नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन को हर जरूरी मदद उपलब्ध कराई जायेगी: CBI

NEW DELHI: केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को कहा कि अपने रिश्तेदार मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में वांछित भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए एजेंसी ब्रिटेन के अधिकारियों को हर जरूरी सहायता उपलब्ध करायेगी।

 

एजेंसी के प्रवक्ता नितिन वाकणकर ने बताया कि सीबीआई उस प्रत्यर्पण अनुरोध के जवाब का इंतजार कर रही है जिसे पिछले वर्ष अगस्त में विदेश मंत्रालय के माध्यम से ब्रिटेन को भेजा गया था। लंदन से इस बात की पुष्टि हुई थी कि नीरव मोदी उनके देश में है और इसके बाद ही इस अनुरोध को भेजा गया था। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन ने पिछले साल जून में नीरव मोदी के खिलाफ एजेंसी द्वारा जारी किए गए रेड कॉर्नर नोटिस का जवाब दिया है।

 

वाकणकर ने कहा, ‘‘हम नीरव मोदी का प्रत्यर्पण सुनिश्चित कराने में विदेश मंत्रालय के माध्यम से ब्रिटेन को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार हैं।’’ ब्रिटेन के एक अखबार ‘टेलीग्राफ’ ने अपनी खबर में दावा किया है कि नीरव मोदी लंदन में एक आलीशान अपार्टमेंट में रहता है और वहां की सड़कों पर घूमता है। अखबार की ओर से जारी एक वीडियो में दिख रहा है कि रिपोर्टर के सवालों पर नीरव ने बार-बार कहा कि‘नो कमेंट‘।

 

सीबीआई ने बैंक की ओर से उसके और उसके रिश्तेदार चोकसी के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में नीरव मोदी के भाई और पत्नी के नाम भी आरोपी के रूप में दर्ज है। एजेंसी ने घोटाले में नीरव मोदी और चोकसी दोनों के खिलाफ अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किया है। नीरव मोदी की पत्नी एमी, एक अमेरिकी नागरिक, भाई निशाल और चोकसी भी पिछले वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह में देश से भाग गये थे।

CBI दफ्तर से बाहर निकले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, रविवार को फिर होगी पूछताछ

NEW DELHI: शारदा चिटफंड घोटाले मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की। उनसे यह पूछताछ पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में की गई। सीबीआई ने तकरीबन 8 घंटे राजीव कुमार से पूछताछ की। हजारों करोड़ रुपए के शारदा चिटफंड स्कैम में सबूतों को नष्ट करने में भूमिका को लेकर राजीव कुमार सीबीआई के निशाने पर हैं।

 

अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार, उनके वकील विश्वजीत देब और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जावेद शमीम तथा मुरलीधर शर्मा पूर्वाह्न 11 बजे जांच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे, जहां सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे। मेघालय की राजधानी में ओकलैंड इलाका स्थित अति सुरक्षा वाले सीबीआई कार्यालय में कुमार से पूछताछ की गई। सीबीआई के तीन वरिष्ठ अधिकारी शुक्रवार को दिल्ली से यहां पहुंचे थे।

 

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस प्रमुख को सीबीआई के समक्ष पेश होने और सारदा चिट फंड घोटाले से उपजे मामलों की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाए। सीबीआई ने शीर्ष न्यायालय में आरोप लगाया था कि सारदा चिट फंड घोटाले की जांच में एसआईटी का नेतृत्व करने वाले कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की और सीबीआई को जो दस्तावेज सौंपे, उनमें से कुछ में बदलाव किए हुए थे।

 

शीर्ष न्यायालय ने कुमार को एक ‘न्यूट्रल’ स्थान शिलांग में जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया, ताकि सारे अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। उल्लेखनीय है कि सीबीआई के अधिकारी पूछताछ करने के लिए तीन फरवरी को कोलकाता में कुमार के आवास पर गए थे, लेकिन पुलिस ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी। सीबीआई की कार्रवाई का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीन दिन तक धरना दिया।

कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से 9 फरवरी को सीबीआई करेगी पूछताछ

NEW DELHI: कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सीबीआई ने पूछताछ के लिए समन किया है। उनसे 9 फरवरी को पूछताछ होगी। इससे पहले खबर मिली थी कि राजीव कुमार सहित कुछ हाई प्रोफाइल संदिग्धों से पूछताछ के दौरान अतिरिक्त अधिकारी मुहैया कराने के लिए सीबीआई ने दिल्ली, भोपाल और लखनऊ इकाई के दस अधिकारियों को 20 फरवरी तक कोलकाता भेजा है। एजेंसी चिटफंड घोटाले की जांच कर रही है।

