लड़की का पहला पीरियड : कहीं जश्न तो कहीं अशुद्धी

NEW DELHI.  महिलाओं एंव लडृकियों में हर महीने पीरियड यानी माहवारी आती है। इसको लेकर समाज में अलग—अलग राय है। ज्यादातर लोग पीरियड के दौरान महिलाओं को अशुद्ध मानते हैं। बहुत से व्यक्ति ऐसे हैं, जो पीरियड के बारे में परंपरा और कथाओं के हवाले से कपोल-कल्पित बातें करते हैं, जिनका कोई आधार नहीं हैं। सच यह है कि आज भारत के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लड़की का पहला पीरियड खुशी का अवसर माना जाता है।

कर्नाटक में कई स्थानों पर आज भी एक परंपरा कायम है। इसके तहत जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड होता है तो इसे उत्सव के तौर पर मनाते हैं। लड़की को नए वस्त्र पहनाकर तैयार किया जाता है और सुमंगली महिला यानी कोई शादीशुदा महिला उसकी आरती उतारती है। लड़की को एक खास प्रकार का व्यंजन खिलाया जाता है, ऐसा माना जाता है कि इससे पीरियड में समस्या नहीं होती है। इसी प्रकार से लड़की के पीरियड शुरू होने पर केरल और आंध्र प्रदेश में भी उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

तमिनाडु में तो पहले पीरियड पर तीन दिन तक उत्सव मनाया जाता है। यहां इस उत्सव को मंजल निराथु विझा के नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु में पहले पीरियड पर लड़की को औषधीयुक्त पानी से नहलाया जाता है। परिवार के सदस्यों और मित्रों को इस उत्सव में बुलाया जाता है। वे लड़की को सिल्क साड़ी गिफ्ट करते हैं। इसी प्रकार से असम में भी ऐसा ही त्यौहार मनाया जाता है, जहां इसे जोरू बिया के नाम से जाना जाता है।

 

भारतीय परंपरा और संस्कृति के नाम पर पीरियड के दौरान महिला को अशुद्ध या यूं कहें कि अछूत की तरह ट्रीट करने वाले लोग नहीं जानते हैं कि वे जिन बातों का पालन कर रहे हैं, वे भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है बल्कि भ्रम और अंधविश्वास के चलते हमारे समाज में वे बातें आ गई हैं। हां, इतना जरूर है कि पीरियड के दौरान महिलाओं को कुछ सावधानियां बरतनी होती हैं, लेकिन इसे घृणा भाव से देखना गलत है। आइए जानते हैं कि ऐसे ही कुछ मिथ जो हमारे समाज में पीरियड से जुड़े हैं, लेकिन इनके पीछे के कारण कुछ अलग हैं।

 

पहला तर्क – पीरियड में गंदा खून निकलता है

सच: पीरियड में निकलने वाला रक्त नसों में बहने वाले खून से अलग होता है। यह सौ प्रतिशत सच है, लेकिन यह गंदा नहीं होता है। यौनी से निकलने वाला खून, वेजाइना के टिश्यू, सेल्स, एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण बच्चेदानी में जो खून और प्रोटीन की परत बनती है, उसके टुकड़े खून के रूप में बाहर निकलते हैं। बच्चेदानी में जमा यह रक्त पीरियड के दौरान बाहर निकल जाता है, क्योंकि यह शरीर के लिए गैरजरूरी होता है।

दूसरा तर्क: अचार छूने से खराब होता है

सच: पीरियड के दौरान महिला अचार छू ले तो वह खराब हो जाता है। ऐसी मान्यता काफी समय से है, लेकिन यह गलत है। दरअसल, अचार तब खराब होता है जब कोई गीले हाथों से उसे छू ले।

तीसरा मिथ: पीरियड के दौरान महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती

सच: पीरियड के दौरान गर्भाधारण की गुंजाइश कम होती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि महिला पीरियड के समय प्रेग्नेंट नहीं हो सकती। सेक्स के दौरान अगर स्पर्म वजाइना के अंदर रह जाए, तो अगले सात दिनों तक प्रेग्नेंसी के चान्सेस होते हैं।

चौथा मिथ: पीरियड के दौरान कसरत नहीं करनी चाहिए

सच: यदि किसी महिला को प्रतिदिन एक्सरसाइज की आदत है तो वह पीरियड में भी बिना किसी चिंता के एक्सरसाइज कर सकती है। इससे कोई नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता है, क्योंकि पीरियड के दौरान होने वाले पेट दर्द में इससे राहत से मिलती है। एक्सरसाइज से जो पसीना निकलता है वह महिला के दर्द को कम करता है।

पांचवां मिथ: पूरे एक हफ्ते चलना चाहिए पीरियड

सच: दरअसल, यह सब एस्ट्रोजन पर निर्भर करता है, जो एक प्रकार का हार्मोन है। यह शरीर की कई चीजों को कंट्रोल करता है, जैसे बाल, आवाज, सेक्स की इच्छा आदि। एस्ट्रोजन के कारण, हर महीने बच्चेदानी में खून और प्रोटीन की एक परत बनती है। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा के हिसाब से खून और प्रोटीन की परत बनती है। यह थोड़ी मोटी भी हो सकती है पतली भी। जिन महिलाओं के यह परत मोटी बनती है पीरियड के दौरान उनका ज्यादा खून निकलता है, जिनके कम उनका खून कम निकलता है। मतलब एक हफ्ते तक पीरियड होना जरूरी नहीं है।

