आईये, आपको बुला रहा है भारत का स्विट्जरलैण्ड

NEW DELHI. अगर आप नये साल का जश्न मनाने के लिए विदेश नहीं जा पाए हैं तो परेशान न हों, आपके लिए कश्मीर घाटी यात्रा के लिए तैयार है। साल के एक बड़े हिस्से में बर्फ से ढकी रहने वाली कश्मीर घाटी देश का स्विट्जरलैण्ड के रूप में मशहूर हो चुका है। तो, अब कश्मीर यात्रा के लिए हो जाइए तैयार! उत्तर रेलवे के साथ चलिए भारत के एक अनोखे भू-भाग में। एक विशिष्ट संस्कृति, आस्था के ताने-बाने, एक समृद्ध विरासत, कुटीर और लघु उद्योग, कढ़ाई, अखरोट की लकड़ी से बने फर्नीचर, हाथ के बुने कार्पेट, हैंड-रग, कीमती केसर के साथ-साथ मिलिए वहां के अदभुत एवं मिलनसार लोंगों से । यह भारत की भूमि है। विविधता में एकता दर्शाने वाली एक अनोखी संस्कृति…।
सर्दियों में पर्यटकों के लिए इस खूबसूरत घाटी में पहुँचना एक सपने के समान था, क्योंकि सर्दियों में भारी हिमपात के कारण जवाहर सुरंग से गुजरने वाला सड़क सम्पर्क पूरी तरह से बन्द हो जाता है। अब भारतीय रेलवे ने विशेष खूबियों वाली डीईएमयू रेलगाड़ियों के जरिए यहां के लिए एक सुगम और निर्बाध रेल सम्पर्क उपलब्ध करा दिया है ।

 

 

भारतीय रेलवे नेटवर्क के जरिए एक युग की सुबह

भारत की इस खूबसूरत घाटी को देश के शेष भागों से जोड़ने के लिए स्वप्निल परियोजना के रूप में इसकी शुरूआत हुई। भारतीय रेलवे इसे चरणबद्ध रूप में पूरा करने का अपना वादा निभा रही है । उत्तर रेलवे के उधमपुर -श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना दल दृढ़ निश्चय और चरणबद्ध रूप से इस पर निरंतर कार्य कर रहा है और देश के उस हिस्से तक अपनी पहुँच बना रहा है जो अलग-थलग पड़ जाता था । इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया गया है। हिमालय पर्वत के कठिन हिस्सों से होकर गुजरने वाली यह रेल लाइन विश्व की सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण रेल लाइन है।

 

कश्मीर घाटी में रेल नेटवर्क

चरणबद्ध रूप से कार्य करते हुए रेलवे ने पहले अनंतनाग से मझोम तक 68 किलोमीटर उसके बाद मझोम से बारामूला 32 किलोमीटर तत्पश्चात काज़ीगुण्ड से अनंतनाग 18 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन का कार्य पूरा करके कश्मीर घाटी में रेल सम्पर्क उपलब्ध कराया। इस लाइन पर सबसे लंबी रेल सुरंग, पीर पंजाल रेल सुरंग जम्मू एवं कश्मीर रेलवे के इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा तथा बनिहाल सेक्शन को रेल रेटवर्क से जोड़ने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है ।

पीर पंजाल सुरंग:

 

11 किलोमीटर लंबी टी-80 सुरंग सबसे लंबी यातायात सुरंग है। यह पीर पंजाल पर्वत क्षेत्रों से गुजरते हुए कश्मीर घाटी को जोड़ती है । यह जम्मू के लोगों को हर मौसम में उपलब्ध रहने वाला वैकल्पिक यातायात माध्यम उपलब्ध कराती है। 7 वर्ष 5 महीने में तैयार की गई इस सुरंग को 150 इंजीनियरों और 1300 फील्ड कर्मियों ने दिन-रात के अथक श्रम से पूरा किया है। इस लाइन के निर्माण में तीन लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट और 7500 मीट्रिक टन इस्पात का उपयोग किया गया है।

रेलवे स्टेशन:

इस सैक्शन पर पड़ने वाले रेलवे स्टेशनों में बनिहाल, शाहाबाद हॉल्ट, काज़ीगुण्ड, सदूरा, अनंतनाग, बिजबहेड़ा, पंजगाम, अवन्तीपुरा, काकापोर, पम्पोर, श्रीनगर, बड़गाम, मझोम, पट्टन, हामरे, सोपोर और बारामूला शामिल हैं।

 

 

कश्मीर घाटी रेलवे के लिए विशेष प्रकार के डीईएमयू डिब्बे:

 

इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई द्वारा खास खूबियों वाला एक रेल इंजन इस लाइन के लिए डिजाइन किया है। यह 1400 अश्वशक्ति का डीज़ल इंजन है। इंजन को सर्दियों में तत्काल स्टार्ट करने और गर्म रखने की सुविधा है । इसके चालक कक्ष का बाहरी सिरा फाइबर के प्लास्टिक नोज़ कोन वाला है जो इंजन के आगे के हिस्‍से को खूबसूरत बनाता है। चालक कक्ष को गर्म रखने तथा कश्मीर के शीतकालीन मौसम में कोहरे को हटाने के लिए डी-फॉगिंग यूनिट और स्पष्ट दृश्यता के लिए सिंगल लुक आउट ग्लास है। सर्दियों में पटरियों पर गिरी बर्फ को हटाने के लिए इंजन के आगे स्नो कटिंग टाइप कैटल गार्ड लगे हैं।

11 जोड़ी डीईएमयू रेलगाड़ियां उपलब्ध

 


उत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी दीपक कुमार के मुताबिक इस सेक्शन पर चलाई जा रही 11 जोड़ी डीईएमयू रेलगाड़ियां हर मौसम में रेल सुविधा उपलब्ध कराती हैं । जनयातायात के रूप में शुरू की गयी यह रेल सेवाएं बहुत जल्दी ही वहाँ के लोगों में लोकप्रिय हो गई हैं । रेल यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या के मद्देनजर डीईएमयू रेलगाड़ियों की यात्री वहन क्षमता भी बढ़ाई गयी है।

 

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