 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को निर्देश दिया कि वह सीबीआई के समक्ष पेश हों और जांच में पूरा सहयोग करें। खबरों के मुताबिक कोलकाता पुलिस के अफसरों ने सीबीआई की पूछताछ के लिए अपने बॉस को तैयार करने के लिए 80-100 सवालों की लिस्ट तैयार की है। कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टेट क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 80-100 ऐसे सवालों की एक लिस्ट तैयार की है, जिन्हें सीबीआई के अधिकारी राजीव कुमार से पूछा जा सकता है।

 

सीबीआई ने अपने अधिकारियों को शनिवार तक शिलॉन्ग पहुंचने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। सीबीआई अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि वो सुनवाई की तारीख से पहले राजीव कुमार से पूछताछ की प्रक्रिया खत्म करने की कोशिश करेंगे।

कोलकाता पुलिस आयुक्त को सीबीआई के साथ सहयोग करने का आदेश

NEW DELHI: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को निर्देश दिया कि वह शारदा चिटफंड घोटाले से संबंधित मामले की जांच में सीबीआई के साथ पूरी ईमानदारी से सहयोग करें और उसके लिए उपलब्ध रहें। शीर्ष अदालत ने कहा कि राजीव कुमार मेघालय के शिलांग स्थित जांच ब्यूरो के कार्यालय में जांच के लिये उपस्थित हों। न्यायालय ने कहा कि जांच के दौरान कोलकाता पुलिस आयुक्त को न तो गिरफ्तार किया जायेगा और न ही उनके प्रति कोई दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।

 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने इसके साथ ही जांच ब्यूरो के आरोपों के बारे में पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया। पीठ ने उन्हें 20 फरवरी से पहले अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। जांच ब्यूरो का आरोप है कि पुलिस आयुक्त इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और उनके नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल द्वारा एजेन्सी को उपलब्ध करायी गयी सामग्री के साथ छेड़छाड़ की गयी है।

 

शीर्ष अदालत ने जांच ब्यूरो द्वारा दायर न्यायालय की अवमानना अर्जी पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस आयुक्त को 18 फरवरी से पहले अपना जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त के जवाब पर विचार करने के बाद न्यायालय इन तीनों को 20 फरवरी को अदालत में पेश होने के लिये कह सकता है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के महासचिव उन्हें 19 फरवरी को सूचित करेंगे कि उन्हें 20 फरवरी को न्यायालय के समक्ष पेश होना है या नहीं।

 

इस मामले की करीब 15 मिनट की सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने 2014 से अब तक के शारदा घोटाले के घटनाक्रम से न्यायालय को अवगत कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव कुमार चिटफंड घोटाले से जुड़े मामलों की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ये मामले शीर्ष अदालत ने सीबीआई को सौंपे थे।

 

वेणुगोपाल और मेहता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस का विशेष जांच दल, जिसके मुख्य कर्ताधर्ता कुमार थे, सीबीआई को सारे दस्तावेज नहीं सौंप रहा है और उसके द्वारा दिये गये कुछ दस्तावेजों के साथ तो छेड़छाड़ भी की गयी है। जांच ब्यूरो का आरोप था कि राज्य विशेष जांच दल ने पूरा काल डाटा विवरण नहीं दिया है और विशेष जांच दल ने जानबूझकर त्रुटियां की हैं। अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘हमें काल रिकार्ड में हेराफेरी की हुई प्रति दी गयी है।’’ उन्होंने कहा कि रोज वैली मामले से संबंधित चिट फंड घोटाला करीब 15,000 करोड़ रूपए की धोखाधड़ी का मामला है।

 

अटार्नी जनरल के कथन के बीच ही पीठ ने कहा कि वह राजीव कुमार को जांच के लिये सीबीआई को उपलब्ध कराने का निर्देश देने पर विचार कर रही है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी कोई वजह नहीं है कि वह खुद को जांच के लिये उपलब्ध नहीं करायेंगें।’’ हालांकि, वेणुगोपाल ने जब यह कहा कि जांच एजेन्सी ने कोलकाता पुलिस प्रमुख के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की याचिका भी दायर की है तो पीठ ने कहा कि पक्षकारों के जवाबों के अवलोकन के बाद ही कोई आदेश पारित किया जा सकता है।

 

पीठ ने कहा, ‘‘हम देंखेंगे कि क्या अवमानना का मामला है या नहीं। हमें इस पर विचार करना होगा। दूसरे पक्ष को सुनना होगा।’’ अटार्नी जनरल ने पीठ को इस बारे में पूरी जानकारी दी कि रविवार को जब सीबीआई के अधिकारी कोलकाता पुलिस आयुक्त से पूछताछ के लिये उनके आवास पर पहुंचे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

