ईवीएम हैकथॉन: अमेरिकी हैकर का दावा, 2014 के आम चुनाव में हैक की गई थी EVM

NEW DELHI: एक अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट का दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक किया जा सकता है। लंदन में चल रही हैकथॉन में इस साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया है कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की 2014 में हत्या की गई थी। एक्सपर्ट सईद सूजा का कहना है कि मुंडे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने के बारे में जानकारी रखते थे।

 

भारत में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम को डिजाइन करने वाले एक्सपर्ट ने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी धांधली हुई थी। यहां तक कि सूजा का दावा है कि 2014 के आम चुनाव में भी ईवीएम में गड़बड़ी की गई थी। इस हैकथॉन में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। वहीं इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने कहा कि भारत में इस्तेमाल की जाने वाली मशीन पूरी तरह सेफ हैं।

 

लंदन हैकथॉन में एक्सपर्ट ने बताया कि ईवीएम कैसे हैक की जा सकती है। इंडियन जर्नलिस्ट असोसिएशन (यूरोप) की तरफ से लंदन में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। बता दें कि चुनाव आयोग हमेशा इस बात का दावा करता रहा है कि भारत में इस्तेमाल किए जाने वाले ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

 

चुनाव आयोग का दावा ईवीएम सुरक्षित
चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘हमारे ध्यान में आया है कि लंदन में एक इवेंट में दावा किया जा रहा है कि ईसीआई द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों में छेड़छाड़ की सकती है। ईसीआई इस मामले में कोई पार्टी नहीं बनना चाहती है। यह प्रायोजित चुनौती है और ईसीआई अपने दावे पर कायम है कि भारत में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता है।’

 

ईसीआई ने अपने बयान में कहा, ‘भारत में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक ऐंड कॉर्पोरेशल ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा बेहद कड़े सुपरविजन में बनाई जाती हैं। 2010 में गठित तकनीकी विशेषज्ञों की एक कमिटी की देखरेख में यह पूरा काम होता है। हम इस बात पर भी अलग से विचार करेंगे कि क्या इस मामले पर कोई कानूनी मदद ली जा सकती है?’

 

कपिल सिब्बल की मौजूदगी पर सवाल
वहीं बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘कांग्रेस के पास बहुत से फ्रीलांसर हैं, जो कभी कभी मोदी जी को हटाने में मदद मांगने के लिए पाकिस्तान भी पहुंच जाते हैं। आने वाले चुनाव में हार को देखते हुए वे (कांग्रेस) हैकिंग हॉरर शो बना रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल का वहां मौजूद होना कोई इत्तेफाक नहीं है। उन्हें कांग्रेस, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने वहां भेजा है। उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों को भी देश और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने की सुपारी दी गई है, उस सुपारी को यहां से लेकर कोई डाकिया तो जाना चाहिए ना। तो वो डाकिया भेजा गया है।

 

मुद्दा उठाएगा विपक्ष: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा है कि अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट के ईवीएम हैकिंग के दावे के बाद विपक्ष इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने उठाएगा। इस मुद्दे पर किए अपने ट्वीट में ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे महान लोकतंत्र को बचाया जाना जरूरी है। हमारे लिए हर वोट कीमती है। महारैली के दौरान सभी विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम के मुद्दे पर बात की। हम सभी मिलकर काम कर रहे हैं और हमने तय किया है कि इस मामले को चुनाव आयोग के पास लेकर जाएंगे।

 

एक्सपर्ट ने किए कई और दावे
– इस मशीन को ब्लूटूथ की मदद से हैक नहीं किया ला सकता है। ग्रेफाइट आधारित ट्रांसमीटर की मदद से ही ईवीएम को खोला जा सकता है। इन ट्रांसमीटरों का इस्तेमाल 2014 के चुनाव में भी किया गया था।

 

– एक्सपर्ट का दावा है कि कोई व्यक्ति ईवीएम के डेटा को मैन्युपुलेट करने के लिए लगातार पिंग कर रहा था। 2014 में बीजेपी के कई नेताओं को इस बारे में जानकारी थी। जब उन्होंने एक अन्य बीजेपी नेता तक यह बात पहुंचाई तो उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या करवा दी गई।

 

