खुशखबरी, 26 नवम्बर को शुरू होगा करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण

NEW DELHI.  गुरु नानक देवजी की 550वीं जयंती अगले वर्ष शानदार तरीके से मनाने के लिए केंद्र सरकार की कवायद तेज कर दी है। दो दिन पहले करतारपुर गलियारे के निर्माण और उसके विकास की मंजूरी देने के बाद आज सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ा दिए हैं। इस ऐतिहासिक कॉरिडोर को दो दिन बाद शुरू कर दिया जाएगा। इसका श्रीगणेश देश के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू खुद करेंगे। इसके लिए सोमवार 26 नवम्बर की तारीख मुकरर्र हो गई है। नायडू सोमवार को करतारपुर कॉरिडेार का शिलान्यास करेंगे। पंजाब के गुरदासपुर जिले में गांव मान में एक समारोह में डेरा बाबा नानक – करतरपुर साहिब रोड कॉरिडोर (अंतरराष्ट्रीय सीमा तक) के निर्माण की शुरूआत की जाएगी। इस मौके पर केंद्रीय परिवहन मंत्री, राजमार्ग और नौवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उपस्थित होंगे।
–उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू करेंगे शिलान्यास
–पंजाब के गुरदासपुर जिले में गांव मान में होगी शुरुआत 
— परियोजना गलियारा सेवा सड़क के साथ 4 लेन की होगी 
–करतारपुर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मिलेगी 
–अब तीर्थ यात्री पूरे वर्ष इस पवित्र गुरुद्वारे में जा सकेंगे 
   परियोजना गलियारा सेवा सड़क के साथ 4 लेन है और पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर जाने का इरादा रखने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अन्य सभी उपयुक्त सुविधाएं हैं। इसके बन जाने के बाद भारत से तीर्थ यात्री आसानी से पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित गुरूद्वारा दरबार साहिब करतारपुर जा सकेंगें जहां गुरुनानक देवजी ने अपने जीवन के 18 वर्ष बिताए थे। इसके बाद तीर्थ यात्री पूरे वर्ष इस पवित्र गुरुद्वारे में जा सकेंगे।
 करतारपुर गलियारे का कार्य सरकार की सहायता से एक संयुक्त विकास परियोजना के रूप में किया जाएगा ताकि सभी आधुनिक सुविधाओं वाले इस मार्ग से तीर्थ यात्री सुगमता और सरलता आ-जा सकें। सरकार तीर्थयात्रियों की आसानी के लिए उपयुक्त सुविधाएं देगी। पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया गया है कि वह सिख समुदाय की भावनाओं को समझे और उचित सुविधाओं के साथ अपने क्षेत्र में भी एक गलियारा विकसित करे।
गुरु नानक देव 18 साल तक वहां रहे थे
      बता दें कि गुरु नानक देव जी ने करतारपुर में सिख समुदाय को इक_ा किया था और 1839 तक 18 साल तक वहां रहे थे। इसके बाद गुरुद्वारा दरबार साहिब का निर्माण हुआ जहां गुरु नानक देव जी ने अपनी आखिरी सांस ली।
    भारत और पाकिस्तान ने 15 नवंबर को घोषणा की थी कि वे सिख तीर्थयात्रियों को वीजा के बिना पवित्र मंदिर में जाने और वीजा सुरक्षित किए बिना वापस आने में मदद करने के लिए अपने संबंधित पक्षों पर गलियारे बनाएंगे। यह गलियारा भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक स्थल होगा और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा क्योंकि अधिक तीर्थयात्री पूरे देश में पूरे देश में पवित्र मंदिर की यात्रा करेंगे।

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