सिख कैदियों की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया यू.पी. सरकार को नोटिस

नई दिल्ली।  पीलीभीत जेल में 1994 के दौरान 7 सिख कैदियों की मौत के आरोपी 41 जेल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा दोषियों के खिलाफ मुकद्दमा चलाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे केस में अदालत ने यू.पी. सरकार को इस संबंधी नोटिस जारी कर 7 जुलाई तक जवाब देने का आदेश दिया है।
दरअसल जेल में 8-9 नवंबर की रात को सिख कैदियों के साथ जेल अधीक्षक विंध्यांचल सिंह यादव तथा साथी अधिकारियों द्वारा बुरी तरह से मारपीट की गई थी। जिस कारण 7 सिख कैदियों की मृत्यु हो गई थी तथा कई कैदियों को गंभीर चोटें लगी थी, पर 2007 में पीलीभीत जिला अदालत ने मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ मुकद्दमा वापिस लेने की लगाई गई अर्जी को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया था। जिस कारण कार्यवाई रूक गई थी।
जिसके खिलाफ गवाहों को साथ लेकर दिल्ली कमेटी द्वारा पहले सुप्रीम कोर्ट में केस दाखिल किया गया था। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का कमेटी को आदेश दिया था। इस बारे जानकारी देते हुए कमेटी के कानूनी विभाग के प्रमुख जसविन्दर सिंह जौली ने बताया कि जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस उमेश चंद्र श्रीवास्तव की पीठ ने यू.पी. सरकार को इस मसले पर जवाब देने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। जिसके चलते इन्साफ मिलने की आशा अब बढ़ गई है।
जौली ने बताया कि 41 दोषियों में से 24 दोषियों को अभी तक मुकद्दमें संबंधी कागजात पहुंचे हैं। जिस कारण अदालत ने अगली सुनवाई 14 जुलाई को करने के आदेश दिये हैं। यू.पी. में नई सरकार आने के कारण पुलिस विभाग के जवाब में अब अन्तर आने की भी जौली ने आशा जताई। कमेटी द्वारा पेश हुए अधिवक्ता गुरबख्श सिंह ने अदालत के सामने दलीलें देते हुए जेल अधिकारियों द्वारा मानवाधिकारों के किये गये हनन का तथ्यों के साथ विवरण रखा।

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