– एक्सपर्ट का दावा है कि ईवीएम हैक करने में रिलायंस कम्युनिकेशन बीजेपी की मदद करता है।

 

– एक्सपर्ट का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के चुनाव में इस ट्रांसमिशन को रुकवा दिया था इसलिए बीजेपी यह चुनाव हार गई थी। दिल्ली के चुनाव में बीजेपी की आईटी सेल द्वारा किया गया ट्रांसमिशन पकड़ में आ गया था। एक्सपर्ट ने कहा, ‘हमने ट्रांसमिशन को आम आदमी पार्टी के पक्ष में कर दिया था। वास्तविक नतीजे 2009 के जैसे ही थे।’

 

– एक्सपर्ट का दावा है कि उन्होंने (बीजेपी) ने कम फ्रिक्वेंसी वाले ट्रांसमिशन को भी इंटरसेप्ट करने की कोशिश की थी। बीजेपी को जब ईवीएम को लेकर चुनौती दी गई तो उन्होंने ऐसी मशीन का इस्तेमाल किया, जिसे हम भी हैक नहीं कर सकते हैं।

कर्नाटक: बैठक में 4 ‘बागियों’ के नहीं पहुंचने से कांग्रेस परेशान, विधायकों को रिजॉर्ट पहुंचाया

NEW DELHI: कुछ विधायकों के बागी तेवर अपनाने की वजह से कांग्रेस ने कर्नाटक के अपने सभी विधायकों को शुक्रवार शाम को एक रिजॉर्ट पहुंचा दिया। पार्टी ने यह फैसला कांग्रेस विधायक दल की बैठक के ठीक बाद लिया, जिसमें 4 ‘बागी’ विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया। कर्नाटक में कांग्रेस के विधायक दल की शुक्रवार को हुई बैठक में 4 असंतुष्ट विधायक नहीं पहुंचे। बीजेपी द्वारा कर्नाटक में गठबंधन सरकार को गिराने की कथित कोशिशों को नाकाम करने के लिए पार्टी ने शक्ति-प्रदर्शन के तौर पर विधायकों की बैठक बुलाई थी।

 

बैठक में 4 विधायकों की गैरमौजूदगी से एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को फिलहाल तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि राज्य कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि बैठक में अनुपस्थित रहने वाले चारों विधायकों को पार्टी नोटिस जारी करेगी और उनसे इसका कारण पूछेगी।

 

विधायकों को रिजॉर्ट में रखने के कदम का बचाव करते हुए कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडु राव ने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी खुलेआम खरीद-फरोख्त में शामिल है और जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को येन केन प्रकारेण गिराने की कोशिश कर रही है।’ उन्होंने कहा, ‘हमें अपने सभी विधायकों को एक जगह रखने और आगामी लोकसभा चुनाव के लिए चर्चा की जरूरत है।’

 

दूसरी तरफ, बीजेपी ने विधायकों के गायब रहने पर कांग्रेस पर हमला बोला है। बीजेपी महासचिव पी. मुरलीधर राव ने कहा कि पूर्व मंत्री रमेश जरकीहोली समेत 4 कांग्रेसी विधायकों का विधायक दल की बैठक से नदारद रहना साफ तौर पर देश की सबसे पुरानी पार्टी में दरार को दिखाता है। बैठक से पहले, कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने पार्टी विधायकों को नोटिस जारी किया था और चेतावनी दी थी कि अगर वे अनुपस्थित रहे तो इसे ‘गंभीरता’ से लिया जाएगा और उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

 

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि विधायक दल की बैठक में 4 विधायक- रमेश जरकीहोली, बी. नागेंद्र, उमेश जाधव और महेश कुमाटहल्ली नहीं शामिल हुए। जरकीहोली को हालिया कैबिनेट फेरबदल में मंत्री पद से हटाया गया था और बताया जा रहा है कि वह इससे काफी नाखुश हैं। असंतुष्ट विधायक उमेश जाधव ने पहले ही सिद्धारमैया को खत लिखकर बैठक में अपने नहीं आने की जानकारी दे दी थी। उन्होंने सिद्धारमैया को लिखा कि उनके विधायक निवास के बाहर लेटर चिपकाकर मीटिंग के बारे में बताया गया था लेकिन वह अस्वस्थ हैं। इस वजह से वह बैठक में शामिल नहीं होंगे।

