400 बेड, 40 साल और अब सिख संगतों से धोखा 

NEW DELHI.  दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन शुरू होने वाले 400 बेड के बाला साहिब अस्पताल को लेकर हो रही सियासत में आज सरना बंधु भी कूद गए। साथ ही बाला साहिब अस्पताल की कारसेवा व प्रबंधन बाबा बचन सिंह को देने पर सवाल खड़े कर दिए है। शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना एवं महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने कहा कि 2013 और 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने बाला साहिब अस्पताल खुद चलाने का दिल्ली की संगत से वायदा किया था। लेकिन, 6 साल के बाद खुद चलाने की बात से पीछे हट गए। कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी को बाबा बचन सिंह के गले डालकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश की है। बिना किसी योजनाबंदी के अस्पताल को सोंैपने की कारसेवा बाबा बचन सिंह को देना दिल्ली की संगत के साथ बड़ा मजाक है। बाबा हरबंश सिंह ने कड़ी मेहनत करके संगतों के सहयोग से अस्पताल की ईमारत खड़ी की थी, जो की अब जर्जर हालात में है। संगत को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि अस्पताल कितने बेड का होगा, और इसको आर्थिक रूप से बाबा बचन सिंह कैसे चलाएंगे। 
 
–बाला साहिब अस्पताल चलाने में फेल हुई गुरुद्वारा कमेटी 
–6 सालों तक दिल्ली की संगत को धोखा देते रहे अकाली : सरना 
–2013 और 2017 में बनाया था चुनावी घोषणा पत्र में मुख्य मुद्दा 
–अस्पताल चलाने से पीछे हटे, छुड़ाया पीछा, पहुंचे बाबा की शरण में 
  पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरना बंधू ने दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान प्रबधकों से पूछा कि यही काम तो वह भी 2012-13 में बाला साहिब अस्पताल चलाने को लेकर कर रहे थे। तब बादल दल ने विरोध क्यों किया? उन्होंने कहा की बादल दल जब 6 साल तक अस्पताल नहीं चला पाया तो अब बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में जाकर अस्पताल चलवाने की गुहार लगा रहे हैं। 
अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा
     सरना ने कहा कि बादल दल ने इसी बाला साहिब अस्पताल को मुद्दा बनाकर कमेटी का चुनाव लड़ा और संगत को झूठा भरोसा देकर गुरु की गोलक और कमेटी के संसाधनों पर कब्ज़ा कर लिया। अब 6 साल गुरु की गोलक लूटने और संसाधनों का घोर दुरपयोग करने के बाद जब बाला साहिब अस्तपाल नहीं चला सके और संगतों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई तो बाबा बचन सिंह जी (कार सेवा वाले) के दरबार में अपने पापों पर पर्दा डालने पहुंच गए।    उन्होंने कहा की दिल्ली की सिक्ख संगत जानना चाहती हैं कि बादल दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा, कुलदीप सिंह भोगल, हरमीत सिंह कालका सहित कमेटी के वरिष्ठ नेता किस गलती की माफ़ी के लिए बाबा बचन सिंह  (कार सेवा वाले) की चौखट पर पहुंचे हैं। 
बादल दल पर हमला बोलते हुए सरना ने कहा कि दिल्ली कमेटी ने उनपर आरोप लगाया था कि बाला साहिब अस्पताल को मनीपाल/बी.एल. कपूर (अस्पताल) को बेच दिया गया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही साबित हुई? 
  
 
1978 में 400 बेड का अस्पताल बनना हुआ था शुरू  
दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के रिकार्डों के मुताबिक 1978 से लगभग साढ़े 12 एकड़ जमीन पर अस्पताल बनाने का सफर शुरू हुआ था। शुरुआत में यह अस्पताल 400 बेड के साथ मेडिकल कालेज के तौर पर प्रस्तावित था। लेकिन 40 साल के बाद भी अस्पताल चलाने को लेकर दिल्ली कमेटी के पास कोई योजना और सरकारी मंजूरी अभी तक नहीं है। सूत्रों की माने तो जर्जर हो चुकी ईमारत को बनाने से पहले कारसेवा वालों ने इसका नक्शा भी पास नहीं कराया था। जिसकी वजह से नगर निगम व मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया से अस्पताल को चलाने की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ दमकल विभाग व अन्य विभागों की भी मंजूरी अधर में लटकी हुई है। सिखों के बीच बाला साहिब अस्पताल को राम मंदिर की तरह चुनावी मुद्दा माना जाता है। हर केाई अस्पताल बनाने को दावा वोट लेने के लिए करता है। लेकिन अस्पताल कब बनेगा उसकी तारीख कोई नहीं बताता है। 

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