बेटे-बेटी को नहीं, काबिल को मिलेगा वेदांता ग्रुप!

NEW DELHI: वैश्विक खनिज बाजार के दिग्गज उद्यमी (माइनिंग मुगल) और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कहना है कि हाल-फिलहाल उनका सेवानिवृत्ति लेने या अधिशासी कार्य छोड़ कर कोई दूसरी (नॉन-एग्जिक्युटिव) जिम्मेदारी लेने का इरादा नहीं है। उन्होंने संकेत दिया है कि यह विशाल कंपनी समूह फिलहाल उनके नेतृत्व में चलेगा, आगे चल कर उनका परिवार इसमें शेयरधारक बना रहेगा पर कंपनी का संचालन एक संस्था के हाथ में होगा और अग्रवाल उसे दिशा और सलाह देने को उपलब्ध रहेंगे।

 

18 अरब डॉलर (करीब 12.60 खरब रुपये) के सलाना कारोबार कर रहे वेदांता समूह के संस्थापक अग्रवाल 64 साल के हो गए हैं। यह समूह तांबा, ऐल्युमिनियम, पेट्रोलियम और अन्य खनिज संसाधनों के कारोबार में लगा है। उन्होंने संकेत दिया है कि उनके बाद इस समूह का नेतृत्व उनके बेटे अग्निवेश या प्रिया के हाथ में जाय यह जरूरी नहीं है क्योंकि समूह ‘इतना बड़ा हो चुका है’ कि वर्तमान नेतृत्व के उत्तराधिकारी का चयन परिवार के अंदर के लोगों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अग्रवाल ने अपनी मुख्य कंपनी वेदांता रिसॉर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचंज से निकाल लिया है। अब समूह भारत में सूचीबद्ध वेदांता लिमिटेड के माध्यम से अपना कारोबार आगे बढ़ा रही है।

 

उन्होंने कहा, ‘मैं कंपनी में आधे का हिस्सेदार हूं। इस हिस्से के भी तीन चौथाई का संकल्प परमार्थ कार्यों के लिए किया जा चुका है।’ उन्होंने अपने परिवार के किसी व्यक्ति को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर कंपनी के शीर्ष पद बिठाए जाने की संभावना को खारिज करते हुए कहा, ‘इस जैसी कोई बड़ी कंपनी का स्वामित्व इस परिवार में सीमित नहीं रहना चाहिए।’ अपने संततियों के बारे में उन्होंने कहा कि अग्निवेश और प्रिया का ‘अपना अलग शौक है और वे उसमें अच्छा काम कर रहे हैं।’

 

उन्होंने कहा कि ‘आने वाले समय में हम कंपनी में शेयरधारक तो बने रहेंगे पर कंपनी का संचालन एक संस्था के हाथ में होना चाहिए। पर साथ-साथ आपको एक ऐेसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो स्वप्नदर्शी हो, जो आपको प्रेरणा दे सके।’ उन्होंने पेट्रोलियम क्षेत्र में बहुत थोड़े समय में भारत में 5 लाख बैरल दैनिक के स्तर पर पहुंचाने में वेदांता की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए आपके अंदर ‘जोश, उद्यमशीलता और जोखिम उठाने की क्षमता होनी चाहिए। और मुझे लगता है कि मैं अपने देश को ये चीजें दे सकूंगा।’

 

यह पूछे जाने पर कि क्या इसका मतलब है कि उनका सेवानिवृत्त होने या नॉन-एग्जिक्युटिव पद लेने का इरादा नहीं है तो उन्होंने कहा, ‘अभी मैं क्यों हटूं? अभी तो मुझे काम पूरा करना है।’ उन्होंने कहा कि उन्होंने कंपनी में एक बहुत सक्षम सीईओ और अन्य एग्जिक्युटिव ऑफिसरों की नियुक्ति कर रखी है। उनका सपना कंपनी को भारत से संचालित दुनिया की ‘विश्वस्तरीय खनिज कंपनी बनाने का है।’

 

उन्होंने मार्च 2017 में एंग्लो-अमेरिका में 2.4 अरब डॉलर के निवेश से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। यह निवेश उन्होंने अपने परिवारिक न्यास के माध्यम से किया था। बाद में उन्होंने हिस्सेदारी बढ़ा कर 22 प्रतिशत कर ली। जुलाई में उन्होंने धातुओं का कारोबार करने वाली कंपनी वेदांता को निजी कंपनी बनाने की घोषणा की और इसके एक तिहाई सार्वजनिक शेयरों को वापस खरीदने के लिए एक अरब डॉलर की पेशकश की।

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