रेलवे के ऐतिहासिक चिनाब ब्रिज के निर्माण पर लगा ‘ब्रेक’

NEW DELHI: जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहा विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल तकनीकी खामियों के चलते तीन महीने से काम बंद पड़ा है। चिनाब पुल के आर्च पर जो पेंटिंग होनी है उसकी क्वालिटी को लेकर निजी कंपनी और कोंकण रेलवे के बीच सहमति नहीं बन पायी है। इसके चलते बीते 25 अक्टूबर 2018 से इस ब्रिज पर आर्च लगाने का मुख्य काम रुका हुआ है।

 

कंपनी से जुड़े अधिकारी का कहना है कि नए रेट पर समझौता रेलवे और कंपनी के बीच होना है। दरअसल इस ब्रिज पर ऐसी पेंटिंग लगाई जानी है जो इलाके के विपरीत मौसम में ब्रिज को कम से कम 15 साल के लिए जंग से बचा सके। इसके अलावा ब्रिज में लगने वाले नए किस्म के भारी-भरकम बोल्ट्स और स्टील के प्लेट्स (स्ट्रक्चर) को लगाने के लिए निजी कंपनी नए रेट की मांग कर रही है, क्योंकि पुराने समझौते में इनका जिक्र नहीं था।

 

उधर, उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार भी पुल के निर्माण का काम बंद होने की पुष्टि करते हैं। उनके मुताबिक वेंडर के साथ कुछ तकनीकी ईशु था, जो संभवत: हल कर लिया गया है। बता दें कि इस पुल के तैयार होने के साथ ही हम ऊंचे पुल के निर्माण में चीन को काफी पीछे छोड़ देंगे। अर्ध चंद्राकार यह पुल हर मायने में विश्व इंजीनियरिंग की मिसाल होगा और इसकी ऊंचाई एफिल टावर से 35 मीटर अधिक होगी।

 

इस पुल पर 100 किलोमीटर की गति से ट्रेन दौड़ सकेगी। भारतीय रेल का यह ऐतिहासिक चिनाब रेल ब्रिज रेलवे के इतिहास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। जम्मू में चिनाब नदी पर रेलवे 1.3 किलोमीटर यानी 1300 मीटर लंबा एक रेल पुल बना रहा है। यह एक आर्च ब्रिज है और इसकी ऊंचाई नदी तल से 359 मीटर उपर है।

 

इस तरह से यह दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज है। इसकी देखरेख का काम कोंकण रेलवे को दिया गया है जबकि इसका ठेका निजी कंपनी एएफसीओएन के पास है। चिनाब नदी पर बन रहा यह पुल हिमालय के दुर्गम इलाके में बनाया जा रहा है। यहां अंग्रेज तक नहीं पहुंच पाए थे, इस लिहाज से यह रेलवे की अति महत्वाकांक्षी परियोजना है।

 

यह पुल कटरा-बनिहाल रेल खंड के बीच में हैं जो रेलवे के उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लाइन का हिस्सा है। जानकारी के मुताबिक 1250 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल को पिछले साल के टारगेट से लिहाज से जून 2019 तक पूरा हो जाना था, लेकिन बाद में इसे दिसंबर 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। इस बीच कंस्ट्रक्शन का काम कर रही कंपनी को उम्मीद है कि कंपनी और रेलवे को बीच नया समझौता जल्द ही पूरा हो जाएगा। जाहिर है ब्रिज के निर्माण में जिस तरह की रुकावट आ रही है उससे इसका निर्माण इस साल भी पूरा होने पर संदेह खड़ा हो गया है।

 

पुल की भार क्षमता 500 टन होगी
पुल का निर्माण कार्य 2004 में शुरू हुआ था। अब कोंकण रेलवे द्वारा अफकान कंपनी को इसका जिम्मा सौंपा गया है। निर्माणकर्ता कंपनी ने पुल की मजबूती को लेकर 120 साल की वारंटी दी है, जबकि उसका दावा है कि पुल 500 साल तक टिका रहेगा। पुल की चौड़ाई 13 मीटर है, जिसमें 150 मी. ऊंचे कुल 18 पिलर होंगे। पुल पर ट्रेन और पुल के ढांचे से पुल की नींव और पिलर पर 10 एमएम वर्ग मीटर जगह में 120 टन वजन पड़ेगा। पुल की भार वहन करने की क्षमता 500 टन होगी। यह पुल 260 किलोमीटर प्रति घंटे की गति की हवाओं का वेग सहन कर सकेगा।

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