छठा मिथ: पीरियड मिस मतलब महिला गर्भवती

सच: यह सच है कि गर्भधारण पर पीरियड नहीं होते हैं, लेकिन पीरियड नहीं होने के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं है। मतलब गर्भवती होने के अलावा भी कई कारण हैं जब पीरियड नहीं होते या मिस हो जाते हैं। जैसे- स्ट्रेस, खराब डाइट और हार्मोनल चेंजेस की वजह से भी कई बार पीरियड मिस हो जाते हैं।

सातवां मिथ: पीरियड के दौरान कपड़े पर दाग मतलब सब ठीक है

सच: महिलाओं के पीरियड खुलकर होना बेहद आवश्यक होता है। ऐसा नहीं होने से या समय पर पीरियड नहीं होने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। समाज में एक मान्यता है कि कपड़ों पर दाग लगा है तो मतलब पीरियड खुलकर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है , दसअसल कपड़ों पर दाग लगे होने का मतलब यह है कि पैड पूरा गीला हो चुका है या उसे सही से नहीं पहना गया है।

 

आठवां मिथ: पीरियड के दौरान गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए

सच यह है: डॉक्टर्स इस बात को कोरा भ्रम करार देते हैं। उनका कहना है कि पीरियड के दौरान गुनगुने पानी से नहाना काफी अच्छा होता है, इससे बॉडी पेन और शरीर में जो एक प्रकार की ऐंठन होती है, वह दूर हो जाती है।

 

नौंवा मिथ: पीरियड के दौरान महिलाएं बाल न धोएं

सच: पीरियड के दौरान बाल न धोने के पीछे सिर्फ भ्रम ही एक कारण है। मेडिकल साइंस में ऐसी कोई वजह नहीं है कि महिलाएं पीरियड में बाल न धोएं। महिलाएं जब चाहें तब बाल धो

UP: वॉट्सऐप पर ट्रिपल तलाक, हलाला के नाम पर रेप

NEW DELHI.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रिपल तलाक कानून को खारिज करने के बाद भी देश के विभिन्न शहरों में अभी भी ट्रिपल तलाक की घटनाएं हो रही हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक विवाहिता को पति द्वारा वॉट्सऐप पर ट्रिपल तलाक देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिले के सांगीपुर इलाके में रहने वाली महिला को पहले पति ने तलाक दिया और फिर दो बार उसका रेप किया। इसपर जब महिला ने पुलिस को मामले की शिकायत दी तो आरोपी शख्स ने दोबारा निकाह की बात कहते हुए उसे एक रिश्तेदार मौलवी के पास हलाला कराने को भेज दिया। यहां पर भी महिला के विरोध करने के बावजूद मौलवी ने उसका रेप किया।

 

परिजनों के मुताबिक, महिला का निकाह करीब 9 साल पहले हुआ था और निकाह के बाद महिला ने दो बच्चों को भी जन्म दिया। हाल ही में कुछ दिनों पहले पति द्वारा तलाक के बाद रेप किए जाने पर उसने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। इसके बाद ही पति ने दबाव में दोबारा निकाह की बात कही थी, लेकिन इसके लिए हलाला कराने की शर्त रखी थी। आरोप के मुताबिक महिला की शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस विभाग ने शरिया कानून की बात कहते हुए कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद महिला न्याय के लिए अपने दो बच्चों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों के दरवाजे पर भटकती रही।

महिला दर-दर भटकने को मजबूर

कहा जा रहा है कि हलाला के नाम पर जिस मौलवी पर रेप करने का आरोप है उसका नाम मजीज है और वह नगर कोतवाली क्षेत्र के जोगापुर इलाके का निवासी है। वहीं घटना के बाद सांगीपुर पुलिस ने महिला और आरोपी मौलवी के खिलाफ केस तो दर्ज किया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इसी उदासीनता के कारण जहां महिला दर-दर भटकने को मजबूर है, वहीं अधिकारियों ने अब तक इस मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई बयान नहीं दिया है।

 

गौरतलब है कि, तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना फैसला सुना चुका है। अब कोर्ट में नया मुद्दा निकाह हलाला की चर्चा जोरों पर है। सुप्रीम कोर्ट में इसपर भी चुनौती दी गई है जिसकी सुनवाई संविधान पीठ करेगा। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से निकाह हलाला जैसी प्रथा भी खत्म करने की मांग उठने लगी है।

दिल्ली-एनसीआर में 2 घंटे ही फोड़ सकेंगे पटाखा

NEW DELHI. दिल्ली—एनसीआर में रहते हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। इस बार दीपावली पर आप दो घंटे ही पटाखा फोड पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ किया कि ग्रीन पटाखे की शर्त केवल दिल्ली-एनसीआर के लिए है और देश के बाकी हिस्सों में सामान्य पटाखे जलाए जा सकेंगे। कोर्ट ने साथ ही पटाखा फोड़ने के दो घंटे में समय बदलाव से साफ इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले दिए गए अपने फैसले में पटाखा फोड़ने का समय रात 8 बजे से 10 बजे तक तय किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय में बदलाव की तमिलनाडु सरकार की अपील पर एक नया निर्देश जरूर जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु में दिवाली के दौरान दो घंटे पटाखा छोड़ने का समय राज्य सरकार तय कर सकती है। बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए सुबह से समय पटाखा फोड़ने की इजाजत मांगी थी।