 

एक और असंतुष्ट विधायक बी. नागेंद्र ने गुरुवार को कहा था कि एक कोर्ट केस की वजह से वह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। बैठक में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और राज्य के नेता उपस्थित थे। बैठक के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जोर देकर कहा कि गठबंधन सरकार को कोई खतरा नहीं है और बीजेपी इसे ‘अस्थिर’ करने के लिए ‘व्यर्थ’ के प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी की साजिश का ‘पर्दाफाश’ हो चुका है।

भाजपा, कांग्रेस-जद एस ने एक-दूसरे पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए

NEW DELHI: कर्नाटक में सोमवार को फिर से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया जब सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन तथा भाजपा ने एक-दूसरे पर विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के आरोप लगाए। वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि स्थिर सरकार चलाने के लिए उनके पास ‘‘पर्याप्त संख्या बल’’ है। इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के छह से आठ विधायक भाजपा के साथ जाने के लिए तैयार हैं और कुछ विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

 

इस बीच, कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार में ‘‘अस्थिरता’’ का सवाल ही नहीं पैदा होता है। कांग्रेस – जदएस ने जहां भाजपा पर विधायकों को लालच देने के आरोप लगाए वहीं राज्य भाजपा के प्रमुख बी. एस. येदियुरप्पा ने इन खबरों को खारिज कर दिया कि सरकार गिराने के लिए उनकी पार्टी ‘ऑपरेशन कमल’ में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि आरोपों में कोई सत्यता नहीं है और कहा कि कांग्रेस- जदएस गठबंधन उनकी पार्टी के विधायकों को लालच देने का प्रयास कर रहा है।

 

मीडिया में इस तरह की खबर आई थी कि कांग्रेस विधायक भाजपा में जाने के लिए तैयार हैं और कुछ विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है जिसके बाद सरकार को खतरे की संभावना के कयास लगाए जाने लगे थे। ‘ऑपरेशन कमल’ का जिक्र 2008 में भाजपा द्वारा विपक्ष के कई विधायकों का दल बदल करवाकर तत्कालीन बी एस येदियुरप्पा सरकार की स्थिरता सुनिश्चत कराने के लिए किया जाता है। राज्य के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘यहां स्थिर सरकार देने के लिए मेरे पास पर्याप्त संख्या बल है।

 

कांग्रेस या जदएस को भाजपा से विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की जरूरत नहीं है, हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है।’’ कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें 120 विधायकों का समर्थन हासिल है और सरकार को अस्थिर करने के लिए येदियुरप्पा ‘‘व्यर्थ प्रयास’’ कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘किस भाजपा विधायक के नाम किस रिजॉर्ट में कमरे आरक्षित थे, कितने कमरे आरक्षित थे। वे कांग्रेस-जदएस के कितने विधायकों को लालच दे रहे थे और साथ ले जाने का प्रयास कर रहे थे… क्या मेरे पास सूचना नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ’गठबंधन सरकार को 120 विधायकों का समर्थन हासिल है।’’

BJP अध्यक्ष अमित शाह ने फूंका मिशन-2019 का बिगुल

NEW DELHI: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव को दो विचारधाओं के बीच ‘युद्ध’ करार दिया और ‘पानीपत के तीसरे युद्ध’ से इसकी तुलना करते हुए कहा कि 2019 की लड़ाई ऐसी है जिसका असर सदियों तक होने वाला है और इसलिये इसे जीतना जरूरी है। विपक्षी दलों के गठबंधन की पहल को ढकोसला करार देते हुए शाह ने कहा कि भाजपा गरीबों के कल्याण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा रही है जबकि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिये साथ आ रहे हैं।

 

भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘‘ 2019 का चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने सामने खड़ी हैं। 2019 का युद्ध सदियों तक असर छोड़ने वाला है और इसलिए मैं मानता हूं कि इसे जीतना बहुत महत्वपूर्ण है । उन्होंने कहा कि एक ओर 1950 से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं गरीब कल्याण की विचारधारा है । एक बड़ा तबका इसके साथ है । नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दल एकजुट चुनाव के लिये खड़े हैं।

 

