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले दिए गए अपने फैसले में पटाखा फोड़ने का समय रात 8 बजे से 10 बजे तक तय किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय में बदलाव की तमिलनाडु सरकार की अपील पर एक नया निर्देश जरूर जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु में दिवाली के दौरान दो घंटे पटाखा छोड़ने का समय राज्य सरकार तय कर सकती है। बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए सुबह से समय पटाखा फोड़ने की इजाजत मांगी थी।

 

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि ग्रीन पटाखे केवल दिल्ली-एनसीआर में ही जलाए जाएंगे और यह देश के अन्य हिस्सों पर लागू नहीं होगा। तमिलनाडु सरकार ने वकील बी विनोद खन्ना के मार्फत याचिका दायर कर शीर्ष अदालत के इस आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करते हुए कहा था कि राज्य में सुबह साढ़े चार बजे से लेकर सुबह साढ़े छह बजे तक भी पटाखे फोड़ने की इजाजत दी जाए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दिए गए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगाने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री को इजाजत दे दी थी।

पटाखों की ऑनलाइन बिक्री नहीं की जा सकती

 

SC ने अपने फैसले में कहा था कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स पोर्टल्स को पटाखे बेचने से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों को केवल लाइसेंस पाए ट्रेडर्स ही बेच सकते हैं। आपको बता दें कि वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस पर अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कम आवाज वाले पटाखे जलाने का आदेश दिया है ताकि प्रदूषण से मुक्ति मिल सके।

शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की अनुमति दी है, जिनसे देशभर में कम उत्सर्जन होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन बाद ही दिवाली का त्योहार है। दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए कोर्ट ने टाइम भी तय किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिवाली पर शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

AAP को बड़ी राहत, 20 विधायक बने रहेंगे

NEW DELHI.  आम आदमी पार्टी की सरकार को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लाभ के पद मामले में अयोग्य ठहराए गए AAP के 20 विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी गई है। चुनाव आयोग की सिफारिश को खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि विधायकों की याचिका पर दोबारा सुनवाई हो। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, ‘सत्य की जीत हुई।’ कुछ ही देर में CM केजरीवाल सभी 20 विधायकों से मुलाकात भी करनेवाले हैं।
केजरीवाल ने आगे लिखा, ‘दिल्ली के लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को गलत तरीके से बर्खास्त किया गया था। हाई कोर्ट ने दिल्ली के लोगों को न्याय दिया। दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत। दिल्ली के लोगों को बधाई।’ उधर, AAP नेता अलका लांबा ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद सभी 20 विधायक बने रहेंगे, उन्हें मुंह की खानी पड़ी है जो सरकार गिराने की कोशिश कर रहे थे

-AAP के 20 विधायकों की सदस्यता बहाल

— चुनाव आयोग फिर से करेगा सुनवाई

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की 2 जजों की बेंच ने यह बड़ा फैसला सुनाया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट में 15 से ज्यादा पूर्व विधायक भी मौजूद थे। फैसला आते ही AAP के खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई और जश्न मनाया जाने लगा। सड़क पर लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी और मिठाई बांटी गई। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि विधायकों को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया था। अब कोर्ट ने उन्हें यह मौका दिया है। चुनाव आयोग दोबारा इस मामले की सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि जनवरी में AAP विधायकों ने अपनी सदस्यता रद्द किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी इस मामले में फैसला आने तक उपचुनाव नहीं कराने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता ने कहा, मैंने केवल मुद्दा उठाया था
उधर, AAP विधायकों की अयोग्यता के मामले में याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल ने कहा, ‘कोर्ट ने कहा है कि यह केस दोबारा खुलेगा। मैंने केवल एक संवैधानिक मुद्दा उठाया था, मेरे लिए यह कोई झटका नहीं है।’

 

यह है पूरा मामला
दरअसल, 19 जनवरी को चुनाव आयोग ने संसदीय सचिव को लाभ का पद ठहराते हुए राष्ट्रपति से AAP के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी। उसी दिन AAP के कुछ विधायकों ने चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था। 21 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर करते हुए AAP के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी।

बाद में AAP विधायकों ने हाई कोर्ट में दायर की गई अपनी पहली याचिका को वापस लेकर नए सिरे से याचिका डाली और अपनी सदस्यता रद्द किए जाने को चुनौती दी। बता दें कि 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने वाले अविंद केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था। उनमें से एक विधायक जरनैल सिंह भी थे जिन्होंने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

 

 