 

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि ग्रीन पटाखे केवल दिल्ली-एनसीआर में ही जलाए जाएंगे और यह देश के अन्य हिस्सों पर लागू नहीं होगा। तमिलनाडु सरकार ने वकील बी विनोद खन्ना के मार्फत याचिका दायर कर शीर्ष अदालत के इस आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करते हुए कहा था कि राज्य में सुबह साढ़े चार बजे से लेकर सुबह साढ़े छह बजे तक भी पटाखे फोड़ने की इजाजत दी जाए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दिए गए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगाने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री को इजाजत दे दी थी।

पटाखों की ऑनलाइन बिक्री नहीं की जा सकती

 

SC ने अपने फैसले में कहा था कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स पोर्टल्स को पटाखे बेचने से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों को केवल लाइसेंस पाए ट्रेडर्स ही बेच सकते हैं। आपको बता दें कि वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस पर अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कम आवाज वाले पटाखे जलाने का आदेश दिया है ताकि प्रदूषण से मुक्ति मिल सके।

शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की अनुमति दी है, जिनसे देशभर में कम उत्सर्जन होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन बाद ही दिवाली का त्योहार है। दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए कोर्ट ने टाइम भी तय किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिवाली पर शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

गुरुद्वारा कमेटी में ‘दान घोटाला, डकार गए 51 लाख,  GM सस्पेंड

NEW DELHI. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा किया है। साथ ही कहा कि जीके ने एक नहीं लगातार कई घोटाले किए हैं, जिसमें से तीन घोटालों के सबूत सामने आए हैँ। इन घोटालों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरूण जेटली, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस सहित दिल्ली गुरुद्वारा आयोग से लिखित रूप से की है। इनमें सबसे अहम घोटाला है दान घोटाला, जिसके तहत 51 लाख रुपये का सीधे गबन किया गया है। मनजीत सिंह जीके के खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई है और पुलिस ने डीडी नंबर 11ए, तारीख 21 अक्टूबर 2018 के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पुलिस को अपना बयान दिया है और सभी साक्ष्य सौंपे हैं। मामला चूंकि, गुरुद्वारे के गोलक की लूट से जुड़ा है, इसलिए अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी शिकायत की गई है।
 
–कमेटी के सदस्य गुरमीत शंटी ने लगाए सनसनीखेज आरोप 
–प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को लिखी चिट्ठी, कमेटी खातों की जांच की मांग
–अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को भी लिखी चिटठी, करें हस्तक्षेप   
–गुरमीत शंटी ने पुस्तक घोटाले का जारी किया आडियो टेप 
शंटी ने आरोप लगाया कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी कमेटी के बाकी सदस्य एवं पदाधिकारी खामोश बैठे हैं। शंटी ने कहा कि मनजीत सिंह जीके के कार्यकाल के दौरान प्रधान-डीएसजीएमसी के रूप में, डीएसजीएमसी और जीएचपीएस के सभी खातों को सत्य जानने के लिए उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
     कमेटी के पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि सिख धर्म के प्रचार के लिए गुरुद्वारा कमेटी ने 82 हजार धार्मिक पुस्तकें छपवाने का दावा किया था, जबकि, हकीकत में पुस्तकें छपी ही नहीं और लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। पुस्तक घोटाले को लेकर शंटी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक आडियो टेप भी जारी किया, जिसमें पुस्तकें नहीं छापने और फर्जी बिल बनाने की बात कही गई है। आडियो टेप में पुस्तक छापने वाले जोगिंदर सिंह प्रेस ने माना है कि कमेटी ने उनसे फर्जी बिल बनवाए और उसका लाखों रुपये खा गए।
ब्लैकलिस्टेड  कंपनी को दिया ठेका, पेमेंट भी हुआ  
इसके अलावा कमेटी अध्यक्ष जीके ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी ‘रेनबी क्लॉथिंग प्राइवेट लिमिटेडÓ को कपड़े सप्लाई करने का ठेका दिया और उसे भुगतान भी कर दिया। यह कंपनी उनके बेटे एवं दामाद की है, जो उनके अपने निजी आवास के पते पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2015 में बंद हो चुकी कंपनी को 2017-18 में भुगतान किया गया। जबकि, कमेटी एक्ट के अनुसार परिवार का सदस्य कोई व्यवसाय गुरुद्वारे में नहीं कर सकता है।
51 लाख रुपये का दान का गबन 
पूर्व महासचिव गुरमीत शंटी ने कहा कि कनाडा के एक श्रद्धालु ने 1 लाख कैनेडियन डॉलर का दान डीएसजीएमसी को दिया, जिनको भारतीय रुपए में बदल कर 51,05,773.20 रुपए 30 जून 2016 को बैंक में जमा किया गया था। यह कुल राशि 51,05,773.20 है। बैंक स्टेटमेंट में भी यह रकम साफ दर्ज है। लेकिन, मनजीत जीके ने एक नकली वाउचर नंबर 3468 बना कर उसी तारीख को 51,05,773 रुपये उसी तारीख को यानी 30 जून 2016 और डीएसजीएमसी के कैश चेस्ट से निकाल ली गई।
जीके ने गृहमंत्रालय से मांगी है जेडप्लस सुरक्षा 
गुरमीत सिंह शंटी ने दावा किया कि मंजीत सिंह जीके ने दिल्ली की संगत द्वारा हमले के डर से, (जैसे अमेरिकी संगत द्वारा हाल ही में उन पर किया गया था) दिल्ली पुलिस और जेड प्लस सुरक्षा मांगी है। इसके लिए गृह मंत्रालय एवं दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि जीके ईमानदार हैं, तो उन्हें दिल्ली की संगत के डर से सुरक्षा की मांग नहीं करनी चाहिए थी।
मंजीत सिंह दें इस्तीफा, गैरहाजिरी में हो खातों की जांच- सरना   
शिरोमणि अकाली दल (दिलली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने इतने बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही पुलिसे से उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि जीके की गैरहाजिरी में कमेटी के सभ्ीा खातों की जांच होनी चाहिए। सरना ने कहा कि कमेटी के इतिहास में यह पहला वाक्या होगा, जब एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं।
जांच में जो दोषी होगा, कार्रवाई होगी: दिल्ली कमेटी 
 दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने गुरमीत सिंह शंटी के आरोपों पर बहुत ज्यादा आज नहीं बोला है। कमेटी प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने इतना ही कहा कि हमने पहले ही नार्थ एवेन्यू थाने मे जांच के लिए तहरीर दे रखी हैं। लिहाजा, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्यवाही होंगी।