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दूसरी ओर न कोई नेता है, न नीति है । स्वार्थ एवं सत्ता के लिये एकत्र लोगों का जमघट है । ‘‘ इन दो विचारधाराओं के बीच युद्ध है । ’’
उन्होंने कहा कि देश में 130 वर्षो का ऐसा कालखंड आया जब शिवाजी एवं अन्य सेनानियों के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई शुरू हुई थी । इसके फलस्वरूप अफगानिस्तान से कर्नाटक और गुजरात से ओडिशा तक बड़ा भूभाग स्वतंत्र हुआ। अमित शाह ने कहा कि दुर्भाग्य से पानीपत के तीसरे युद्ध जो अब्दाली और सदाशिवराव भाऊ के बीच लड़ा गया, उसमें मराठा सेना पराजित हो गई । यह निर्णायक युद्ध था । 131 युद्ध जीतने वाली मराठा सेना एक युद्ध हार गई और इसके कारण 200 साल गुलामी झेलनी पड़ा ।

 

शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव को ऐसा ही युद्ध बताया । उन्होंने कहा कि युद्ध कई प्रकार के होते हैं । कुछ युद्ध जय पराजय तक सीमित होते हैं । कुछ युद्धों का प्रभाव एक आध दशक तक होता है। जबकि कुछ युद्धों का प्रभाव सदियों तक रहता है। ‘‘मैं मानता हूं कि 2019 का युद्ध सदियों तक असर डालने वाला है और इसलिये यह युद्ध जीतना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि 70 साल तक जिन वंचितों, गरीबों के लिये कुछ नहीं किया गया, उनके कल्याण के लिये भाजपा ने प्रयास किया है, यह युद्ध उन गरीबों के लिये है।

 

उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव भारत के गरीब के लिए बहुत मायने रखता है। स्टार्टअप को लेकर निकले युवाओं के लिए ये चुनाव मायने रखता है । करोड़ों भारतीय जो दुनिया में भारत का गौरव देखने चाहते हैं उनके लिए ये चुनाव मायने रखता है । उन्होंने कहा कि एक दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले नरेंद्र मोदी जी को हराना मुमकिन नहीं है । शाह ने कहा कि 2014 के चुनाव में हम इन दलों को पराजित कर चुके हैं और आगे भी इन्हें पराजित करेंगे ।

 

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीट 73 से बढ़कर 74 सीटें होगी, यह 72 नहीं होगी । उन्होंने दावा किया कि 2019 में भाजपा के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि 2014 में 6 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थी और 2019 में 16 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। 5 साल के अंदर भाजपा का गौरव दिन दोगुनी गति से बढ़ा है। अमित शाह ने कहा कि ये अधिवेशन भारतीय जनता पार्टी के देशभर में फैले कार्यकर्ताओं के लिए संकल्प करने का अधिवेशन है । उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता अजेय योद्धा ‘मोदी’ के नेतृत्व में चुनाव में जा रहे हैं । ऐसे में कार्यकर्ताओं को जोश में बढ़ना चाहिए लेकिन होश नहीं खोना चाहिए ।

 

शाह ने कहा कि भाजपा चाहती है जल्द से जल्द उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और इसमें कोई दुविधा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ हम प्रयास कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की जल्द से जल्द सुनवाई हो लेकिन कांग्रेस इसमें भी रोड़े अटकाने का काम कर रही है । कांग्रेस अपना रूख स्पष्ट करे।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आश्वस्त रहे कि संविधान के तहत राम मंदिर के निर्माण के लिये पार्टी कटिबद्ध है।

 

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ समय से जो स्वयं जमानत पर हैं, जिन पर इनकम टैक्स का 600 करोड़ रुपए बकाया हो, ऐसे लोग मोदी जी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। जनता की सूझबूझ बहुत ज्यादा है। मोदी जी का प्रामाणिक जीवन और निष्कलंक चरित्र जनता के सामने है । उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब देश में कांग्रेस बनाम अन्य हुआ करता था, आज मोदी बनाम अन्य सभी हो गया है । शाह ने अपने संबोधन में सरकार की जनकल्याण योजनाओं और आंतरिक एवं वाह्य सुरक्षा के मोर्चे पर किए प्रयासों का जिक्र किया और कार्यकर्ताओं से इन्हें जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया।