दिल्ली में ऑड-ईवन कभी भी,सरकार तैयार

 NEW DELHI. राजधानी में लगातार बढ़ रहे पलूशन को देखते हुए दिल्ली सरकार जल्द ही ऑड-ईवन सिस्टम लागू कर सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से विभागों को तैयार कर दिया गया है। हाल ही में दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया था कि ऑड-ईवन के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है और पलूशन को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

ट्रांसपॉर्ट मिनिस्टर कैलाश गहलोत ने हाल में कहा था कि दो से तीन दिन के नोटिस पर दिल्ली सरकार ऑड-ईवन लागू करने के लिए तैयार है। दिवाली के बाद इस पर फैसला होगा।  अब ट्रांसपॉर्ट मिनिस्टर ने अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑड-ईवन पर बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया है जिससे शॉर्ट नोटिस पर इसे लागू किया जा सके।
गहलोत ने TOI से कहा है कि ट्रांसपॉर्ट डिपार्टमेंट, DTC, दिल्ली इंटिग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (DIMTS) को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे 2-3 दिन के भीतर ऑड-ईवन लागू करने के लिए तैयार रहें।  ट्रांसपॉर्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया, ‘बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ऑड-ईवन के लिए और क्या करने की जरूरत है। इसके अलावा प्रत्येक विभाग और एजेंसी की जिम्मेदारी क्या होगी, इस पर भी बात हुई।’

अधिकारी ने आगे कहा, ‘सिविल डिफेंस वॉलनटिअर्स की तैनाती रेवेन्यू विभाग द्वारा की जाएगी, पर सबसे बड़ी चिंता बसों की उपलब्धता है। हमने DTC से जितना संभव हो सके, बसें बढ़ाने को कहा है। निजी बसों का भी प्रबंध करने को कहा गया है। DMRC से भी ट्रेनें और फेरे बढ़ाने को कहा जा सकता है।’

 दिल्‍ली में मोहल्ला क्लीनिक खोलने की मंजूरी   

   नयी दिल्ली दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारर्दिशता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपाय तय करते हुये केजरीवाल सरकार की मोहल्ला क्लीनिक स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है।
  दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी मोहल्ला क्लीनिक योजना को बैजल ने आज अनुमित देते हुये इसके कार्यान्वयन में उचित निगरानी के लिए बायामैट्रिक आधारित आनलाइन सिस्टम से लैस कर इस योजना को छह माह के भीतर लागू करने को कहा है। राजनिवास द्वारा दी गयी आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैजल ने मोहल्ला क्लिनिक से संबंधित सरकार के प्रस्ताव को पारर्दिशता से लागू करने को मंजूरी दे दी। जिससे दिल्ली के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।        इसके मुताबिक सुरक्षा उपायों का मकसद मौजूदा मोहल्ला क्लीनिकों के कार्यान्वयन में प्राप्त शिकायतों का निदान करने के अलावा एक मजबूत स्वास्थ्य निगरानी तंत्र विकसित करना है।
—-दिल्ली के उपराज्यपाल ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारर्दिशता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपाय तय 
इस बारे में मिली शिकायतों के आधार पर मौजूदा मोहल्ला क्लीनिकों की जगह का चयन करते समय पारर्दिशता बरतने की जरूरत पर बल दियरा गया है जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक संख्या में लक्षित लोग खासकर कमजोर वर्ग के लोग उठा सकें।
बैजल ने निजी परिसरों में मोहल्ला क्लीनिक खोले जाने के दौरान स्थान का चयन और किराया पीडब्ल्यूडी और सीपीडब्ल्यूडी के नियमों के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से करने को कहा है।       उपराज्यपाल ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि मोहल्ला क्लीनिकों में तैनात किये जाने वाले डाक्टर और अन्य र्किमयों की नियुक्ति में पारर्दिशता बरती जाए और  इसमें योग्यता के पैमानों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए । इस संबंध में आंकड़ों की हेराफेरी की शिकायतों की जांच के लिए उपराज्यपाल ने प्रशासनिक विभाग को एक ऐसा तंत्र विकसित करने को कहा जिससे मरीजों की संख्या को सत्यापित किया जा सके।
   बैजल ने मुख्यमंत्री अरङ्क्षवद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के साथ हाल ही में हुई विस्तृत बातचीत के आधार पर इस योजना को मंजूरी दी है। इसमें बैजल ने  चिकित्सा सेवाओं और सामग्री की आपूॢत के लिए स्वास्थ्य विभाग को सभी आवश्यक निर्देश और औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही उन्होंने किसी भी दूर्भाग्यपूर्ण घटना से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग को मोहल्ला क्लीनिकों के कामकाज की नियमित रूप से जांच करने को भी कहा है।