गुरुद्वारा कमेटी का जनरल मैनेजर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित

दिल्ली कमेटी सदस्य सरदार गुरमीत सिंह शंटी द्वारा कमेटी के जनरल मैनेजर सरदार हरजीत सिंह सुबेदार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर कमेटी अध्यक्ष मंजीतसिंह जीके ने तत्काल प्रभाव से सुबेदार को संस्पेंड कर दिया है। साथ ही जांच के लिए सरदार हरमीत सिंह कालका व सरदार महिन्द्रपाल सिंह चड्ड़ा की अगुवाई में 2 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस फैसले का ऐलान करते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह जी.के. ने सूबेदार को पद से निलंबित भी कर दिया।

बादल की ‘अदालत’ में अकालियों की लगी ‘क्लास’  

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी में कथित भ्रष्टाचार, घोटाले सहित कई अन्य मामलों में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई आज अकाली दल बादल के सुप्रीमों सुखबीर सिंह बादल की अदालत में पहुंची। बादल ने कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके एवं महासचिव मनजिंंदर सिंह सिरसा के बीच छिड़े जंग को सुलझाने के लिए आज अपने आवास पर सभी नेताओं को तलब किया। बादल ने कमेटी के करीब 20 सदस्यों से बंद कमरे में अलग-अलग बातचीत की और वर्तमान हालात की बावत जानकारी मांगी। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान ज्यादातर सदस्यों ने करप्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। साथ ही कहा कि कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए। इसको लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है और संगत के बीच गलत मैसेज भी जा रहा है।
— सिरसा-जीके की लड़ाई को सुलझाने में जुटे सुखबीर बादल  
–दिल्ली कमेटी में भ्रष्टाचार पर सदस्यों ने उठाई आवाज 
–अलग-अलग सदस्यों से बंद कमरे में मिले शिअद सुप्रीमो 
सूत्रों के मुताबिक सदस्यों ने कहा कि अब करप्शन का मुद्दा इतना ज्यादा फैल गया है िक संगत भी पूछने लगी है। लिहाजा, संगतों को हम लोग क्या जवाब दें। सदस्यों ने सुखबीर बादल को कहा कि पहले मंजीत सिंह जीके इस्तीफे की बात कही और शक्तियां देकर चले गए, और अब महासचिव मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा ने अपनी शक्तियां देकर घर बैठ गए। यह सिख संगतों के बीच बहुत गलत मैसेज जा रहा है। लिहाजा इस मसले को तुरंत सुलझाया जाना चाहिए। एक सदस्य ने कहा कि मंजीत सिंह जीके पर बड़ा ही गंभीर आरोप लगा है, इसके जवाब में जीके को खुद अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही पार्टी को चाहिए कि वह इसकी निष्पक्ष जांच करवाए।
आज फिर बाकी 20 सदस्यों से करेंगे मुलाकात
   शुक्रवार को फिर दिल्ली के बाकी सदस्यों को बुलाया गया है। वीरवार को पश्चिमी दिल्ली एवं नई दिल्ली क्षेत्र के सदस्य पहुंचे थे। इनमें पूर्व कमेटी अध्यक्ष एवं पटना साहिब के नवनियुक्त अध्यक्ष अवतार सिंह हित, रंजीत कौर, हरमनजीत सिंह, जगदीश सिंह काहलो, हरजीत सिंह पप्पा, गुरमीत सिंह भाटिया, निशान सिंह मान, स्वर्ण सिंह बराड़, मनमोहन सिंह, दलजीत सिंह सरना, सर्वजीत सिंह विर्क एवं महेंद्र सिंह भुल्लर आदि पहुंचे। इसके अलावा कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके खुद भी मौजूद रहे, लेकिन सुखबीर बादल सदस्यों से अकेले ही मिले। इस दौरान सदस्यों ने कई अहम सुझाव भी दिए। सूत्रों के मुताबिक सुखबीर ङ्क्षसह बादल से मिलने के बाद कुछ सदस्यों ने अकाली सांसद प्रो. चंदूमाजरा के आवास पर जाकर उनसे भी मुलाकात की। उधर, इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कुछ भी बोलने से साथ इनकार कर दिया है।
भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए : रंजीत कौर 
दिल्ली कमेटी की सदस्य एवं अकाली दल बादल की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रंजीत कौर ने भी पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के समक्ष अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि कमेटी एवं पार्टी में जो भी आतंरिक विरोध का मामला है उसे बैठकर सुलझा लिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सिख संगत के सामने आ जाए। लेकिन, अफसोस कि एक दूसरे पर आरोप लगाने के चलते संगत के बीच गलत मैसेज जा रहा है। उन्होंने सुखबीर बादल को बताया कि कमेटी में विपक्ष नहीं है, लेकिन हम खुद ही विपक्ष क्रियेट कर दिए हैं। लिहाजा, समय-समय पर सदस्यों की काउंसलिग होनी चाहिए। रंजीत कौर ने इस दौरान बताया कि हमसभी को मिलकर संगइन को मजबूत करना चाहिए। यूथ विंग को महिला विंग की तर्ज पर फैलाना चाहिए। हमने 1000 महिलाओं को जोड़ा है। स्त्री कवि दरबार शुरू कराया। अब घरेलू महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। रंजीत कौर ने सुखबीर बादल को लिखित सुझाव दिया कि वह कार्यकर्ताओं से बीच-बीच में मिलें, ताकि उनका मनोबल भी मजबूत हो।
धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे : बाठ 
दिल्ली कमेटी के पूर्वी दिल्ली से सदस्य कुलवंत सिंह बाठ के मुताबिक आरोप बहुत लोग लगाते हैं, अगर आरोप गंभीर है तो कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके को खुद सामने आकर संगत को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी भी अध्यक्ष जांच बिठा सकते हैं। 5 साल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। बाठ ने दिल्ली कमेटी के एक्ट में सरकार जो संशोधन करने जा रही है उसका स्वागत किया है। धार्मिक लोग राजनीतिक क्षेत्र से अलग होना चाहिए। धर्म उपर होना चाहिए और राजनीति पीछे।

