50 साल की महिलाएं भी बन सकेंगी मां

NEW DELHI. महिलाओं के लिए एक बडी खुशखबरी है, जो अधिक उम्र में मां नहीं बन पाती हैं। अब विज्ञान एवं तकनीक ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। लिहाजा, अगर आप 50 की उम्र में हैं तो घबराएं नहीं, अब मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।
कॅरियर और जिंदगी की भागदौड़ में उलझी महिलाएं परिवार शुरू करने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं। कई बार उनकी उम्र उस दहलीज पर पहुंच जाती है, बायोलॉजिकली जहां मां बनने में मुश्किल होती है। मगर मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि महिलाओं के अधिक उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं है। 50 साल महिलाओं के लिए एक ऐसी उम्र है जब ज्यादातर महिलाओं का मेनॉपॉज शुरू हो जाता है और अंडाशयों द्वारा हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में मां बनना नामुमकिन समझा जाता है। मगर साइंस और टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। अब 50 की उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।

एक ओर मेडिकल साइंस में तरक्की ने कॅरियर पर ध्यान देने वाली, स्वतंत्र महिलाओं को यह विकल्प दिया है कि वे गर्भावस्था को देरी से प्लान कर सकती हैं। वहीं, दूसरी ओर उन महिलाओं के लिए भी संभावनाएं उत्पन्न की हैं जो बढ़ती उम्र में दूसरा या तीसरा बच्चा चाहती हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने देर से शादी की हो, या जो दूसरी शादी से बच्चा चाहती हैं। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो दूसरा बच्चा प्लान करने के बारे में सोच रही हैं, लेकिन लंबे ब्रेक के बाद यानी लेट प्रेगनेंसी प्लानिंग।

 

बड़ी उम्र में मां बनने पर रिस्क
दिल्ली के फॉर्टिस लाफेम की ऑब्स्टेट्रिक्स और गाइनोकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ कुसुम साहनी का कहना है कि अगर आप 30 साल की उम्र के आसपास बच्चे को जन्म देने की प्लानिंग करती हैं तो प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक होती है। हालांकि बड़ी संख्या में महिलाएं अब बड़ी उम्र में भी प्रेग्नेंट हो रही हैं। 40 या 50 साल की उम्र में मां बनना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। हालांकि डॉ साहनी कहती हैं कि अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबीटीज, हाइपरटेंशन, होने वाले बच्चे में डाउन्स सिंड्रोम, समय से पहले डिलिवरी और स्टिल बर्थ जैसे कई रिस्क शामिल होते हैं। अधिक उम्र में 3 तरीकों से कर सकती हैं गर्भधारण। हालांकि इनके अपने-अपने सीमाएं और सफलता की दर है।

 

गर्भधारण के 3 तरीके

-प्राकृतिक रूप से गर्भधारण
-आईवीएफ तकनीक में खुद के अंडों का इस्तेमाल
-आईवीएफ तकनीक में डोनर की मदद से

उम्र पर निर्भर करती है फर्टिलिटी
इसमें कोई शक नहीं कि फर्टिलिटी की क्षमता उम्र पर निर्भर करती है। महिला की उम्र जितनी अधिक होगी उसके प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की संभावना उतनी ही घट जाएगी। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है उसके शरीर में मौजूद स्वस्थ अंडों की संख्या घटती जाती है और यही वजह है कि उसके प्रेग्नेंट होने की संभावना भी कम होती जाती है।

एक महिला जन्म के समय सभी अंडाणु के साथ पैदा होती है। 30 साल की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में स्वस्थ अंडाणुओं की संभावनाएं कम होती हैं। इससे उनके गर्भवती होने की संभवाना भी कम हो जाती है। इसलिए, विसंगतियों वाले बच्चे होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़ों की बात करें तो 20 की उम्र के दौर में जेनेटिक डिसऑर्डर के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संभावना 2500 में एक होती है, जबकि 40 की उम्र में यह संभावना 350 में एक हो जाती है।

 

डोनर की मदद से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल

50 साल की उम्र में ज्यादातर महिलाओं की रजानिवृत्ति शुरू हो जाती है। ऐसे में उनका मां बनना लगभग असंभव हो जाता है। वह अपने ही अंडों से गर्भधारण करने की कोशिश करने के बजाय किसी डोनर की सहायता से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि महिला को पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए ताकि प्रेग्नेंसी से जुड़े रिस्क को कम किया जा सके और स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके।

क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक
गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग कंसल्टेंट डॉ. रितु सेठी ने बताया कि, अपने अंडाणु से गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अंडाशय से प्राप्त परिपक्व अंडे के उर्वरता की जटिल प्रक्रिया है। इनफार्टिलिटी कई कारकों जैसे फेलोपियन ट्यूब में क्षति या अवरोध होना, एंडोमीट्रिओसिस, शुक्राणु गतिशीलता में कमी आना और ओवुलेशन में गड़बड़ी की वजह से हो सकती है। ओवरी से अण्डे के बाहर आने की क्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। बढ़ती उम्र में अपने अंडे का उपयोग कर गर्भ धारण करने का सफलता दर काफी कम है। हालांकि, अगर किसी ने कम उम्र में एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया कर ली है, तो उन्हें फर्टाइल करने के लिए क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक होती हैं।

 

पासपोर्ट: ऐड्रेस प्रूफ के तौर पर काम नहीं करेगा

NEW DELHI. जल्‍द ही आपका पासपोर्ट आपके ऐड्रेस प्रूफ के रूप में काम नहीं आएगा। विदेश मंत्रालय की घोषणा के अनुसार अब पासपोर्ट का आखिरी पन्‍ना प्रिंट नहीं किया जाएगा। भारतीय पासपोर्ट के आखिरी पन्‍ने पर नाम, पिता या कानूनी अभिभावक का नाम, माता का नाम, पत्‍नी का नाम और पता छपा होता है। य‍ह निर्णय विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित तीन सदस्‍यीय समिति की रिपोर्ट के बाद लिया गया है। समिति ने उन बातों की समीक्षा की जिनमें कहा गया था कि क्‍या पासपोर्ट में से पिता का नाम हटाया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा कि समिति की रिपोर्ट को स्‍वीकार कर लिया गया है। नए वर्जन में पासपोर्ट का आखिरी पन्‍ना खाली रखा जाएगा। हालांकि सारी जानकारी अब भी विदेश मंत्रालय के सिस्‍टम में जमा रहेगी इसलिए इससे सरकारी स्‍तर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

प्रवक्‍ता ने कहा, ‘अब जबकि पासपोर्ट का आखिरी पन्‍ना अब प्रिंट नहीं होगा, इसीआर (इमिग्रेशन चेक रिक्‍वायर्ड) स्‍टेटस वाले पासपोर्ट धारकों के लिए नारंगी रंग के पासपोर्ट जैकेट वाले पासपोर्ट जारी किए जाएंगे और नॉन इसीआर स्‍टेटस वालों के लिए नियमित नीले पासपोर्ट ही जारी होंगे। वर्तमान में पासपोर्ट तीन रंगों में जारी होते हैं। सरकारी अधिकारियों को सफेद रंग के पासपोर्ट जारी होते हैं जबकि राजनयिकों को लाल रंग और अन्‍य लोगों को नीले रंग के।

नए पासपोर्ट को नासिक स्थित इंडियन सिक्‍योरिटी प्रेस द्वार डिजाइन किया जाएगा।