दिल्ली में कचरे के पहाड़ का हिस्सा गिरा, 3 की मौत

NEW DELHI . पूर्वी दिल्ली के बाहरी क्षेत्र में स्थित गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिर जाने से कम से कम 3 लोगों की मौत की खबर है। कूड़े का यह पहाड़ गिरकर रोड पर आ गिरा, जिससे वहां से गुजर रही गाड़ियों के भी धंसने की खबर है। कचरे के इस हिस्से के धसकने से यहां से गुजर रही एक स्विफ्ट कार और एक स्कूटी पास के कोंडली नाले में गिर गई।

 

एमसीडी की टीम बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई है। पुलिस ने एक लड़की की मौत की पुष्टि कर दी है। लड़की का नाम राजकुमारी है, जो स्कूटी पर सवार थी और घटना के वक्त यहां से गुजर रही थी। यहां से गुजरते हुए अचानक कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिर गया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटनास्थल पर बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम पहुंच चकी है।

गौताखोरों की मदद से रेस्क्यू टीम बचाव कार्य में जुटी हुई है। पुलिस ने बताया कि उसे 6 लोगों के गिरने की जानकारी मिली थी, जिसमें से 4 को सुरक्षित निकाल लिया है, जबकि 1 लड़की समेत दो लोगों के शव बरामद हुए हैं। गाजीपुर में यह कूड़े का डंपिंग ग्राउंड है, जहां से पूर्वी दिल्ली का सारा कूड़ा लाकर डंप किया जाता है। कई बार प्रशासन को यह जानकारी दी गई थी कि इस डंपिंग ग्राउंड की क्षमता पूरी हो चुकी है और दिल्ली के कूड़े को डंप करने के लिए किसी नई डंपिंग फील्ड की जरूरत है। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और लगातार कूड़े की डंपिंग यहीं की जाती रही। इस लैंडफील्ड पर सालों से दिल्ली का कूड़ा डंप किया जा रहा है। इसकी क्षमता कई साल पहले ही पूरी हो चुकी है। एमसीडी का कहना है कि वह कई बार सरकार से कूड़े के निपटारे के लिए नई जमीन की मांग कर चुका है, लेकिन उसे कूड़े के निपटारे के लिए अभी तक नई जमीन नहीं दी गई। ऐसे में वह (एमसीडी) इस जमीन पर ही कूड़े की डंपिंग का काम कर रही थी।

बता दें कि इस पर हाई कोर्ट ने भी इस पर कई बार चिंता जताई है, लेकिन एमसीडी हमेशा ही नई जमीन न मिलने की बात कहकर इससे पलड़ा झाड़ता रहा। यह जमीन कभी आसपास की जमीन की ही तरह समतल थी। लेकिन सालों से यहां लाया जा रहा दिल्ली का कूड़ा डंप होने से यह एक पहाड़ की तरह ऊंचा होती चली गई। दिल्ली और आसपास लोगों में यह जगह कूड़े के पहाड़ के रूप में ही चर्चित है।

दिल्ली में आंगनबाड़ी कर्मियों की सैलरी बढ़ी, वर्कर की 9678 और हेल्प‍र की 4839 रुपये प्रति महीना

 नयी दिल्ली ।  दिल्ली सरकार ने आंगनवाड़ीकर्मियों और उनके सहायकों का भत्ता बढ़ाकर दोगुना करने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आज मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुये बताया कि सरकार ने इसे लागू करने के लिये उपराज्यपाल अनिल बैजल से इस पर मंजूरी देने का अनुरोध किया है।
     सिसोदिया ने बताया कि मंत्रिमंडल ने आंगनवाड़ी कर्मियों का भत्ता 5000 रुपये से बढ़ाकर 10170 रुपये और सहायकों का भत्ता 2500 रुपये से बढ़ाकर 5089 रुपये करने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लागू करने की अधिसूचना जारी करने से पहले इस पर बैजल की मंजूरी लेना अनिवार्य है। सरकार ने फैसले की फाइल राजनिवास भेज दी है।
      मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर बताया कि आंगनवाड़ी कर्मियों को 500 रुपये और सहायकों को 250 रुपये मोबाइल फोन और इंटरनेट पर खर्च करने के लिये दिया जायेगा। दिल्ली में लगभग 11000 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं। प्रत्येक केन्द्र पर एक आंगनवाड़ी कर्मी और एक सहायक तैनात है।
       हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद भत्ता बढ़ाये जाने की मांग को लेकर पिछले एक महीने से आंदोलनरत आंगनवाड़ीकर्मियों और सहायकों ने हड़ताल खत्म नहीं की है। ये लोग वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठे हैं।
      दिल्ली आंगनवाड़ी कर्मचारी यूनियन के प्रवक्ता ने सरकार पर इस मामले में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुये कहा कि सरकार ने पहले कहा था कि इस मामले में उपराज्यपाल की मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं है और अब कह रही है कि बढ़ा हुआ वेतन राजनिवास की मंजूरी मिलने के बाद लागू होगा।
प्रवक्ता ने इस फैसले को नाकाफी बताते हुये कहा कि सोमवार को आंदोलनरत कर्मचारी रामलीला मैदान से जंतर मंतर तक पैदल मार्च करेंगे।

