छोटे बच्चे को जोर से कभी न हिलाएं… न तेज मसाज दें

NEW DELHI. छोटे बच्चे किसे पसंद नहीं होते। जब उनके साथ खेलने की बात हो, तो कोई भी उन्हें गोद में उठाकर उनके साथ खेलना चाहेगा। मगर खेल-खेल में उन्हें हमारी वजह से कितनी गंभीर चोट लग सकती है, इसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते। ऐसी ही एक अवस्था है जिसे ‘शेकेन बेबी सिन्ड्रोम’ के नाम से जाना जाता है। जो छोटे बच्चों को तेज से हिलाने पर हो सकता है।

–हिलाने पर लग सकती है दिमाग में चोट

– मंदबुद्धि होने या कोमा में जाने का खतरा

अकसर लोग छोटे बच्चों को हवा में उछाल देते हैं या सुलाते और मालिश करते समय तेज-तेज हिलाते हैं। मगर ऐसा करने से बिलकुल बचना चाहिए। अगर आपका बच्चा 0-2 साल की उम्र का है, तब तो भूलकर भी नहीं। इन बच्चों का दिमाग और शरीर के नाजुक अंग बेहद कोमल होते हैं और वयस्कों की तरह स्थिर नहीं हो पाए होते हैं।

इस बारे में हमने जब लखनऊ स्थित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष शुक्ला से बात की, तो उन्होंने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘अकसर लोग बच्चों को हवा में उछाल देते हैं, जिससे उनके दिमाग पर असर होने के साथ ही हर्निया होने का भी खतरा रहता है। साथ ही उन्हें जोर से हिलाने से बचना चाहिए।’

उन्होंने बताया, ‘कुछ लोग बच्चों के सिर पर मालिश करते समय जोर-जोर से सिर को ठोंकते हैं और सिर के अगले हिस्से में लेप वगैरह लगा देते हैं, जो भूलकर भी नहीं करना चाहिए।’

उनके मुताबिक, ऐसे तो 5 साल की उम्र तक के बच्चों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। मगर 1-2 साल की उम्र तक के बच्चों का खासतौर पर मालिश करते समय और उनके साथ खेलते समय ध्यान रखना चाहिए।

बच्चों के दिमाग में इस तरह चोट लगने की दशा में जरूरी नहीं है कि तुरंत कोई असर दिखाई दे, मगर लॉन्ग टर्म में याद्दाश्त में कमजोरी, पैरालिसिस, मंदबुद्धि, मानसिक विकास धीमा होना जैसी समस्याएं उभरकर सामने आ सकती हैं। तुरंत असर होने की सूरत में बच्चे के उल्टी होना, चेहरे का नीला होना, हद से ज्यादा चिड़चिड़ापन या सोकर उठने में देरी होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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