वीणा बनीं देश की पहली ट्रांस ब्यूटी क्वीन

NEW DELHI.  छत्तीसगढ़ की वीणा सेंद्रे ने देश की पहली ट्रांस ब्यूटी क्वीन का खिताब जीत लिया है। मुंबई में आयोजित इस स्पर्धा में प्रदेश की वीणा सेंद्रे ने शानदार प्रदर्शन किया और ब्यूटी क्वीन का ताज हासिल कर लिया। गौरतलब है कि वीना मिस ट्रांसक्वीन इंडिया कॉम्पिटिशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। ऑनलाइन वोटिंग के जरिए देशभर से ट्रांसजेंडर समुदाय से ब्यूटी क्वीन का चुनाव हुआ था। इस कॉम्पिटिशन में वीना टॉप पर चल रही थीं। 13 से अधिक वोट पाकर वीना ने यह टाइटल अपने नाम किया। इस कॉन्टेस्ट में वीना के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रांसजेडर्स शामिल हुई थीं।

 

24 साल की वीना मूल रूप से रायपुर की ही रहने वाली हैं और यहीं उन्होंने अपनी मॉडलिंग व पर्सनालिटी डेवलेपमेंट की ट्रेनिंग पूरी की है। रैंप पर वॉक के दौरान वीना की अदाएं देखने लायक थीं। प्रतियोगिता के दौरान जब वह रैंप पर उतरीं तो देखने वाले देखते ही रह गए। वीना इससे पहले फैशन की दुनिया के बेहद प्रतिष्ठित माने जाने वाले ‘लैक्मे फैशन वीक’ के रैंप पर भी अपनी अदाओं का जलवा बिखेर चुकी हैं।

 

पीजेंट इंडिया द्वारा यह ब्यूटी कॉन्टेस्ट पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया है। ट्रांसजेंडर्स समुदाय को संवैधानिक मान्यता मिलने के बाद से इस स्पर्धा का दायरा बढ़ा है और अब देश के प्रत्येक राज्य से ट्रांसवुमन मॉडल्स इस स्पर्धा में चुन कर आ रही हैं। अलग-अलग राउंड से होते हुए फाइनल मुकाबला सात अक्टूबर की रात को मुंबई में हुआ। पब्लिक वोटिंग, रैंप वॉक, व्यक्तित्व और प्रजेन्स और माइंड और सोशल अवेयरनेश से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हुए वीना ने सभी का दिल जीत लिया।

वीना ने इस स्पर्धा को जीतकर अपनी प्रतिभा को पूरी दुनिया के सामने साबित किया है। उनका टैलेंट, आत्मविश्वास और खूबसूरती किसी भी दूसरे के मुकाबले कम नहीं है। वीना ने कहा कि वे अब आगे बतौर प्रोफेशनल मॉडल काम करते हुए अपनी पहचान को मजबूत बनाना चाहती हैं। इसके साथ ही बॉलीवुड की तरफ भी उनका रूझान है। यदि फिल्मों में बेहतर भूमिकाएं मिलीं, तो वे जरूर काम करना चाहेंगी।

वीना ने इस खिताब को जीतने के बाद एक चर्चा के दौरान कहा कि समाज में अक्सर ट्रांस जेंडर बच्चों को उनके पैरेंन्ट्स से वो प्यार नहीं मिल पाता जो आम बच्चों को मिलता है। या यूं कहा जाए तो ऐसे बच्चे उपेक्षा का शिकार होते हैं और उन्हें उनके ही हाल पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे बच्चों को भी एक सुखद भविष्य बनाने का अधिकार है। उन्हें सपोर्ट मिलना जरूरी है। वीना ने मैट्रिक तक पढ़ाई की है। उनका कहना है कि वे आगे और पढ़ना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों के चलते उच्च शिक्षा नहीं ले पाईं। अभी वे डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए आगे की पढ़ाई पूरी कर रही हैं।

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