50 साल की महिलाएं भी बन सकेंगी मां

NEW DELHI. महिलाओं के लिए एक बडी खुशखबरी है, जो अधिक उम्र में मां नहीं बन पाती हैं। अब विज्ञान एवं तकनीक ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। लिहाजा, अगर आप 50 की उम्र में हैं तो घबराएं नहीं, अब मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।
कॅरियर और जिंदगी की भागदौड़ में उलझी महिलाएं परिवार शुरू करने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं। कई बार उनकी उम्र उस दहलीज पर पहुंच जाती है, बायोलॉजिकली जहां मां बनने में मुश्किल होती है। मगर मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि महिलाओं के अधिक उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं है। 50 साल महिलाओं के लिए एक ऐसी उम्र है जब ज्यादातर महिलाओं का मेनॉपॉज शुरू हो जाता है और अंडाशयों द्वारा हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में मां बनना नामुमकिन समझा जाता है। मगर साइंस और टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। अब 50 की उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है।

एक ओर मेडिकल साइंस में तरक्की ने कॅरियर पर ध्यान देने वाली, स्वतंत्र महिलाओं को यह विकल्प दिया है कि वे गर्भावस्था को देरी से प्लान कर सकती हैं। वहीं, दूसरी ओर उन महिलाओं के लिए भी संभावनाएं उत्पन्न की हैं जो बढ़ती उम्र में दूसरा या तीसरा बच्चा चाहती हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने देर से शादी की हो, या जो दूसरी शादी से बच्चा चाहती हैं। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो दूसरा बच्चा प्लान करने के बारे में सोच रही हैं, लेकिन लंबे ब्रेक के बाद यानी लेट प्रेगनेंसी प्लानिंग।

 

बड़ी उम्र में मां बनने पर रिस्क
दिल्ली के फॉर्टिस लाफेम की ऑब्स्टेट्रिक्स और गाइनोकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ कुसुम साहनी का कहना है कि अगर आप 30 साल की उम्र के आसपास बच्चे को जन्म देने की प्लानिंग करती हैं तो प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक होती है। हालांकि बड़ी संख्या में महिलाएं अब बड़ी उम्र में भी प्रेग्नेंट हो रही हैं। 40 या 50 साल की उम्र में मां बनना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। हालांकि डॉ साहनी कहती हैं कि अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबीटीज, हाइपरटेंशन, होने वाले बच्चे में डाउन्स सिंड्रोम, समय से पहले डिलिवरी और स्टिल बर्थ जैसे कई रिस्क शामिल होते हैं। अधिक उम्र में 3 तरीकों से कर सकती हैं गर्भधारण। हालांकि इनके अपने-अपने सीमाएं और सफलता की दर है।

 

गर्भधारण के 3 तरीके

-प्राकृतिक रूप से गर्भधारण
-आईवीएफ तकनीक में खुद के अंडों का इस्तेमाल
-आईवीएफ तकनीक में डोनर की मदद से

उम्र पर निर्भर करती है फर्टिलिटी
इसमें कोई शक नहीं कि फर्टिलिटी की क्षमता उम्र पर निर्भर करती है। महिला की उम्र जितनी अधिक होगी उसके प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की संभावना उतनी ही घट जाएगी। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है उसके शरीर में मौजूद स्वस्थ अंडों की संख्या घटती जाती है और यही वजह है कि उसके प्रेग्नेंट होने की संभावना भी कम होती जाती है।

