सिख दंगा: एसआईटी में अधिकारी की नियुक्ति को राष्ट्रपति से गुहार 

NEW DELHI. 1984 सिख दंगों के मामले में बनी एसआईटी की जांच शुरु न होने और उसमें पुलिस अधिकारी की नियुक्ति न होने के खिलाफ  आज भाजपा सांसद, सिख नेताओं का एक दल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। साथ ही एक ज्ञापन सौंपा। इसमें अपील की गई की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी में जल्द तीसरे अधिकारी को नियुक्त किया जाए। इस दौरान सांसद मीनाक्षी लेखी ने बताया कि एसआईटी को दो या तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी थी लेकिन एक सदस्य की गैरमौजूदगी में यह काम नहीं कर पा रही है। इसलिए हम राष्ट्रपति को अभ्यावेदन देने गए थे कि तीसरे सदस्य के नाम को तत्काल अधिसूचित किया जाना चाहिए।  पत्र में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय से 1984 के सिख विरोधी दंगे मामलों की जांच की निगरानी के लिए गठित एसआईटी के तीसरे सदस्य के नाम को तत्काल अधिसूचित करने के लिए कहें।  भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सरदार आरपी सिंह ने कहा कि इससे पहले भी हमने कई बार इस मामले को लेकर पत्र लिख चुके हैं, केंद्र सरकार ने भी कोर्ट को एसआईटी के लिए तीसरे अधिकारी का नाम सुझाया गया है। इसे दुर्भाग्य या सुप्रीम कोर्ट की बेरूखी कहेंगे कि अब तक इस मामले में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
    राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले दल में पूर्व सेना प्रमुख जे जे ङ्क्षसह, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रूङ्क्षपदर एस सूरी, राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता गुरुचरण एस गिल और पूर्व विधायक आर पी ङ्क्षसह शामिल थे।       
–भाजपा सांसद की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने की राष्ट्रपति से मुलाकात
–सुप्रीम कोर्ट की बनी एसआईटी में 8 महीने से नहीं नियुक्त हुआ एक अधिकारी 
 —-जस्टिस ढींगरा के नेतृत्व में बनी है तीन सदस्यीय एसआईटी 
  
 बता दें कि 1984 में हुए सिख दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 186 बंद मामलों की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की थी। इसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा के नेतृत्व वाली इस कमेटी में दो और सदस्य को शामिल होना था। लेकिन आठ महीनों बाद भी यह टीम पूरी नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक 1984 सिख दंगों के 250 मामलों में से केवल 9 मामले अदालत में चल रहे हैं।  241 मामलों को केंद्र सकरार की एसआईटी बंद कर चुकी है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की नई बनाई एसआईटी को इसमें से 186 केस खोलने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया हुआ है।  लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी में पुलिस अधिकारी की नियुक्ति न हो पाने के कारण ये मामले अभी बंद पडे हैँ। 
   

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