भाजपा का राष्ट्रीय महाकुंभ आज से, अमित शाह करेंगे अधिवेशन का शुभारंभ

NEW DELHI : भारतीय जनता पार्टी मिशन-2019 के लिए दिल्ली में कल से राष्ट्रीय परिषद शुरू कर रही है। दो दिवसीय इस बैठक का शुभारंभ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह करेंगे, जबकि आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका समापन करेंगे। लोकसभा चुनाव से पहले हो रही इस बैठक में भाजपा देशभर के सभी चुने हुए पार्टी के नुमाइंदों, पंचायत से लेकर संसद तक को आमंत्रित किया है।

 

यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 12000 लोगों की समुलियत होगी। बैठक में क्या-क्या होगा, इसको लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वीरवार की देर शाम राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक अधिवेशन में तीन प्रस्ताव लाने पर विचार हो रहा है, लेकिन अंतिम फैसला पदाधिकारियों की बैठक में होगा। इनमें से राजनीतिक प्रस्ताव गृहमंत्री राजनाथ सिंह रख सकते हैं। इसके अलावा आर्थिक प्रस्ताव होगा और अगर तीसरा प्रस्ताव आता है तो वह इंटरनरल सिक्युरिटी पर हो सकता है।

 

सूत्रों के मुताबिक अधिवेशन के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठक में सरकार के पांच साल के कामकाज का हिसाब-किताब पेश करेंगे। इसके जरिए वे अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी प्रचार कर सकते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह एक तरह का कार्यकर्ताओं का महासंगम होगा और इसका मकसद यही है कि जब कार्यकर्ता चुनाव के लिए मैदान में जाएं तो उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि वे किन मुद्दों पर जनता से बातचीत करें और किन वायदों और मुद्दों पर वोट मांगें। इसके अलावा प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ते और महिला रिजर्वेशन बिल जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर भी दांव खेल सकते हैं।

 

हालांकि ये दोनों ही मुद्दे महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनके जरिए प्रधानमंत्री इसे एक बड़े वादे के रूप में पेश कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अधिवेशन में भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर ही रहने वाला है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि इस अधिवेशन से इस तरह का संकेत जाए कि न सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल उंचा हो बल्कि लोगों में भी उत्साह का संचार हो। अधिवेशन में हिस्सा लेने आ रहे पंचायत जिला अध्यक्ष सहित जमीनी कार्यकर्ताओं में भी यह उत्सुकता रहेगी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किस तरह के लाइन ऑफ एक्शन का ऐलान करते हैं।

 

बता दें कि यह बैठक समान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी मिलने के बीच हो रही है। इसने हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी को मिली हार के बाद भगवा पार्टी के मनोबल को बढ़ाया है। यह पहला मौका है जब भाजपा अपनी राष्ट्रीय परिषद की बैठक को विस्तृत स्वरूप देने जा रही है। इसमें हर लोकसभा क्षेत्र के लगभग दस प्रमुख नेता हिस्सा लेंगे। बैठक में सभी सांसदों, विधायकों, परिषद के सदस्यों, जिला अध्यक्षों व महामंत्रियों के साथ हर क्षेत्र के विस्तारकों को भी बुलाया गया है ।

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अमित शाह ने शुरू की तैयारी

NEW DELHI: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बुधवार को 17 राज्यों के लिए पार्टी प्रभारियों की नियुक्ति की। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर राजस्थान में और थावरचंद गहलोत उत्तराखंड में चुनाव अभियान संभालेंगे।

 

राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत उत्तर प्रदेश में गोवर्धन झडापिया, दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा को प्रभारी नियुक्त किया गया है। झडापिया गुजरात के नेता हैं वहीं गौतम पार्टी उपाध्यक्ष हैं। नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश से हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा को सपा तथा बसपा के संभावित गठबंधन से कठिन चुनौती मिलने की संभावना है।

 

पार्टी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार भाजपा के महासचिवों भूपेंद्र यादव और अनिल जैन को क्रमश: बिहार और छत्तीसगढ़ का जिम्मा सौंपा गया है। राज्यसभा सदस्य वी. मुरलीधरन और पार्टी सचिव देवधर राव को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

 

