एम्स को टक्कर देगा आयुर्वेदा अस्पताल

NEW DELHI : एम्स को टक्कर देने वाला देश का पहला आयुर्वेद आयुर्विज्ञान संस्थान 17 अक्टूबर को देश को समर्पित हो जाएगा। 200 बिस्तर वाले पहले आल इंडिया इंस्टीटयूट आफ आयुर्वेदा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। ठीक एम्स की तर्ज पर दो ब्लाक शुरू हो रहे हैं। पहला एकेडमिक और दूसरा अस्पताल, जहां लोगों को आयुर्वेद में हर प्रकार का इलाज किया जाएगा। दिल्ली के साउथ दिल्ली में पड़ते सरिता विहार में इस राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान का पहला फेज बनकर तैयार हो गया है। दूसरे फेज के लिए 200 करोड़ रूपये सरकार ने मंजूर किए हैं, जिसमें फार्मेसी सहित कई अन्य चीजें खोली जाएंगी।

–200 बिस्तर वाला देश का पहला आयुर्वेदा अस्पताल तैयार
— 17 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन
–ओपीडी, सर्जरी से लेकर सभी सुविधाएं होंगी मुहैया : मंत्री

यह जानकारी आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने आज यहां पत्रकारों को दी। उनके मुताबिक देश का पहला एम्स जैसा आयुर्वेद आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारतीय इलाज पद्धति आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाने के लिए एम्स जैसा आयुर्वेद अस्पताल खोला गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एलौपैथी इलाज के लिए एम्स को जाना जाता है ठीक उसी तरह से आयुर्वेदिक इलाज के लिए इस नए अस्पताल को जाना जाएगा।
आयुष मंत्री ने बताया कि देश के सभी राज्यों की राजधानी में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एआईआईए) खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से आयुर्वेदिक दवाओं के संबंध में गलत दावे किए जाने पर रोक लगेगा और लोगों को गुमराह होने से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेदा के फालोवर तो बहुत हैं और आयुर्वेद को इस्तेमाल में लाना तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं अब तक नहीं मिल रही थी। लेकिन, मंगलवार के बाद उनकी सभी समस्या खत्म हो जाएगी। यहां पर ओपीडी से लेकर आपरेशन तक की व्यवस्था होगी। खास बात यह है कि गरीबों के लिए दवाएं फ्री मुहैया करवाई जाएगी। इस संस्थान के जरिये रिसर्च एजुकेशन को भी बहुत लाभ होगा। नाइक के मुताबिक संस्थान के एकेडमिक सेक्शन में पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी की डिग्री दी जाएगी। अगले फेज में फार्मेसी की भी योजना है।
बता दें कि 17 अक्टूबर को ही आयुष मंत्रालय दूसरा आयुर्वेदा डे मना रहा है। इस उपलक्ष्य में धनवन्तरी जयंती भी मनाई जा रही है।
गौरतलब है कि आजादी के बाद देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को दबाया गया। नरेंद्र मोदी सरकार ने इन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए अलग से आयुष मंत्रालय का गठन किया।

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