2 हफ्ते में 1546 रेलगाडिय़ां समय से हुई ‘डिरेल

NEW DELHI: रेलवे के सबसे बड़े दुश्मन स्मॉग-फॉग ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इसके चलते रेलगाडिय़ों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इसमें  वीआईपी ट्रेने भी शामिल हैं, जो 5 घंटे से ज्यादा विलंब से रेंग रही हैं। हालात यह है कि जिन ट्रेनों को रात 12 बजे पहुंचना चाहिए, वह दोपहर 12 बजे अपने गंतब्य पर पहुंच रही हैं। महज 2 हफ्ते में 1546 ट्रेनें अपने समय से डिरेल हुई हैं। राजधानी एक्सप्रेस, दूरंतो जैसी ट्रेनों को छोड़ बाकी रेलगाडिय़ां 5 से 20 घंटे से ज्यादा घंटे की देरी से पहुंच रही हैं।
  इसमें रेलवे की वीआईपी हावड़ा, गोवाहाटी, पटना व सियालदह राजधानी एक्सप्रेस टे्रनें भी शामिल हैं। इसके अलावा काफी संख्या में ट्रेनें रद की जा रही हैं। यात्रियों को अगले साल फरवरी तक इस समस्या से जूझना होगा। ट्रेनों कीबिगड़ी समय सारिणी के चलते यात्रियों का बुरा हाल है।
  जानकारी के मुताबिक 1 नवम्बर से 12 नवंबर के बीच में सबसे ज्यादा 9 नवम्बर को 280 रेलगाडिय़ां  विलंब से चलीं। इसी प्रकार 8 नवंबर को 249, 7 नवंबर को 120, 10 नवंबर को 281, 11 नवंबर को 246, और 12 नवंबर को 173 ट्रेनें लेटलतीफी का शिकार हुई।
–धुंध का कहर, वीआईपी टे्रनें भी हुईं घंटों लेट 
-लम्बी दूरी की ट्रेनों का हाल खराब, यात्री परेशान 
    रेलवे  की माने तो धुंध के बाद उत्तर भारत में ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह से लडख़ड़ा गया है। विशेषकर दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-जम्मू, दिल्ली-चैन्नई रूट की लेटलतीफी का शिकार हैं। रेलवे मंत्रालय ने बताया कि सोमवार को तीन ट्रे्रनें संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस ट्रेनों को सुबह पांच बजे से साढ़े आठ बजे तक दिल्ली पहुंचने का समय था। लेकिन, खबर लिखे जाने तक ट्रेनें नहीं पहुंची थीं।
   रेलगाडिय़ों के लेट होने से यात्री हलकान हैं। इसमें सबसे अधिक परेशनी छोटे बच्चे, महिलाएं व वरिष्ठ नागरियों को उठानी पड़ रही है। ट्रेन में खाने और पीने के पीने का संकट हो जाता है। कुछ खुश किस्मत ट्रेन के यात्रियों बे्रड अथवा खिचड़ी खाने को मिल जाती है, इसके लिए उन्हें हंगामा करना पड़ता है। अन्यथा अधिकांश ट्रेनों में कैटरिंग ठेकेदार हाथ खड़े कर देते हैं। उनका तर्क है कि टे्रन में तय मात्रा में खाने का समान व पीने की बोतल होती हैं। ऐसे में आपूर्ति कहां से करें। यदि यात्रियों को अतिरिक्त खानपान की व्यवस्था की जाए तो रेलवे उसका भुगतान नहीं करता है। इसलिए कैटरिंग के वेंडर पेंट्रीकार से कोच में जाते ही नहीं हैं।
    रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना कि धुंध के चलते ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ है। 1 नवंबर से 12 नवंबर के बीच 1546 ट्रेनें प्रभावित हुईं हैं। उनका तर्क है कि स्मॉग के कारण दृश्यता काफी कम होती है, जिससे टे्रन दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। ड्राइवरों को निर्देश दिए जाते हैं कि द़श्यता कम होने पर ट्रेनों को प्रतिबंधित रफ्तार पर चलाया जाए। यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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