बयान के अनुसार महेंद्र सिंह को असम तथा ओ. पी. माथुर को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। भाजपा ने कई अन्य राज्यों के लिए भी प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन राज्यों में हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, पंजाब, तेलंगाना और सिक्किम शामिल हैं।

दंगा पीड़ितों की मुफ्त में केस लड़ते रहे एचएस फुल्का

NEW DELHI 1984 सिख दंगों के मामले में पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए पहले दिन से मुफ्त में केस लड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का आज जब सजा सुनाई गई तब वह रो पड़े। ये वही फुल्का हैं जो सिख विरोधी दंगों में खुद भी फंस गए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब दिल्ली में सिख विरोधी दंगे हुए तो एचएस फुल्का अपनी पत्नी को डॉक्टर को दिखाने के लिए गए थे। वापस लौटते वक्त वे दंगाइयों से घिर गए.। एचएस फुल्का जान बचाने के लिए पत्नी के साथ कोटला मुबारकपुर की झुग्गियों में घुस गए। इसके बाद जैसे-तैसे जान बचाकर वापस निकले और दिल्ली छोड़कर चंडीगढ़ चले गए।

 

चंडीगढ़ से ही कानून की पढ़ाई करने वाले एचएस फुल्का खुद दंगों का दंश झेल चुके थे। उन्होंने दंगा पीडि़तों को न्याय दिलाने की ठानी और लड़ाई शुरू कर दी। दंगों के साल भर बाद एक संस्था बनाई, जिसका नाम रखा सिटिजन्स जस्टिस कमेटी। पंजाब के बरनाला जिले के रहने वाले एचएस फुल्का की लड़ाई में तमाम नामी लोग साथ आए। खुशवंत सिंह, जस्टिस रंजीत सिंह नरुला, सोली सोराबजी, जनरल जगजीत सिंह अरोरा, जस्टिस वी एम तारकुंडे जैसे लोग उनके साथ जुड़ गए। जानकारी के मुताबिक एचएस फुल्का 1985 में दंगों की जांच के लिए बनी मिश्रा कमेटी के सामने पीडि़तों के वकील की हैसियत से पेश और तमाम तथ्य कमेटी के सामने रखे। न्याय की लड़ाई चलती रही है।

 

डेढ़ दशक बाद जब उन्होंने महसूस किया कि लड़ाई की गति धीमी हो रही है तो कार्नेज 1984 के नाम से एक वेबसाइट शुरू की। इस वेबसाइट के साथ देखते-देखते लाखों लोग जुड़ गए। 2013 में जब निचली अदालत ने दंगों के आरोपी सज्जन कुमार को बरी कर दिया तो पीडि़त निराश हो गए, लेकिन एचएस फुल्का ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस लड़ाई को आगे ले जाने का निर्णय लिया। बता दें कि फुल्का ने दंगा पीडि़तों का केस लडऩे के लिए कोई फीस नहीं ली। एचएस फुल्का की इस लड़ाई में उनकी पत्नी मनिंदर कौर हर कदम पर साथ खड़ी रहीं। कहा जाता है कि फुल्का के सहयोग के लिए उन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़ दी।

 

पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए छोड़ी सियासत
एचएस फुल्का की सियासी पारी भी शुरू हुई। 2014 में पहली बार आप के टिकट पर लुधियाना सीट से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। पिछले साल वे फिर पंजाब विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। हालांकि, थोड़े दिनों बाद ही एचएस फुल्का ने विधायकी छोड़ दी और कहा कि वे अपना पूरा ध्यान 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने में लगाने चाहते हैं। एचएस फुल्का की बदौलत आज दंगा पीडि़तों को न्याय मिला है और कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी करार दिया।

