जीके का छलका दर्द, अपनों को ही बता दिया साजिशकर्ता

NEW DELHI: भ्रष्टाचार मामले में अपने खिलाफ क्लोजर दाखिल होने के बाद आज मीडिया के सामने आए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके अपनों के घाव के जख्म न चाहते हुए भी सार्वजनिक कर गए। साथ ही जीके ने संगत की कचहरी के आदेश को आपने लिए सुप्रीम आदेश बताकर अपने बागी सुर भी दिखा दिए।

 

जीके ने कहा कि उनकी अगली सियासी मंजिल क्या होंगी।यह वो दिल्ली की संगत के बीच जाकर तय करेंगे। वो पार्टी में रहेगें अकाली हाईकमान के आदेश को मानेगें पर संगत द्वारा तय की जाने वाली दशा व दिशा उनके लिए अहम हैं। अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद से लगातार मौन व्रत पर चल रहें जीके ने क्लोजर दाखिल होने के बाद अपने खिलाफ बड़ी साजिश होने का दावा किया।

 

जीके ने कहां कि उनका सियासी कत्ल करने का जो कुचक्र रचा गया निश्चित तौर पर अपने भी उसमें शामिल थे। पर कौन-कौन थे, इस बारे में उनके पास अभी सबूत नहीं हैं। जी.के. ने शिकायतकर्ता गुरमीत सिंह शंटी की मंशा व व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। जी.के. ने आरोपों के पीछे बड़े षड्यंत्र होने का भी संदेह जताया।

 

जी.के. ने कहा की एक तरफ 1984 सिख कत्लेआम का आरोपी जगदीश टाईटलर मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाता हैं, तो दुसरी और कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह शंटी मुझ पर टाईटलर की स्टिंग वीडियो जारी करने के बदले करोड़ों रुपये लेने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाता हैं। लेकिन अदालत में इस आरोप पर कोई सबूत सामने नहीं रखता।

 

आखिर टाईटलर- शंटी का यह रिश्ता क्या कहलाता हैं ? एक तरफ कत्लेआम के दुसरे बड़े आरोपी सज्जन कुमार को हम जेल भिजवाते हैं और टाईटलर को जेल भिजवाने की तैयारी करते हैं। लेकिन इस बीच मेरी पंथ प्रति वफादारी पर सवाल उठाने को लेकर शंटी अति उत्साह मे कातिलों को संरक्षण देने की मुहिम के ध्वजवाहक बनते नजर क्यों आते हैं ?

 

जी.के. ने अपना किरदार हनन करने की साजिश रचने वाले सभी भद्रपुरुषों का नाम लिये बिना अपने सहित सभी का लाई-डिटैकटर टैस्ट करवाने की दिल्ली पुलिस को अपील की। जी.के. ने अपने पिता तथा खुद के द्वारा किए गए पंथक कार्यों को भी अपने सरगर्म सियासी विरोधीयों की तत्परता से जोड़ा। जी.के. ने कहा कि गुरु साहिब के आगे संगतों के द्वारा की गई अरदासों ने उन्हें मानसिक व शारीरिक ऊर्जा दी हैं।

 

संगतों की आवाज वो सदा उठाते रहेंगे, बेशक किसी पद पर वो रहें या न रहें। लोकसभा चुनाव लड़ने की उनकी लग रहीं अटकलों के बारे मे पुछे गए सवाल के जवाब में जी.के. ने साफ कहा कि सिख नीति व राजनीति साथ नहीं चलती। वो धर्म की नीति व राजनीति को साथ लेकर चलने मे विश्वास नहीं रखते।

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