 

वेणुगोपाल ने कहा कि जांच ब्यूरो के 25 अधिकारियों को एक बस में बंद करके थाने ले जाया गया और यहां तक कि जांच एजेन्सी के संयुक्त निदेशक विकास श्रीवास्तव के आवास को भी पश्चिम बंगाल पुलिस ने घेर लिया। श्रीवास्तव के पूरे परिवार ने खुद को घर में बंद कर लिया जबकि राज्य पुलिस के कर्मी उनके दरवाजे पीट रहे थे।

 

अटार्नी जनरल ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के इस तरह के रवैये से यही लगता है कि राज्य में सांविधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है और यदि इस तरह की घटनायें होने दी गयीं तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जांच एजेन्सी के आरोपों का प्रतिवाद करते हुये कहा कि यह कोलकाता के पुलिस आयुक्त को परेशान और अपमानित करने का प्रयास है।

 

उन्होंने शीर्ष अदालत के उस आदेश का भी जिक्र करने का प्रयास किया जिसमें उनके अनुसार विशेष जांच दल की भूमिका की सराहना की गयी थी और इसमें साफ कहा गया था कि चिट फंड मामले सीबीआई को स्थानांतरित किये जा रहे हैं क्योंकि यह कई राज्यों में फैले हैं। सिंघवी ने कहा कि अभी तक राजीव कुमार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है और न ही उन्हें चिट फंड घोटाले से संबंधित किसी मामले में आरोपी ही बनाया गया है।

 

उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस आयुक्त को तीन बार नोटिस दिया गया था और इसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चूंकि हस्तक्षेप कर रखा था, इसलिए वह जांच एजेन्सी के समक्ष पेश नहीं हुये थे। रविवार के घटनाक्रम का जिक्र करते हुये सिंघवी ने कहा कि पुलिस आयुक्त के खिलाफ तीन साल बाद इस तरह की कार्रवाई की गयी है। उन्होंने कहा कि रविवार की घटना राज्य में एक राजनीतिक जनसभा के दो दिन बाद हुयी।

 

उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल पुलिस और कुमार जांच एजेन्सी के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और पुलिस महानिदेशक ने इस जांच के सिलसिले में सीबीआई को पांच पत्र भी लिखे थे। इस बीच, पीठ ने सिंघवी को टोकते हुये कहा कि कोलकाता के पुलिस आयुक्त को जांच में शामिल होना ही होगा।

पत्रकार की हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम सहित तीन अन्य दोषी करार

NEW DELHI: सीबीआई की एक अदालत ने 2002 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हुई हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और तीन अन्य को शुक्रवार को दोषी करार दिया। उन्हें 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। विशेष सीबीआई न्यायाधीश जगदीप सिंह ने यहां डेरा प्रमुख और तीन अन्य को इस मामले में दोषी ठहराया। सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने बताया, सभी चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।

 

इस मामले में 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। तीन अन्य आरोपियों में कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल शामिल हैं। गुरमीत (51) रोहतक की सुरनिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ। वह अपनी दो अनुयायियों से बलात्कार करने के मामले में फिलहाल 20 साल की कैद की सजा काट रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2002 में छत्रपति की उनके आवास के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

 

दरअसल उनके अखबार ‘पूरा सच’ ने एक पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में गुरमीत किस तरह से महिलाओं का यौन उत्पीड़न करता था। यह मामला 2003 में दर्ज किया गया था और इसे 2006 में सीबीआई को सौंपा गया था। मामले में गुरमीत को मुख्य षडयंत्रकर्ता नामजद किया गया था।

आलोक वर्मा CBI निदेशक पद से हटाए गए, नागेश्वर राव को मिला प्रभार

NEW DELHI: एक अभूतपूर्व कदम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने मैराथन बैठक के बाद आलोक वर्मा को गुरुवार को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया। उन्हें भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में पद से हटाया गया। अधिकारियों ने बताया कि वर्मा का दो वर्षों का निर्धारित कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है और वह उसी दिन सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सीबीआई के 55 वर्षों के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले जांच एजेंसी के वह पहले प्रमुख हैं।

 

गुरुवार शाम जारी एक सरकारी आदेश में बताया गया कि वर्मा को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है। सीबीआई का प्रभार अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दिया गया है। सीवीसी की रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ आठ आरोप लगाए गए थे। यह रिपोर्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष रखी गई। समिति में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी भी शामिल थे।

 

