खालिस्तान की मांग पर भड़के सिख, की आलोचना 

NEW DELHI. : खालिस्तान के संबंध में प्रचारित किए जा रहे रेफरेंडम 2020 की भारतीय सिखों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि सिखों का भविष्य सिर्फ भारत में ही सुरक्षित है और खालिस्तान की मांग उनके लिए आत्मघाती है। इसको लेकर शुक्रवार को कुछ सिख संगठन दिल्ली में स्थित यूके दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन भी करने वाले हैंं। इसकी अगुवाई आल इंडिया एंटी टेररिज्म फं्रट के चेयरमैन एमएस बिटटा करेंगे। उधर, सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल ने खालिस्तान के संबंध में प्रचारित किए जा रहे रेफरेंडम 2020 की तीखी आलोचना की है। साथ ही कहा कि आईएसआई एजेंट और उनके द्वार समर्थित सिखों का एक समूह इस राष्ट्रविरोधी षडयंत्र को पाकिस्तानी इस्टैबलिशमेंट (सेना) के इशारों पर भड़का रहे हैं।
 
–रेफरेंडम 2020 सिखों के लिए आत्मघाती : बक्शी 
–भारत सरकार कनाडा, इंग्लैंड की सरकारों के साथ उठाए मुद्दा
–यूके दूतावास के बाहर आज सिख करेंगे प्रदर्शन 
संगठन के अध्यक्ष बक्शी परमजीत सिंह ने इसके लिए एक वेबसाइट भी तैयार की है, जिसमें खालिस्तानियों को आईएसआई एजेंटों के साथ देखा जा सकता है। बक्शी ने कहा कि वो इस मसले को हवा देने के लिए 12 अगस्त को कनाडा, इंग्लैंड आदि देशों में प्रदर्शन भी करने वाले हैं। जाहिर है वो कश्मीर की तरह पंजाब की शांति भी भंग करना चाहते हैं और इसे फिर से आतंक की आग में झोंकना चाहते हैं।
आईएसआई समर्थित वो सिख कर रहे हैं षडयंत्र 
     बक्शी ने कहा कि इस षडयंत्र (रेफरेंडम 2020) के मुख्य कर्ताधर्ता आईएसआई समर्थित वो सिख हैं, जिन्होंने 1984 में विभिन्न देशों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजनीतिक शरण ली थी। लिहाजा, उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वो इस मसले को तुरंत संबंधित सरकारों के समक्ष उठाए। साथ ही उन्हें चेतावनी दे कि अगर उनकी जमीन पर भारत के खिलाफ ऐसे ही गतिविधियां चलती रहीं तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।
  सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल के अध्यक्ष बक्शी परमजीत सिंह ने कहा कि अगर अपने अंदरूनी मामलों में दखल के लिए सउदी अरब, कनाडा के राजदूत को वापस भेज सकता है तो भारत इनके खिलाफ कड़े कदम क्यों नहीं उठा सकता? भारत सरकार को संबंधित सरकारों से मांग करनी चाहिए कि वो खालिस्तानी षडयंत्रकारियों के फर्जी दस्तावेजों की जांच करे और उन्हें अपने देश से बाहर करे।
पंजाब सरकार से भी गुहार लगाई
    बक्शी ने इस बावत पंजाब सरकार से भी गुहार लगाई है कि वो राज्य में चल रही देशविरोधी गतिविधियों को सख्ती से कुचल दे। सिख खालिस्तान नहीं चाहते, वो शांति से भारत में रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में हमारे नेतृत्व ने स्वेच्छा से भारत में रहना मंजूर किया, उनपर किसी भी तरह का दबाव नहीं था। उन्हें पता थी कि सिख धर्म और हिंदुत्व एक दूसरे के पूरक हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी हिंदू परिवार अपने सबसे बड़े लड़के को सिख धर्म को समर्पित करते आए हैं। आज भी हिंदू गुरू ग्रंथ साहिब का उतना ही सम्मान करते हैं जितना सिख करते हैं।
एकजुट हों सिख, षडयंत्रों को दे जवाब 
सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल ने कहा कि हकीकत ये है कि हिंदु न सिखों को भड़का रहे हैं और न ही सिख धर्म में दखलअंदाजी कर रहे हैं, षडयंत्र तो पाकिस्तानी सेना कर रही है जो पंजाब और भारत को अस्थिर करना चाहती है और अस्सी के दशक जैस हालात बनाना चहाती है। लिहाजा, सिखों से अपील है कि वो एकजुट हो पाकिस्तानी षडयंत्रों का जवाब दें और उन्हें नाकाम करें।

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