कृषि के संपूर्ण विकास के लिए तकनीकी सशक्तिकरण जरूरी-प्रो. स्वामिनाथन

नई दिल्ली, (डिजिटल टीम) : भारतीय हरित क्रांति के जनक प्रो. एमएस स्वामिनाथन ने कहा कि भारत एक आई टी महाशक्ति है, लेकिन विडंबना यह है कि पिछले तीन दशकों के दौरान आईटी सेक्टर द्वारा की गई विशाल प्रगति ने भारत में कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज किया है।

उन्होंने कहा कि खेती दक्षता बढ़ाने, रोगों और कीटों की निगरानी, उचित मूल्यांकन, कृषि सलाह, संसाधन प्रबंधन और बाजार संपर्क की बढ़ती जरुरत के लिए कृषि में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के लिए एक बहुत बड़ी संभावना है, जो कृषि लाभप्रदता तेजी से बढ़ा सकती है।

स्वामिनाथन आज यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं। इस मौके पर कृषि केंद्रित सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के आईसीएफए वर्किंग ग्रुप का शुभारंभ भी किया।

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— ग्रामीण डिजिटलीकरण के लिए विस्तृत रोड मैप खींचा
–हरित क्रांति के जनक प्रो. एमएस स्वामिनाथन ने किया आईसीएफए वर्किंग ग्रुप का शुभारंभ


उन्होंने कहा कि कृषि के संपूर्ण विकास के लिए तकनीकी सशक्तिकरण आवश्यक है, जो कि प्रकृति, गरीबों और महिलाओं पर विशेष ध्यान दे। स्वामिनाथन ने पुष्टि की कि यह आईसीएफए कार्य समूह आईसीटी सक्षम सेवाओं और समाधान के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिससे कि किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे। उन्होंने ग्रामीण डिजिटलीकरण के लिए विस्तृत रोड मैप का विवरण दिया, जो कृषि समुदाय के लिए अत्यंत लाभदायक होगा।
इस मौके पर सांसद डॉ0 आनंद भास्कर रपोलू ने किसानों और खेतों की समस्याओं पर तेजी से और समय पर समाधान प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया, जो कि सभी कृषि सेवाओं, नीति सहायता और तकनीकी हस्तक्षेपों में आईसीटी को एकीकृत करके ही संभव हो सकती है।

 

भास्कर ने योजनाओं और उनके कार्यान्वयन के बीच के अंतराल का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव डॉ0 अशोक दलवई ने आईसीटी और निजी क्षेत्र को एक पूरक के रूप में देश की विस्तार प्रणाली को फिर से तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उत्पादन उपरांत गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया।
आईसीएफए के अध्यक्ष डॉ0 एम जे खान ने कहा कि यह कार्य समूह चुनौतियों को संबोधित करने और कृषि में आईसीटी के व्यापक विकास की सुविधा के लिए नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, विस्तार विशेषज्ञ, उद्योग और प्रगतिशील किसानों का एक समग्र गठबंधन होगा।

यह समूह एक सार्थक और प्रभावपूर्ण हस्तक्षेप के लिए हितधारकों में एक समन्वयक के रूप में कार्य करने के लिए एवं किसानों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। इस मौके पर डॉ एम मोनी, ममता जैन, डा. अशोक दलवाई, अलीना सहित कई कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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