अधिकारियों ने बताया कि 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा को पद से हटाने का फैसला बहुमत से किया गया। खड़गे ने इस कदम का विरोध किया। समिति की बैठक बुधवार को भी हुई थी जो बेनतीजा रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सात लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर शाम साढ़े चार बजे गुरुवार को एकबार फिर से समिति की बैठक बुलाई गई। बैठक तकरीबन दो घंटे तक चली। खड़गे ने सीवीसी द्वारा वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देने की पुरजोर वकालत की। हालांकि, प्रधानमंत्री और न्यायमूर्ति सीकरी ने इससे सहमति नहीं जताई और एजेंसी से उन्हें बाहर करने का रास्ता साफ कर दिया।

 

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा, ‘‘आलोक वर्मा को उनका पक्ष रखने का मौका दिये बिना पद से हटाकर प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर दिखा दिया है कि वह जांच–चाहे वह स्वतंत्र सीबीआई निदेशक से हो या संसद या जेपीसी के जरिये– को लेकर काफी भयभीत हैं।’’  पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चार अक्टूबर 2018 को वर्मा से मुलाकात की थी और राफेल खरीद सौदे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

 

वर्मा को विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के साथ उनके झगड़े के मद्देनजर 23 अक्टूबर 2018 की देर रात विवादास्पद सरकारी आदेश के जरिये छुट्टी पर भेज दिया गया था। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में सरकार के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने वाले आदेश को निरस्त कर दिया था, लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच पूरी होने तक उनके कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला करने पर रोक लगा दी थी।

 

शीर्ष अदालत ने कहा था कि वर्मा के खिलाफ कोई भी आगे का फैसला उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति एक सप्ताह के भीतर करेगी। यह समिति सीबीआई निदेशक का चयन करती है और उनकी नियुक्ति करती है। उच्चतम न्यायालय ने विनीत नारायण मामले में सीबीआई निदेशक का न्यूनतम दो साल का कार्यकाल निर्धारित किया था ताकि किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से उन्हें बचाया जा सके। लोकपाल अधिनियम के जरिये बाद में सीबीआई निदेशक के चयन की जिम्मेदारी चयन समिति को सौंप दी गई थी।

स्कूल में हत्या: सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र, राज्य, CBI,CBSE को नोटिस

NEW DELHI.  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के रायन इंटरनैशनल स्कूल के प्रद्युम्न मर्डर केस में उसके पिता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, हरियाणा सरकार, CBI और सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों से तीन हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रद्युमन के पिता वरुण ठाकुर ने कहा, ‘मुझे कोर्ट पर बहुत विश्वास है, इसलिए हम यहां आए थे। जिस तरह से कोर्ट ने ऐक्शन लिया है, हम खुश हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने मुझे फोन किया था। हरियाणा सरकार की तरफ से भी हमें सहयोग मिल रहा है।’ प्रद्युमन के पिता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कहा कि याचिका में कई पक्षों को पार्टी बनाया गया है, जिसमें केंद्र, हरियाणा सरकार और सीबीएसई शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से तीन हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह नोटिस एक ही स्कूल तक सीमित नहीं है। देश के सभी स्कूलों को लेकर यह नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि याचिका में उनकी ओर से मांग की गई थी कि स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा के बारे में एक गाइडलाइंस जारी की जाए। इसके साथ ही प्रद्युमन की हत्या की जांच के लिए आयोग के गठन की मांग की गई है, जिससे जिम्मेदारी फिक्स हो सके। उन्होंने कहा कि कोर्ट से मामले की सीबीआई जांच भी कराने की मांग की गई है।

प्रद्युमन के पिता वरुण ठाकुर ने इस मामले की जांच सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। यह अर्जी जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ के समक्ष सुनवायी के लिए आई। इस पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएम. खानविलकर और जस्टिस डीवाई. चन्द्रचूड भी शामिल हैं। गुरग्राम स्थित रायन इंटरनैशनल स्कूल के शौचालय में आठ सितंबर को बच्चे का गला रेता हुआ शव मिला था।

कंडक्टर के कथित इकबालिया बयान पर संदेह

स्कूल के कंडक्टरों में से एक अशोक कुमार को इस सिलसिले में उसी दिन गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि कुमार ने बच्चे का यौन उत्पीड़न करना चाहा और इसी दौरान उसकी हत्या कर दी। हालांकि प्रद्युम्न की मां ने कंडक्टर के कथित इकबालिया बयान पर संदेह व्यक्त किया है। मृत बच्चे की मां का कहना है कि उसके बच्चे ने स्कूल में कुछ गलत होता देख लिया था, इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने मामले की जांच कर असल दोषियों को नहीं पकड़ने पर आत्मदाह की भी धमकी दी है।