दिल्ली्वालों को मिलती रहेगी सस्‍ती बिजली, दिल्ली सरकार का ऐलान

 नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार ने घरेलू बिजली पर दी जा रही सब्सिडी को जारी रखने की समय सीमा में एक साल का इजाफा किया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में आज हुई मंत्र्ािमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी।

इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा प्रतिमाह 400 यूनिट तक बिजली की खपत पर दी जा रही सब्सिडी को चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 की पूरी अवधि के लिये बढ़ा दिया गया है। मंत्र्ािमंडल ने उर्जा विभाग के इस प्रस्ताव पर व्यय होन वाले 1720 करोड़ रपये को चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी पर खर्च करने की अनुमित दे दी।

 

 

इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को शून्य से 200 यूनिट बिजली की खपत पर 2 रपये प्रति यूनिट की दर से बिल देना होगा। जबकि 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर 2.975 रपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा।

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सब्सिडी की राशि बिजली कंपनियों के खाते में भेज दी जायेगी इसे बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के बिल से समायोजित कर लेंगी। साथ ही बिजली कंपनियों को सूचित कर दिया गया है कि उपभोक्ताओं को सब्सिडी का वास्तविक लाभ मिलने की बात पुष्ट करने के लिये सरकार बिजली कंपनियों का किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट करा सकती है।

कश्मीरियों को नियमित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी 

मंत्र्ािमंडल ने शिक्षा विभाग में संविदा पर नियुक्त विस्थापित कश्मीरियों को नियमित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंत्र्ािमंडल की बैठक के बाद बताया कि सरकार ने 1994 से शिक्षा विभाग में संविदा शिक्षक के पद पर कार्यरत विस्थापित कश्मीरियों को भर्ती नियमों में ढील देते हुये नियमित करने का फैसला किया है।

सिसोदिया ने बताया कि इसके तहत 1994 से ठेके पर कार्यरत कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों को नियमित करने की प्रक््िरया में उम्र में छूट देने के अलावा केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में उत्तीर्ण करने के मानकों में ढील देने और इन्हें  नियमित किए जाने की तिथि से ही नियमित कर्मचारी माना जायेगा।

 

उन्होंने बताया कि कश्मीरी विस्थापितों को विशेष परिस्थितियों में शिक्षा विभाग द्वारा संविदा शिक्षक के तौर पर दो दशक पहले भर्ती किया गया था। इसलिये विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर पृथक नीति के तहत ठेके पर तैनात कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों को नियमित करने का फैसला किया गया है। इस श्रेणी में पीजीटी, टीजीटी, पुस्तकालय प्रभारी और संगीत शिक्षक के पद पर 170 कश्मीरी विस्थापित नियुक्त हैं। इन्हें नियमित करने के बाद विभाग पर सालाना 13 करोड़ रपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

आईएलबीएस  में बिस्तरों की संख्या में इजाफा

मंत्र्ािमंडल ने दिल्ली सरकार के पित्त एवं यकृत चिकित्सा संस्थान (आईएलबीएस) में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुये बिस्तरों की संख्या में इजाफा करने का भी फैसला किया है। इस अहम फैसले के तहत आईएलबीएस की दूसरी यूनिट शुरू कर बिस्तरों की मौजूदा संख्या को 155 से बढ़ाकर 549 किया जायेगा। इसके लिये मंत्र्ािमंडल ने परियोजना की अनुमानित लागत को 389 करोड़ रपये से बढ़ाकर 497.72 करोड़ रपये कर दिया गया है। आईएलबीएस की दूसरी यूनिट में बिस्तरों की संख्या में इजाफे के अलावा सुपर स्पेशियलिटी श्रेणी की चिकित्सा सेवाओं के अलावा शिक्षण प्रशिक्षण एवं शोध कार्य भी होगा।