एक महिला जन्म के समय सभी अंडाणु के साथ पैदा होती है। 30 साल की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में स्वस्थ अंडाणुओं की संभावनाएं कम होती हैं। इससे उनके गर्भवती होने की संभवाना भी कम हो जाती है। इसलिए, विसंगतियों वाले बच्चे होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़ों की बात करें तो 20 की उम्र के दौर में जेनेटिक डिसऑर्डर के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संभावना 2500 में एक होती है, जबकि 40 की उम्र में यह संभावना 350 में एक हो जाती है।

 

डोनर की मदद से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल

50 साल की उम्र में ज्यादातर महिलाओं की रजानिवृत्ति शुरू हो जाती है। ऐसे में उनका मां बनना लगभग असंभव हो जाता है। वह अपने ही अंडों से गर्भधारण करने की कोशिश करने के बजाय किसी डोनर की सहायता से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि महिला को पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए ताकि प्रेग्नेंसी से जुड़े रिस्क को कम किया जा सके और स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके।

क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक
गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग कंसल्टेंट डॉ. रितु सेठी ने बताया कि, अपने अंडाणु से गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अंडाशय से प्राप्त परिपक्व अंडे के उर्वरता की जटिल प्रक्रिया है। इनफार्टिलिटी कई कारकों जैसे फेलोपियन ट्यूब में क्षति या अवरोध होना, एंडोमीट्रिओसिस, शुक्राणु गतिशीलता में कमी आना और ओवुलेशन में गड़बड़ी की वजह से हो सकती है। ओवरी से अण्डे के बाहर आने की क्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। बढ़ती उम्र में अपने अंडे का उपयोग कर गर्भ धारण करने का सफलता दर काफी कम है। हालांकि, अगर किसी ने कम उम्र में एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया कर ली है, तो उन्हें फर्टाइल करने के लिए क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक होती हैं।

 

सिक्खी सेवा भूल, कीचड़ उछालने की शुरु हुई राजनीति

NEW DELHI.  सिक्खी सेवा के लिए स्थापित दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इन दिनों अजीबोगरीब घोटालों को सुलझाने में उलझ गई है। इसके चलते असली काम छोड़ विपक्षी दलों के आरोपों पर सफाई देने में जुट गई है। साथ ही विपक्षी दलों के असली मुद्दों के बदले उनके निजी मुद्दों को उठाकर कीचड़ उछालने की नई सियासत शुरू कर दी है। दिल्ली कमेटी ने विरोधियों पर पलटवार करने के लिए हर हफ्ते पोल-खोल कांफ्रैंस करने की नई परंपरा शुरू कर दी। आज उसकी शुरुआत थी। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, उपाध्यक्ष हरमनजीत सिंह, तख्त पटना साहिब कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित तथा कमेटी के प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने विरोधियों पर तीखे हमले किये। 
 
–गुरुद्वारा कमेटी ने भी विपक्षी दलों पर किया पलटवार 
–वर्दी, पुस्तक एवं गोलक घोटाले पर दी सफाई, दी नसीहत 
   कालका ने सरना कार्यकाल के दौरान किताबों तथा वर्दी की खरीद में अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का सरना पर आरोप लगाया। साथ ही बताया कि दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना की बेटी की कम्पनी बिंद्रा सिलैक्शन व अन्यों से 10 लाख 67 हजार रूपये के कोर्ट पैंट, वर्दी तथा शालों की खरीद 2003 में कमेटी द्वारा की गई थी। इसमें सीधे तौर पर साबित होता है कि सरना भाईयों ने अपनी बर्तनों की कम्पनी पंजाब स्टेनलस स्टील से गुरुद्वारा कमेटी तथा स्कूलों में गिफ्ट आईटमों की खरीद करने के साथ ही अपनी बेटी तथा दामाद की दुकानों से कपड़ा खरीदकर सीधे तौर पर अपने परिवार को फायदा पहुंचाया है।  कालका ने कहा कि सरना ने कहा था कि आज भी पुराने बर्तन बेंच कर उस समय के बर्तनों की कीमत वसूल की जा सकती है। परन्तु सवाल उठता है कि जितने बर्तन स्टाफ या अन्य लोगों को उपहार में दिये गये वो कैसे वापिस आयेंगे। कालका ने साफ कहा कि दुष्प्रचार के कीचड़ में उतरने का हमारा कोई ईरादा नहीं था, परन्तु विरोधियों ने कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. के खिलाफ सियासत से प्रेरित होकर निचले स्तर के आरोप लगाये हैं। नतीजन, हमें संगतों को इनकी हकीकत के बारे बताने को मजबूर होना पड़ा।
   कालका ने 2013 में दिल्ली कमेटी चुनाव के दौरान गुरू की गोलक से चुनाव प्रचार सामग्री छपवाने के लिए सरना ने 55 हजार प्रति प्रचार सामग्री छपवाई थी। 
सच क्या है, सरना संगतों को बतायें
   कमेटी प्रवक्ता परमिन्दर पाल सिंह ने कहा कि दिल्ली कमेटी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कमेटी के स्टोर में बिना कागज तथा किताबें आये 27 लाख रूपये का कमेटी ने भुगतान कर दिया। साथ ही अपना कागज देने के बावजूद 78 रूपये की एक किताब खरीदना कहीं न कहीं कमेटी प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जिस पिं्रटर से यह किताब छपवाई गई थी आज उस पते पर ब्यूटी पार्लर चल रहा है। सच क्या है, सरना संगतों को बतायें। 

महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका, तनाव

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट की ओर से सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के आदेश के बाद बुधवार को पहली बार मंदिर के कपाट मासिक पूजा के लिए खुलेंगे। लेकिन कई संगठनों की ओर से फैसले के विरोध के कारण क्षेत्र में तनाव की स्थिति है।
फैसले का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को मंदिर की ओर आ रहे वाहनों की जांच शुरू की। उन्होंने प्रतिबंधित उम्र वर्ग की महिलाओं को लेकर मंदिर की ओर से जाने वाले वाहनों को रोक दिया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारी मंदिर जाने के मार्ग में स्थित निलाकल बेस कैंप पर डेरा डाले हुए हैं और महिलाओं को पम्बा की ओर भी नहीं जाने दे रहे हैं, जहां तक पहले महिलाओं को जाने की इजाजत थी।
पहाड़ी पर स्थित सबरीमला मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित शिविर में परंपरागत साड़ी पहने महिलाओं के समूह को प्रत्येक वाहनों को रोकते देखा जा सकता है। इनमें वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। निजी वाहनों के अलावा श्रद्धालुओं ने केरल राज्य पथ परिवहन निगम की बसें भी रोकीं और उनमें से युवतियों को बाहर निकलने को कहा। एक महिला आंदोलनकारी ने कहा, प्रतिबंधित उम्र 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं को निलाकल से आगे नहीं जाने दिया जाएगा और उन्हें मंदिर में पूजा भी नहीं करने दी जाएगी।
गौरतलब है कि मंदिर को मलयालम थुलाम महीने में पांच दिन की मासिक पूजा के लिए खोला जा रहा है। 22 अक्तूबर को इस मंदिर के कपाट एक बार फिर बंद हो जाएंगे।
केरल सरकार ने साफ किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने पर कृत संकल्प है। मुख्यमंत्री पी.विजयन ने कहा कि किसी को भी कानून व्यवस्था को हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगी, बल्कि आदेश को उसी स्वरूप में लागू करेगी।
मुद्दा सुलझाने के लिए हुई बैठक बेनतीजा
मामले का हल निकालने के लिए मंदिर का प्रबंधक त्रावणकोर देवास्म बोर्ड और मंदिर के संरक्षक पंडालम शाही परिवार की मंगलवार को बैठक हुई। लेकिन यह बेनतीजा रही। पंडालम शाही महल में प्रबंधक समिति के अध्यक्ष शशिकुमार वर्मा ने कहा, शाही परिवार ने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेन की मांग की। लेकिन बोर्ड इस पर सहमत नहीं है। इसलिए शाही परिवार के सदस्यों ने बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने दो टूक कहा कि बैठक संतोषजनक नहीं थी। हालांकि, दोनों पक्ष एक बार फिर शुक्रवार को बैठक करने पर सहमत हुए हैं। बोर्ड के अध्यक्ष और माकपा नेता पी पद्मकुमार ने कहा कि कोर्ट के आदेश के मुद्दे पर बोर्ड के सदस्यों की अलग-अलग राय है।
सांसद ने अध्यादेश की मांग की 
पत्थनथिट्टा से लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता एंटो एंथनी ने इस मामले में केंद्र से अध्यादेश लाकर इस मामले को सुलझाने की मांग की। बता दें, इसी जिले में मंदिर स्थित है। उन्होंने कांग्रेस की महिला इकाई की ओर से आयोजित धरना प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (एम) ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया। एंथनी ने कहा, बुधवार को मासिक पूजा के मंदिर खुलेगा, जिसमें सभी धर्मों की आस्था है। लेकिन मौजूदा विवाद की वजह से हम चिंतित हैं। कोर्ट के आदेश का अयप्पा भक्तों के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी कर रहे हैं।
महिला ने खुदकुशी की कोशिश की 
सबरीमाला पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बड़ी संख्या में केरल की महिलाएं विरोध कर रही हैं और उन्होंने जगह-जगह विरोध मार्च निकाला है। इसी कड़ी में मंगलवार को एक महिला ने सार्वजनिक रूप से फांसी लगाने की कोशिश की। हालांकि, वहां खड़े लोगों ने उसे रोक दिया। बता दें, कोर्ट के आदेश का विरोध कर रही शिवसेना की महिला कार्यकर्ताओं ने भी घोषणा की है कि अगर बुधवार को प्रतिबंधित आयुवर्ग की महिलाएं मंदिर में प्रवेश की कोशिश करेंगी, तो वे सामूहिक रूप से आत्महत्या करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका विचाराधीन 
इस फैसले के खिलाफ पहले ही कई संगठनों ने अदालत का रुख किया है। इनमें नेशनल अयप्पा डिवोटीज एसोसिएशन की अध्यक्ष शैलजा विजयन प्रमुख हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इसपर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया है। ऑल केरल ब्राह्मण एसोसिएशन ने भी फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।