धूमल ही होंगे हिमाचल प्रदेश में भाजपा का चेहरा 

NEW Delhi : हिमाचल प्रदेश में भाजपा के सत्ता में लाने के लिए पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर विश्वास जताया है। बुधवार को वहां के सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है, जिसमें धूमल की पसंद को खास तबज्जो दी गई है। धूमल को चुनाव मैदान में उतारने से साफ हो जाता है कि पार्टी सत्ता में आई तो कमान उन्हें ही सौपा जाएगा। मतलब धूमल एक तरह से मुख्यमंत्री पद का चेहरा सामने कर दिए गए हैं। चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार धोषित कर देने की भी संभावना है। भाजपा की रणनीतिक मोर्चाबंदी और गुडिय़ा कांड से डरे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला ग्रामीण सीट छोड़कर अर्की से लड़ेंगे।
  बुधवार को भाजपा उम्मीदवारों के जो चेहरे सामने आए हैं, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी क्षेत्रीय, सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण धूमल को चुनाव लड़ाने का फैसला है। पार्टी ने उन पर विश्वास जताकर साफ कर दिया है कि हिमाचल में पार्टी अपने आजमाए हुए चेहरा को दोहरा सकती है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखराम के बेटे अनिल शर्मा को टिकट देर पार्टी का लक्ष्य उन वोटों को साधना है, जो अभी तक कांग्रेस के साथ जाते रहे हैं। मंडी क्षेत्र में सुखराम का अच्छा प्रभाव रहा है। कांगड़ा में भाजपा नेता शांता कुमार का अच्छा असर है। धूमल का हमीरपुर क्षेत्र में खासा प्रभाव है। ऐसे में माना ये जा रहा है कि सारी स्थिति का आकलन करते हुए पार्टी ने उन लोगों को मैदान में उतारा है, जो कांग्रेस से मुकाबला करने की सामर्थ रखते हैं। इसमें बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व द्वारा धूमल की पसंद को ज्यादा तबज्जो दी गई है।
–भाजपा ने दिया संकेत, मोदी अपनी रैली में कर सकते हैं ऐलान 
–उनकी पसंद के प्रत्याशियों को पार्टी ने दिया तबज्जो
–धूमल का दबाव काम आया, मिली उनके करीबियों को ज्यादा सीट 
–केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के कतरे पर, नहीं दी प्राथमिकता 
–गुडिय़ा कांड से भयभीत वीरभद्र ने बदली अपनी सीट
पार्टी के आदेश पर धूमल इस बार अपनी पुरानी सीट हमीरपुर की जगह सुजानपुर से लड़ रहे हैं। उन्हें सुजानपुर से चुनाव लड़ाने का फैसला पार्टी ने बहुत सोच-समझकर किया है। सुजानपुर से धूमल के चुनाव मैदान में होने का फायदा पार्टी को कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर सीट पर मिलेगा।
   उधर, जिस तरह के राजनीतिक हालात हैं, उसमें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अपनी सीट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है। सूत्रों की माने तो जिस सीट से वह लगातार चुनाव लड़ते आए हैं, वहां हिमाचल के चर्चित गुडिय़ा कांड का मामला इतना गर्म है कि सिंह को सीट पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। लिहाजा, वह इस बार शिमला ग्रामीण की जगह पर सोलन जिले के अर्की सीट से चुनाव लडऩे जा रहे हैं।
 गौरतलब है कि बीते शनिवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ अलग से बंद कमरे में बैठक की थी। इस दौरान धूमल के साथ सभी सीटों और प्रत्याशियों की गुणा गणित का खाका खींचा गया था। इस मुलाकात से ही अंदेशा लगाया जा रहा था कि धूमल को ही भाजपा का चेहरा बनाया जा सकता है।
 केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पार्टी ने किया किनारे  
  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पार्टी ने किनारे कर दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि नड्डा की सिफारिश इस बार बिलकुल नहीं चली है। यहां तक की वह अपनी बिलासपुर सीट पर भी अपनी पसंद का उम्मीदवार नहीं दिला पाए हैं। बिलासपुर से सुभाष ठाकुर को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी ने यह चयन कांग्रेस उम्मीदवार बुम्बर ठाकुर की पकड़ को ध्यान में रखकर किया है। 2012 में नड्डा की सिफारिश पर उम्मीदवार रहे चंदेल को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए पार्टी नेतृत्व ने इस बार नड्डा को लेकर कोई जोखिम मोल लेना ठीक नहीं समझा।
नड्डा खेमे से लगातार यह प्रचारित किया जा रहा था कि इस बार पार्टी हिमाचल में उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में सामने ला सकती है, लेकिन पार्टी द्वारा बिलासपुर सीट में उम्मीदवार चयन में उन्हें तबज्जो नहीं देकर और धूमल को प्रोजेक्ट कर साफ संकेत दे दिया है कि हिमाचल में धूमल ही पार्टी के चेहरा होंगे।