राहुल गांधी ने सिक्किम गतिरोध के दौरान चीनी राजदूत से की थी मुलाकात

New Delhi: भारत तथा चीन के बीच सिक्किम में जारी गतिरोध के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन के भारत में राजदूत से मुलाकात की थी, कांग्रेस पार्टी ने इस बात की सोमवार को पुष्टि की, और पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि “बैठक को सनसनीखेज़ मुद्दा बनाने की ज़रूरत नहीं है।

हालांकि कांग्रेस इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाई कि सुबह 8:30 बजे तक चीनी दूतावास की वेबसाइट पर राहुल गांधी और चीनी राजदूत के बीच शनिवार, 8 जुलाई को हुई मुलाकात का ज़िक्र था, और जानकारी में इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि दोनों ने मौजूदा भारत-चीन संबंधों पर चर्चा की (स्क्रीनशॉट समाचार के अंत में देखें). चीनी दूतावास ने अब वह पोस्ट डिलीट कर दिया है।

इस बैठक की ख़बरें सामने आ रही थीं, जिनकी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी, और जिस समय विवाद बढ़ रहा था, राहुल गांधी के कार्यालय ने कई घंटे तक न उसकी पुष्टि की थी, न खंडन किया।

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्विटर पर ज़ोर देकर कहा कि भारत के चीन के साथ अब भी राजनयिक संबंध बरकरार हैं।

 

पार्टी के सोशल मीडिया सेल की प्रमुख राम्या ने ट्विटर पर लिखा, “अगर कांग्रेस उपाध्यक्ष चीनी राजदूत से मिले भी हैं, तो मैं इसे मुद्दे के रूप में नहीं देखती…” इससे पहले सुरजेवाला ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि राहुल गांधी ने चीनी राजनयिक से मुलाकात की, और भूटानी राजदूत से भी – यह स्टैंडर्ड प्रोसीजर है… उन्होंने कहा, “जी-5 देश के राजदूत शिष्टाचार के नाते राहुल गांधी से भेंट किया करते हैं। हमें इन सामान्य शिष्टाचार भेंटों को ख़बर नहीं बना डालना चाहिए।

पिछले सप्ताह राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन से जारी गतिरोध को लेकर सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहने के लिए हमला बोला था।

सिक्किम की सीमा के निकट जिस इलाके को चीन अपना बताता है, वहां से भारत द्वारा सेना नहीं हटाने की सूरत में ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने की चेतावनी को भारत ने नज़रअंदाज़ कर दिया है। चीन का दावा है कि भारतीय सैनिकों ने डोंगलांग इलाके में जून की शुरुआत में प्रवेश किया, और वहां सड़क बना रहे चीनी फौजियों को रोक दिया।

चीन का कहना है कि वह ज़मीन ब्रिटेन से वर्ष 1890 में हुए करार के तहत चीन की ही है।

लेकिन भारत तथा हिमालय की गोद में बसे भूटान का दावा है कि वह ज़मीन (डोकलाम) भूटान की है, जिसने उस करार पर दस्तखत नहीं किए थे, और जो राजनयिक तथा सैन्य समर्थन के लिए भारत पर निर्भर है।

पिछले सप्ताह, बेहद असामान्य रूप से रूखी टिप्पणी में चीनी राजदूत लुओ झाओहुई ने एक इंटरव्यू में कहा था कि “समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है,” और किसी भी वार्ता को शुरू करने के लिए भारत को अपने सैनिक वापस बुलाने ही होंगे. दिल्ली ने उस चेतावनी को भी नज़रअंदाज़ किया, और चीन के सरकारी मीडिया की उन चेतावनियों को भी, जिसमें भारत को 1962 जैसी ‘शर्मनाक’ हार की ओर बढ़ने से रुकने की सलाह ही गई. रक्षामंत्री अरुण जेटली ने पलटवार करते हुए कहा था कि 2017 का भारत 1962 से कतई अलग है।

इस दौरान पिछले सप्ताह जर्मनी में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात हुई, जबकि एक ही दिन पहले चीन ने कहा था कि द्विपक्षीय मुलाकात के लिए ‘माहौल सही नहीं है…’ हालांकि विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच ‘कई तरह के मुद्दों पर’ अनौपचारिक बातचीत हुई, और इस बात पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया कि सिक्किम विवाद पर वार्ता हुई या नहीं।

विवादित इलाका सुरक्षा के लिहाज़ से भारत के लिए अहम है, क्योंकि यह उस जगह स्थित है, जहां भारत, तिब्बत और भूटान मिलते हैं, और बनाई जा रही सड़क से चीन उस पट्टी तक पहुंच सकता है, जिसे ‘चिकन्स नेक’ कहा जाता है, और यही पट्टी सात पूर्वोत्तर राज्यों से शेष भारत को जोड़ती है।