BJP की मजबूती के लिए मैराथन में दौड़ी महिलाएं

NEW DELHI. भाजपा महिला मोर्चा की नींव रखने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्मशती पर ग्वालियर से दिल्ली तक आयोजित 375 किमी लंबी रिले—मैराथन का दिल्ली में मंगलवार को विधिवत तरीके से समापन हो गया। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने इसका स्वागत किया।
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर के नेतृत्व में ग्वालियर से यात्रा 12 अक्टूबर को शुरू हुई थी। यहां पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। इसके उपरांत यात्रा राजस्थान पहुंची। यहां पर राज्य की मुख्यमंत्री श्रीमती विजयाराजे सिंधिया ने यात्रा का स्वागत किया और राज्य में इसके 35 किमी के सफर में लगातार इसके साथ रहीं। इसके बाद यात्रा उप्र पहुंची। यहां पर राज्य के उपमुख्यमंत्री दिनेशचंद्र शर्मा और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने यात्रा का स्वागत किया। यात्रा का अगला पड़ाव हरियाणा था। यहां पर होडल में राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खटटर ने यात्रा का स्वागत किया। वहां से यात्रा बदरपुर बॉर्डर होते हुए तालकटोरा स्टेडियम पहुंची। यहां पर भाजपा के महासचिव रामलाल और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने यात्रा का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इस पांच दिवसीय 375 किमी की यात्रा ने सफलतापूर्वक मोदी सरकार की महिला सशक्तिकरण की योजनाओंं को पांच राज्यों के घर—घर तक पहुंचाया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि यहां पर आईं महिलाओं से वह वादा लेना चाहती हैं कि वह अपने इलाके में घर—घर जाएंगी और जो कार्य बहन विजया राहटकर ने यात्रा के माध्यम से किया है, यहां उपस्थित सभी बहनें अपने इलाके में इस कार्य को आगे बढ़ाएंगी और मोदी सरकार की महिला सशक्तिरण योजनाओं का प्रचार—प्रसार करेंगी।

 

सिंधिया  सच्चे अर्थो में लोकमाता थीं

राजमाता विजयाराजे सिंधिया को याद करते हुए श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि वह सच्चे अर्थो में लोकमाता थीं। उनकी छवि राजनीतिक छवि से भी कई आगे और उपर है। इसकी वजह यह रही कि उन्होंने अपने वैभव को त्यागकर गरीब, दीन—हीन के लिए कार्य किया। श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि वह लौह—महिला थीं। आपातकाल के दौरान उन्होंने कांग्रेस की ओर से उन्हें दी गई पीड़ा और दु:ख के आगे झुकने से मना कर दिया। उन्होंने राजपरिवार से होने के बाद भी कांग्रेस के आगे झुकने की जगह लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए अपना विरोध जारी रखा और जेल गईं। कार्यक्रम में सबसे उम्रदराज महिला धावक बीबी मान कौर और दिव्यांग जयश्री शिंदे भी शामिल थीं। बीबी मान कौर 102 वर्ष की हैं और इन्होंने बदरपुर बॉर्डर से तालकटोरा स्टेडियम तक मैराथन में हिस्सा लिया। वहीं जयश्री शिंदे लगातार 375 किमी तक मैराथन में शामिल रहीं।

 

महिलाओं का असली सशक्तिकरण मोदी सरकार ने किया

भाजपा के संगठन मंत्री रामलाल ने कहा कि यह मैराथन दौड़ मोदी सरकार की महिला सशक्तिरण योजनाओं को सफलतापूर्वक लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है। महिलाओं के असली सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार ने उन्हें केंद्र में रखकर कई योजनाएं बनाईं। इसमें उज्जवला, उजाला और पीएम आवास योजना कुछ नाम हैं। यह राजमाता विजयाराजे सिंधिया को भी हमारी सच्ची श्रद्धाजली है। मोदी सरकार के सभी कार्य गरीबों, दीन—हीन को बेहतर जीवन देने के लिए संकल्प की तरह हैं। यह मोदी सरकार ही है जिसने बच्चियों, महिलाओं के साथ होने वाले अपराध पर कड़े कानून बनाएं। बेटियों को बचाने के लिए बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं जैसी योजना शुरू की और उसका आज सकारात्मक नतीजा भी सामने आ रहा है। रामलाल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मोदी सरकार के इन कार्यो को देखते हुए देश की जनता एक बार फिर से उन्हें मौका देगी और आने वाले समय में और अच्छे कार्य और अच्छी नीतियों से मोदी सरकार लोगों के सशक्तिकरण का कार्य जारी रखेगी।

100 महिलाओं ने मैराथन को सशक्त किया
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर ने मैराथन में लगातार दौड़ने वाली 100 महिला—पुरूष धावकों और अन्य लोगों को दौड़ को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दौड़ को मप्र, राजस्थान, उप्र, हरियाणा और दिल्ली में स्वागत मिला है और लोग स्वेच्छा से हर जगह इसमें बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं, उससे उन्हें विश्वास है कि अगले चुनाव में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनेगी। इस बार हम पहले से अधिक सीटों पर विजयी हासिल करेंगे। विजया राहटकर ने कहा कि सभी धावक और अन्य लोग जो दौड़ में शामिल रहे हैं वे सभी मोदी सरकार की महिला सशक्तिकरण वाली योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। जनता को वह यह बताने में सफल रहे हैं कि इन योजनाओं ने महिलाओं को पहले से अधिक सशक्त किया है।