सिक्खी सेवा भूल, कीचड़ उछालने की शुरु हुई राजनीति

NEW DELHI.  सिक्खी सेवा के लिए स्थापित दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इन दिनों अजीबोगरीब घोटालों को सुलझाने में उलझ गई है। इसके चलते असली काम छोड़ विपक्षी दलों के आरोपों पर सफाई देने में जुट गई है। साथ ही विपक्षी दलों के असली मुद्दों के बदले उनके निजी मुद्दों को उठाकर कीचड़ उछालने की नई सियासत शुरू कर दी है। दिल्ली कमेटी ने विरोधियों पर पलटवार करने के लिए हर हफ्ते पोल-खोल कांफ्रैंस करने की नई परंपरा शुरू कर दी। आज उसकी शुरुआत थी। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह, तख्त पटना साहिब कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित तथा कमेटी के प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने विरोधियों पर तीखे हमले किये। 
 
–गुरुद्वारा कमेटी ने भी विपक्षी दलों पर किया पलटवार 
–वर्दी, पुस्तक एवं गोलक घोटाले पर दी सफाई, दी नसीहत 
   कालका ने सरना कार्यकाल के दौरान किताबों तथा वर्दी की खरीद में अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का सरना पर आरोप लगाया। साथ ही बताया कि दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना की बेटी की कम्पनी बिंद्रा सिलैक्शन व अन्यों से 10 लाख 67 हजार रूपये के कोर्ट पैंट, वर्दी तथा शालों की खरीद 2003 में कमेटी द्वारा की गई थी। इसमें सीधे तौर पर साबित होता है कि सरना भाईयों ने अपनी बर्तनों की कम्पनी पंजाब स्टेनलस स्टील से गुरुद्वारा कमेटी तथा स्कूलों में गिफ्ट आईटमों की खरीद करने के साथ ही अपनी बेटी तथा दामाद की दुकानों से कपड़ा खरीदकर सीधे तौर पर अपने परिवार को फायदा पहुंचाया है।  कालका ने कहा कि सरना ने कहा था कि आज भी पुराने बर्तन बेंच कर उस समय के बर्तनों की कीमत वसूल की जा सकती है। परन्तु सवाल उठता है कि जितने बर्तन स्टाफ या अन्य लोगों को उपहार में दिये गये वो कैसे वापिस आयेंगे। कालका ने साफ कहा कि दुष्प्रचार के कीचड़ में उतरने का हमारा कोई ईरादा नहीं था, परन्तु विरोधियों ने कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. के खिलाफ सियासत से प्रेरित होकर निचले स्तर के आरोप लगाये हैं। नतीजन, हमें संगतों को इनकी हकीकत के बारे बताने को मजबूर होना पड़ा।
   कालका ने 2013 में दिल्ली कमेटी चुनाव के दौरान गुरू की गोलक से चुनाव प्रचार सामग्री छपवाने के लिए सरना ने 55 हजार प्रति प्रचार सामग्री छपवाई थी। 
सच क्या है, सरना संगतों को बतायें
   कमेटी प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि दिल्ली कमेटी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कमेटी के स्टोर में बिना कागज तथा किताबें आये 27 लाख रूपये का कमेटी ने भुगतान कर दिया। साथ ही अपना कागज देने के बावजूद 78 रूपये की एक किताब खरीदना कहीं न कहीं कमेटी प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जिस पिं्रटर से यह किताब छपवाई गई थी आज उस पते पर ब्यूटी पार्लर चल रहा है। सच क्या है, सरना संगतों को बतायें।